Author Topic: Analysis of Uttarakhand Assembly Election 2012-चुनाव विश्लेष्ण  (Read 4862 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Dosto,

Uttarakhand Assembly Election has got over and none of the party has got clear majority in the assembly State. Out of 70 Seats, ruling Party BJP 31, Congress 32, BSP 3, Independent 3 and 01 seat for UKD.

 जैसे की आप देख सकते है किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला! जहाँ तक भारतीय जनता पार्टी का सवाल है, पार्टी के पांच दिग्गज नेता स्वयं मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूरी चुनाव हार गये फिर भी पार्टी ने कांटे की टक्कर बनाई रखी! वही कांग्रेस पार्टी को पिछले चुनाव परिणाम से अच्छी सीटे मिली! उत्तराखंड राज्य में अहम् भूमिका निभानी वाली पार्टी उत्तराखंड दल मात्र एक ही सीट हासिल कर पायी जिससे अब पार्टी का अस्तितव खतरे में है ! इस टोपिक में हम चर्चा करंगे, भारतीय जनता पार्टी के दिग्गजों के चुनाव हराने के कारणों की और विकास के मुद्दों पर विफल होने की! इसके आलवा कांग्रेस और अन्य पार्टियों के प्रदर्शन पर भी हम यहाँ पर चर्चा करंगे!  ये चुनाव परिणाम कई मुद्दों को उजागर करते है!
 १)   जिस किसी भी पार्टी ने उत्तराखंड में राज किया, लेकिन पहाड़ से जुड़े हुए मुद्दों पर क्यों बिफल रहे ?.. जैसे पलायन, बेरोजगारी आदि!

२)  उत्तराखंड की राजधानी गैरसैंन बनाने पर क्यों ये पार्टियाँ अपना रुख स्पष्ट करती है ?

 ३)  उत्तराखंड क्रांति दल इस पतन के क्या कारन है ?

 ४)   नेताओ के लिए विकास के क्या मायने है ?

Let us discuss on these issues ..

 एम् एस मेहता

मेरे द्रष्टि में भारतीय जनता पार्टी ने पहाडो में विकास को एक तरफ से नाकारा जिसका खामियाजा उनको भुगतना पड़ा ! निमंलिख्त मंत्रियो का कार्य साधारण रहा जिसे वजह से उनको चुनाव हारना पड़ा

१) प्रकाश पन्त जी
२) बलवंत सिह भौरियाल
३) मतवार सिंह कंडारी
४) त्रिवेन्द्र सिह रावत
५) खुद भुवन चंद खंडूरी

पहाड़ी में कही भी विकास नहीं दिखा अभी तक ! लोगो को जनवरी के महीने में पिथोरगढ में पानी के लिए जूझना पड़ता है! स्वास्थ्य, सड़क, बेरोजगारी के बुरा हाल है

Mahi Mehta

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उत्तराखंड राज्य में जातिवाद की राजनीती नहीं है जैसे उत्तर प्रदेश में है.. यादवो एव मुसलवानो को लेकर!

चुनाव सिर्फ विकास पर लड़े जाने चाहिए! आज एक बात पक्की है जो विकास करेगा वही राज करेगा.. गुजरात, और विहार स्पष्ट उधाहरण है!

उत्तराखंड का दुर्भाग्य है यहाँ पर न कांग्रेस और न ही भारतीय जनता पार्टी ने विकास कोई ख़ास काम नहीं कर पाए है!  जनता विवस होकर कभी कांग्रेस तो कभी भारतीय जनता पार्टी कोई वोट देती है क्यों तीसरा दल यहाँ पर सक्रिय नहीं है!

दुःख की बात है भारतीय जनता पार्टी के नेताओ ने पाच साल सिर्फ कुर्सी की दौड़ में गवाए!

विकास करते तो ५० सीटे जरुर मिलती!  दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी न केंद्र में और न राज्य में विकास किया!

जनता तो वही की वही है नेताओ की गाडीया एव बैंक बैलंस जरुर बड़ा होगा!

उत्तराखंड राज्य बनाने का सपना कही पर भी साकार नहीं हुवा!   




विनोद सिंह गढ़िया

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जैसा कि आप सभी को मालूम है उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। कांग्रेस और बीजेपी के कद्दावर नेताओं को हार का मुंह देखना पड़ा। आश्चर्य तो तब हुआ जब पता चला कि उत्तराखंड में बीजेपी के चार मंत्री चुनाव हार गए और मुख्यमंत्री जी भी बलि की भेंट चढ़ गए।
 
 मैं यहाँ पर अपने विधानसभा क्षेत्र कपकोट के बारे में बताना चाहूँगा। मैंने इसी फोरम के माध्यम से मतदान के बाद आप सभी को बता दिया था कि इस बार कपकोट में बीजेपी की राह आसान नहीं है, क्योंकि कपकोट इस बार परिवर्तन चाहता है यानि कपकोट में बीजेपी की हार निश्चित है। जिसे आप इस लिंक के माध्यम से पढ़ सकते हैं।
 
 आप सभी जानते हैं कि कपकोट एक हॉट सीट है जिसका प्रतिनिधित्व उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री भगत सिंह कोश्यारी जी करते हैं। लेकिन इस बार वे अपनी प्रतिष्ठा को नहीं बचा पाए, क्योंकि कोश्यारी जी बीजेपी के कपकोट विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवार, उत्तराखंड सरकार में कबीना मंत्री श्री बलवंत सिंह भौर्याल जी की हार को नहीं बचा पाए। 
 कपकोट क्षेत्र बीजेपी का गड़ कहा जाता है 15  साल तक बीजेपी यहाँ से जीतते आ रही है। ग्राम पंचायत चुनावों से लेकर विधानसभा चुनावों तक बीजेपी का ही बोलबाला रहता है लेकिन बीजेपी ने यहाँ क्या दिया ? सिर्फ गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार। आज यहाँ के गाँव वही 20 साल पुरानी समस्याएँ बिजली, पानी, सड़क इत्यादि से जूझ रही हैं। जहाँ सड़क है वहां धूल भरी उबड़-खाबड़ है, कहीं बिजली की लाइन है लेकिन वहां बिजली आती ही नहीं।
 
 
क्या कारण रहा हार का ? आईये जाने अपने क्षेत्र के लोगों के अनुसार -
 
  • हार का मुख्य कारण रहा कपकोट का विकास के क्षेत्र में पिछड़ना। जो भी विकास हुआ वह आशानुरूप नहीं हुआ क्योंकि एक वीआईपी सीट होते हुए भी यहाँ की मूलभूत समस्याएँ जस की तस हैं। जैसे- बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा इत्यादि।
  • बीजेपी कपकोट में आपसी कलह उन्हें ले डूबी।  साथ वोटरों की  इच्छा के विपरीत प्रत्याशी को खड़ा किया गया।
  • बीजेपी प्रत्याशी को अपने ही गृह क्षेत्र की जनता से साथ न मिलना। क्योंकि पूरी नाकुरी पट्टी आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जी रही है, रीमा-नाकुरी पट्टी की एकमात्र सड़क आज भी यहाँ के लोगों को धूल और हिचकोले खिलाती हुयी उनके गंतव्य स्थान तक पहुँचती है। जिसका कारण यहाँ के लोगों ने अपने ही परिवार के व्यक्ति को समझा और नकारने में ही भलाई समझी। 
     
  • कुछ लोगों का कहना है कि पंचायत चुनावों में बीजेपी के कुछ महानुभावों द्वारा मत गणना में भारी धांधली की गयी, जिसका दुष्परिणाम आज बीजेपी भुगत रही है।
  • विरोधी पार्टी का प्रत्याशी एक गैर, नया चहेरा होते हुए भी उसने यहाँ की जनता के सामने जो मुद्दे उठाये, उनमें जनता को दम दिखा और उसी को विजयी बनाने में ही अपनी और क्षेत्र की भलाई समझी।
कुछ और ऐसे गंभीर कारण हैं जिससे आज बीजेपी को कपकोट से हाथ धोना पड़ा, उन्हें मैं यहाँ पर बताना उचित नहीं समझता।
यदि बीजेपी कपकोट में पुनः आना चाहती है तो उन्हें उपरोक्त समस्याएँ ध्यान में रखकर आत्म मंथन करने की जरुरत है।
   

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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 अब चलो मै भी उत्तराखंड राज्य के हाल में हुए चुनावों के बारे में अपना विस्तृत विश्लेषण दे दूं!

 "आज तो अभी दो, उत्तराखंड राज्य दो:" यह उत्तराखंड राज्य संघर्ष के दौरान एक नारा था! राज्य मिला लेकिन पर विकास नहीं!


 चुनाव का हर पांच साल बाद होना एक संविधानिक प्रक्रिया है जिसमे पार्टिया हारती भी है जीतती भी है! लेकिन मै आज बेहद उदास हूँ किसी पार्टी के हार या जीत को लेकर नहीं बल्कि उत्तराखंड राज्य के विकास के लिए! जिस उद्देश्य से उत्तराखंड राज्य का निर्माण हुवा था वह की खो गया है मुख्यमंत्री बने और सरकार बनाने की दौड़ में! ११ साल इस नवजात राज्य में अब तक पांच मुख्यमंत्री बन चुके है और छटा मुख्य मंत्री बनाने वाला है! लेकिन शहीदों के सपने का उत्तराखंड अभी तक भी नहीं बन पाया है! एक बार पूरे पाच साल कांग्रेस और पूरे पांच साल भारतीय जनता पार्टी ने यहाँ पर राज किया है और दोनों की पार्टियों का शाशन बेहद साधारण रहा है क्योंकि इन दोनों पार्टियों की कुंजिया दिल्ली में है!


 जहाँ तक २०१२ विधान सभा के चुनाव की बात है, भारतीय जनता पार्टी एव कांग्रेस दोनों एक बीच बहुत कड़ा मुकाबला रहा और शायद अन्तः कांग्रेस पार्टी सरकार बनाने जा रही है वह भी निर्दलीय और उत्तराखंड क्रांति दल के सहयोग से! इस आम चुनाव में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी का पाच साल का कार्य काल किसी फ़िल्मी नाटक से कम नहीं रहा! शुरू में है जिस तरह भगत सिह कोशियारी को खंडूरी जी हासिये में रखने में सफल रहे वही समय की सुई ने अंत में उन्हें ही हासिये पर रख दिया! भारतीय जनता पार्टी की हाई कमान की सबसे बड़े गलती रही, खंडूरी जी को जबरदस्ती मुख्यमंत्री थोपना! अपने २ साल से ज्यादे के कार्य काल में खंडूरी जी कोई ख़ास चमत्कार तो नहीं कर पाए और लोक सभा चुनाव में पांचो के पांचो सीटे भारतीय जनता पार्टी हार गयी!  विरोध के शुर फिर से बुलंद हुयी और खंडूरी जी के जाना पड़े लेकिन जाते जाते उन्होंने अपना उत्तराधिकारी के रूप में रमेश पोखरियाल निशक को बनाया लेकिन रमेश जी विकास कम भ्रष्टाचार के मुद्दों में छाए रहे और चुनाव को देखर को भारतीय जनता पार्टी ने फिर से दाव खेल और खंडूरी को पुनः मुख्य मंत्री बना डाला! लेकिन खंडूरी जी स्वयं ही इस बार चुनाव हार गए!


 यह तो है एक संशिप्त कहानी! इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के दिग्गजों के हारने से यह सवित हो गया है क़ि ये नेता पाच साल तक सिर्फ घाम (धूप) सेकते रहे और विकास ने नाम पर इन्होने कुछ ख़ास नही किया और फलस्वरूप गद्दी गयी हाथ से!


 १) क्यों आज कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड राज्य के स्थाई राजधानी के बारे में खुल कर अपनी राय देते है! इससे स्पष्ट है इन पार्टियों को पहाड़ का विकास नहीं चाहिए और केवल पाच साल के किसी न किसी तरह कुर्सी चाहिए जो क़ि राज्य के विकास के लिए शुभ संकेत नहीं है!


 २) उत्तराखंड राज्य को आज एक येसा लीडर चाहिए जो अपने पार्टी और व्यकतिगत स्वार्थो से उठकर विकास के कड़े से कड़े कदम उठाये!


 ३) उत्तराखंड वासी आज चाहते है उनका कोई येसा मुख्य मंत्री आये जिसकी तुलना विकास के मामलों में गुजरात, विहार, उडीसा और अन्य राज्य के मुख्यमंत्री की श्रेणी में आये!


 चुहाव जीतना केवल लक्ष्य नहीं होना चाहिए! हर विधायक का फर्ज होना चाहिए वो अपने क्षेत्र का तन मन और धन से विकास करे तभी शहीदों का सपनो का उत्तराखंड राज्य बन पायेगा !
 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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The simple reason of BJP downfall in Uttarakhand is poor development.

Devbhoomi,Uttarakhand

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BJP ka Poor Parformation rha hai lekin Kangresh ne bhi kyaa ykhaad liya hai ya kya ukhaad legi Ye sab chor Hain Or ek hi sikke do Pahlu hain

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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PGGroup] Nishank behind Khanduri’s loss?
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mukesh kumar garry_124@yahoo.co.in via yahoogroups.com
4:22 PM (5 hours ago)
to younguttaranch.
Images are not displayed. Display images below - Always display images from garry_124@yahoo.co.in       Dear Kukreti ji,You have rightly said it is total failure of political management of Khanduri ji.Shri Negi won by dint of his efforts ,but this type of miracle may happen only in Uttarakhand not in other state.It is the result of efforts of Khanduri ji that the final seat results were having so thin margin. He never thought that he will loose in his backyard.If celeberating the win in election is important then we should give the same credit to the criminal ,murderers ,rapists who are holding seat in different legislative assemblies and very soon this thing will also come to uttarakhand.Psych of people is unknown but when it becomes psyche it becomes noticeable .Few lines ..."ek hi uloo kafi hai barbadi-e gulistan ko ;yahan har shakh par uloo baitha hai,to anjam -e -gulistan kyan hoga"ANY WAY I LIKE YOUR LITERATURE A LOT  BUT MY ETHIC SYSTEM IS DIFFERENT.
With   warm regards


     

  From: Bhishma Kukreti <bckukreti@gmail.com>
 To: PauriGarhwal@yahoogroups.com
Cc: younguttaranchal mygroup <younguttaranchal@yahoogroups.com>; Youth United <burans.youthunited@gmail.com>; kumaoni garhwali <kumaoni-garhwali@yahoogroups.com>; arju <uttranchalkalasangam@googlegroups.com>
 Sent: Friday, 9 March 2012 1:05 PM
 Subject: [YU - All India Society] Re: [PGGroup] Nishank behind Khanduri’s loss?
 [/size][/font] 
                         
Khanduri Should be Blamed for His Defeat ![/font][/color][/font]   Dear All,   I do agree that Uttarakhand should have chief minister as B.C. khanduri from honest politician point of view.However, Khanduri should be balmed for his defeat than Nishank or other aspects.  Khanduri failed in political management and no body shour pour tears who can not manage his own election कैम्पेन Khanduri failed in knowing the psychology of Kotdwara electrotes. No body should have sympathy with the politician who can not understand psych of his voters. Politics is politics and Khanduri should have taken every care [/size]हारे हुए जुवारी पर आंसू  बहाने का अर्थ है हम जीत को आलिंगन करना पसंद नही करते हैं  [/color] [/size]हमें सुरेन्द्र नेगी को शाबासी  देनी चाहिए[/color]

 On Fri, Mar 9, 2012 at 11:26 AM, D Dobriyal <dd20005@hotmail.com> wrote:
         
 I also agree with all of you which looking the goodness of Garhwal.
 People of Kotdwar and also people of Uttrakhand losing the good cheif Minister
 and also the development. If Khanduri will not lose this election then nobody
 stop the Kotdwar development. Nishank fully responsble of this blunder.
 
 rgds
 Dwarika
 

To: PauriGarhwal@yahoogroups.com
From: bsnegi1952@gmail.com
Date: Fri, 9 Mar 2012 07:43:04 +0400
 Subject: Re: [PGGroup] Nishank behind Khanduri’s loss?

      I agree with the views expressed in this mail.  There is no development at all. 

--
 [/size]Regards,[/color]
  B.S.NEGI [/size][/color][/size][/color][/b][/size][/color][/size][/color][/b]
 [/size]ATLAS[/color][/i][/b][/size][/color][/size]CYCLES (HARYANA) LTD.[/color]
 [/size]email[/color][/b][/size][/color][/size]bsnegi1952@gmail.com[/color][/size][/color]
 </blockquote>

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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kochiyar library kochiyarlibrary@gmail.com
   
 
 बारी बारी से ही सही किसी  न किसी को सत्ता सुख तो मिल ही रहा है

 

सदस्य, म्यर उत्तराखंड, धुमाकोट/नैनीडांडा  तथा इंटरनेट पर उपलब्ध दूसरे उत्तराखंडी ग्रुप

 

चुनाव तो बुखार है.  बुखार उतरते ही आदमी सामान्य हो जाता है.  उत्तराखंड में ही क्यों भारत में भी या दुनिया में भी पार्टियां तो दो ही होती हैं.  एक पार्टी जीतती है.  दूसरी हारती है. बात तो सोच की है.  एक सोच जीतती.  दूसरी हार जाती है.  कभी कभी मैच बराबरी पर भी समाप्त हो जाता है.  वास्तव में आज तो भाजपा और कांग्रेसी विचार धाराएँ एक ही हैं.  सत्ता के लिए व्यक्ति ग्रुप बना लेते है.  ग्रुप का मध्यमार्गी होना जरूरी है.  कभी कभी लोग चाहते है कि आमूल परिवर्तन हों. पूरी व्यवस्था ही बदल दी जाये. ऐसा करने  में आम व्यक्ति की स्वतन्त्रता पर प्रतिबन्ध लगा दिए जाते हैं इसके लिए लोगों को तैयार करना पड़ता है.  एक प्रकार का जिहाद करना पड़ता है. क्रुसेड करना पड़ता है  तभी लोग क्रांति के लिए तैयार होते हैं. इतिहास में महत्व पूर्ण युग आये हैं.  पर जो भी बौद्धिक काम हुआ है वह उन युगों में हुआ हैं जो कि स्वर्ण युग कहलाते हैं.

 

जब उत्तराखंड बनाया गया था तब उसे तराई का मैदानी भाग भी दिया गया था. तभी उत्तराखंड मध्य मार्गी रास्ता अपना सकता था.  पर इसका असर यह हुआ कि उस औचित्य पर कोई काम नहीं हुआ जिसके कारण उत्तराखंड को उत्तर प्रदेश से अलग किया गया था. उत्तर प्रदेश पर जरूर असर पड़ा.  वहाँ  बसपा और सपा बारी बारी से सत्ता सुख भोग रहे हैं.

 

कहने को तो सरकारें उत्तराखंड के पहाड़ी हिस्से के औद्योगिकी करण के लिए पालिसी पर पालिसी बनाती रही है. ऐसा ही कुछ ग्लोबैलाइजेशन  से पहले भारत सरकार के टेक्नोलोजी पालिसी के बारे में होता रहता था. पर जो वास्तविकता है वह उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणामों से साफ़ ज़ाहिर है.  देश की औद्योगिक समस्या दिखावे के झरोखों से हल नहीं की जा सकती. सत्ता में रहने और न रहने से भी समस्या नहीं सुलझाई जा सकती है.  उत्तराखंड ने इंदूस्ट्रियल पॉलिसी २०११ मे जो पहाड़ी क्षेत्र के लिए औद्योगिक नीति बनायी थी उसे समझने के लिए एक रिपोर्ट का अंतिम भाग देख सकते हैं जो इस प्रकार है:

The Indian Industries Association (IAU), a key body of SMEs in the hill state, has welcomed the amendments in the hill policy, saying it would promote new investments. “We want the government to focus on the preservation of handicrafts, handlooms and khadi by infusing modern techniques to devise new products,” said Pankaj Gupta, president of IAU.

The IAU said the khadi and handicrafts sector needs to be leveraged for use in the fashion and interior design industry by creating linkages with top fashion designers through aggressive marketing.

It said cluster development needs to be encouraged in the state, particularly in new industrial areas, and that this can be done by creating dedicated industrial parks.

CII has called for the creation of a SME renewable fund for technology upgradation. It has also called for creation of a common marketing and branding fund for MSMEs and asked the government to set up a MSME facilitation council to facilitate the resolution of problems, said Dr S Farooq, chairman of the CII’s state council.

 

जिस के पास भी सत्ता सुख भोगने का अवसर आएगा उसे याद रखना होगा कि औद्योगिक संगठन तो पारंपरिक सोच से चल रहे हैं.  उनमें दम हॉता तो राजनीति इतनी अस्थिर न होती जितने आज दिखाई दे रही है.

 

राम प्रसाद 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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देव भूमि बद्री-केदार नाथ राजनीती के आंगन मै
 उत्तराखंड के अखाड़े मै
 बस मंत्री का खेल होगा
 नोटों का लेंन देंन होगा
 पद का अब हेर फेर होगा ध्यानी
 पाँच बरसों के बाद फिर मेल होगा 
 अलविदा नेता ओर नेतागण!!
 भैजी मेरा पहाडा का शुभ संध्या !!

 

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