Poll

Do you feel that the Capital of Uttarakhand should be shifted Gairsain ?

Yes
97 (70.8%)
No
26 (19%)
Yes But at later stage
9 (6.6%)
Can't say
5 (3.6%)

Total Members Voted: 136

Voting closes: March 21, 2024, 12:04:57 PM

Author Topic: Should Gairsain Be Capital? - क्या उत्तराखंड की राजधानी गैरसैण होनी चाहिए?  (Read 162773 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Joshi Ji,

Several sites have carried out some surveys and people of Uttarakhant want that the existing capital to be shifted to Gairsain.

But govt has to take move now.


Actually we are came out of track I feel, we were started with that should capital be in Gairsain?  I am very clear about it that yes. if you ask why because
1. The Uttarakhand movement started with the issue of Gairsain as capital.
2. Our Uttarakhandi friends gave their supreame sacrifice on the name of Gairsain.
3. Gairsain is most suitable place for capital in the hill region of this state.
4. Gairsain is the central place accessable to all region of the state.
But it will take atleast 5 years to develop neccessary infrastructure for capital in Gairsain.  If it would be decided that capita should be Gairsain I think no Dixit Commission was required.
Dixit Commission can never decide that where should be the capital and why he is mere govt. administrator.  He is not mature enough and suitable to decide where should be the capital of a state.  This should be decided by the mandate of the public.  If issue of deciding the capital of state is given to an administrator or decided on the basis of tecnicallties, it never be decided.  If you measure capitals on the basis of technicalties, I feel most of the capitals of states and even countries are not suitable for capital.
Govt is for the public, but since it run by the polytical parties and the polytician try to get their share out of each issue the simplest way is devide and rule.
The polyticians not hesitate to devide the mandate on basis of cast, community or regions.  same happpend with the issue of capital of Uttarakhand.
But we should get united and say Capital should be at Gairsain the only issue remains is how long it will take to develop neccessary infrastructure at that place, I say 5 years.
I also know that what will be going to be happen on govt part.  That at last government will reject all the places for capital on the bases of fake technicalties and Dehradun will remain the capital of Uttarakhand.
If Gairsain becomes the capital of Uttarakhand, it wll be the greatest achievement of the public and a real homage to our Uttarakhandi martyors starting from hero of Peshawar Kand Veer Cahandra Singh Garhwali ji.

पंकज सिंह महर

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२४ सितम्बर, २००० को गिर्दा ने गैरसैंण रैली में यह छ्न्द कहे थे, जो सच भी हुये

कस होलो उत्तराखण्द, कां होली राजधानी,
राग-बागी यों आजि करला आपुणि मनमानी,
यो बतौक खुली-खुलास गैरसैंण करुंलो।
हम लड़्ते रयां भुली, हम लड़्ते रुंल॥

टेम्पुरेरी-परमानैन्टैकी बात यों करला,
दून-नैनीताल कौला, आपुंण सुख देखला,
गैरसैंण का कौल-करार पैली कर ल्हूयला।
हम लड़्ते रयां भुली, हम लड़्ते रुंल॥

वां बै चुई घुमाल यनरी माफिया-सरताज,
दून बै-नैनताल बै चलौल उनरै राज,
फिरि पैली है बांकि उनरा फन्द में फंस जूंला।
हम लड़्ते रयां भुली, हम लड़्ते रुंल॥

’गैरसैणाक’ नाम पर फूं-फूं करनेर,
हमरै कानि में चडि हमने घुत्ति देखूनेर,
हमलै यनरि गद्दि-गुद्दि रघोड़ि यैं धरुला।
हम लड़्ते रयां भुली, हम लड़्ते रुंल॥

दिनेश मन्द्रवाल

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gairsain hi rajdhani honi cahiye, kyonki uttarakhand ke logo ne usi jagah ke liye ladai ladi thi, dosri jagah jana to uttarakhand ke shaheedo kaa apman hoga. meri samaj me yah nahi aata ki is mudde ko kyo uljhaya ja raha hai, rajdhani ka to vivad hi nahi hona cahiye, uttarakahand ke kisi bhi aadmi ne aaj tak nahi kaha ki rajdhani yaha honi cahiye ya waha honi cahiye, sabka ek hi mat hai ki rajdhani gairsain honi cahiye.
 
"NA BHABAR NA SAIN, RAJDHANI SIRF GAIRSAIN"

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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Bilkul sahi kaha aapne Sir yeh sab Politicians ki saazish hai apne araam ke liye. Agar Rajdhani Gairsain banane main bahut kharcha hoga jaisa ki iske virodhi kahte hain to fir Uttarakhand hi kyun banwaya usmain bhi to bahut kharcha hua hoga?

gairsain hi rajdhani honi cahiye, kyonki uttarakhand ke logo ne usi jagah ke liye ladai ladi thi, dosri jagah jana to uttarakhand ke shaheedo kaa apman hoga. meri samaj me yah nahi aata ki is mudde ko kyo uljhaya ja raha hai, rajdhani ka to vivad hi nahi hona cahiye, uttarakahand ke kisi bhi aadmi ne aaj tak nahi kaha ki rajdhani yaha honi cahiye ya waha honi cahiye, sabka ek hi mat hai ki rajdhani gairsain honi cahiye.
hamare pankaj bhai to kabhi-kabhi mahphilo me nare bhi lagawa dete hai
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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mandrawal ji,

Sahmat hai aap ke views se.  


gairsain hi rajdhani honi cahiye, kyonki uttarakhand ke logo ne usi jagah ke liye ladai ladi thi, dosri jagah jana to uttarakhand ke shaheedo kaa apman hoga. meri samaj me yah nahi aata ki is mudde ko kyo uljhaya ja raha hai, rajdhani ka to vivad hi nahi hona cahiye, uttarakahand ke kisi bhi aadmi ne aaj tak nahi kaha ki rajdhani yaha honi cahiye ya waha honi cahiye, sabka ek hi mat hai ki rajdhani gairsain honi cahiye.
hamare pankaj bhai to kabhi-kabhi mahphilo me nare bhi lagawa dete hai
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pushkar_429

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agar raajdhani gairsain hoi jaali ta sabhi logo ka te koi dikkat ni hoi chehandi.....................

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Mainly people are demanding the existing capital to be shifted to Gairsain because they expect faster development of hill. Secondly, reason is that, somewhere peoples sentiments are connected with this issue. A lot of people of Uttarakhand sacrified their lives during its struggle. Gairsain was the proposed capital of UK during its struggle days. 

agar raajdhani gairsain hoi jaali ta sabhi logo ka te koi dikkat ni hoi chehandi.....................

पंकज सिंह महर

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देहरादून। उत्तराखंड की स्थाई राजधानी का पिटारा जल्द ही प्रदेश की जनता के सामने खुल जाएगा। तकनीकि रूप से इसकी कसरत तो अब लगभग पूरी हो गई है। पर इसे सरकार के समक्ष रखने के लिए आयोग दस्तावेजी सेप देने में जुटा है। उम्मीद की जा रही है कि जुलाई दूसरे या तीसरे सप्ताह तक पूरी रिपोर्ट सरकार के सामने होगी। राज्य की जनता से ली गई राय को माने तो गैरसैंण ही स्थाई राजधानी बननी चाहिए। पर भूगर्भीय, भौगोलिक व पर्यावरणीय पहलू से ली गई तकनीकि रिपोर्ट गैरसैंण के पक्ष में नहीं है।
उत्तराखंड के जन्म के साथ ही स्थाई राजधानी को लेकर इस नए राज्य के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया था। अस्थाई राजधानी के तौर पर देहरादून में सचिवालय, विधानसभा से लेकर सभी महत्वपूर्ण दफ्तर स्थापित कर दिए गए और करोड़ों रूपए की बिल्डिगें खड़ी हो गई। इसको लेकर आम आदमी को लगता है कि अब शायद ही यहां से राजधानी कहीं अन्यत्र शिफ्ट हो। राजनीतिक दलों की भी इस मामले में कोई साफ राय कभी नहीं रही। उक्रांद जरूर शुरू से ही गैरसैंण को लेकर आंदोलित है पर चुनावों में उसे जनता द्वारा ठुकराए जाने के बाद उसके तेवर भी कहीं न कहीं ठीले हुए हैं।
अब राजधानी चयन आयोग की रिपोर्ट जल्द ही सरकार के मेज पर पहुंचने वाली है। ऐसे में सरकार के लिए इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करना चुनौती भरा माना जा रहा है। स्थाई राजधानी को लेकर आयोग ने जनता से खुले तौर पर उनकी राय मांगी थी। सूत्रों ने बताया आयोग को कुल 251 लोगों ने अपनी राय भेजी थी। इसमें से सबसे अधिक लोग चाहते थे कि स्थाई राजधानी गैरसैंण ही होनी चाहिए। जबकि दूसरे स्थान पर लोगों ने आईडीपीएल ऋषिकेश को राजधानी के उपयुक्त बताया। तीसरे स्थान पर देहरादून और चौथे स्थान पर कालाढ़ूंगी-काशीपुर-रामनगर रहा। इसके विपरीत आयोग को स्कूल आफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर दिल्ली (एसपीए) से जो तकनीकि रिपोर्ट मिली है वह कम से कम गैरसैंण के अनुकूल नहीं बताई जाती। पर उसने देहरादून को भी इसमें प्राथमिकता नहीं दी है। इससे आयोग की रिपोर्ट काफी महत्वपूर्ण हो गई है।
दरअसल, स्कूल आफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर दिल्ली को राजधानी चयन आयोग ने गैरसैंण, देहरादून, आईडीपीएल और रामनगर-काशीपुर स्थलों के बारे में पूरी भूगर्भीय, भौगोलिक और पर्यावरणीय स्थिति, जल स्रोत, संचार सुविधाएं, रेल हैड से दूरी, हवाई सेवा के विस्तार की संभावनाओं के साथ ही हर पहलू पर अध्ययन कर रिपोर्ट मांगी थी। एसपीए ने इन स्थलों की सैटेलाइट इमेज का कार्य हैदराबाद स्थित रिमोट सैंसिंग को दिया था। सभी 26 सैटेलाइट इमेज के साथ ही भूगर्भीय, भौगोलिक, पर्यावरणीय और पास्थितिकीय स्थिति के बारे में रिपोर्ट आयोग के पास पहुंच गई है।

साभार- राष्ट्रीय सहारा

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Mahar ji,

You have brought a good news. Let us see what happens in future whether it is only on paper or some ground level works is done in this regard.

देहरादून। उत्तराखंड की स्थाई राजधानी का पिटारा जल्द ही प्रदेश की जनता के सामने खुल जाएगा। तकनीकि रूप से इसकी कसरत तो अब लगभग पूरी हो गई है। पर इसे सरकार के समक्ष रखने के लिए आयोग दस्तावेजी सेप देने में जुटा है। उम्मीद की जा रही है कि जुलाई दूसरे या तीसरे सप्ताह तक पूरी रिपोर्ट सरकार के सामने होगी। राज्य की जनता से ली गई राय को माने तो गैरसैंण ही स्थाई राजधानी बननी चाहिए। पर भूगर्भीय, भौगोलिक व पर्यावरणीय पहलू से ली गई तकनीकि रिपोर्ट गैरसैंण के पक्ष में नहीं है।
उत्तराखंड के जन्म के साथ ही स्थाई राजधानी को लेकर इस नए राज्य के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया था। अस्थाई राजधानी के तौर पर देहरादून में सचिवालय, विधानसभा से लेकर सभी महत्वपूर्ण दफ्तर स्थापित कर दिए गए और करोड़ों रूपए की बिल्डिगें खड़ी हो गई। इसको लेकर आम आदमी को लगता है कि अब शायद ही यहां से राजधानी कहीं अन्यत्र शिफ्ट हो। राजनीतिक दलों की भी इस मामले में कोई साफ राय कभी नहीं रही। उक्रांद जरूर शुरू से ही गैरसैंण को लेकर आंदोलित है पर चुनावों में उसे जनता द्वारा ठुकराए जाने के बाद उसके तेवर भी कहीं न कहीं ठीले हुए हैं।
अब राजधानी चयन आयोग की रिपोर्ट जल्द ही सरकार के मेज पर पहुंचने वाली है। ऐसे में सरकार के लिए इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करना चुनौती भरा माना जा रहा है। स्थाई राजधानी को लेकर आयोग ने जनता से खुले तौर पर उनकी राय मांगी थी। सूत्रों ने बताया आयोग को कुल 251 लोगों ने अपनी राय भेजी थी। इसमें से सबसे अधिक लोग चाहते थे कि स्थाई राजधानी गैरसैंण ही होनी चाहिए। जबकि दूसरे स्थान पर लोगों ने आईडीपीएल ऋषिकेश को राजधानी के उपयुक्त बताया। तीसरे स्थान पर देहरादून और चौथे स्थान पर कालाढ़ूंगी-काशीपुर-रामनगर रहा। इसके विपरीत आयोग को स्कूल आफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर दिल्ली (एसपीए) से जो तकनीकि रिपोर्ट मिली है वह कम से कम गैरसैंण के अनुकूल नहीं बताई जाती। पर उसने देहरादून को भी इसमें प्राथमिकता नहीं दी है। इससे आयोग की रिपोर्ट काफी महत्वपूर्ण हो गई है।
दरअसल, स्कूल आफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर दिल्ली को राजधानी चयन आयोग ने गैरसैंण, देहरादून, आईडीपीएल और रामनगर-काशीपुर स्थलों के बारे में पूरी भूगर्भीय, भौगोलिक और पर्यावरणीय स्थिति, जल स्रोत, संचार सुविधाएं, रेल हैड से दूरी, हवाई सेवा के विस्तार की संभावनाओं के साथ ही हर पहलू पर अध्ययन कर रिपोर्ट मांगी थी। एसपीए ने इन स्थलों की सैटेलाइट इमेज का कार्य हैदराबाद स्थित रिमोट सैंसिंग को दिया था। सभी 26 सैटेलाइट इमेज के साथ ही भूगर्भीय, भौगोलिक, पर्यावरणीय और पास्थितिकीय स्थिति के बारे में रिपोर्ट आयोग के पास पहुंच गई है।

साभार- राष्ट्रीय सहारा


Charu Tiwari

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मेहर जी, आप लोगो ने यह ठीक ही किया की समय रहते स्थाई राजधानी का सवाल जिंदा राका है. राजनीतिक दल तों कभी नही  चाहते है कि उत्तराखंड के सरोकारों को आगे जाना चाहिय. राज्य का सवाल पर भी उनकी भूमिका नकारात्मक रही तब उनसे किसी प्रकार की उम्मीद करने की भूल हमें नही करनी चाहिय. जहा तक गरसैन का सवाल है उससे अलग राजदानी के बरिया  में सोचा भी नही जा सकता है .

 

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