Author Topic: Women As Graam Pradhaan - महिला प्रधान सिर्फ नाम की: पति है पूरे ग्राम प्रधान  (Read 8868 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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महिला प्रधान सिर्फ नाम की - पति है पूरे ग्राम प्रधान

Dosto,


दोस्तों,

पंचायती राज में महिलाओ को जन पर्तिनिधि के रूप में अवसर देने के लिए जगह जगह पर आरक्षण दिया गया है लेकिन गावो में अक्सर यह देखा गया है के ये महिलाये केवल एक stamp है और इनका पूरा काम इनके पति देव ही खुद कर लेते है !

यहाँ तक की गावो मे लोग पति को ही ग्राम प्रधान कहने लगे है जहाँ -२ पर महिलाये आरक्षित सीट पर चुनाव जीत है !

इस विषय पर खुली चर्चा के लिए आपके views welcome है !

रेगार्ड्स,

एम् एस मेहता

Risky Pathak

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Sat pratisat sahi keh reh h mehta g aap.

Mahila ka pati hi pradhan mana jata h. Har jagah pati ki hi bhumika rhti h. Mahila koi bi decisi0n indpndntly nai leti.

Sarkar k dwara mahilao ke samvardhan ke lye, panchayti chunaav me seats  mahilao k lye arkshit ki ti. Uska k0i fal nai najar aa ra h.

Ganv ki bagd0r ab bi mahilao k pati k hath me e h.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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My experience is even bitter. In my villages, ladies have got two turns and each time what i observed is that their husbands doing all the work themselves depeating the purpose of Panchayati Raj and giving an opportunity to women.

During my recent visit to my native place, i observed the husband of the Gram Pradhan (women) annoucing some scheme.

People were even calling him Padhan ji..

This is totally against the rule..

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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views from other members are also expected on this issue. Can way suggest if anybody wants to complain about this, where he can do the same ?

umeshbani

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बात पंचायती राज के ही नहीं  देश के सबसे बड़े सदन  में  तक ऐसा ही है
अनपढ़ और कम पढ़ा लिखा जब  MP बन जाता है तो वो अपना काम खुद करता है नहीं........ तो एक अनपढ़ और कम पढ़ी लिखी ग्राम प्रधान से क्या अपेक्षा रखोगे ?
जो अपना और अपने ग्राम का नाम ढंग से ना लिक पाए तो वो और काम केसे करेगा वो तो आरक्षित सीट का कमाल होता है कि
रधुली आमा ग्राम प्रधान होती है और उसका पति या  बेटा  .......  काम करता है ......  नाम रधुली आमा का काम हरदा का .........


महिला प्रधान सिर्फ नाम की - पति है पूरे ग्राम प्रधान

Dosto,


दोस्तों,

पंचायती राज में महिलाओ को जन पर्तिनिधि के रूप में अवसर देने के लिए जगह जगह पर आरक्षण दिया गया है लेकिन गावो में अक्सर यह देखा गया है के ये महिलाये केवल एक stamp है और इनका पूरा काम इनके पति देव ही खुद कर लेते है !

यहाँ तक की गावो मे लोग पति को ही ग्राम प्रधान कहने लगे है जहाँ -२ पर महिलाये आरक्षित सीट पर चुनाव जीत है !

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एम् एस मेहता


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Umesh Ji,

You are right. We can say . it happens only in Democracy.. but there should some oppose of such mal-practice from public side.


बात पंचायती राज के ही नहीं  देश के सबसे बड़े सदन  में  तक ऐसा ही है
अनपढ़ और कम पढ़ा लिखा जब  MP बन जाता है तो वो अपना काम खुद करता है नहीं........ तो एक अनपढ़ और कम पढ़ी लिखी ग्राम प्रधान से क्या अपेक्षा रखोगे ?
जो अपना और अपने ग्राम का नाम ढंग से ना लिक पाए तो वो और काम केसे करेगा वो तो आरक्षित सीट का कमाल होता है कि
रधुली आमा ग्राम प्रधान होती है और उसका पति या  बेटा  .......  काम करता है ......  नाम रधुली आमा का काम हरदा का .........


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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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People should give some chance to Women Pradhan also to do their job. However, they can always guide them where ever they need any support but is not appropriate to do all the work hiself and make Women Pradhan only a stamp.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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During my recent visit, i observed that women Village Heads in various areas, including my village, were just like a pupet.

All the work is being done by their husbands.

Women must be get maximum opportunities.

Devbhoomi,Uttarakhand

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मेहता जी सही कहा है आपने लेकिन इसका मतलब ये नहीं हैं की महिला प्रधान अशिक्षित है, सभी महिला प्रधान अशिक्षित नहीं हैं , कुछ हैं जो की पड़ना लिखना नहीं जानती हैं

लेकिन वो अशिक्षित होकर भी गाँव मैं और क्षेत्रों मैं सभाओं मैं बहुत अछि तरह से भाषण बाजी भी करती हैं जब की आज कुछ पड़े -लिखे पुरुष प्रधान भी लेकिन उन मैं ऐसे भी हैं जो की भाषण बाजी नहीं कर पाते हैं तो इसलिए उनकी जगह पर अशिक्षित महिलाएं ही उनका कार्य करते हैं!

और दूसरी  बात ये हैं की आजकल की महिला प्रधान केवल स्टैम्प बनकर रहा गयी है ,उसका एक कारण तो ये है की उसका पति पड़ा लिखा हो सकता है ओए बहुत इंटेलिजेंट हो सकता भी हो सकता है

, दूसरा कारण ये है की वो उसकी पत्नी यानी स्टैम्प नमक महिला प्रधान की आड़ मैं कुछ हेर-फेर करना  चाहता हो , या गाँव मैं जो प्रस्ताव पास होते हैं उनमेंसे कुछ अपने जेब डालना चाहते हैं!

 जिससे आजकल की महिला प्रधान जी केवल स्टैम्प ही लगाती है लेकिन काम -काज दौड़ -भाग पति ही करता है !क्योंकि पति को मालुम है कैसे हेरा-फेरी  करनी है !

पंचायती राज और लोकसभा ,राज्य सभा  मैं कोई फर्क नहीं है वही राजनीति और वही टिका-टिप्पणी पंचायती राज में भी होती है !यहाँ तक की गाँव में भी प्रधान के चुनाव के लिए पैसे से वोट ख़रीदे जाते हैं

Devbhoomi,Uttarakhand

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"जब लालू प्रसाद याधाव जी, I.I.M  में भाषण और दे सकते हैं पढाई  की निति बता सकते" तो गांवों अशिक्षित महिला प्रधान क्यों नहीं बन सकती है, गाँव में कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जो की अशिक्षित होने के बावजूद भी पड़ी लिखी महिन्लाओं से अच्छा विकास करने की क्षमता रखती है !

और अशिक्षित महिलाओं को प्रधान की कुर्शी  पर कौन बिठाता है,उनका ही पति,वो शिक्षित पति ही अपनी अशिक्षित पत्नी को प्रधान के उमीद्वार के रूप में आगे पेश करता है क्योंकि वो शिक्षित होने बावजूद भी प्रधान की कुर्शी पर नहीं बैठ सकता है !
अशिक्षित महिलाएं चाहे किसी से भी पड़ने लिखने का काम करवाती हो विकास तो फिर भी होता है,मेरे गान में जो प्रधान जी हैं वो भी कोई ख़ास पड़े लिखे नहीं है !

और न ही उनकी पत्नी पड़ी-लिखी है,लेकिन गाँव का विकास तो हो ही रहा है लेकिन राज शाम को घर दो तीन ब्योड़े बैठे होते हैं,रोज प्रधान जी के घर मों पार्टी होती हैं,पत्नी बिचारी भी वही अशिक्षित स्टैम्प हैं ,जैसा पति कटा है वैसे ही स्टैम्प मार देती है !

 

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