Author Topic: Your Hearth Touching Uttarakhadi Songs -आपके दिल को छू लेने वाले ये गाने !  (Read 10073 times)

Devbhoomi,Uttarakhand

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इस गाने मैं नेगी जी ने एक गढ़वाली बेटी की भावनाओं की कल्पना की है की वो शादी के बाद कैसे अपने मैत के यादों मैं ये कल्पना करती है जब फाल्गुन का महिना ख़तम हो जाता है और चैत का महिना शुरू हो जाता है तब घुघूती की सुरेली आवाज उन डांडी कांठियों मैं गूंजती है उस घुघूती की सुरीली अवाज्को सुनकर बेटी ब्वारियों को अपने मैत की खुद लगाती हैं वो अपने मैत से आने वाले रैबार का इन्तजार करती रहती हैं और उस चैत के महीने मैं गाँव मैं बेटी ब्वारियों को कहीं दूर जब घुघूती की सुरीली आवाज सुनाई देती है तो तब उनें इस गाने को गाया गया है
घुगुती  घुरोण  लागी म्यार  मैत  की
बौडी  बौडी आयी गे  ऋतू , ऋतू चेत  की
डांडी   कांठियों  को हूए, गौली  गए  होलू
म्यारा मेता को बोन , मौली  गए  होलू
चाकुला  घोलू  छोडी , उड़ना  हवाला
बेठुला  मेतुदा  कु , पेताना  हवाला
घुगुती  घुरोण  लागी हो ......................

घुगुती  घुरोण  लागी म्यार  मैत  की
बौडी  बौडी आयी गे  ऋतू , ऋतू चेत  की
ऋतू, ऋतू चैत की, ऋतू, ऋतू चेत की
डान्दियुन खिलना  होला , बुरसी का  फूल
पथियुं  हैसनी  होली , फ्योली  मोल मोल
कुलारी  फुल्पाती  लेकी , देल्हियुं  देल्हियुं जाला
दग्द्या  भग्यान  थडया, चौपाल  लागला
घुगुती  घुरोण  लागी म्यार  मैत  की
बौडी  बौडी आयी गे  ऋतू , ऋतू चेत  की
ऋतू, ऋतू चैत की, ऋतू, ऋतू चेत की
तिबरी  मा  बैठ्या  हवाला, बाबाजी उदास
बतु  हेनी  होली  माजी , लागी  होली  सास
कब म्यारा मैती  औजी , देसा  भेंटी  आला
कब म्यारा भाई बहनों  की राजी खुशी ल्याला
घुगुती  घुरोण  लागी म्यार  मैत  की
बौडी  बौडी आयी गे  ऋतू , ऋतू चेत  की
ऋतू, ऋतू चैत की, ऋतू, ऋतू चेत की
ऋतू, ऋतू चैत की, ऋतू, ऋतू चेत की
ऋतू, ऋतू चैत की, ऋतू, ऋतू चेत की
ऋतू, ऋतू चैत की, ऋतू, ऋतू चेत की

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Jakhi ji...

This is best song and one of the my favorite song.

इस गाने मैं नेगी जी ने एक गढ़वाली बेटी की भावनाओं की कल्पना की है की वो शादी के बाद कैसे अपने मैत के यादों मैं ये कल्पना करती है जब फाल्गुन का महिना ख़तम हो जाता है और चैत का महिना शुरू हो जाता है तब घुघूती की सुरेली आवाज उन डांडी कांठियों मैं गूंजती है उस घुघूती की सुरीली अवाज्को सुनकर बेटी ब्वारियों को अपने मैत की खुद लगाती हैं वो अपने मैत से आने वाले रैबार का इन्तजार करती रहती हैं और उस चैत के महीने मैं गाँव मैं बेटी ब्वारियों को कहीं दूर जब घुघूती की सुरीली आवाज सुनाई देती है तो तब उनें इस गाने को गाया गया है
घुगुती  घुरोण  लागी म्यार  मैत  की
बौडी  बौडी आयी गे  ऋतू , ऋतू चेत  की
डांडी   कांठियों  को हूए, गौली  गए  होलू
म्यारा मेता को बोन , मौली  गए  होलू
चाकुला  घोलू  छोडी , उड़ना  हवाला
बेठुला  मेतुदा  कु , पेताना  हवाला
घुगुती  घुरोण  लागी हो ......................

घुगुती  घुरोण  लागी म्यार  मैत  की
बौडी  बौडी आयी गे  ऋतू , ऋतू चेत  की
ऋतू, ऋतू चैत की, ऋतू, ऋतू चेत की
डान्दियुन खिलना  होला , बुरसी का  फूल
पथियुं  हैसनी  होली , फ्योली  मोल मोल
कुलारी  फुल्पाती  लेकी , देल्हियुं  देल्हियुं जाला
दग्द्या  भग्यान  थडया, चौपाल  लागला
घुगुती  घुरोण  लागी म्यार  मैत  की
बौडी  बौडी आयी गे  ऋतू , ऋतू चेत  की
ऋतू, ऋतू चैत की, ऋतू, ऋतू चेत की
तिबरी  मा  बैठ्या  हवाला, बाबाजी उदास
बतु  हेनी  होली  माजी , लागी  होली  सास
कब म्यारा मैती  औजी , देसा  भेंटी  आला
कब म्यारा भाई बहनों  की राजी खुशी ल्याला
घुगुती  घुरोण  लागी म्यार  मैत  की
बौडी  बौडी आयी गे  ऋतू , ऋतू चेत  की
ऋतू, ऋतू चैत की, ऋतू, ऋतू चेत की
ऋतू, ऋतू चैत की, ऋतू, ऋतू चेत की
ऋतू, ऋतू चैत की, ऋतू, ऋतू चेत की
ऋतू, ऋतू चैत की, ऋतू, ऋतू चेत की

Devbhoomi,Uttarakhand

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one more hearth tuching new song by n s negi ji

इस गाने में नयी नयी शादी शुदा वाली नारी का दुःख को प्रकट किया गया है, जिसका आदमी शादी करके अपनी नौकरी पर दिल्ली गया और अभी तक अपने घर वापिस नहीं आया है, वह औरत दिल्ली से आये किसी अन्य युवक से अपने पति के हाल-चाल जानने को उत्सुक है.. बङा अर्थपूर्ण और मार्मिक गाना है, एक बार फ़िर नेगी जी ने "पलायन" की समस्या पर अपनी सशक्त कलम चलायी है...
हे दिल्ली वला दयुरा, हे दिल्ली वला ...........
हे दिल्ली वला दयुरा, तेरा भेजी भी दिखेंदिनी रे कभी आन्दा जांदा..२

चोंठी मा तिल वाली भोजी, चोंठी मा तिल वली.......
चोंठी मा तिल वली भोजी हुन्दू क्वी अता पता भेजी कु त खोजी ल्यान्दा....2
हे दिल्ली वला दयुरा, तेरा भेजी भी दिखेंदिनी रे कभी आन्दा जांदा..

भंडी बरस व्हेगीन यून्की, चिट्ठी पतरी ना खबर सार ....2
नयु- नयु ब्यो व्हे छो हमरू, छोड़ी चली गीन घरबार
चोंठी मा तिल वली भोजी हुन्दू क्वी अता पता भेजी कु त खोजी ल्यान्दा

मैं शक-सुभा हूनू भोजी फड़कणी च आँखी मेरी....2
भेजी मेरु रशिलू मिजाज, क्वी बाँध ना हो तख धेरीं

हट ठठा ना कर भे दयुरा, स्यना त नि छिन तेरा भेजी
छोवं आश मा कभी त ल्याली, मेरी खुद तों खेन्ची खेन्ची
हे दिल्ली वला दयुरा, तेरा भेजी भी दिखेंदिनी रे कभी आन्दा जांदा..

तू फिकर ना कर बो पंछी, कख जालू घोलू छोड़ी
बाटू बिरर्युं च भेजी, ए जालू त्वेमा बोड़ी
चोंठी मा तिल वाली भोजी, काटेनी तिन भी दिन याखुली रून्दा रून्दा

Devbhoomi,Uttarakhand

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Hearth Tuching song by birendr Rajput

 ये गाना गाया है बिरेन्द्र राजपूत और उम्मा ने, दयुर और भावी का जिसमे भावी ही अपने देवर को पाल पोस कर बड़ा करते है जब वो बड़ा होकर दुरु परदेश चला जाता है तो उसके बाद जब उस को अपने बचपन की याद आती है तो वो इस गाने को गाते है और भावी को माँ का दर्जा मिला हुवा है, भावी माँ के सामान होती है

 
भांडी भरी बल दूधकी भांडी भरी बल दूधकी !
हए जिया प्यारी मेरी माया बहु भांडी भरी बल दूधकी !
गोला लगादी बडुली, बौजी तुमारा खुद की,
हाँ जिया प्यारी मेरी माया बौहू ,तुमारा खुदकी!!
 घास काटी ले बौज, घास काटी ले बौज,
लड़ा दयुर मेरा विमालू घास काटी ले बौज ,
दयुर ठुमरी याद माँ आग भाव्रांदी  रोज,
लड़ा दयुर मेरा विमालू आग भाव्रांदी रोज !!
छांची कु बल माखन, छांची कु बल माखन.
लाडा दयुर मेरा विमालू छांची कु ले माखन
दुरु रैग्य तुमु पर्देशु अब देखण कखन
हे लाडा दयुर मेरा विमालू अब देखण कखन !!
खालयानी कु ले दान्दु, खंल्यानी कु ले दान्दु
जिया प्यारी मेरी माया बौहू खाल्यानी कु ले दान्दु !
होन्दा पांखुर जू मैम बौजी उडी का ऐजांदु
जिया प्यारी मेरी माया बौहू बौजी उडी का ऐजांदु !!
लाखुडू का ले भारा,लाखुडू का ले भारा
जिया प्यारी मेरी माया बौहू,लाखुडू का ले भारा !
दिन कतुणु छौं मैहि तुमारी चिठियुं का सारा
हे जिया प्यारी मेरी माया बौहू तुमारी चिठियुं का सारा!
पूजी जाला बल पीतर पूजी जाला बल पीतर
हे लाडा दयुर मेरा विमालू पूजी जाला बल पीतर !
सुनु लगदु तुमारा बिगर घर बाण भैर भीतर !
लाडा दयुर मेरा विमालू घर बाण भैर भीतर
बाखुरी कु ले रान बाखुरी कु ले रान
हे लाडा दयुर मेरा विमालू बाखुरी कु ले रान !
ड्यूटी का दगडा मेरु भी ख्याल रख्यान
लाडा दयुर मेरा विमालू मेरु भी ख्याल रख्यान

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this song is very famus and its really hearth Tuching song


Sauna ka mehna, bhew kanu kui rehna, kuyedi launkali-2
Anderi raata, barkha ki jhamdaata, khud teri laagali-2

Chau dandiyon por, sargi gagdaand -2
Hiririri paaphi barkha jhuki aand -2
Baduli laagali
Sauna ka mehna, bhew kanu kui rehna, kuyedi launkali
Sauna ka mehna, bhew kanu kui rehna

Gadh gadniyon si, syat ghanaghora -2
Tum pardes, mi akuli ghora -2
Jyukdi dauraali
Sauna ka mehna, bhew kanu kui rehna, kuyedi launkali

Yakulu sarela, uni prani kwasu -2
Sera basgyal, ab dan man aansu -2
Aankhi dholali
Sauna ka mehna, bhew kanu kui rehna, kuyedi launkali

Tera naunyal, ar pungudiyon dhaan -2
Barkha ka deedo ma ghaansa ku beejaan -2
Jhuli meri roojhali
Sauna ka mehna, bhew kanu kui rehna, kuyedi launkali

Sauna bhadon barkhiki chali gaini -2
Ritu gaini meri aankhen ni oobaeini -2
Kanu ke oobaali
Sauna ka mehna, bhew kanu kui rehna, kuyedi launkali
Anderi raata, barkha ki jhamdaata, khud teri launkali

Devbhoomi,Uttarakhand

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one more Hearth Tuching song by negiji and its very old song


   
उत्तरांचल के हिमालयी क्षेत्रों में ढोल नेगी जी की गूंजती आवाज वादन की बहुत पुरानी और समृद्ध परंपरा रही है लेकिन समय के साथ ढोल का शास्त्र और इसे बजानेवाले कलाकार हाशिये पर जाने लगे थे.ऐसे में कुछ संस्कृतिकर्मियों और लोककलाकारों ने ढोल और सोलह ठेठ पहाड़ी साज़ों को मिलाकर अनूठा ऑर्केस्ट्रा तैयार किया है.अब तक इन साज़ों को अलग-अलग ही बजाया जाता था या ज़्यादा से ज़्यादा दो या तीन साज की जुगलबंदी होती थी.लेकिन पहली बार एक दर्जन से अधिक लोकवाद्यों को एक साथ एक जगह रख दिया गया है


रीधी कु सुमिरो,सीधी कु सुमिरो,सुमिरो सारदा माई,
अर् सुमिरो गुरु अभिनासी को,सुमिरो किशन कनाई!

 सदा अमर या धरती नि रैन्दि,मेघ पड़े शुखी जाई,
 अमर नि रैंदा,चन्द्र सूरज चुचा,गर्हण लगे छुपी जाई!

माता रोये जनम-जनम को,बहिन रोये छै मासा,
 तिरिया रोये डेड घडी को,आन करे घर वासा!

ना घर तेरा न घर मेरा,चिडिया रैन बसेरा,
अस्ति घोड़ा कुटुंब कबीला रै चला-चली का फेरा!

रीधी कु सुमिरो सीधी कु सुमिरो,सुमिरो सारदा माई ,
सुन ले बेटा गोपीचंद जी बात सुनों चितलाई,

 झूटी तेरी माया ममता,मति कैसी भरमाई!
 कागज पटरी सब कोई बांचे करम न बांचे कोई,

 राज घरों को राज कुवंर चुचा करणी जोग रमाई !
रीधी कु सुमिरो सीधी कु सुमिरो सुमिरो सारदा माई.

 अर् सुमिरो गुरु अभिनासी कु सुमिरो किशन कनाई !

M S JAKHI

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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This song of Naredra Singh Negi ji really very heart touching. In this song, Senior Citizen (almost  Octogenarian ) explains about his lonely and old age life. It seems that his kids are not away from pahad and better half is no more. 

He explains his condition like this "

Ko Sun do meri Kheri,
Ko Gan to Mera Dukh.

It means nobody it take care of him and no body is listen to his pain.

This is the song from N S Negi "Nauchami Naryana Album.


Raje Singh Karakoti

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प्रश्न का उत्तर देने के लिए बहुत धन्यवाद मेहता जी ! बहुत ही कर्णप्रिय गाना है ये !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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    मैंने इस गाने से ज्यादे भाविक गाना भी तक नहीं सुना !     कौन सा कठोर हिर्दय नहीं पिघल उठेगा जब किसी के बेटी की बारात विदा हो रही है! और बाप अपने बेटी को आशीर्वाद एव अपने लाज रखने की हिदायते देता है! अगर नील कमल फिल्म का गाना " बाबुल की दुवाए लेती जा" हिंदी फिल्मो का भाविक गाना है तो पहाड़ी में यह गाना भी कम नहीं है !      बैटी गे बारात चेली बैठ डोली मा  बाबु की लाडीली चेली बैठ डोली मा!     बाट घाटा भली के जाए   मेरी लाडली झन निशाशिये   मेरी धरिये लाज चेली बैठ डोली मा     बाट लागी बारात चेली बैठ डोली मा     गाने के और भी लाइन बहुत भाविक है. स्वर्गीय गोपाल बाबु गोस्वामी जी ने इस गाने k   

सत्यदेव सिंह नेगी

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घुघूती घुराण लगी मेरा मैता की बौडी बौडी ऐगे ऋतू ऋतू चैता की भी बहुत भावुक गाना है मेहता जी

 

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