Author Topic: Uttarakhand Ramleela - उत्तराखंड की रामलीला  (Read 34116 times)

Devbhoomi,Uttarakhand

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पिछली रात सीता का हरण फिर कर गया रावण

श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल)। हिमालय साहित्य कला परिषद श्रीनगर के तत्वावधान में आयोजित कवि सम्मेलन में वक्ताओं ने अव्यवस्थाओ और देश की वर्तमान स्थिति पर तंज कसे।

डालमियां धर्मशाला में आयोजित कवि सम्मेलन में अव्यवस्थाओं पर करारा प्रहार करते हुए राकेश जुगरान ने कहा कि जलाकर चंद पुतले हमने समझा मर गया रावण, पिछली रात सीता का हरण फिर कर गया रावण.।

डा. एसपी सती ने कलम का सिपाही

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_5873617.html

Devbhoomi,Uttarakhand

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विष्णु ने अयोध्या में लिया रामा अवतार

सोमेश्वर (अल्मोड़ा)। सोमनाथ-महावीर रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित रामलीला नाटक का शुभारंभ हो गया है। सोमेश्वर रामलीला मंच में प्रथम दिन की लीला से पूर्व उद्घाटन कार्यक्रम में ब्लाक प्रमुख श्रीमती दुर्गा कैड़ा ने मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम के रूप में अवतार लेकर भगवान विष्णु ने तपस्वीगणों, ऋषि मुनियों व असहायों पर अत्याचार करने वाले रावण के अंत का मार्ग प्रशस्त किया। मर्यादाओं के पोषक राम द्वारा मानव समाज को जो आदर्श दिए उनके अनुसरण की अपील दर्शकों से की। प्रथम दिवस के मंचित दृश्यों में सूत्रधार व नटी द्वारा रंगभूमि में राग ईमन में स्तुति गायन करना, कैलाश पर्वत में मृगचर्म में विराजमान भगवान शिव द्वारा रावण, विभीषण तथा कुंभकर्ण की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें इच्छित वर प्रदान करना, रावण के दूतों द्वारा मुनियों को प्रताडि़त करना, देवताओं द्वारा रावण के अत्याचार के अंत हेतु ब्रह्मा से प्रार्थना करना तथा अयोध्या नरेश दशरथ के घर राम, लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न का जन्म लेना आदि में कलाकारों ने जीवंत अभिनय कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरी। उल्लेखनीय है कि बौरारौ घाटी की इस रामलीला का आयोजन पिछले 4-5 दशकों से लगातार होता रहा है तथा खेती के कार्यो से निपटने के बाद क्षेत्र के दर्जनों ग्रामों के लोग रामलीला देखने पहुंच रहे हैं।

हेम पन्त

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नैनीताल की प्राचीन रामलीला का मंच


पंकज सिंह महर

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नैनीताले की सूर्पनखा


फोटो- श्री नवीन जोशी

पंकज सिंह महर

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पहाड़ की रामलीला, यहां रावण को नौ सिर वाला मुकुट पहनाया जाता है-


पंकज सिंह महर

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नैनीताल में रावण-सूर्पनखा संवाद

फोटो साभार-सुश्री वैजयन्ती (फेसबुक)

PratapSingh Bharda

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Kai saal ho gaye Ramleela dekhe........Mumbai ke August Kranti Maidan par hoti thi Pahadi Ramleela ab band ho chuki hai...aur young generation intereste nahi lete aise cheezo mai.

Devbhoomi,Uttarakhand

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को तुम श्यामल गौर शरीरा, क्षत्रिय रूप फिरहु वनवीरा
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पिथौरागढ़: रामलीला मंचन के सातवें रोज सीता की खोज के दौरान भगवान राम और हनुमान मिलन और बाली वध का मंचन हुआ।

नगर की मुख्य रामलीला की शुरुआत भगवान राम और लक्ष्मण द्वारा जंगल में सीता की खोज से हुई। भगवान राम व्यथित होकर जंगल में पेड़-पत्तों से सीता का पता पूछते हैं। इसी दौरान उन्हें घायलावस्था में जटायु मिलते हैं। जानकारी मिलने पर राम और लक्ष्मण आगे बढ़ते हैं। जंगल में ही भगवान राम की मुलाकात हनुमान और सुग्रीव से होती है। सुग्रीव बाली द्वारा उनका राजपाठ हथिया लिये जाने की जानकारी भगवान राम को देते हैं। भगवान राम उनकी मदद कर उनका राजपाठ वापस दिलाते हैं। उसके बाद सुग्रीव की वानर सेना सीता की खोज में जुटती है। भगवान राम हनुमान को अपनी अंगूठी देकर सीता की खोज के लिए भेजते हैं। हनुमान समुद्र लांघ कर सीता की खोज के लिए लंका पहुंचते हैं और वहीं सातवें दिन की लीला का समापन हुआ। उधर टकाना में चल रही रामलीला में भी हनुमान के सीता माता की खोज में निकलने तक की लीला का मंचन हुआ। दोनों स्थानों पर रामलीला देखने के लिए देर रात तक भारी भीड़ उमड़ रही है।

soure daink jagran

विनोद सिंह गढ़िया

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पहाड़ की रामलीला राष्ट्रीय धरोहर घोषित
संगीत नाट अकादमी को मिला संरक्षण का काम
पिथौरागढ़। लंबी जद्दोजहद के बाद पहाड़ की रामलीला को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर दिया गया है। केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने संगीत नाट्य अकादमी को रामलीला के संरक्षण की जिम्मेदारी सौंपी है। फरवरी 2011 में अल्मोड़ा में होने वाले सेमीनार में राष्ट्रीय स्तर पर पहाड़ की रामलीला के मंचन की रूपरेखा तय की जाएगी।
संगीत नाट अकादमी की ओर से पहाड़ी रामलीला को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की जानकारी प्रो.डीआर पुरोहित और संगीतज्ञ डा.पंकज उप्रेती को दी गई है। अकादमी ने प्रो.डीआर पुरोहित को गढ़वाल और हिमालय संगीत शोध समिति के निदेशक डा.पंकज उप्रेती को कुमाऊं में रामलीला के जानकारों से जनसंपर्क का काम सौंपा गया है। हिमालय संगीत शोध समिति के निदेशक डा.पंकज उप्रेती ने पहाड़ की रामलीला पर काफी विस्तार से शोध का काम किया है।
डा.उप्रेती पहाड़ी रामलीला की गायनशैली पर एक तथ्यपूर्ण पुस्तक भी लिख चुके हैं। उन्होंने ही संस्कृति मंत्रालय के सामने पहाड़ की रामलीला का खाका रखा था। आखिरकार डा.उप्रेती का प्रयास रंग लाया और संस्कृति मंत्रालय ने पहाड़ (उत्तराखंड) की रामलीला को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर दिया है।
डा.उप्रेती ने पहाड़ी रामलीला के राष्ट्रीय धरोहर घोषित होने को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। क हा कि हमारे पुरखों द्वारा पोषित, संरक्षित रामलीला को अब राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। बताया कि एसएसजे परिसर अल्मोड़ा के निदेशक डा.डीएस पोखरिया ने फरवरी में परिसर में सेमीनार के लिए स्वीकृति दे दी है। राष्ट्रीय मंच पर रामलीला का मंचन किस प्रकार हो सेमीनार में यह तय होगा।

Source- Amar Ujala e-paper

Devbhoomi,Uttarakhand

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Akhodi ganv ki ramleela main indrajeet or rawan ke paatr

 

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