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पहाड़ मे एक दिवसीय शादी का प्रचलन आपके दृष्टि से कैसा है ?

अच्छा है
20 (35.7%)
सही नही है
16 (28.6%)
संस्कृति के खिलाफ
15 (26.8%)
कह नही सकते
5 (8.9%)

Total Members Voted: 56

Voting closes: February 07, 2106, 11:58:15 AM

Author Topic: System Of One Day Marriages In Uttarakhand - पहाड़ मे एक दिवसीय शादी का प्रचलन  (Read 22695 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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दोस्तो,

आमतौर से पहाड़ मे शादिया  २ दिन ही होती है ! बारात शाम को दुल्हन के घर जाती है और दुश्रे दिन लौटती है ! कई लोग इस नई प्रथा को अच्छा मानने लगे है परन्तु बहुत से लोगो के इस नई प्रथा से संतुष्ट नही है !

इस विषय पर आप की क्या राय है ?

एम एस मेहता

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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मे अपना विचार जरुर व्यक्त करूँगा पर पहले आप लोगो के ???

I would definitly share my views but first of all, i would to know your views on this most crucial topic.

"Aaj Meri Yaar Ki Shaadi Hai par One Day " - Just a joke..

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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पंकज सिंह महर

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मेहता जी,
 ये शादियां कुछ अजीब सी नहीं होती?
लगता ही नहीं कि शादी हो रही है और यह हमारी वैदिक संस्क्रति के खिलाफ भी है, क्योंकि शादी का मूहूर्त रात का होता है और फिर विवाहित जोडे़ को सुबह ध्रुवतारा दिखाने की भी प्रथा है कि इसी तारे की तरह तुम्हारा वैवाहिक जीवन अटल रहे....... पर आजकल तारे दिखने तक को बारात एक नींद निकाल चुकी होती है,
     हां, इसके प्रचलन के पीछे एक तर्क दिया जाता है और काफी हद तक वह ठीक भी है कि दिन में शराब पीने में आदमी झिझकता है और मार-पीट की संभावना कम रहती है.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Mahar JI,

Thanx  for giving your views on this fast changing culture of UK.

I believe there is some mythological reasons for conducting two days marriages.

मेहता जी,
 ये शादियां कुछ अजीब सी नहीं होती?
लगता ही नहीं कि शादी हो रही है और यह हमारी वैदिक संस्क्रति के खिलाफ भी है, क्योंकि शादी का मूहूर्त रात का होता है और फिर विवाहित जोडे़ को सुबह ध्रुवतारा दिखाने की भी प्रथा है कि इसी तारे की तरह तुम्हारा वैवाहिक जीवन अटल रहे....... पर आजकल तारे दिखने तक को बारात एक नींद निकाल चुकी होती है,
     हां, इसके प्रचलन के पीछे एक तर्क दिया जाता है और काफी हद तक वह ठीक भी है कि दिन में शराब पीने में आदमी झिझकता है और मार-पीट की संभावना कम रहती है.


पंकज सिंह महर

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मेहता जी,
 ये शादियां कुछ अजीब सी नहीं होती?
लगता ही नहीं कि शादी हो रही है और यह हमारी वैदिक संस्क्रति के खिलाफ भी है, क्योंकि शादी का मूहूर्त रात का होता है और फिर विवाहित जोडे़ को सुबह ध्रुवतारा दिखाने की भी प्रथा है कि इसी तारे की तरह तुम्हारा वैवाहिक जीवन अटल रहे....... पर आजकल तारे दिखने तक को बारात एक नींद निकाल चुकी होती है,
     हां, इसके प्रचलन के पीछे एक तर्क दिया जाता है और काफी हद तक वह ठीक भी है कि दिन में शराब पीने में आदमी झिझकता है और मार-पीट की संभावना कम रहती है.


इसके अलावा भी कई रस्में प्रभावित होती हैं जैसे धूल्यर्ग है, पांव धोने वाला है और फिर हमारे वैदिक रीतियों में फेरे तो बडी़ लम्बी प्रक्रिया के बाद होते है,  इस शार्टकट शादी के चलते अब शादियां सही रीति-रिवाजों से भी नहीं हो पा रही हैं.  पहले दही और हरे पत्ते, शगुन लेकर सुबह पहले ढाक देने (अगवा) जाते थे, फिर बारात जाती थी,  अब तो सुबह पूरी बारात ही चल देती है.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Mahar Ji,

Surely, this is one of the aspect.

मेहता जी,
 ये शादियां कुछ अजीब सी नहीं होती?
लगता ही नहीं कि शादी हो रही है और यह हमारी वैदिक संस्क्रति के खिलाफ भी है, क्योंकि शादी का मूहूर्त रात का होता है और फिर विवाहित जोडे़ को सुबह ध्रुवतारा दिखाने की भी प्रथा है कि इसी तारे की तरह तुम्हारा वैवाहिक जीवन अटल रहे....... पर आजकल तारे दिखने तक को बारात एक नींद निकाल चुकी होती है,
     हां, इसके प्रचलन के पीछे एक तर्क दिया जाता है और काफी हद तक वह ठीक भी है कि दिन में शराब पीने में आदमी झिझकता है और मार-पीट की संभावना कम रहती है.


इसके अलावा भी कई रस्में प्रभावित होती हैं जैसे धूल्यर्ग है, पांव धोने वाला है और फिर हमारे वैदिक रीतियों में फेरे तो बडी़ लम्बी प्रक्रिया के बाद होते है,  इस शार्टकट शादी के चलते अब शादियां सही रीति-रिवाजों से भी नहीं हो पा रही हैं.  पहले दही और हरे पत्ते, शगुन लेकर सुबह पहले ढाक देने (अगवा) जाते थे, फिर बारात जाती थी,  अब तो सुबह पूरी बारात ही चल देती है.

suchira

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मुझे तो पुराना तरीका ही पसंद है,
पहले दीन गणेश पूजा होती है ,फीर दूसरे दीन सुवल पथई होती है | फीर आता है शादी वाला दीन | दूल्हा बारात के साथ दुल्हन के घर जाता है | दुल्हन के घर मे बेसब्री से बारात का इंतज़ार होता है |
दुल्हे  के घर मे जीस दीन बारात दुल्हन के घर जाती  है घर की सारी महिलाएं रतीयाली करती हैं,खूब गाना  बजाना होता  है,बहुत अच्छा माहोल होता है बड़ा मजा आता है .कोई भी नही सोता है | और दुल्हन के घर मे बरात का जोरदार स्वागत होता है | सारे रीती रीवाजों के साथ शादी होती है | जिसमे पूरी रात लग जाती है | सुबह सुबह जहाँ दुल्हन के घर मे वीदाई  हो रही होती है | सब की आँखें नम होती हैं |दुल्हे के घर मे बारात का बेसब्री से  इंतज़ार रहता है ,बारात के साथ दुल्हन जो आने वाली है |
फीर उस दीन reception होता है |
बहुत मजा आता था | अब तो इस तरीके से शादियाँ  होती ही नही हैं |

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Suchira Ji,

Thanx for giving your views. Well said. Every religion have some ways of performing marriages and conduting rituals. We are somewhat gettig modernized and fogetting our cultural values.

But some feel that in view of some disturbances, people are prefering oneday marraiges.


मुझे तो पुराना तरीका ही पसंद है,
पहले दीन गणेश पूजा होती है ,फीर दूसरे दीन सुवल पथई होती है | फीर आता है शादी वाला दीन | दूल्हा बारात के साथ दुल्हन के घर जाता है | दुल्हन के घर मे बेसब्री से बारात का इंतज़ार होता है |
दुल्हे  के घर मे जीस दीन बारात दुल्हन के घर जाती  है घर की सारी महिलाएं रतीयाली करती हैं,खूब गाना  बजाना होता  है,बहुत अच्छा माहोल होता है बड़ा मजा आता है .कोई भी नही सोता है | और दुल्हन के घर मे बरात का जोरदार स्वागत होता है | सारे रीती रीवाजों के साथ शादी होती है | जिसमे पूरी रात लग जाती है | सुबह सुबह जहाँ दुल्हन के घर मे वीदाई  हो रही होती है | सब की आँखें नम होती हैं |दुल्हे के घर मे बारात का बेसब्री से  इंतज़ार रहता है ,बारात के साथ दुल्हन जो आने वाली है |
फीर उस दीन reception होता है |
बहुत मजा आता था | अब तो इस तरीके से शादियाँ  होती ही नही हैं |

suchira

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जो भी रीती रीवाज होते हैं उनका बहुत महत्व होता है |
हमारे यहाँ की शादीयाँ जीस शानदार तरीके से होती हैं उस मे तो अच्छी  खासी  फील्म बन सकती है |
अगर फील्म बनाई जाए तो सबको बहुत पसंद आएगी |

 

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