Author Topic: Uttarakhand Power State, Huge Power Cut - उर्जा प्रदेश में क्यों है उर्जा गुल !  (Read 6361 times)

हेम पन्त

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देखिये बिजली कटौती के कारण चम्पावत के सरकारी कर्मचारी कैसी ’मौज’ काट रहे हैं... "नैनीताल समाचार" में सतीश जोशी की रिपोर्ट

http://nainitalsamachar.in/daily-power-cuts-in-champawat-and-office-work/

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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This is unfortunate.

The corruption issue has already been highlighted in TV channels in UK. Despite of this, there is no improvement in Govt functionaries.

dayal pandey/ दयाल पाण्डे

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इसमें आश्चर्य की क्या बात है जब आवंटन मैं ही घोटाला हुवा है तो suply  कहाँ से आएगी माननीय मुख्या मंत्री जी तो अवार्ड्स के चक्कर मैं रिकॉर्ड बना रहे है

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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condition has come to this extent.
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  अरबों की बिजली खरीद रहा उत्तराखंड     May 12, 01:47 am   बताएं            देहरादून, जागरण ब्यूरो
बिजली के मामले में वर्ष 2007 तक सरप्लस स्टेट उत्तराखंड अब जरूरतें पूरी करने के लिए सालाना अरबों की बिजली खरीद रहा है। हालात साल दर साल बदतर होते जा रहे हैं। नई परियोजनाएं न जुड़ने की वजह से राज्य में बिजली का उत्पादन स्थिर हो गया है, जबकि मांग लगातार बढ़ती जा रही है।
वर्ष 2001-02 में उत्तराखंड में 36.2 मिलियन यूनिट बिजली सरप्लस थी। 2002-03 में 1101.6 एमयू बिजली सरप्लस हो गई। 2003-04 में 1240.7 एमयू बिजली मांग से अधिक थी। 2004-05 में 418.3 एमयू बिजली सरप्लस थी। अब धीरे-धीरे मांग बढ़ने लगी थी और अतिरिक्त बिजली की मात्रा कम होने लगी। 2005-06 में मांग से अधिक 333.8 एमयू बिजली थी। 2006-07 में मांग पूरी करने के बाद मात्र 64.2 एमयू बिजली बच पाई।
2007-08 में चक्का उल्टा घूम गया। इस साल 290.1 एमयू बिजली कम पड़ गई। 2008-09 में 189.9 एमयू बिजली मांग से कम रही। 2009-10 में 1256 एमयू बिजली कम पड़ी। 2010-11 में हालात और भी बदतर हो गए। वर्ष 2007-08 में उद्योगों का कुल भार 595 मेगावाट था जो 2008-09 में 862 मेगावाट हो गया। 2010-11 में उद्योगों के विद्युत भार में 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
राज्य में ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है, दूसरी तरफ जरूरतों को पूरा करने के लिए 2007-08 में 304 मेगावाट की मनेरी भाली फेज-दो के अतिरिक्त कोई बड़ी परियोजना राज्य बनने के बाद नहीं जुड़ी है। इससे भी अधिक निराशाजनक पहलू यह है कि निकट भविष्य में उत्तराखंड की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कोई और परियोजना जुड़ने वाली नहीं है। एक मात्र 120 मेगावाट की व्यासी परियोजना निर्माण शुरू करने की सभी औपचारिकताओं को पूरा करती है, लेकिन करीब एक साल से केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुमति के इंतजार में लटकी हुई है।
वर्ष 2009-10 के बाद उत्तराखंड बिजली खरीद के लिए बाकायदा टेंडर जारी करता है। 2009-10 में उत्तराखंड ने सौ करोड़ की बिजली खरीदी। 2010-11 में 102.7 करोड़ की बिजली खरीदी। 2011-12 के लिए 638 मिलियन यूनिट बिजली खरीदने का अनुबंध राज्य ने किया है, जो 270.5 करोड़ रुपये की पड़ेगी। यही नहीं, एक तरफ उत्तराखंड पिछले साल राज्य ने 322 एमयू बिजली बैंकिंग के जरिये दूसरे राज्यों से प्राप्त की, जो इस साल पांच प्रतिशत अतिरिक्त देकर चुकानी होगी। बात यहीं खत्म नहीं हो जाती है। हर साल ओवरड्रा के जरिये भी अरबों की बिजली खरीदी जा रही है। वर्ष 2008-09 में उत्तराखंड ओवरड्रा के जरिये 213 करोड़ और वर्ष 2009-10 में 321.33 करोड़ की बिजली खरीद चुका है।
 
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7713436.html

Devbhoomi,Uttarakhand

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पोखरी के गांवों में बीस दिन से बिजली नहीं ======================


गौचर। पोखरी विकासखंड के ग्रामसभा टोली-गेलुंग, क्वींठी, बौब और रुद्रप्रयाग जिले के विसराकोट ग्रामसभा में पिछले 20 दिनों से विद्युत आपूर्ति ठप है, जिससे ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन को ज्ञापन प्रेषित कर समस्या का शीघ्र निदान न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।


ग्रामीणों के अनुसार ग्रामसभा टोली-गेलुंग, क्वींठी, बौब, विजराकोट, पुड़ियास, गैर, जखेड़ा आदि क्षेत्रों में विगत 16 जुलाई से विद्युत आपूर्ति ठप पड़ी है। टोली की ग्राम प्रधान मुन्नी देवी ने बताया कि इन क्षेत्रों की विद्युत लाइन क्षतिग्रस्त पड़ी है और कई स्थानों पर बिजली के तार जमीन पर झूल रहे हैं। विभागीय कर्मचारियों को कई बार अवगत कराने के बाद भी गांवों के लगभग दो सौ परिवारों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

 बताया कि ग्रामसभा में पेयजल लाइन भी भूस्खलन से क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों को पानी के लिए जूझना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान सहित चंदन सिंह, उत्तम सिंह, मातबर सिंह, नरेश सिंह आदि ने डीएम चमोली और रुद्रप्रयाग को ज्ञापन प्रेषित कर गांवों की विद्युत और पेयजल समस्या का शीघ्र निस्तारण न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।








http://epaper.amarujala.com/svww_index.php
 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Same condition everywhere in Uttarakhand.

पोखरी के गांवों में बीस दिन से बिजली नहीं ======================


गौचर। पोखरी विकासखंड के ग्रामसभा टोली-गेलुंग, क्वींठी, बौब और रुद्रप्रयाग जिले के विसराकोट ग्रामसभा में पिछले 20 दिनों से विद्युत आपूर्ति ठप है, जिससे ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन को ज्ञापन प्रेषित कर समस्या का शीघ्र निदान न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।


ग्रामीणों के अनुसार ग्रामसभा टोली-गेलुंग, क्वींठी, बौब, विजराकोट, पुड़ियास, गैर, जखेड़ा आदि क्षेत्रों में विगत 16 जुलाई से विद्युत आपूर्ति ठप पड़ी है। टोली की ग्राम प्रधान मुन्नी देवी ने बताया कि इन क्षेत्रों की विद्युत लाइन क्षतिग्रस्त पड़ी है और कई स्थानों पर बिजली के तार जमीन पर झूल रहे हैं। विभागीय कर्मचारियों को कई बार अवगत कराने के बाद भी गांवों के लगभग दो सौ परिवारों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

 बताया कि ग्रामसभा में पेयजल लाइन भी भूस्खलन से क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों को पानी के लिए जूझना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान सहित चंदन सिंह, उत्तम सिंह, मातबर सिंह, नरेश सिंह आदि ने डीएम चमोली और रुद्रप्रयाग को ज्ञापन प्रेषित कर गांवों की विद्युत और पेयजल समस्या का शीघ्र निस्तारण न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।








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Himalayan Warrior /पहाड़ी योद्धा

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This is true there are many villages in Uttarakhand which are still in dark. Though, there are thousands of dam under constructions and many of them start functioning but people in many parts even do not get for 10 hrs electricity.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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This is the situation of power in uttarakhand.


दस मिलियन यूनिट बिजली खरीद रहा है उत्तराखंड



बाजपुर: मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि भाजपा सरकार में 6-7 विद्युत परियोजनाओं को बंद कर दिए जाने का ही नतीजा है कि आज बिजली की खपत पूरी करने के लिए विकास कार्यो का पैसा खर्च करके दस मिलियन यूनिट बिजली ऊर्जा प्रदेश को ही खरीदनी पड़ रही है।
शनिवार को प्रथम बार बाजपुर पहुंचे मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने करीब तीन सौ करोड़ से अधिक की विकास योजनाओं को जनता के लिए समर्पित किया। उसके बाद उन्होंने श्रीरामभवन धर्मशाला में जनसभा को संबोधित किया। बहुगुणा ने कहा कि पृथक राज्य बनाने के पीछे उद्देश्य यही था कि यहां की जल विद्युत परियोजनाएं, पर्यटन व जड़ी बूटी इत्यादि के क्षेत्र में प्रदेश को आगे बढ़ाया जाएगा। लेकिन हम अपने प्रदेश में स्थापित प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल नहीं कर पाए। प्रदेश में 27 हजार मेगावाट बिजली पैदा की जा सकती है, लेकिन कानूनी अड़चने इस में रोड़ा बनकर खड़ी हो गई। उन्होंने कहा कि भाजपा ने अपनी सरकार के दौरान छोटी-छोटी विद्युत परियोजनाओं को रद्द कर दिया जिस कारण बिजली उत्पादन में प्रदेश काफी पीछे चला गया, आज हालात यह हो गए कि ऊर्जा प्रदेश को ही 10 मिलियन यूनिट बिजली की खरीदारी करनी पड़ रही है। बहुगुणा ने कहा कि प्रदेश सरकार नंद प्रयाग व थलीसैढ़ में गंगा नदी पर विद्युत परियोजनाएं शुरू करने की योजना बना रही है, यदि सबकुछ ठीकठाक रहा तो तीन-चार साल के भीतर प्रदेश को बाहर से बिजली नहीं खरीदनी पड़ेगी। इसके अलावा जल्द ही छोटी परियोजनाएं संचालित कर 6-7 सौ मेगावाट का विद्युत उत्पादन शुरू किया जाएगा। जनसभा से पूर्व मुख्यमंत्री ने लगभग 300 करोड़ रुपए के विकास कार्यो का शिलान्यास किया। राजस्व मंत्री व क्षेत्रीय विधायक यशपाल आर्य ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के नेतृत्व में चल रही कांग्रेस की सरकार ने हर गरीब, बेसहारा, मजलूम व्यक्ति के आंसू पोंछने का काम किया है। करीब 40 हजार नौजवानों के हाथों को सरकार काम देने जा रही है। इसमें जनजाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ी जाति को आरक्षण मिलेगा और बैकलॉग भरा जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अपने पिछले पांच साल में कुछ नहीं किया वो आज विकास की बातें कर रहे हैं, जब सत्ता में थे उस समय बाजपुर का विकास करने से किसने रोका था। कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि तराई को हरा-भरा करने में यहां आकर बसे जिन लोगों का हाथ था उन्हें जमीन का मालिकाना हक नहीं मिल पा रहा था। तराई वासियों के इस पीड़ा व दर्द को कांग्रेस सरकार ने समझा तथा वर्ग-4 की जमीन पर मालिकाना हक देकर एतिहासिक काम किया है। जिले के प्रभारी मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने कहा कि सरकार पूरी पारदर्शिता से विकास कार्य कर रही है बाजपुर की जनता को ऐसा व्यक्ति मिला है जो इस क्षेत्र को चमन बना देगा। कार्यक्रम को सांसद केसी सिंह बाबा, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़, कांग्रेस जिलाध्यक्ष नारायण सिंह बिष्ट, नैनीताल की विधायक सरिता आर्य, पूर्व सांसद महेंद्र पाल सिंह आदि ने भी संबोधित किया। संचालन सुरजीत अग्निहोत्री ने किया।(dainik jagran)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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ऊर्जा प्रदेश कहे जाने वाले  उत्तराखंड में बिजली के ये हाल है.

उत्तराखंड में गहरा सकता है बिजली संकट

उत्तराखंड में बिजली का संकट और अधिक गहरा सकता है। दक्षिण गुजरात के 4000 मेगावाट के कोल पावर प्लांट में आग लगने के कारण यह असर दिखना शुरू हो गया है।

बृहस्पतिवार को दो के बजाए चार घंटे हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की कटौती की गई। इसके अलावा छोटे शहरों में भी तीन घंटे की रोस्टिंग की गई, जबकि औद्योगिक क्षेत्रों में भी दो घंटे की कटौती शुरू कर दी गई है।

उत्पादन लगातार हो रहा है कम
आग लगने की खबर के बाद नार्थ इंडिया के ग्रिड से बिजली ओवर ड्रा करने के लिए सभी राज्यों को मना कर दिया गया है। इसके कारण उत्तराखंड में बिजली संकट खड़ा होने की आशंका है।

इसका कारण यह है कि प्रदेश में जल विद्युत परियोजनाओं से उत्पादन लगातार कम हो रहा है। वर्तमान में उत्पादन महज आठ मिलियन यूनिट (80 लाख यूनिट) तक सिमट गया है।

दूसरे विकल्पों पर किया विचार
शेष बिजली की आपूर्ति केंद्रीय शेयर और खरीदकर की जा रही है। इसके बावजूद आपूर्ति सामान्य नहीं हो पा रही है, जिसके कारण कटौती करनी पड़ रही थी। ऐसे में जहां से बिजली खरीदी जा रही थी, वहीं से संकट खड़ा हो गया है।

दूसरी ओर ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक एसएस यादव का कहना है कि प्रदेश में बिजली आपूर्ति सामान्य करने के लिए दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे कटौती कम से कम करनी पड़े।

 

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