Author Topic: Debate-पहाड़ के गाँव को उत्पादक बनाने का सवाल चुनौतियाँ तथा रास्ते पर लोकविमर्श  (Read 4149 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Dosto,
A Social Group of Uttarakhand Dhaad has organized a debate programme in Dehradun 11th Dec on पहाड़ के गाँव को उत्पादक बनाने का सवाल चुनौतियाँ तथा रास्ते पर लोकविमर्श". Many experts are participating this programme.

Theme
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"आखिर पहाड़ के गाँव अनुत्पादक क्यों हैं दरअसल हमें पहाड़ों की संसाधन संरचना और उत्पादन प्रवृति और बाजार की समझ और पहचान नहीं है .जबकि पहाड़ों मैं आर्थिक संरचना के आधार की प्रवृति और क्षमता भिन्न है जिससे कभी पहाड़ों की दृष्टि से नहीं समझा गया . इसलिए पहाड़ों के विकास का उत्तर खोजने के लिए हमें इस पहाड़ी दृष्टि या पहाड़ों के आर्थिक उत्पादन सिद्धांत को समझाना होगा यहाँ एक अन्य बात को रेखांकित करना जरुरी है की यह विकास और आर्थिकी कि न...यी समझ और नए पर्यायों का युग है लेकिन पहाड़ों के विकास को लेकर हमें इस नयी समझ का आभाव दीखता है इसलिए आज भी विकास कि दृष्टि से गाँव हाशिये पर हैं दरअसल यहाँ का मनुष्य यहाँ तभी रहना चाहेगा जब पहाड़ के गाँव उत्पादक बने इसलिए धाद गाँव को केंद्र मैं रखकर एक खुले सामाजिक विमर्श का आयोजन कर रहा है" ... Dhaad.

We would like to know your views on this crucial topic here.

Regards,

M S Mehta

Invitation by Dhaad

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Views by many people of facebook Community members of Dhaad
    • Dhaad - धाद आखिर पहाड़ के गाँव अनुत्पादक क्यों हैं दरअसल हमें पहाड़ों की संसाधन संरचना और उत्पादन प्रवृति और बाजार की समझ और पहचान नहीं है .जबकि पहाड़ों मैं आर्थिक संरचना के आधार की प्रवृति और क्षमता भिन्न है जिससे कभी पहाड़ों की दृष्टि से नहीं समझा गया .... इसलिए पहाड़ों के विकास का उत्तर खोजने के लिए हमें इस पहाड़ी दृष्टि या पहाड़ों के आर्थिक उत्पादन सिद्धांत को समझाना होगा यहाँ एक अन्य बात को रेखांकित करना जरुरी है की यह विकास और आर्थिकी कि नयी समझ और नए पर्यायों का युग है लेकिन पहाड़ों के विकास को लेकर हमें इस नयी समझ का आभाव दीखता है इसलिए आज भी विकास कि दृष्टि से गाँव हाशिये पर हैं दरअसल यहाँ का मनुष्य यहाँ तभी रहना चाहेगा जब पहाड़ के गाँव उत्पादक बने इसलिए धाद गाँव को केंद्र मैं रखकर एक खुले सामाजिक विमर्श का आयोजन कर रहा हैSee MoreTuesday at 8:56pm · LikeUnlike ·  2 peopleLoading... ·
    • Geetesh Singh Negi जल भी छुटटू ,
      जंगल भी छुटटू,
      भोल प्रभात कुडी -पुंगडि  भी जाण
      फिर बतावा कक्ख हमुल उत्तराखंड ?
      और कक्ख तुमुल  " म्यारु पहाड़  " बणाण ?
      ...
      सुनसान व्हेय ग्यीं पहाड़
      ख़ाली छीन गौं  का गौं
      बता द्यावा साफ़ साफ़
      अब क्या च तुम्हरा जी मा?
      और क्या च अब तुम्हरी गओवं ? (कक्ख जाण : now its a good time to think where we want to go )

      Join this event of Dhaad  to save the "PAHAD "See MoreTuesday at 9:31pm · LikeUnlike ·  1 personLoading... ·
    • Hem Pant Karyakram ki safalta ke liye shubhkamnaye..Tuesday at 9:32pm · LikeUnlike ·
    • Madhuri Rawat साधुवाद, अनेक अनुत्तरित प्रश्नों के उत्तर खोजे जाने आवश्यक हैंTuesday at 10:00pm · LikeUnlike ·  1 personLoading... ·
    • Geetesh Singh Negi बिरिडियूँ च समाज
      छलेणु चा पहाड़
      ब्हेर भट़ेय भी
      और भितिर भट़ेय भी
      सिर्फ और सिर्फ कचोरेंणु च पहाड़Tuesday at 10:34pm · LikeUnlike ·  1 personJayprakash Panwar likes this. ·
    • Subhash Chandra Lakhera Vichar - vimarsh se hee samasyaon kee jad tak pahuncha ja sakta hai
      kintu ismen naye vichar samne aane chahiyenWednesday at 9:30am · LikeUnlike ·
    • Jaya Prakash Dabral Geetesh ji! Your poetry is inspiring. I enjoyed reading it.
      Regards'
      JP DabralWednesday at 10:53am · LikeUnlike ·
    • Geetesh Singh Negi ‎" कोशिश करला खूब ,रौंला मिली-जुली की
       कन्नी आला दिन खुशी का एक दिन बोडी की "
      @ डबराल जी जुगराज रयाँ
      हौसला अफजाई  खुण   हार्दिक आभारWednesday at 5:43pm · LikeUnlike ·

Himalayan Warrior /पहाड़ी योद्धा

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We appreicate the efforts by Dhaad. This is indeed a very important issue and we need to work out.

I am sure if collective is done and Govt also तकस इस सेरिऔस्ल्य, there will be fruitful results. This will also help to minimize migration from pahad.

पंकज सिंह महर

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दरअसल पहाड़ की चिन्ता पर सिर्फ सेमिनार होते हैं या कुछ सोफेस्टिकेटेड नोस्टालजिक लोग पहाड़ के दर्द को व्हिस्की के नशे के साथ लेते हैं, जैसे-जैसे नशा गहराता है, पहाड़ प्रेम भी गहराता है और नशा खत्म होते ही पहाड़ प्रेम भी काफूर हो जाता है। असल में पहाड़ को बचाने से पहले पहाड़ को बसाना जरुरी है, पहाड़ रोज बरोज़ खाली होते जा रहे हैं और हम लोग सेमिनारों में ही बिजी रह जाते हैं। जरुरत है फील्ड में कुछ ऐसा करने की जिससे लोग पहाड़ की महत्ता को जाने, समझॆं और आत्मसात करें। पहाड़ के संसाधन आधारित इंड्रस्ट्री हमें डेवलप करनी होगी, पूरे पहाड़ को आत्मनिर्भर बनाना होगा, जिसके लिये वैचारिक चेतना की आवश्यकता है और वर्तमान में इसका नितान्त अभाव ही दिख रहा है। असल में इन २० सालों में उत्तराखण्ड में पेन सेलिंग इंडस्ट्री का ही गठन हुआ है, उत्तराखण्ड की पीड़ा को दर्द बनाकर देश और दुनिया के सामने बेचा ही गया है। यह उन सक्षम लोगों ने किया जो अपने नाम के दम पर उत्तराखण्ड का दर्द विभिन्न माध्यमों से बेचते है। हमें इस मानसिकता पर भी रोक लगानी होगी, उत्तराखण्ड के दर्द के सौदागरों को पहचान कर इनकी जड़ों में मट्ठा डालना बहुत जरुरी है।

धाद से मुझे बहुत आशायें है, कार्यकम की सफलता हेतु शुभकामनायें

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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मेरे हिसाब से यह एक बहुत ही महतवपूर्ण विषय है जिसे पर जल्दी से जल्दी कार्य करने के जरुरत है!  लेकिन इसमें चुनौती भी बहुत है!

सबसे पहले पहाड़ में पानी को बचाए रखना एक चुनौती है! आये दिन अखबारों में खबर रहती है लोग पीने के लिए जूझ रहे है, सिचाई के लिए पानी उपलब्ध करना कितना मुस्किल होगा और सरकार इसमें इस तरह से कार्य करती है देखने वाली बात होगी !

मै देखता हूँ पहाड़ में रहन सहन, खान पानी और दैनिक जीवन में काफी बदलाव आया है जैसे

१) आज घर घर में लोगो के पास मोबाइल फोन से सूचना का साधन है
२) adhiktak gaavo में bijali है
3) लोगो के पास TV और Dish TV जैसे suvidha है
4) कई जाहो पर इन्टरनेट भी है

लेकिन हमारे खेती करने का तरीका वही है जो बर्षो से चला आ रहा है और नयी पीड़ी इस प्रकार के खेती नहीं करनी चाहती!

पहाडो के उन गावो में खेती का Patten बदलना चाहिए ताकि धान या गेहू के उत्पादन नहीं होता, क्यों के ये क्षेत्र तराई मे नहीं है और लोग फिर इन जगह पर तराई की जैसे फसल उगाने चाहते है!

१)  फलो का उत्पादन
२)  दाल का उपाधन
३)  जड़ी बूटियों का उत्पादन
४)  रेशम आदि उत्पादन को badawaa diya jaana चाहिए

आज जरुरत है हमारे वैज्ञानिक इसमें अध्यन करे ताकि पहाड़ में इससे रोजगार के साधन भी इसके जरिये उपलब्ध हो सके !

 


Nice to know that Dhaad is organizing a debate agriculture issue. This is indeed need of the our in Uttarakhand.

This area has never been paid any attention by Govt.

Like Himanchal they have a good resource of revenues through production of fruits cereals etc.

We must adopt similar parttern of agriculture in Uttarakhand since we are sharing similar kind of geographical condition.

Himalayan Warrior /पहाड़ी योद्धा

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This is really very imporatant area needs immediate attention.


If we can preserve water, then it is possible.



Devbhoomi,Uttarakhand

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मेरे हिसाब से यह एक बहुत ही महतवपूर्ण विषय है जिसे पर जल्दी से जल्दी कार्य करने के जरुरत है!  लेकिन इसमें चुनौती भी बहुत है!

सबसे पहले पहाड़ में पानी को बचाए रखना एक चुनौती है! आये दिन अखबारों में खबर रहती है लोग पीने के लिए जूझ रहे है, सिचाई के लिए पानी उपलब्ध करना कितना मुस्किल होगा और सरकार इसमें इस तरह से कार्य करती है देखने वाली बात होगी !

मै देखता हूँ पहाड़ में रहन सहन, खान पानी और दैनिक जीवन में काफी बदलाव आया है जैसे

१) आज घर घर में लोगो के पास मोबाइल फोन से सूचना का साधन है
२) adhiktak gaavo में bijali है
3) लोगो के पास TV और Dish TV जैसे suvidha है
4) कई जाहो पर इन्टरनेट भी है

लेकिन हमारे खेती करने का तरीका वही है जो बर्षो से चला आ रहा है और नयी पीड़ी इस प्रकार के खेती नहीं करनी चाहती!

पहाडो के उन गावो में खेती का Patten बदलना चाहिए ताकि धान या गेहू के उत्पादन नहीं होता, क्यों के ये क्षेत्र तराई मे नहीं है और लोग फिर इन जगह पर तराई की जैसे फसल उगाने चाहते है!

१)  फलो का उत्पादन
२)  दाल का उपाधन
३)  जड़ी बूटियों का उत्पादन
४)  रेशम आदि उत्पादन को badawaa diya jaana चाहिए

आज जरुरत है हमारे वैज्ञानिक इसमें अध्यन करे ताकि पहाड़ में इससे रोजगार के साधन भी इसके जरिये उपलब्ध हो सके !

 



Mehta ji Ajkal Ganv main ye sabhi Sadhan hai lekin In sabhiSadhano ko Chlaane  ke liye Niymit Roop se Bijali Hoi Chahiye,Ajkal Ganvon main Itne bhi samay Bijali Nahin Hoti ki Log Apna Mobile PHone ki Battri Charj karen

 

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