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उत्तराखंड मे बन रहे हाड्रो प्रोजेक्ट वरदान या अभिशाप ?

अभिशाप
21 (56.8%)
वरदान
10 (27%)
कह नहीं सकते
6 (16.2%)

Total Members Voted: 37

Voting closes: October 10, 2037, 04:59:09 PM

Author Topic: Hydro Projects In Uttarakhand - उत्तराखंड मे बन रहे हाड्रो प्रोजेक्ट  (Read 33453 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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बांधों पर ये कैसा विरोध ?
चंद्रशेखर करगेती   Thursday May 10, 2012
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1

उत्तराखण्ड में बड़े बाँध बनाने से पहले बड़े बांधों का समर्थन करने वाले वैज्ञानिकों एवं पर्यावरणविदों को पहले पहाड़ में भूकंप आदि आने जैसी घटनाओं को रोकने के लिये भी कोई तकनीक विकसित कर लेनी चाहिये........

शायद ऐसा लगता है कि बड़े बाँधो का निर्दयता के साथ समर्थन करने वालों ने इस प्रकार की कोई प्रकार की तकनीक इजाद कर ली है, तभी वे प्रकृतिजन्य खतरों से बेखबर है !

बड़े बाँध बने या ना बने, इस गंभीर मुद्दे पर अपना समर्थन या विरोध दर्ज कराने से पहले हम अपने भविष्य के बारे में जरुर सोचे. यह कल्पना भी जरुर करें कि हम तीव्र भूकम जोन में ये परियोजनाएं बना/बनावा रहे है, एक तीव्रगति का भूकम्प उन सभी को मटियामेट कर सकता है जिन पर हम आज अपनी सांस्कतिक विरासत होने का गर्व कर अघाते नहीं थक रहे है.

आजकल एक बात, जिस पर ज्यादा चर्चा हो रही है, हम हर बात में अपने पड़ोसी देश चीन की बराबरी करने की बात कर रहें है, लेकिन जब बाँध बनाने की बात आती है तो हम चीन की नीति को भूल जा रहे है. चीन ने अपने पहाड़ी (3500 फीट से उपर के क्षेत्र में) क्षेत्रों में सन् 1975 के बाद कोई बड़ा बाँध नहीं बनाया है, जिस नीती को हमारा पड़ोसी देश खतरा भांप कर सन् 1975 में ही छोड़ चुका था, हम आज सन् 2012 में उसी नीती का अनुसरण करने और ना करने के विरोध में ही उलझे हुए है ? फिर ये मत भूलिये की चीन की दूरी इन बाँधो से कितनी है उसका एक बम इन बड़े बांधों के साथ कहाँ तक मार करेगा यह भी सोचना जरूरी है ?

उत्तराखंड के अपने सीमित प्राकृतिक संसाधन है, यहाँ की सदा नीरा नदियाँ उनमें से एक है, उत्तराखण्ड में बाँध आधारित परियोजनाएं बने पर यहाँ के निवासियों की सहभागिता से, समर्थन-विरोध का निर्णय लेने से पहले टिहरी डेम एवं छिर्किला डेम से मिले नफे नुकसान को भी ध्यान में जरुर रखें..........

आज उत्तराखण्ड के स्थानीय लोग पूर्व में बनी इन परियोजनाओं से कितने लाभान्वित हुए और भविष्य में बनने वाली परियोजनाओं से कितने लाभान्वित होंगे ? टिहरी डेम एवं छिर्किला डेम से कितने लोगो को रोजगार मिला ? राज्य के निवासियों को प्रत्यक्ष रूप से क्या लाभ हो रहा है ?

यह लिखने की जरुरत नहीं है, जरुरत है तो एक ईमानदार प्रयास की जिससे राज्य के साथ-साथ यहाँ के निवासियों का भी भला हो, राज्य आर्थिक,सामाजिक प्रगति की अग्रसर हो...

इस पोस्ट में व्यक्त विचार ब्लॉगर के अपने विचार है। यदि आपको इस पोस्ट में कही गई किसी भी बात पर आपत्ति हो तो कृपया यहाँ क्लिक करें|

Devbhoomi,Uttarakhand

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देवसारी बांध के विरोध में धरना, प्रदर्शन भी
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देवाल। ‘पिंडर को अविरल बहने दो, बांध कंपनी वापस जाओ’ के नारों के साथ ग्रामीणों ने बाजार में जुलूस निकाला। इस मौके पर प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार का पुतला भी फूंका।

मंगलवार को स्थानीय ग्रामीणों ने मुख्य बाजार में जुलूस निकालते हुए सतलुज जल विद्युत निगम और केंद्र सरकार के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने बस स्टैंड में केंद्र सरकार का पुतला फूंकते हुए जनसभा का आयोजन किया। इस मौके पर देवाल बचाओ संघर्ष समिति के संरक्षक मदन मिश्रा एवं दिनेश मिश्रा ने कहा कि ग्रामीणों के विरोध के बावजूद केंद्र और राज्य सरकार जबरन देवसारी बांध का निर्माण करने जा रही है।

कहा कि डैम के निर्माण से जहां सोडिंग गांव डूब जाएगा वहीं दो दर्जन से अधिक गांवों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ने की संभावना है। ैम से प्रभावित गांवों में पेयजल स्रोत सूख जाएंगे और पर्यावरण को भारी नुकसान भी होगा। विदित हो कि बीते 15 मई को रॉक टेस्टिंग के दौरान परियोजना स्थल पर एक मजदूर की मौत हो गई थी जबकि कंपनी द्वारा मृतक मजदूर के परिवार को मात्र एक लाख की आर्थिक सहायता ही दी गई।

इस मौके पर वक्ताओं का कहना था कि डैम के विरोध में धरना, प्रदर्शन का आयोजन तहसील एवं ब्लाकस्तर पर आगे भी जारी रहेगा। धरना-प्रदर्शन एवं पुतला फूंकने वालों में मदन मिश्रा, दिनेश चद्रं, महिपत कठैत, केडी मिश्रा, जीवन मिश्रा, सोबन सिंह खत्री, उमेश चंद्र, हरीश पांडे, राजेंद्र कठैत, पुष्कर सिंह, गीता देवी, मुन्नी देवी, तारा देवी, मोहन राम, बलवंत आगरी, दीपा, भजन आदि मौजूद थे।
•ग्रामीणों ने केंद्र और एसजेवीएन के खिलाफ की नारेबाजी


Amarujala

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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I Love My Tehri GardhwalLiked · 8 hours ago
टिहरी की बर्बादी की एक झलक
 
 Mohan Lal AswalLike ·  · =218174251526404&p[]=1797624]Share
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Chandra Shekhar Kargeti ये अपील है माननीय  मन्त्री प्रसाद नैथानी (केबीनेट मन्त्री उत्तराखण्ड सरकार) और माननीय  Satpal Maharaj (सांसद,पोड़ी लोकसभा सीट उत्तराखण्ड ) से इस राज्य के निवासियों की आपसे ये करबद्ध गुहार है कि एक दिन आप उनकी  मांगों के समर्थन में भी जंतर-मंतर पर अनशन करें........
 
 आप दोनों जिम्मेदार मंत्री और सांसद अनशन को राजी हों इसके लिये कितने लोगो का हुजूम होना चाहिये, उम्मीद करते है आप और दिनों की तरह फेसबुक...See More — with देवसिंह रावत and 97 others.Unlike ·  · Share · 9 hours ago ·
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    • Bhagwat Jantwal waise mujhe lagta hai satpal mahraj k pass dhan ki kami nahi hogi, shayad naithani k ansan k bahane apni rajnaitik taakat ka ahasas dikha rahe honge, qki nirdaliya jeet kar aaye mantri prasad naithani ne maharaj ko cm banane ki wakalat ki thi. chalo maharaj ka naithani ka sath dena laajami hai.about an hour ago via mobile · Like
    • Chandra Shekhar Kargeti Bhagwat Jantwal जी दोनों किसी भी वजह से या किसी भी बहाने से एकसाथ जंतर मन्त्र पर आयें हो लेकिन हम तो कह रहें है कि उपरोक्त चार मुद्दों पर भी तो अपनी सरकार के खिलाफ अनशन करें..........24 minutes ago · Like

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Chandra Shekhar Kargeti10 hours ago ·  ये अपील है माननीय  मन्त्री प्रसाद नैथानी (केबीनेट मन्त्री उत्तराखण्ड सरकार) और माननीय  Satpal Maharaj (सांसद,पोड़ी लोकसभा सीट उत्तराखण्ड ) से इस राज्य के निवासियों की आपसे ये करबद्ध गुहार है कि एक दिन आप उनकी  मांगों के समर्थन में भी जंतर-मंतर पर अनशन करें........
 
 आप दोनों जिम्मेदार मंत्री और सांसद अनशन को राजी हों इसके लिये कितने लोगो का हुजूम होना चाहिये, उम्मीद करते है आप और दिनों की तरह फेसबुक पर मौनी बाबा बन के नहीं रहेंगे, आपके उत्तर की प्रतीक्षा रहेगी, उत्तर ना मिलने पर इस राज्य की जनता स्वयं निर्णय लेने में सक्षम है किस तरह से हालत अपने पक्ष में करने हैं,और अपनी बात कैसे मनवानी है.......
 
 आपका अनशन निम्न बिन्दुओ पर आधारित होगा........
 
 १.राज्य में कृषि भूमि को बाहरी लोगो (राज्य बनने से पूर्व जो स्वयं या उनके पूर्वज राज्य क्षेत्र के निवासी नहीं थे) एवं स्थानीय लोगो द्वारा की जा रही खरीद-फरोक्त पर तुरंत रोक लगाने हेतु अन्य ९ हिमालयी राज्यों की तर्ज पर कड़ा भू-राजस्व क़ानून पास करवाने को l (ताकि राज्य में दिनोंदिन कम होती कृषि भूमि को बचाया जा सके)
 
 २.राज्य के पर्वतीय क्षेत्र में कृषि भूमि की आवश्यकीय चकबंदी किये जाने हेतु क़ानून पास करवाने को l (ताकि पर्वतीय क्षेत्र में दूर-दराज में फ़ैली कृषि भूमि को एक जगह लाकर उससे सुगम एवं रोजगारपरक कृषि की जा सके, और पहाड़ से पलायन को रोका जा सके)
 
 ३.राज्य की शिक्षा, कृषि, रोजगार तथा चिकित्सा नीति घोषित करवाने को l
   ( ताकि राज्य का युवा अपने ही घर में रहकर अपना जीवन यापन कर सके,   
    प्रसव पीड़ा से बिलखती हमारी माँ-बहनों को समुचित चिकत्सा सहायता
    मिल सके, उसके आभाव में वे अकाल मौत ना मरें) 
 
 ४. राज्य निर्माण की जनभावना के अनुरूप "गैरसैण" को राज्य की स्थायी राजधानी घोषित किये जाने हेतु तुरंत अधिनियम/अध्यादेश पारित किया जाना l"
 
 महोदय उपरोक्त राज्य की अस्मिता और विकास से जुड़े उपरोक्त चार कार्यों को शीघ्रातिशीघ्र संपन्न करवाने को आप दोनों माननीयों का जंतर-मंतर पर अनशन करना अति आवश्यक है, क्योंकि पुरे राज्य में केवल आप दो ही सम्माननीय जनप्रतिनिधी हैं, जिन्हें उत्तराखण्ड राज्य के निवासियों की दिल से चिंता है.....आपके सहयोग की अपेक्षा में..........राज्य का एक अदना से नागरिक — with देवसिंह रावत and 97 others.11Unlike ·  · Unfollow Post · Share · Remove from Profile
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    • Sudarshan Rawat उत्तराखंड के हुक्मरानों शर्म करो 13 साल से अपनी राजधानी तो बना नहीं पाए तुम, और न ही मुजफ्फरनगर काण्ड के अभियुक्तों को सजा दिला पाए और न सजा दिलाने के लिए धरने पर बैठे.....चले बांधो पे राजनीति करने....अभी तक राजधानी के नाम के आगे तुम अस्थाई राजधानी लिखते हो.............:P9 hours ago · Like · 5
    • Bhagwat Jantwal satpal mahraj or naithani dono noutanki kar rahe hai janta ko gumrah kar rahe hai..9 hours ago via mobile · Like · 6
    • Sudarshan Rawat पहाड़ के हितों की रक्षा के लिए तो कभी कोई नेता देल्ली अनशन पे तो क्या अपने आला कमान से मिलने नहीं आया...!!
       उत्तराखंड के हुक्मरानों शर्म करो 13 साल से अपनी राजधानी तो बना नहीं पाए तुम, और न ही मुजफ्फरनगर काण्ड के अभियुक्तों को सजा दिला पाए औ...See More9 hours ago · Like · 3
    • Raghuveer Negi hahahaha khub kaha kargeti jee ...... GVK Dalalon ke sath .............9 hours ago · Like · 2
    • Sudarshan Rawat यह उत्तराखंड के हितों के लिए अनशन नहीं है बल्कि पहाड़ो की दलाली के लिए अनशन है....पहाड़ों को बेचने के लिए अनशन है...!!9 hours ago · Like · 3
    • Raghuveer Negi Pahle to kuch Thik lag raha tha ki sach main ye andolan sahi hai aakhir rojgaar ke liye hai par ab sachai ki dar part udhad rahi hai. ab jaldi sach samne aane wala hai  kaun kiske liye ye prapnch rach raha hai ...... kya sachmuch pahad ke logon ke bhale ke liye anshan kiya ja raha hai ya phir GVK main moti dalali ke liye .........9 hours ago · Like · 2
    • Bharat RawatChandra Shekhar Kargeti Koi Bhi Minister Kabhi Bhi Sath Nahin Dega9 hours ago · Like · 1
    • Mahi Singh Mehta Maitri prasad is a Dhakaan and so is Mahraj.. Agar in maa ke laalo me himmat hai to Uttarakhand kee rajdhani gairsain bana kar dikhao... Yahan ansan kar baith kar ye mar bhi jaay to koi gam nahi...... Ye ansan janta ke hit me nahi hai.9 hours ago · Like · 4
    • Bhagwat Jantwal kitna paisa mila hai in longo ko GVK se.9 hours ago via mobile · Like · 2
    • देवसिंह रावत ye log abhi es mudhon par andolan nahi karenge, ye rajneta jab janta andolit hoti hai tab us mudde ko bhunane ke liye andolano main kudte hain , haan ye hai ki maharaj ne kayi achhe karyon or andolono ko shuru kiya , par parisiman, mujafar nagar kand ke abhiyukton, aadi par mook rahe jyada prakhar nahi huye jese aaj bandh ke samarthan main huye9 hours ago · Like · 2
    • Aranya Ranjan andher nagri chapat raja, taka ser bhaji taka ser khaja. ye to andher nagri ki hado ko par kar gaye hai. pahli bar ho raha hai ki sarkar dwara prayojit andolan apni party ki sarkar ke khilaf ho. is bada gadbad jhala kya ho sakta hai. janta to yanha road block aur bhu skhalan me fansi hai9 hours ago · Like · 1
    • Prithvi Singh Satpaal ji Maharaaj aur ansan ye kuchh samajh me nahi aaya ...Dusare Prasad Nathani ji ..inko mai janata hi nahi hoon ..Kya comments karu ...Phir inase appeel kyon ...Koi Aagaaj (Aawahaan) kyon nahi  karata...Ham Banduk dusare ke kandhe par kyon rakh rahe hai9 hours ago · Like · 1
    • Uttam Panwar kya kar sakte hai bhai es des ka sestam he eysa hai9 hours ago · Like
    • Rakesh Madhwal kya aisi aasha thik hai..?? jantr-manttr jaana ? wo bhi in muddo ke saath ? ye toh highcomman ki toheen hogi.! ek neta waha kya pahucha ki,,baki line me khade hai...dhakka marne ko ! chatukari se kuch mila bhi hai....use bhi gawa den? ye kya bat huyi ? mudde jara apne style me uchhalenge,,taaki kuch karna bhee naa pde...or mahaan bhi bne rhe....yaha hateli par jwar ugane ka aagrah kyu kar rhe hain..inse sir.8 hours ago via mobile · Like
    • Chandra Shekhar KargetiPrithvi Singh जी बन्दुक हमारी ही है और कंधा भी हमारा ....जिस दिन निशाना लगा दिया उस दिन से इनकी उल्टी गिनती शुरू हो जायेगी, इसलिये अभी चेता रहें है कि जन सरोकारों की बात करों निती बनाओं, नहीं तो जबरदस्ती जंतर मंतर पर बन्दर की भाँती बैठाए जाओगे........और कौवा सिर पर बींट कर रहा होगा...........8 hours ago · Like · 1
    • Raghuveer Negi Rajdhani gairsain ho ya kahin bhi lekin baat tab hai jab ye log uttrakhand ke palayan ko roke aur yahan himachal jaisi khushhaali laa ke dikha de .........Dam se Bhala kam aur bura jyada hai8 hours ago · Like · 2
    • Raghuveer Negi bus sachhai kuch dino main bahar aane wali hai ...... bus intzaar hai to tab aap logon ki pratikriya ka8 hours ago · Like · 1
    • Raghuveer Negi esi socail site par sibbal, diggi, manmohan soniya pr di gayi pratikriyaon ke liye himmat ...........8 hours ago · Like · 1
    • घुघूती बासुती कोई तो होगा कद्वार पहाड़ी नेता जिसमे जरा सा शर्म और स्वाभिमान हो जनता ने इनको चुना आज जनता के सामने ये नाकारा सिद्ध हो चुके है पहाड़ों की बदहाली हो चुकी है फिर भी पहाड़ी नेता अपना स्वभिनाम समझ रहा है ..पहाड़ों में पुराने घर बाघ का डेरा बने है ...बोई हो या कड़ी फसल वन्य जन्तुओ का राज है ....करोड़ों की वन संपदा राख हो गयी एक भी नेता ये नहीं कहता की आखिर क्यों संसाधनों  को ऐसे लुटाया जा रहा है8 hours ago · Like · 3
    • घुघूती बासुती ‎..धिक्कार हो धिक्कार ....शर्म है तो सामने आओ8 hours ago · Like · 2
    • Rakesh Madhwal MP Dekh liye sir,wo bhi pure 4 !!!, harish rawat ji ki hekdi toh dekhi hogi? suru me achha laga ki TAMTA ji or rawat ji...ko shayad sarokar hai ! aaj ka seen kya hai ! ab maharaj toh maharaj hain...gustakhi na ho jaye inki shan me ! reilpurush kahne lage hai bhakt-jan,,...ek bayan kafi hai inka apne krmo ko chhupane ko...or janta usime khush...! aakhir we humari neend se khus huye jate hain..5 sal bad fir uthayenge...8 hours ago via mobile · Like · 1
    • घुघूती बासुती स्कुल पहाड़ों के भैसिया  छाना बन चुके है ....बच्चे सिर्फ भात  खाने जा रहे है बिना मासाब के ...पहाड़ के अस्पतालों से अछे है शहरों के गोर्बछिया अस्पताल8 hours ago · Like · 2
    • Raghuveer Negi Ghughuti basuti jee aapko pata nahin ki apl aur bpl chawal ke kote main commission hota hai .....agar fasal bachayenge to kaun khayega en chawalon ko ........... aur phir inka commission kahan se aayega ..........8 hours ago · Like · 2
    • Digvijay Rawat chupra chhoro halla na kara mantri dida senu chha.... uttarakhand ku vikas ghotalo ma hunu chha...8 hours ago via mobile · Like · 1
    • Chandra Shekhar Kargeti मन्त्री और संतरी दीदा की नींद अब उडनी छा भैजी तुम भी देखदी रया रे..........8 hours ago · Like
    • Prithvi Singh Kargeti ji Jan sarokar ki hi Baaten honi chahiye..aur Jan Jagran ki hi baaten honi chahiye.... Yah to thik hai ..Jabardasti koi nahi bitha sakata hai ...Jo jagega vo aapani atma se jagega8 hours ago · Like · 1
    • Chandra Shekhar Kargeti पृथ्वी जी इस बार जबरदस्ती करनी पड़ी तो वो भी होगी.......जनता के वोटो पर पलने वाले ये नेता जब जनता की ना सुने तो फिर जोर जबरदस्ती के अलावा और कोई रास्ता भी नहीं बचता..........ये लोग भी तो चुनाव के बाद जनता के साथ यही करते है.....जब कोई मिलने ...See More8 hours ago · Like · 4
    • Bhagwat Jantwal waise mujhe lagta hai satpal mahraj k pass dhan ki kami nahi hogi, shayad naithani k ansan k bahane apni rajnaitik taakat ka ahasas dikha rahe honge, qki nirdaliya jeet kar aaye mantri prasad naithani ne maharaj ko cm banane ki wakalat ki thi. chalo maharaj ka naithani ka sath dena laajami hai.about an hour ago via mobile · Like
    • Chandra Shekhar Kargeti Bhagwat Jantwal जी दोनों किसी भी वजह से या किसी भी बहाने से एकसाथ जंतर मन्त्र पर आयें हो लेकिन हम तो कह रहें है कि उपरोक्त चार मुद्दों पर भी तो अपनी सरकार के खिलाफ अनशन करें..........29 minutes ago · Like

Devbhoomi,Uttarakhand

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कोटेश्वर झील से कई गांव खतरे में
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• अमर उजाला ब्यूरो

नई टिहरी। कोटेश्वर बांध की झील से कई गांवों पर भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। दो साल पहले झील का जलस्तर आरएल 615 तक होेने पर आरएल 660 तक बसे लोगों के भवनों में दरारें पड़ र्गइं थी।

कोटेश्वर बांध का जलस्तर बढ़ाने पर झील के ठीक ऊपर बसे डोभालगांव, पयालगांव और जौरासी- खांड के कई आवासीय भवनों में बड़ी दरारें देखी गई थी। इन गांवों के साथ-साथ बंडरिया, सिरोली, धर्मघाट, सौंठियालगांव, आली मल्ली और आली तल्ली के गांव भी खासे प्रभावित हुए थे।

 इसे देखते हुए ग्रामीणों ने भूगर्भीय सर्वेक्षण कराने की मांग की थी लेकिन न तो सर्वे हो पाया और ना ही टीएचडीसी, पुनर्वास विभाग ने कोई सकारात्मक निर्णय लिया है।

 इसके चलते ग्रामीण इन जर्जर घरों में रहने को मजबूर हैं। प्रभारी पुनर्वास अधिकारी आरके तिवारी का कहना है कि कोटेश्वर बांध की झील के आरएल 615 से ऊपर आरएल 660 मीटर तक के कई गांवों में दरारें देखी गई हैं। जीएसआई को कई बार क्षेत्र के भूगर्भीय सर्वे के लिए पत्र लिखा गया लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

 जून में भेेजे पत्र के जवाब में उन्होंने इस माह के अंत तक आने की सहमति दी है। क्षेत्र का सर्वे कर रिपोर्ट शासन-प्रशासन को भेजी जाएगी।
•दो साल पहले जलस्तर बढ़ने पर कई घरों में पड़ी थी दरारें

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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 “उत्तराखंड में जलविद्युत परियोजनाएं और जनपक्षीय विकास”
 विषयक गोष्ठी  का आयोजन
 दिनांक 27-28 जुलाई-2012, स्थान-नगर पालिका सभागार,जोशीमठ
 
 प्रथम दिन......
 
 उत्तराखंड आंदोलन में आंदोलनकारियों का सपना था कि राज्य बनने के बाद यहाँ के जल,जंगल,जमीन जैसी अकूत प्राकृतिक सम्पदा का स्थानीय लोगों की बेहतरी के लिए उपयोग होगा. लेकिन आज इसके उलट सिडकुल, विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) और जलविद्युत परियोजनाओं के जरिये बड़े पूंजीपति इन संसाधनों की लूट मचाये हुए हैं और यहाँ का आम आदमी इनसे बेदखल किया जा रहा है, नगरपालिका सभागार, जोशीमठ में अखिल भारतीय किसान महासभा द्वारा आयोजित “उत्तराखंड में जलविद्युत परियोजनाएं और जनपक्षीय विकास-विषयक” दो दिवसीय गोष्ठी को संबोधित करते हुए वक्ताओं द्वारा कही गयी. गोष्ठी में कहा कि चूँकि बिजली बनाने का धंधा बेहद मुनाफे का धंधा है, इसलिए आज इस बात की होड है कि इन परियोजनाओं को कैसे हथियाया जाए. कारपोरेट घराने इस लूट को सुगम बनाने के लिए सत्ता की मलाई उड़ाने वालों से लेकर सत्ता की जूठन पाने वालों की बड़ी फ़ौज खड़ी कर रहे हैं. इस अवसर पर कामरेड श्री पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि संसाधनों की लूट के खिलाफ लड़ाई राज्य निर्माण की लड़ाई से कठिन लड़ाई है. जिस तरह परियोजना विरोधियों का मुंह काला करने वालों का सम्मान करने का पतित कृत्य किया गया, उससे ये खतरे पैदा हो गया है कि कल को प्रतिरोध करने वालों की ह्त्या भी हो सकती है. उन्होंने कहा कि सत्ताधारी और परियोजना समर्थक विकास की बहुत बात कर रहे हैं, लेकिन इस विकास में जनता कहीं नहीं है. ये लड़ाई परियोजना विरोध या समर्थन की नहीं बल्कि विकास में जनता का पक्ष और हिस्सेदारी की है.
 
 वरिष्ठ पत्रकार हरीश चंदोला ने कहा कि जलविद्युत परियोजना निर्माण की पहली शर्त जन सुनवाई के जरिये परियोजनाओं का जनता समर्थन करे. किसी परियोजना की जनसुनवाई में जनता ने समर्थन नहीं किया लेकिन फिर भी सब परियोजनाओं को केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत किया जा रहा है,और वर्तमान राज्य सरकार उनकी पैरवी कर रही है. उन्होंने कहा कि सफल परियोजना का एक भी मॉडल नहीं है लेकिन विनाश के चांई गाँव जैसे कई मॉडल हैं. चांई गाँव का फल, दूध, दही, पशुधन सब परियोजना से तबाह हो गया. श्री चंदोला ने कहा कि ये परियोजनाएं जनता के जमीन, आजीविका और अधिकार पर आक्रमण हैं.
 
 उत्तराखंड महिला मंच की संयोजक कमला पन्त ने कहा राज्य आंदोलन में लोगों की कोई व्यक्तिगत हित की आकांक्षा नहीं थी, बल्कि समग्र विकास का सपना था, ये उम्मीद थी कि यहाँ के जल, जंगल, जमीन जैसे संसाधनों का उपयोग यहाँ की जनता के हित में किया जाएगा. गैरसैण राजधानी की मांग के पीछे भी यही आकांक्षा थी. लेकिन राज्य बनने बाद पहाड के लोगों की घोर उपेक्षा हुई. पहाड में ना सड़क है, ना अस्पतालों में डाक्टर हैं और ना ही स्कूलों में शिक्षक हैं. उन्होंने कहा कि जलविद्युत परियोजनाएं बनाने में ना तो गंभीर वैज्ञानिक आकलन किया जा रहा है, ना विश्वसनीय भूगर्भीय आकलन किया गया है.
 
 परियोजनाओं के विस्फोट से पहाड़ कमजोर हो रहे हैं, मकान, चारागाह तबाह हो रहे हैं, लेकिन उन पर कहीं भी चर्चा ही नहीं हो रही है. कमला पन्त ने कहा कि जो भी परियोजनाएं बनें उनपर,पूंजीपतियों का नहीं, स्थानीय जनता का मालिकाना हक होना चाहिए. बड़ी परियोजनाएं तो कहीं भी नहीं बननी चाहिए क्यूंकि बड़ी परियोजनाओं के साथ ही बड़ी पूँजी आएगी जो प्रतिरोध की हर आवाज को पैसे के दम पर कुचल देती है. उन्होंने कहा कि ये सिर्फ पानी का मामला नहीं है,ये हमारे अस्तित्व औरअस्मिता का सवाल है. संसाधनों पर जनता के हक की लड़ाई के लिए हमें एकजुट होकर आगे आना होगा.
 
 चेतना आंदोलन के त्रेपन सिंह चौहान ने कहा कि सरकारी दस्तावेज स्वयं बता रहें हैं कि नदियों में पानी कम हो रहा लेकिन कम होते पानी को ही सरकार अधिक परियोजनाएं बनाने के तर्क के तौर पर इस्तेमाल कर रही है, जो बेहद खतरनाक है. आंकड़ों के आधार पर उन्होंने बताया कि इन जलविद्युत परियोजनाओं से प्रतिदिन करोड़ों रुपये का मुनाफा पूंजीपतियों की जेब में जाता है. इसलिए परियोजनाओं के पक्ष में आक्रामकता इस मुनाफे को बचाने के लिए है. त्रेपन चौहान ने कहा कि बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं का विकल्प है कि स्थानीय जनता की भागीदारी से एक मेगावाट से कम की परियोजनाए बनायीं जाएँ. उन्होंने कहा कि जिस तरह परियोजना समर्थकों द्वारा भरत झुनझुनवाला पर हमला किया गया वो शर्मनाक और निंदनीय है.
 
 गोष्ठी की शुरुआत धन सिंह राणा द्वारा जनगीत पेश करके किया गया. गोष्ठी का संचालन कामरेड अतुल सती द्वारा किया गया तथा चर्चा हेतु आधार पत्र अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष इन्द्रेश मैखुरी द्वारा प्रस्तुत किया गया. आधार पत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि वर्तमान में उत्तराखंड में चल रही जलविद्युत परियोजना के समर्थन और विरोध की बहस, दरअसल विकास के मॉडल की बहस है और उत्तराखंड की जनता को विकास के जनपक्षीय मॉडल की जरुरत है.
 
 गोष्ठी में जोशीमठ व्यापार मंडल के संरक्षक माधव प्रसाद सेमवाल,भगवती प्रसाद नंबूरी, भोपाल सिंह पंवार, कुलदीप भंडारी, तुलसी देवी, आइसा नेता आशीष कांडपाल, दिलवर सिंह, महिदीप पंवार, विजय बमोला, गणेश डिमरी तथा परियोजना प्रभावित ग्रामीणों ने अपनी बात रखी.
 
 उत्तराखंड में जलविद्युत परियोजनाओं के अंध समर्थन और आस्था के नाम पर अंध विरोध के बीच इन परियोजनाओं में अपना सब कुछ गंवाने वाले लोग ना तो सरकार के एजेंडे में हैं,ना परियोजना समर्थकों के और ना ही आस्था के नाम पर परियोजनाओं का विरोध करने वालों को इनकी चिंता है. जब इन परियोजनाओं को विकास की कुंजी बताया जा रहा है तो ये प्रश्न उठना लाजमी है कि किसके विकास की बात कही जा रही है. हम भी इस राज्य के गरीब, मेहनतकश लोगों का विकास चाहते हैं, पर उन्हें तो उनकी जमीन, पानी, जंगल से बेदखल किया जा रहा है. ऐसा विकास कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता जो कुछ लोगों की तिजोरियां भरे और कुछ लोगों को अपनी ही जमीन पर शरणार्थी बना दे, ये बात अखिल भारतीय किसान महासभा द्वारा नगरपालिका सभागार में,अखिल भारतीय किसान महासभा द्वारा आयोजित -उत्तराखंड में जलविद्युत परियोजनाएं और जनपक्षीय विकास का सवाल-विषयक दो दिवसीय गोष्ठी को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष कामरेड पुरुषोत्तम शर्मा ने कही.
 
 द्वितीय दिन...............
 
 गोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रख्यात आंदोलनकारी नेता और उत्तराखंड लोक वाहिनी के अध्यक्ष डा.शमशेर सिंह बिष्ट ने कहा कि उत्तराखंड में बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं अतिसंवेदनशील हिमालयी क्षेत्र के लिए विनाशकारी सिद्ध होंगी.ये परियोजनाएं हमारे समग्र को नष्ट-भ्रष्ट कर देंगी.बड़ी परियोजनाओं को विकास का आधार बताने वाला उत्तराखंड का शासक वर्ग पूंजीपतियों के मुनाफे और अपनी सत्ता बनाये रखने के लिए उत्तराखंड के समाज को विघटित कर रहा है.उन्होंने कहा कि पिछले बारह सालों में बारह लाख से अधिक लोग पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन कर गए हैं.जब सरकारी नीतियों के चलते पहाड़ में लोग ही नहीं रह रहे हैं,तो इन जलविद्युत परियोजनाओं के जरिये सरकार किसके विकास का दावा कर रही है.
 वरिष्ठ पत्रकार हरीश चंदोला ने कहा कि जनता की सहभागिता और सहमति से ही परियोजनाएं बनायी जानी चाहिए.
 उत्तराखंड लोक वाहिनी के पूरण चंद्र तिवारी ने कहा कि छोटी-छोटी परियोजनाएं बननी चाहिए जिनपर जनता का स्वामित्व हो.
 गोष्ठी के बाद प्रस्ताव पारित किये गए कि –
 
 1. इस गोष्ठी में एकत्र सभी लोग एक स्वर में श्रीनगर में परियोजना समर्थकों द्वारा डा.भरत झुनझुनवाला पर हमले की तीव्र भर्त्सना करते हैं.इस प्रकरण के दोषियों के खिलाफ कार्यवाही के प्रति उदासीनता के चलते प्रशासन और राज्य सरकार की भूमिका भी सवालों के घेरे में है.इस घटना के दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए.साथ ही मुंह पर कालिख पोतने वालों के सम्मान किये जाने की भी हम कड़ी निंदा करते हैं.ऐसा करना चरम पतनशीलता और मानसिक दिवालिएपन को ही प्रदर्शित करता है.
 2. दिल्ली के एक समाचार पत्र द्वारा विजय बहुगुणा के उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बनते समय एक कंपनी द्वारा पैसा लगाये जाने का समाचार प्रकाशित किया गया.बाद में स्थानीय पत्र-पत्रिकाओं द्वारा इंडिया बुल्स नामक कंपनी का नाम लेते हुए,उक्त कंपनी के जलविद्युत परियोजना क्षेत्र में उतरने और मुख्यमंत्री के पुत्र के उक्त कंपनी के निदेशक मंडल में होने के समाचार प्रकाशित किये गए. हम उक्त प्रकरण की सच्चाई का पता लगाने के लिए उच्च स्तरीय स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच करवाए जाने की मांग करते हैं.
 3. उत्तराखंड में जलविद्युत परियोजनाएं बनाने के जितने समझौते हैं,उन में स्थानीय जनता को ठगा गया है और परियोजना निर्माता उससे भारी मुनाफा कमाएंगे.इस गोष्ठी से हम ये मांग करते हैं कि उत्तराखंड में जलविद्युत परियोजना निर्माण के जितने एम.ओ.यू. पर सरकार द्वारा दस्तखत किये गए हैं,उन सब की समीक्षा की जाए तथा इस समीक्षा तक नयी परियोजनाओं को स्वीकृति ना दी जाए.
 4. परियोजना निर्माण जनता की सहभागिता से ही किया जाए,निजी कंपनियों को परियोजना निर्माण का ठेका ना दिया जाए.
 5. भूगर्भीय तथा पर्यावरणीय दृष्टि से नुकसानदायक परियोजनाएं किसी हालत में नहीं बननी चाहिए.
 6. परियोजना प्रारंभ करने से पहले किये जाने वाले पर्यावरणीय प्रभाव आकलन(E.I.A) करवाने की जिम्मेदारी परियोजना निर्माता को नहीं सौंपी जानी चाहिए.ये कार्य परियोजना की योजना बनाने से पहले सरकार द्वारा किसी स्वतंत्र एवं सक्षम एजेंसी से करवाया जाना चाहिए.
 7. पूरी हो चुकी परियोजनाओं में परियोजना प्रभावितों को शेयर होल्डर बनाया जाए तथा जिस क्षेत्र में परियोजना है वहाँ के लोगों को बिजली मुफ्त दी जाए.
 8. उत्तराखंड सरकार विस्थापन एवं पुनर्वास नीति (R&R Policy) घोषित करे,जिसमें विस्थापितों के पुश्तैनी हक-हकूक और पुश्तैनी रोजगार की सुरक्षा की गारंटी हो.
 9. ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत बिलों में फिक्स डिमांड चार्ज के रूप में लिए जा रहे साठ रूपया प्रति बिल की अधिभार वसूली को समाप्त किया जाए.
 10. तपोवन विष्णुगाड परियोजना में जनता के आंदोलन के बाद जिला प्रशासन,एन.टी.पी.सी. और जनता के बीच हुए समझौते का पालन सुनिश्चित किया जाए.
 
 गोष्ठी का समापन जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय पार्षद मदन मोहन चमोली के द्वारा जनगीत गा कर की गयी.गोष्ठी का सञ्चालन कामरेड अतुल सती ने किया . गोष्ठी को संबोधित करने वालों में व्यापार मंडल के संरक्षक माधव प्रसाद सेमवाल, पूर्व प्रधानचार्य हरीश चंद्र खंडूडी, राकेश भंडारी, बचन सिंह राणा, मेरग की सरपंच सावित्री देवी,दिवाकर भट्ट, मुकेश कुमार, सज्जन मावड़ी, आइसा के आशीष कांडपाल, दिलवर सिंह, विजय बमोला, महादीप सिंह पंवार आदि शामिल थे.
 
 (आभार : डॉ.शमशेर सिंह बिष्ट) — with Deep Pathak and 19 others.
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  • Vipin Pant, Devender Bisht and Dinesh Tiwari like this.
    • Devender Bisht Aisi gosthiya ab aam jarurat ban gayi hai aur inse hi Uttrakhand ki bholi janta ko sarakr aur prashasan ki mansa ka pata chalta hai...!about an hour ago · Like · 1
    • Chandra Shekhar Kargeti कल श्रीनगर में बाँध कम्पनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को लेकर हमारी माताओं और बहनों ने बवाल काटा और कोतवाल को भी कैमरे के सामने जवाब देना पड़ा......धीरे-धीरे सोया पहाड़ भी जाग रहा है....इसकी शुरू श्रीनगर से हो चुकी है......वीडियो शीघ्र ही अपलोड करूँगा......about an hour ago · Like · 3
    • Shanker Kargeti आप प्रदेश के समग्र विकास के लिए बहुत मेहनत कर रहे हैं....!! साधुवाद ...!!44 minutes ago · Like
    • Dinesh Tiwari lekin aap jaisi sarthak soch wale log hi to sarkar ki nazar ko khatkte hain.dalali karne walon se khus rahti hai6 minutes ago · Like

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Vishnugad-Pipalkoti power project in Uttarakhand in trouble, World Bank to send team for investigation


Read more at: http://indiatoday.intoday.in/story/vishnugad-pipalkoti-hydro-electric-project-chamoli-world-bank/1/241670.html

The 444 MW Vishnugad Pipalkoti Hydro Electric Project, located in Chamoli, could be in trouble. Acting on the complaints made by local people against policy violation, the main funding agency World Bank will be sending its inspection panel to probe the allegations in coming March.

The Vishnugad Pipalkoti Hydro Electric Project, located near village Haatgoan in Chamoli, is being built on Alaknanda river, a main tributary of Ganga. The Tehri Hydro Development Corporation is developing this run of the river project with a budget of Rs.2491.58 crores. After receiving a series of complains the World Bank's Board of Executive Directors approved investigate matters of policy non-compliance and related harm last month.

The project is facing ire of the local people because houses and land located in the area have developed cracks due to blasting for the development work.

The local villagers allege that the power project will degrade the water quality of Alaknanda river and also result in loss of aquatic life. "We are happy that the complaint has been accepted for a full investigation by the Inspection Panel" said Briharshraj Tadiyal, one the complainants. Another complainant Bharat Jhunjhunwala said "We hope for a fair and independent investigation and no work or funds disbursements should happen till all issues are settled to the satisfaction of all concerned".

Giving its consent, World Banks writes on its website, "The Board of Executive Directors approved the Inspection Panel's Report and Recommendation to investigate matters of policy non-compliance and related harm raised in the Request for Inspection. The Panel's Recommendation was approved on Tuesday, December 18, 2012, effective as of March 15, 2013. The relevant documents will be disclosed after March 15, 2013, and the Panel will commence its investigation after this date."

The Inspection Panel was set up in 1993, following the Independent Review Committee which looked into the violations by Sardar Sarovar (Narmada) Dam resulting World Bank's withdrawal from the project.

The loss of aquatic species and also degradation of the natural habitat of endangered species such as the "Cheer" pheasant, otter, and Mahaseer fish is yet another major issue raised in the complaint.  There are serious concerns about the loss of livelihood due to this project. People's access to river, sand and fish will be severely impacted due to this project.  As many houses have developed cracks many villagers  fear that these houses will collapse if there were to be an earthquake as the area is in a high risk seismic zone.

Puran Singh Rana, a member of Matu organization, opposing the project, says, "Water shortages will occur in the stretch of the river where water will be diverted into the underground tunnel. The quality of the water in the Alaknanda River will be degraded when it is diverted into the underground tunnel and its free flow is blocked."

In addition to this, the complaint also says that due to the diversion of the river there is no river water available for religious and cultural rituals like bathing festival, funeral rites, river worship, etc.


: http://indiatoday.intoday.in

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Saroj Upreti पहाड़ियों को चैन से रहने दो
 चैन से जीने नहीं देते
 ये क्या तुम गज़ब ढा रहे
 नदियों छोटा कर तुमने
 बांधों  का निर्माण कर दिया
 खोद खोद हरी भूमि को
 बंजर क्यों बना रहे
 
 वर्षों से विकसित पहाड़ है 
 भिन्न भिन्न जड़ी बूटियां यहाँ
 तुम्हारी इन करतूतों से
 सब कुछ यहाँ उजाड़ जाएगा
 बसा बसाया पहाड़
 कुछ दिनों में नष्ट हो जाएगा
 
 पहले जंगल काटे तुमने
 अब नदियों को नहीं छोड़ते
 अन्दर अन्दर विलुप्त हो रही नदियाँ
 क्यों प्रकृति संग खिलवाड़ कर रहे
 
 यह एक प्राचीन संस्कृति
 भारत की विरासत है
 उस विरासत के सीने पर
 हथोडों का प्रहार कर रहे
 दुर्लभ जिव जंतु यहाँ के
 धीरे धीरे नष्ट हो रहे 
 देव भूमि की सुन्दरता को
 क्यों यूँ ही  तुम नष्ट कर रहे
 सरोज उप्रेतीपहाड़ियों को चैन से रहने दो चैन से जीने नहीं देते ये क्या तुम गज़ब ढा रहे नदियों छोटा कर तुमने बांधों  का निर्माण कर दिया खोद खोद हरी भूमि को बंजर क्यों बना रहे वर्षों से विकसित पहाड़ है भिन्न भिन्न जड़ी बूटियां यहाँ तुम्हारी इन करतूतों से सब कुछ यहाँ उजाड़ जाएगा बसा बसाया पहाड़ कुछ दिनों में नष्ट हो जाएगा पहले जंगल काटे तुमने अब नदियों को नहीं छोड़ते अन्दर अन्दर विलुप्त हो रही नदियाँ क्यों प्रकृति संग खिलवाड़ कर रहे यह एक प्राचीन संस्कृति भारत की विरासत है उस विरासत के सीने पर हथोडों का प्रहार कर रहे दुर्लभ जिव जंतु यहाँ के धीरे धीरे नष्ट हो रहे देव भूमि की सुन्दरता को क्यों यूँ ही  तुम नष्ट कर रहे सरोज उप्रेती height=298

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Good decision of Supreme Court - शीर्ष न्यायालय उत्तराखंड में पनबिजली परियोजनाओं पर रोक

उत्तराखंड में हाल ही में आई बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए शीर्ष न्यायालय ने मंगलवार को राज्य में कोई भी नई पनबिजली परियोजना शुरू करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने मौजूदा और निर्माणाधीन व प्रस्तावित परियोजनाओं से होने वाले पर्यावरण नुकसान का अध्ययन करने के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया है। ये परियोजनाएं अलकनंदा और भागीरथी नदियों पर हैं।
 
 कोर्ट ने कहा कि यह सही है कि इन परियाजनाओं से भागीरथी का 81 फीसदी तथा अलकनंदा का 65 फीसदी क्षेत्र प्रभावित होगा जो इन नदियों के पुनर्जीवन के लिए बहुत कम क्षेत्र छोड़ेगा। इसलिए इन परियोजनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है। इनमें धारी देवी मंदिर को प्रभावित करने वाली परियोजना भी शमिल है।
 
 शीर्ष अदालत ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार को निर्देश दिया कि अगले आदेश तक किसी भी पनबिजली परियोजना को पर्यावरण या वन संबंधी मंजूरी नहीं दी जाए। जस्टिस केएस राधाकृष्णन और दीपक मिश्र की पीठ ने मंगलवार को दिए फैसले में कहा कि हम हाल ही में हुई त्रसदी से बेहद चिंतित हैं जिसने उत्तराखंड के चार धाम इलाके को प्रभावित किया है।

 

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