Author Topic: Analysis of Uttarakhand Assembly Election 2012-चुनाव विश्लेष्ण  (Read 4838 times)

Mahi Mehta

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BJP must be realizing now reasons of defeat in Uttarakhand but at meantime, we are also not hopeful about Congress to fast development.


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Now the political drama starts in Uttarakhand.

हरीश रावत का मंत्री पद से इस्तीफा

नई दिल्ली।। उत्तराखंड के सीएम पद पर विजय बहुगुणा की ताजपोशी के पहले ही कांग्रेस में बगावत हो गई है। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि सीएम न बनाए जाने से नाराज केंद्रीय मंत्री हरीश रावत ने संसदीय कार्य राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस सूत्रों ने बताया है कि उन्होंने इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेज दिया है। इससे पहले मंगलवार सुबह उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया को चिट्ठी भेजी। उस चिट्ठी में उन्होंने कहा कि उनके समर्थकों की भावनाओं का भी सम्मान होना चाहिए।

हरीश रावत के नजदीकी सूत्र ने बताया है कि हम सिर्फ इसकी पुष्टि कर सकते हैं कि उन्होंने इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेज दिया है। रावत ने यह इस्तीफा उनकी जगह विजय बहुगुणा को उत्तराखंड का नया सीएम चुने जाने से नाराज होकर दिया है। विजय बहुगुणा ने कहा है कि यह विरोध है और यह इस्तीफा नही है। मामले को मिल बैठकर सुलझा लिया जाएगा।


इससे पहले सोमवार को कांग्रेस पार्टी ने उत्तराखंड के नए सीएम का ऐलान कर दिया। दिल्ली के 10 जनपथ पर चली मैराथन बैठक के बाद विजय बहुगुणा के नाम पर सहमति बनी थी। केंद्रीय मंत्री हरीश रावत, सतपाल महाराज, यशपाल आर्य, इंदिरा हृदयेश और हरक सिंह रावत भी मुख्यमंत्री के दावेदार थे।

बहुगुणा के नाम की घोषणा बाद रावत समर्थकों ने दिल्ली में उनके घर के बाहर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया। समर्थकों ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ भी नारे लगाए गए। रावत समर्थक अब भी दिल्ली में उनके घर पर जमे हुए हैं। रावत को उत्तराखंड के सीएम पद की रेस में सबसे आगे माना जा रहा था। लेकिन ऐन वक्त पर उनके नाम पर सहमति नहीं बन पाई। इससे रावत समर्थक गुस्से में हैं।

http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/12244702.cms

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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ना राष्ट्रीय पार्टी ना ही हमारे नेता राज्य का भला कर सकते है! संविधान के हिसाब से विधायको द्वारा चुना हुवा नेता ही मुख्यमंत्री होना चाहिए ना की इन पार्टियों के दिल्ली में बैठे आका! इसी प्रकार का ड्रामा पहले भगत सिह कोशियारी के साथ भारतीय जनता पार्टी ने किया था और अब  कांग्रेस! दुर्भाग्य है उत्तराखंड की भोली भाली जनता है, इन पार्टियों ने कितना विकास किया है यह किसी से छुपा नहीं है! नहीं मिल सकता है उत्तराखंड को विकास पुरुष क्योंकि यहाँ तो दौड़ है कुर्सी की! आज समय आ गया जनता को सोचना चाहिए क़ि उत्तराखंड की किसी मजबूत क्षेत्रीय पार्टी को समर्थन थे तब ही पहाड़ का विकास हो पायेगा! एस एस मेहता (मेरापहाड़ फोरम डोट कॉम)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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This poems written by our member Hem Bahuguna describe the real picture of Uttarakhand development but our Leaders are least bothered about the future and development of our state.


तुम मागते हो उत्तराखंड कहा से लाऊ?

तुम मागते हो उत्तराखंड कहा से लाऊ?
सूखने लगी गंगा, पीघलने लगा हीमालय!
उत्तरकाशी है जख्मी, पीथोरागढ़ है घायल!
बागेश्वर को है बेचेनी, पौडी मे है बगावत!
कीतना है DIL मे दर्द, कीस-कीस को मैं दीखाऊ!
तुम माग रहे हो उत्तराखंड कहा से लाऊ????

मडुवा, झंगोरे की फसले भूल!
खेतो मे जीरेनीयम के फूल!
गांव की धार मे रीसोर्ट बने!
गांव के बीच मे sweeming पूल!
कैसा वीकास? क्यों घमंड?
तुम मागते हो उत्तराखण्ड??

खद्दंजो से वीकास की बातें,
प्यासे दीन अँधेरी रातें,
जातीवाद का जहर यहाँ,
ठेकेदारी का कहर यहाँ,
घुटन सी होती है आखीर कहा जाऊ?
तुम मागते हो उत्तराखण्ड कहा से लाऊ???

वन कानूनों ने छीनी छाह,
वन आवाद और बंजर गांव,
खेतो की मेडे टूट गयी,
बारानाजा संस्कृती छुट गयी,
क्या गडवाल? क्या कुमाऊ?
तुम माग रहे हो उत्तराखण्ड कहा से लाऊ??

लुप्त हुए स्वालंबी गांव,
कहा गयी आफर की छाव?
हथोडे की ठक-ठक का साज,
धोकनी की गरमी का राज,
रीगाल के डाले और सूप,
सैम्यो से बनती थी धुप,
कहा गया ग्राम्य उधोग ?
क्यों लगा पलायन का रोग?
यही था क्या " म्योर उत्तराखण्ड" भाऊ?
तुम मागते हो उत्तराखण्ड कहा से लाऊ?

Devbhoomi,Uttarakhand

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कांटों भरा ताज करवाएगा चोरों से राज
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उत्तराखंड के सातवें और कांग्रेस के दूसरे मुख्यमंत्री के रूप में आज शपथ ग्रहण करने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय बहुगुणा के समक्ष राजनैतिक चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। चुनौतियां बाहर से हैं तो अंदर भी रास्ता कांटों से भरा। स्व. एचएन बहुगुणा की राजनीतिक विरासत के अलावा विजय बहुगुणा के पास अभी सक्रिय राजनीति में महज डेढ़ दशक का तजुर्बा और बतौर सांसद दो बार का लगभग पांच साल का कार्यकाल ही है और इस लिहाज से सियासी मोर्चे पर तीन तरह की चुनौतियों, आंतरिक, बाह्य और तात्कालिक, से पार पाने में ही उनके रणनीतिक कौशल की असली परीक्षा होगी।

कांग्रेस में नेता विधायक दल के चयन को लेकर सात दिनों तक चली लंबी कवायद और फिर मुख्यमंत्री के रूप में विजय बहुगुणा के नाम की घोषणा के बाद पार्टी के अंदर जो बवाल उठा, उससे साफ हो गया कि बहुगुणा ने मुख्यमंत्री की कुर्सी तो हासिल कर ली मगर सरकार चलाने के लिए उनके सामने कांटो भरी राह है। सबसे बड़ा सवाल, जो आज सबके सामने है, वह यह है कि विजय बहुगुणा ने कांग्रेस की सूबाई सरकार के मुखिया के तौर पर तो पार्टी आलाकमान का भरोसा जीत लिया मगर जिनके साथ मिलकर उन्हें सरकार को पांच साल तक चलाना है, क्या वे उनके साथ खड़े हैं। चलिए पहले करें बतौर मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के सामने पेश आने वाली आंतरिक चुनौतियों का आकलन।

Dainik jagran


Devbhoomi,Uttarakhand

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कांटों भरा ताज,
 करवाएगा चोरों से राज,
उत्तराखंड में मुख्यमंत्रियों  की पैदावार बढती जा रही है,
विकास गति घटती जा रही है

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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उत्तराखंड परिणाम
 कोई खफा है
 
 उत्तराखंड परिणाम
 सोचा था वो होआ क्या ?
 मौका हाथ से फिर छुटा लगता है
 अपना जुँतों से ही अब
 अपना सर ही अब फूटा लगता है
 
 उत्तराखंड परिणाम
 सब जुदा जुदा सा है
 दुर खड़ा वो खुदा लगता है
 बहती रहती है निर्मल गंगा
 पर उसका बांध टूटा सा लगता है
 सोचा था वो होआ क्या ?
 
 उत्तराखंड परिणाम
 बाँटें बाँटें हैं अब फैसले हमारे
 साथ हमारा अब रूठा लगता है
 इस पटल पर अब तुम देखो
 कुछ लिखा है पर अधुरा लगता है 
 सोचा था वो होआ क्या ?
 
 उत्तराखंड परिणाम
 राजनीती की खीचड़ी मै देखो
 सब पका पका है पर सब कचा लगता है
 झुठे वादों के बीच रहना है अब
 सच्चाई की आवाज कंही दबी सी लगती है
  सोचा था वो होआ क्या ? 
 
 उत्तराखंड परिणाम
 सोचा था वो होआ क्या ?
 मौका हाथ से फिर छुटा लगता है
 अपना जुँतों से ही अब
 अपना सर ही अब फूटा लगता है
 
 बालकृष्ण डी ध्यानी
 देवभूमि बद्री-केदारनाथ
 मेरा ब्लोग्स
 http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
 मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत — with Mahi Singh Mehta and 47 others.Like ·  · Share

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Matbar Singh Negi ms_negi2k@yahoo.co.in

As many as 8 leaders were trying their best to become the CM of a small state of Uttarakhand.... not a good sign for the developement of this new state. Now Harish Rawat is singing his own tune, not good at all for him personally.  With all due respect, Harish Rawat should try to understand the reason, one should not be so adamant !! Congress is on a sticky wicket in Haridwar in case of byelection and Congress can ill afford to loose one MP. This was the main reason and probably the only reason Harish Rawat was not selected, otherwise he deserved it more than Bahuguna. He would have been elevated to Cabinet rank with good portfolio had he understood the ground realities. If he continues with his revolt he will only be a looser and may become another Amar Singh or Lt.Gen TPS Rawat !! While Amar Singh revolted because of personal enmity with Aazam Khan, Gen TPS Rawat kept on changing the parties because of his over ambitions, otherwise he would have been the CM of Uttarakhand today if he had sticked to Congress. God bless Uttarakhand !!
Matbar Singh Negi
Newyork

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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 दोस्तों, जिस तरह से उत्तराखंड में राजनीतिक ड्रामे वाजी चल रही है उससे प्रतीत होता है, यहाँ हर कोई मुख्यमंत्री के दौड़ में शामिल है! यह उत्तराखंड राज्य के लिया शुभ नहीं है
 

हलिया

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मेह्ता जी यह सच है कि उत्तराखण्ड के प्रथक राज्य बनने से लेकर आज तक यहां के नेता अपने नीजी स्वर्थों के लिये आपसी खींच तान में लगे रहे राज्य के बिकास का ध्यान किसी को नहीं.

 

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