Poll

आपके अनुसार विकास की दृष्टि से उत्तराखंड ने १०० % मैं से कितना विकास किया है ?

below 25 %
46 (69.7%)
50 %
11 (16.7%)
75 %
5 (7.6%)
100 %
2 (3%)
Can't say
2 (3%)

Total Members Voted: 62

Voting closes: February 07, 2106, 11:58:15 AM

Author Topic: 9 November - उत्तराखंड स्थापना दिवस: आएये उत्तराखंड के विकास का भी आकलन करे  (Read 56856 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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If I see any development during these 8 yrs i.e. entire Uttarakhand villages are under the Dam or above the Dam. Since the state is already in high earthquake zone and the spate of construction of these Hydro Dam has put the Uttarakhand villagers life into dangers.

We know if we have to development there, some big projects are required but not a spate on each and every places.

Thoroughout the year there have been many agitation from people but no gain.

 

सुधीर चतुर्वेदी

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राज्य स्थापना दिवस: तैयारी बैठक 31 को (Oct27/09 News from Dainik Jagran)

चम्पावत: राज्य स्थापना दिवस को धूमधाम से मनाने के लिए 31 अक्टूबर को तैयारी बैठक का आयोजन किया जाएगा। डीआईओ धीरेश पांडेय ने बताया कि बैठक ग्यारह बजे से कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होगी। जिसमें कार्यक्रमों की रुप रेखा को अंतिम रुप दिया जाएगा।


Source : Dainik Jagran (27/10/09)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: 9 November - MORE THAN 85 % PEOPLE SAY BELOW 25 % DEVELOPMENT IN UK
« Reply #82 on: October 29, 2009, 04:27:35 PM »

The polls shows that more than 84% people say below 25% development. This is picture of development in uttarakhand during these 8 yrs.

Request.. please give more details about the progress in yours areas and vote accordingly.


सत्यदेव सिंह नेगी

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Gaon ke gaon khali pade hain Jo gaon me hain bhi wo bhi kheti ko banjar banate ja rahe hain khali ghas ki chinta rahati hai

Mere Pitaji jo ki bahut boodhe ho chuke hain aur meree maa 1996 me expire ho gaye thi par pitaji mere sath permanently sirf isiliye nahi aa rahe hain ki gaon me koee unka ghas kat lega  saath hi market me jo hamara khet hai congress sarkaar ke time us tak road ka katan ho chuka tha abhi tak sarak ka kaam band hai gaon pahuchane ka rasta bhi bhayanak sa ho gaya hai

ye hai vikas ab ap hi batao ki ham vote kaise karen

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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This is the Poll Result so far- Please Cast your vote on top .
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Question:      आपके अनुसार विकास की दृष्टि से उत्तराखंड ने १०० % मैं से कितना विकास किया है ?  (Voting closes: January 01, 1970, 04:29:59 AM)

Option No 1 -    below 25 %    - 16 (84.2%)
Option No 2       50 %            - 2 (10.5%)
Option No 3       75 %            - 1 (5.3%)
100 %    - 0 (0%)
Can't say    - 0 (0%)
   
 
Total Voters: 19

सत्यदेव सिंह नेगी

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सूचना मिलने की राह में हैं रोड़े बड़े:
यह सूचना का अधिकार नहीं चमत्कार है। अब बीडीओ साहब देखकर बैठने के लिए पूछते
हैं। इज्जत से बात करते हैं। गांव के आदमी को और क्या चाहिए? कमलेश कामत मैनही
पंचायत अमही प्रखंड मधुबनी के रहने वाले हैं। सूचना के अधिकार से उनका परिचय
अभी नया-नया है। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि हाल में जब प्रखंड कार्यालय से
उन्होंने अपने पंचायत में होने वाले विकास संबंधी कार्यों में हो रहे व्यय का
ब्यौरा मांग तो क्यों पंचायत से लेकर ब्लॉक तक में उनकी इज्जत पहले से कई गुना
बढ़ गई है। *

पहले जो बीडीओ साहब उन्हें अपने आस-पास भी फटकने नहीं देते थे, आजकल कमलेश को
अपने दफ्तर में ना सिर्फ बिठाते हैं बल्कि चाय भी पूछते हैं। कमलेश के घर से
ब्लॉक ऑफीस की दूरी तीन घंटे की है। जिसमें लगभग डेढ़ घंटा-दो घंटे पैदल चलना
पड़ता है क्योंकि उस रास्ते में पानी लगने की वजह से सवारी नहीं मिलती। इतनी दूर
से ब्लॉक आने के बाद बाबू से लेकर साहब तक उसे दुत्कार देते थे तो आप समझ सकते
हैं, उसपर क्या बीतती होगी? कमलेश को कोई बड़ी जीत हासिल हुई है ऐसा नहीं है
लेकिन ब्लॉक के बाबू और अफसर से मिले प्यार के दो बोल ही उसके लिए अमृत के
बराबर है। वह इसी से खुश है। दूसरी कहानी है, बिहार के दरभंगा के एक सज्जन की।
जो एक प्रखंड विकास पदाधिकारी के खिलाफ सूचना के अधिकार कानून के अन्तर्गत कुछ
ऐसी जानकारी पा गए, जिससे प्रखंड में पैसों की गड़बड़ी का खुलासा हो रहा था। उस
व्यक्ति ने बातचीत में कहा कि- `बीडीओ साहब अपन गाड़ी लक हमर दुआर पर आइब गेला।
की कहू? फेर हम अपील में नई गेलऊ। अब अतेक बड अधिकारी घर आईब गेल त ओकर खिलाफ
की जाऊ?´

इन दो कहानियों में जो एक बात समान थी, वह यह कि इन दो कहानियों के मुख्य पात्र
इस बात से ही खुश हो गए कि सरकारी अधिकारी ने उन्हें थोड़ी तवज्जो दे दी। अब
इससे एक कदम आगे बढ़ते हैं, मतलब जिन्होंने इतने पर राजी होना स्वीकार नहीं
किया। अपनी कार्यवाही को अंजाम तक पहुंचाने का निर्णय लिया, उनका अंजाम अच्छा
नहीं हुआ।

अब सारण के रहने वाले विरेन्द्र कुमार को देख लीजिए। वे पांव से विकलांग हैं।
उनपर हत्या का मुकदमा चलाया जा रहा है, क्योंकि उन्होंने पंचायत शिक्षकों की
नियुक्ति में हुई अनियमितता पर सूचना मांगी थी। पुनपुन के कुणाल मोची और पिंकी
देवी ने अपने-अपने पंचायत में हो रही गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज बुलन्द की तो उनपर
अशांति फैलाने का मुकदमा बहाल है। यह सूची बहुत लंबी है। रामबालक शर्मा पर एसपी
लखीसराय ने धारा 302 का मुकदमा लगाया है, युगलकिशोर प्रसाद को सूचना मांगने पर
सूचना के बदले बीडीओ नालंदा की प्रताड़ना मिली। इन कहानियों को बताने के पिछे
सीधी सी बात यह थी कि भले ही सूचना के अधिकार को आम आदमी के लिए बना कानून कह
कर प्रचारित किया जाए लेकिन यह कानून उन लोगों के लिए है जो प्रशासन की
प्रताड़ना सहने और उससे लड़ने का कुव्वत रखते हों। इसी वजह से सूचना का अधिकार
कानून का इस्तेमाल कर, सूचना निकालना मानों जंग लड़कर, जंग जीतने के बराबर है।

ऐसी ही एक जंग हाल में बक्सर के भाई शिवप्रकाश राय हाल में ही जीतकर आए हैं।
उन्होंने जिले के करीब 70 बैंकों से प्रधानमंत्री रोजगार योजना के अन्तर्गत
कृषि उपकरणों पर अनुदान संबंधी सूचना मांगी थी। बदले में जिलाधिकारी ने उनपर
झूठा मुकदमा चलाया। जिसकी पुष्टि एसपी, बक्सर की जांच रिपोर्ट से होती है।
जिसमें उन्होंने राय को बेकसूर पाया। जिसकी वजह से 29 दिन जेल की सजा काटने के
बाद वे बाइज्जत बरी कर दिए गए। शिवप्रकाश राय के मामले में बिहार सूचना आयोग की
पूर्ण पीठ ने बक्सर के जिलाधिकारी को 15,400 रुपए उन्हें यात्रा व्यय के एवज
में देने का आदेश दिया है। श्री राय कहते हैं, `सूचना आयोग से मिले न्याय की
वजह से मेरा हौंसला बढ़ गया है और मैं आगे भी समाजहित में सूचना के अधिकार को एक
अहिंसक हथियार बनाकर लड़ता रहूंगा।´

हो सकता है, सूचना का अधिकार को लेकर काम कर रहे कार्यकर्ता शिवप्रकाश राय की
जीत को आम आदमी की जीत कहकर प्रचारित करें लेकिन राय आम आदमी नहीं है। इस देश
का आम आदमी कमलेश कामत जैसा है, जो भावुक है। वह लड़ना-भिड़ना नहीं जानता। हर
चुनाव में राजनीतिक नेता उन्हें प्यार के दो बोल बोलकर, झूठे वादों के सहारे
सुनहरे सपने दिखाकर, जीतने के बाद पांच साल के लिए नर्क में छोड़ जाते हैं। ऐसा
आम आदमी शिवप्रकाश राय नहीं हो सकता। ऐसी स्थिति में सूचना का अधिकार आम आदमी
का कानून बने, आम आदमी के लिए इसे अपनाना सहज हो, इसकी राह अभी मुश्किल जान
पड़ती है।

Devbhoomi,Uttarakhand

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UTTARAKHAND KIVARSH GAANTH KO HI MANAATE RHO KUCHH, VIKASH KARNE KI TO BAAT HAI NAHI HAI VIKASH KAHAN KRENGE UTTARAKHAND TO POORAA KA POORA VIKSHIT HAI, TUM LOGON KO ISKE BAARE MAIN SOCHANE KI JAROORAT HI NAHIN HAI , BAS UTTARAKHAND DIWAS MANAO OR APNI JAIBEN BHARO,APNI NHI BILDIGON KA SHILANYAASHA KARO UTTARAKHAND KA VIKASH TO HOT RAHEGA



धूमधाम से मनेगी राज्य स्थापना की नवीं वर्षगांठ



Oct 31, 10:12 pm


चम्पावत। राज्य स्थापना की नवीं वर्षगांठ जनपद में धूमधाम से मनाई जाएगी। जिला, तहसील तथा न्याय पंचायत स्तर पर सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए खेलकूद व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। चम्पावत, लोहाघाट व टनकपुर में विशेष सफाई अभियान में अधिकारी भी हिस्सेदारी करेगे। सरकारी दफ्तरों को रोशनी से जगमग किया जाएगा। यह निर्णय जिलाधिकारी अवनेन्द्र नयाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया।
आठ नवंबर को तीनों निकाय विशेष सफाई अभियान चलेगा। इस दौरान गोष्ठियों का आयोजन कर पालीथिन से होने वाले नुकसान को लेकर जनजागरण किया जाएगा। आठ व नौ को कलेक्ट्रेट, विकास भवन तथा निकाय कार्यालय बल्वों की रोशनी से जगमग रहेगे। स्थापना दिवस के रोज दस बजे विभिन्न क्षेत्रों में स्कूली बच्चों द्वारा रैलिया निकाली जाएंगी। गोरलचौड़ मैदान में सूचना विभाग द्वारा प्रकाशित विकास पुस्तिका के विमोचन के साथ ही विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिलाधिकारी सेना अवार्ड से सम्मानित सैनिकों को पुरस्कृत करेगे और बनबसा में कारगिल शहीद खीम सिंह कुंवर की प्रतिमा में माल्यार्पण होगा। इस मौके पर गोरलचौड़ मैदान में विभिन्न विभागों को विकास प्रदर्शनी लगाई जाएगी।


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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See this is the report of development
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ग्राम प्रधान ने दी आत्मदाह की धमकी

बागेश्वर। तहसील कपकोट के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय फुरमूला विगत कई वर्षो से बिना शिक्षक के चल रहा है। शिक्षा मित्र के भरोसे छोड़े गये इस विद्यालय में शिक्षकों की मांग को लेकर अभिभावकों व जनप्रतिनिधियों ने धरना शुरू कर दिया है। ग्राम प्रधान ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र शिक्षकों की तैनाती नहीं की गयी तो वह आत्मदाह कर लेंगे। ग्रामीणों ने बताया कि गोगिना के प्राथमिक विद्यालय फुरमूला में विगत कई वर्षो से शिक्षक तैनात नहीं हो पाये है। शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी व जनप्रतिनिधि शिक्षकों की तैनाती नहीं कर पा रहे है। जिस कारण विद्यालय में पढ़ रहे 60 बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। अभिभावकों ने कहा कि कई बार विभाग को सूचित करने के बाद भी शिक्षकों की तैनाती नहीं हो पायी है। मजबूर होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ा। प्रधान संजय कुमार आर्या ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गयी तो वह 5 नवंबर को आत्मदाह कर लेंगे। साथ ही सोमवार से विद्यालय में तालाबंदी का भी ऐलान किया गया है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_5905843.html

Devbhoomi,Uttarakhand

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SABKO 9TH NOVEMBER KA INTAJAAR HAI,

नौ नवम्बर से चक्का जाम करेंगे परिवहन निगम कर्मी

पिथौरागढ़ : रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संयुक्त परिषद ने 6 सूत्रीय मांगों पर कोई निर्णय नहीं लेने की स्थिति में नौ नवम्बर से अनिश्चितकालीन चक्का जाम की घोषणा कर दी है।

परिषद की दोनों शाखाओं की एक बैठक सोमवार को स्टेशन परिसर में सम्पन्न हुई। जिसमें वक्ताओं ने कहा परिषद 21 फरवरी 2009 को शासन स्तर पर हुए समझौते को लागू करने, परिवहन निगम कर्मियों को अन्य निगम कर्मचारियों की भांति 1 जनवरी 2006 से ही पुनरीक्षित वेतनमानों का लाभ देने, मृतक आश्रितों को अविलम्ब सेवायोजित किये जाने, संविदा कर्मचारियों को नियमित किये जाने, निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति पहचान पत्र जारी करने की मांग कर रही है,लेकिन आज तक इन मांगों पर कोई निर्णय नहीं लिया है। सरकार की उपेक्षा से खिन्न होकर निगम कर्मियों ने 4 नवम्बर को निगम मुख्यालय में धरना देने और नौ नवम्बर से अनश्चित कालीन चक्का जाम का निर्णय लिया है। कर्मचारियों ने अनिश्चित कालीन हड़ताल की तैयारियां शुरू कर दी है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_5910457.html

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VIKAS KAISE HOGA PAISE TO SAB HRAAMI KHA JAATE HAI OR BAAT JAB INKI JAIBEN KHALI HO JAATI HAIN TO PHIR BAAT KARTE HAIN VIKASA KI,VINAAS KARNE KE BAAD VIKAS WHW RE DEVBHOOMI MAIN PAIDAA HUYE DANABON TUMARA BHI KYA KAHANA<

AGAR KISI BHI PRJECT KE LIYE AGAR 100 RUPYE MANJOOR HOTE HAIN, PROJECT TAK PAHUNCHATE PAHUNCHATE YE 100 RUPYE KEWAL 30 RUPAYE HI WHAN PAHUNCHTE HAIN HAIN,


करोड़ों अटके, कैसे होगा विकास

रुद्रप्रयाग। पहली बार जिला योजना के तहत अनुमोदित धनराशि के अवमुक्त होने की संभावना काफी कम है। अनुमानित 29 करोड़ के सापेक्ष सात माह बीत जाने के बाद भी मात्र तीस फीसदी धनराशि ही उपलब्ध हो सकी है। इससे विकास कार्य तो प्रभावित होंगे ही, वहीं वर्तमान सरकार पर आर्थिक तंगी का भी खुलासा होता है।

जिले के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जिला योजना में इस वर्ष धन की कमी रोड़ा बन गई है। जिला योजना के तहत प्रत्येक वर्ष जिले में कई विकास योजनाओं की नींव रखी जाती है। वर्ष 2009-10 के लिए जिला योजना के अन्तर्गत अनुमोदित 2908 लाख रुपये की धनराशि के सापेक्ष वित्तीय वर्ष के सात माह बीत जाने के बाद भी 1083.13 लाख की धनराशि अवमुक्त हो चुकी है, जिसमें सड़क एवं पुल के लिए 375 लाख अनुमोदित के सापेक्ष 70 लाख रूपए अवमुक्त हुए हैं। जल संस्थान के लिए 508.38 लाख अनुमोदित के सापेक्ष 48.79 लाख की धनराशि अवमुक्त हुई है।

 वन विभाग के लिए 70 लाख के अनुमोदित के सापेक्ष 14.90 लाख, विद्युत के लिए 115.24 लाख अनुमोदित के सापेक्ष 76.81 लाख, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के लिए 187.54 लाख अनुमोदित के सापेक्ष 124.65 लाख की धनराशि अवमुक्त हुई है। वर्तमान समय में जिला योजना में अभी तक लगभग तीस फीसदी धनराशि ही अवमुक्त हो सकी है। हालांकि स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष भी अभी तक खर्च हुई धनराशि की स्थिति काफी अच्छी नहीं है। इस वर्ष इस योजना के तहत धनराशि अवमुक्त न होने के पीछे सरकारी धन की कमी को कारण माना जा रहा है।

 जिलाधिकारी रविनाथ रामन से जब इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी जिला योजना के तहत योजनाओं के निर्माण के तीस फीसदी धनराशि ही अवमुक्त हो सकी है। उन्होंने कहा कि आने वाले पांच महीने में इतनी ही धनराशि और स्वीकृत होने की संभावना है।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_5908677.html

 

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