Author Topic: Divya Sandesh by "Divya Jyoti Jagriti Sansthan"  (Read 6570 times)

Raje Singh Karakoti

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Re: Divya Sandesh by "Divya Jyoti Jagriti Sansthan"
« Reply #70 on: December 12, 2016, 11:33:05 AM »
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (DJJS) तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के मध्य चल रहे प्राथमिक नेत्र चिकित्सा (PEC) प्रयास का विस्तारण अगले चार वर्षों तक
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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य-धाम आश्रम के निकटतम 66 ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों (लगभग 2,00,000) को नेत्र रोगों से मुक्त करने हेतु, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (DJJS) तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली के मध्य चल रहे ‘Comprehensive Eye Care Project’ गत एक  अक्टूबर 2016 से अगले चार वर्षों तक के लिए विस्तारण किया गया. इस उपलक्ष में AIIMS के Dr. R. P. Centre for Opthalmic Sciences के प्रमुख डॉ. प्रवीण वशिष्ठ जी ने दिव्य-धाम आश्रम में चल रहे ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’(Primary Eye Care Clinic,PEC) स्वयं उपस्थित रहे. इस मोक़े पर अपने वक्तव्य में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की सराहना करते हुए डॉ. प्रवीण वशिष्ठ ने कहा, “दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान ने AIIMS के साथ मिलकर यह बहुत अच्छा initiative शुरू किया है. इसमें 2 लाख लोगों की आँखों की तकलीफ और अंधेपन को दूर करने का target है. अंधापन एक major public health problem है. भारत में 1% लोग अंधे माने जाते हैं. और 50 वर्ष से ऊपर की आयु वर्ग में तो 8% लोगों में अंधापन है. Vision 2020 ‘Right to Sight’ नाम से एक international program चल रहा है, जिसके अंतर्गत सन 2020 तक हमें पूरी तरह से अंधापन ख़त्म करना है. और यहाँ दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान के साथ जो प्रयास चल रहा है, वो इसमें बहुत बड़ी contribution है. हमें बहुत ख़ुशी होती है दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान के कार्यकर्ताओं की इतनी बड़ी टीम इसमें लगी हुई है. वे यहाँ पर भी सेवा करते हैं, AIIMS अस्पताल तक मरीजों को लेकर भी जाते हैं. उनका पूरा ख़याल भी रखते हैं. और ये सारा प्रबंध संस्थान की ओर से सभी मरीजों के लिय निःशुल्क होता है. मुझे नहीं लगता की eye care में इससे अच्छा  program कोई और हो सकता है.” अंत में, इस अवसर पर डॉ. प्रवीण वशिष्ठ ने ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’(PEC) से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं को AIIMS की ओर से certificates प्रदान कर उनका उत्साह वर्धन किया.[/color] दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान का सम्पूर्ण स्वास्थ्य प्रकल्प – ‘आरोग्य’, “स्वस्मिन् तिष्ठति इति स्वस्थः” की विचारधारा पर केन्द्रित है. अभावग्रस्त तथा दूर-दराज़ के ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करवाना ही ‘आरोग्य’ प्रकल्प की विशिष्टता है. ‘आरोग्य’ के अंतर्गत देश भर में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर (रक्तदान, पोलियो इम्यूनाइजेशन, डेंटल चिकित्सा, नेत्र चिकित्सा, माँ एवं शिशु कल्याण), निःशुल्क OPDs तथा पुरातन भारतीय मेधा पर आधारित विलक्षण योग शिविर तथा आयुर्वैदिक चिकित्सा प्रबंधों का आयोजन किया जाता है.[/color]JOURNEY THROUGH TIME | 13 YEARS | 66 VILLAGES | NORTH WEST DELHI JATKHOR & VICINITY[/font][/color] अक्टूबर 2012-2016 | DJJS व AIIMS द्वारा पश्चिमी दिल्ली के जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों के लिए संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में संयुक्त ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’ (PEC)     खोला गया[/color]नवम्बर 14, 2015 | बवाना में मोज़ान चौपाल, नज़दीक धाधुराम मार्किट, शनिवार को एक विशाल व् भव्य ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’ आयोजित किया गया| [/color]फरवरी 22-23, 2013 | जटखोड़ के निकट बहादुरगढ़ क्षेत्र में 2 दिवसीय ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’[/color]अक्टूबर 6, 2012 | संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में साप्ताहिक ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’ (PEC)  का शुभारंभ[/color]सितम्बर 29, 2012 | संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में दूसरा ‘नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’[/color]नवंबर 19, 2011 | संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में प्रथम ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’[/color]जवनरी 2006 – मार्च 2008 | Dr. N. C. Pal के सौजन्य से संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में साप्ताहिक नेत्र जांच’ OPD[/color]अगस्त – दिसम्बर 2004 | जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों में ‘नेत्र चिकित्सा शिविर’[/color]फरवरी 8-10, 2003 | जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों के लिए संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में 3 दिवसीय ‘ग्रामीण स्वास्थ्य अभियान’[/color]सन 2003 में दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान द्वारा संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम के निकटतम क्षेत्रों में स्वास्थ्य आधारित सर्वेक्षण किये गए. परिणाम स्वरुप तथाकथित क्षेत्रों में अनेकों स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं पाई गई. अतः संस्थान के सम्पूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रम – आरोग्य द्वारा जन मानस को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने हेतु प्रयास शुरू किये गए. 8 से 10 फरवरी 2003 तक संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में तीन दिवसीय “ग्रामीण स्वास्थ्य अभियान” चलाया गया जिसके अंतर्गत स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ साथ बिमारियों की रोकथाम हेतु स्वास्थ्य सम्बन्धी विभिन्न विषयों पर जागरूकता भी उत्पन्न की गयी. AIIMS, Broadways, CATS तथा केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय जैसी कई सरकारी, गैर सरकारी तथा सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से तीन दिवसीय “ग्रामीण स्वास्थ्य अभियान” द्वारा 3 लाख लाभार्थियों तक स्वास्थ्य सुविधाएँ मुह्हैया करवाई गयी. उपस्थित रोगियों में सर्वाधिक नेत्र सम्बन्धी समस्याएं पाई गयीं.[/color] क्या आप जानते हैं?[/color]विश्वभर में करीबन 28.5 करोड़ लोग नेत्रहीन हैं (WHO Visual Impairment & Blindness, 2013)
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    • इनमे से 1.5 करोड़ नेत्रहीन लोग भारत के निवासी हैं (WHO Visual Impairment & Blindness, 2013)[/color][/color][/font][/font]
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    • 80% नेत्रहीनता साध्य (curable) है क्योंकि नेत्रहीनता जिन नेत्र रोगों द्वारा होती है वे नेत्र-रोग साध्य (curable) होते हैं. जैसे की – Corneal Disorder, Diabetic Retinopathy, Cataract, Glaucoma & Refractive Error इत्यादि[/color][/color][/font][/font]
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    • इसमें से 62.4% लोगों की नेत्रहीनता वास्तव में मोतिया-बिन्द (Cataract) के कारण होती है[/color][/color][/font][/font]
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    • अतः जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों में उप-लिखित नेत्र सम्बन्धी समस्याओं को देखते हुए, सन 2004 में अगस्त से दिसम्बर माह तक विशेष नेत्र चिकित्सा मुहीम चलायी गई. इसके बाद इन्ही ग्रामीण निवासियों के सम्पूर्ण स्वास्थ्य हेतु संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में स्थायी ‘आयुर्वैदिक चिकित्सा केंद्र’ OPD शुरू कर दी गयी. तदुपरांत, अगस्त 2006 से Dr. N. C. Pal के सहयोग से दिव्य धाम आश्रम में विशेष रूप से साप्ताहिक ‘नेत्र चिकित्सा केन्द्र’ OPD चलायी जाने लगी और साथ साथ ‘नेत्र चिकित्सा शिविर’ भी लगाये गए.  सन 2008 तक चली इस साप्ताहिक चिकित्सा सुविधा के अंतर्गत 4791 नेत्र रोगियों को लाभ प्रदान किया गया. परन्तु, निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी अस्पतालों की व्यवस्था न होने के कारण लोगों में मोतिया बिन्द, कान्चबिंदु तथा अन्य नेत्र रोग कभी समाप्त नहीं हो पाए. अतः पश्चिमी दिल्ली के जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों की स्थायी नेत्र सम्बन्धी समस्याओं के निदान हेतु सन 2012 में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के Dr. R. P. Centre of Opthalmic Sciences के साथ चार वर्षीय संयुक्त ‘विस्तृत नेत्र चिकित्सा प्रकल्प’ (Comprehensive Eye Care Project) शुरू किया. इसके अंतर्गत दिव्य धाम आश्रम में साप्ताहिक ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’ (PEC) OPD शुरू की गयी तथा समय समय पर क्षेत्रीय समुदायों में ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’(Eye Screening Camps) आयोजित किये जाने लगे. ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा’ PEC (Primary Eye Care) OPD में प्रत्येक सप्ताह AIIMS के Dr. R. P. Centre of Opthalmic Sciences के नेत्र चिकित्सा विशेषज्ञ एवं टीम (an Ophthalmologist with paramedical staff) द्वारा नेत्र रोगियों को चिकित्सीय परामर्श प्रदान किया जाने लगा.[/color][/color][/font]
      दायित्व | अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS)[/font][/color]नेत्र चिकित्सा विशेषज्ञों एवं टीम अपने बुनियादी आवश्यक साधनों और उपकरणों द्वारा दिव्य धाम आश्रम में साप्ताहिक ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा’ केन्द्र व समय समय पर विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’ में बड़ी संख्या में नेत्र रोगियों को चिकित्सीय परामर्श एवं इलाज़[/color][/font][/font]
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    • आवश्यकता अनुसार मोतियाबिन्द रोगियों को AIIMS में निःशुल्क Operation/Surgery की सुविधा[/color][/color][/font][/font]
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    • DJJS कार्यकर्ताओं के लिए समय समय पर प्रशिक्षण कार्यशालाएं[/color][/color][/font][/font]
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    • दायित्व | दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान (DJJS)[/color][/size]ग्रामीण समुदायों में संस्थान के कार्यकर्ताओं द्वारा ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा’ प्राप्त करने हेतु प्रोत्साहन एवं  जागरूकता[/font][/size][/font]
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    • संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य-धाम आश्रम में साप्ताहिक ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’  तथा ग्रामीण समुदायों में समय समय पर ‘नेत्र चिकित्सा शिविरों’ (Comprehensive Screening Eye Camps) का आयोजन व प्रबंध[/color][/color][/font][/font]
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    • नेत्र रोगियों को आवश्यकता अनुसार कम से कम खर्चे में चश्में उपलब्ध कराना[/color][/color][/font][/font]
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    • नेत्र रोगियों को आवश्यकता अनुसार निःशुल्क दवाइयां[/color][/color][/font][/font]
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    • नेत्र रोगियों व संग उपस्थित स्वजनों के लिए नेत्र रोग सम्बन्धी स्वास्थ्य जागरूकता[/color][/color][/font][/font]
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    • AIIMS में निःशुल्क ऑपरेशन की कागज़ी कार्यवाही व सम्पूर्ण प्रबंध[/color][/color][/font][/font]
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    • AIIMS में ऑपरेशन हेतु आने जाने की निःशुल्क वाहन सुविधा[/color][/color][/font][/font]
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    • AIIMS के चिकित्सा विशेषज्ञों के वेतन का दायित्व[/color][/color][/font][/font]
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    • साप्ताहिक ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा’ OPD व ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित ‘नेत्र चिकित्सा शिविरों’ का प्रबंधन[/color][/color][/font][/font]
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    • सफलताDJJS व AIIMS के चार वर्षीय (नवंबर 2012-2016 तक) संयुक्त प्रयास – ‘विस्तृत नेत्र चिकित्सा प्रकल्प’ (‘Comprehensive Eye Care’ Project) के अंतर्गत 16,640 रोगियों को दृष्टिविहीन से पुनः दृष्टियुक्त किया गया जिसके अंतर्गत 1000 से जयादा मोतियाबिन्द के operations निःशुल्क किये गए.लाभार्थियों के अनुभव (कुछ)[/color][/size]श्री भगीरथ, लाढोथ गाँव, रोहतक | “मैंने अपने गाँव में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की van के द्वारा  ‘नेत्र चिकित्सा शिविर’ की anouncement सुनी. मैं सुबह 9 बजे दिव्य-धाम आश्रम में पहुंचा, मुझे AIIMS में ऑपरेशन की डेट मिली. 11 बजे तक मैं वहाँ से अपने घर के लिए निकल चुका था. दो घंटे में मेरा सारा काम हो गया. इतना समय तो मुझे अपने घर से AIIMS पहुँचाने मात्र में लग जाता. हमारे नज़दीक  इन स्वास्थ्य सुविधाओ को लाने के लिए मैं संस्थान का आभारी हूँ.”[/font][/size][/font]
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    • श्री रणधीर सिंह, कुलसी गाँव, झज्जर | “11 अक्टूबर 2012 को दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की मदद से AIIMS में मेरा मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ. गरीब होने के कारण अपने बल पर मैं ये ऑपरेशन कभी भी नहीं करवा सकता था. मैं श्री आशुतोष महाराज जी का दिल से शुक्रियादा करता हूँ और संस्थान द्वारा किये गए प्रबंध सराहनीय हैं.”[/color][/color][/font][/font]
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    • भारत भूषण, 9 वर्षीय, चौथी कक्षा का छात्र, कुतुबगढ़ | भारत के दादा ने बताया की भारत को बचपन से नेत्र रोग है. वो अत्यंत नज़दीक से और एक विशेष angle से ही देख पाता था. AIIMS के डॉक्टरों को दिखाने के बाद एक उम्मीद जागी है कि वह ठीक हो जायेगा और यहाँ पर निशुल्क चिकित्सा मिलने पर हमें बहुत ख़ुशी है.[/color][/color][/font][/font]
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    • तारावती, 65 वर्षीय | “मुझे पिछले कुछ महीनों से मोतियाबिंद की शिकायत थी. आर्थिक तंगी के कारण मैं इलाज नहीं करवा पाती थी. लेकिन, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की मदद से मेरा AIIMS में निःशुल्क ऑपरेशन हुआ. और अब मैं ठीक से देख सकती हूँ.”[/color][/color][/font][/font]
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    Raje Singh Karakoti

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    Re: Divya Sandesh by "Divya Jyoti Jagriti Sansthan"
    « Reply #71 on: December 12, 2016, 11:33:29 AM »
    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (DJJS) तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के मध्य चल रहे प्राथमिक नेत्र चिकित्सा (PEC) प्रयास का विस्तारण अगले चार वर्षों तक
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    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य-धाम आश्रम के निकटतम 66 ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों (लगभग 2,00,000) को नेत्र रोगों से मुक्त करने हेतु, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (DJJS) तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली के मध्य चल रहे ‘Comprehensive Eye Care Project’ गत एक  अक्टूबर 2016 से अगले चार वर्षों तक के लिए विस्तारण किया गया. इस उपलक्ष में AIIMS के Dr. R. P. Centre for Opthalmic Sciences के प्रमुख डॉ. प्रवीण वशिष्ठ जी ने दिव्य-धाम आश्रम में चल रहे ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’(Primary Eye Care Clinic,PEC) स्वयं उपस्थित रहे. इस मोक़े पर अपने वक्तव्य में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की सराहना करते हुए डॉ. प्रवीण वशिष्ठ ने कहा, “दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान ने AIIMS के साथ मिलकर यह बहुत अच्छा initiative शुरू किया है. इसमें 2 लाख लोगों की आँखों की तकलीफ और अंधेपन को दूर करने का target है. अंधापन एक major public health problem है. भारत में 1% लोग अंधे माने जाते हैं. और 50 वर्ष से ऊपर की आयु वर्ग में तो 8% लोगों में अंधापन है. Vision 2020 ‘Right to Sight’ नाम से एक international program चल रहा है, जिसके अंतर्गत सन 2020 तक हमें पूरी तरह से अंधापन ख़त्म करना है. और यहाँ दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान के साथ जो प्रयास चल रहा है, वो इसमें बहुत बड़ी contribution है. हमें बहुत ख़ुशी होती है दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान के कार्यकर्ताओं की इतनी बड़ी टीम इसमें लगी हुई है. वे यहाँ पर भी सेवा करते हैं, AIIMS अस्पताल तक मरीजों को लेकर भी जाते हैं. उनका पूरा ख़याल भी रखते हैं. और ये सारा प्रबंध संस्थान की ओर से सभी मरीजों के लिय निःशुल्क होता है. मुझे नहीं लगता की eye care में इससे अच्छा  program कोई और हो सकता है.” अंत में, इस अवसर पर डॉ. प्रवीण वशिष्ठ ने ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’(PEC) से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं को AIIMS की ओर से certificates प्रदान कर उनका उत्साह वर्धन किया.[/color] दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान का सम्पूर्ण स्वास्थ्य प्रकल्प – ‘आरोग्य’, “स्वस्मिन् तिष्ठति इति स्वस्थः” की विचारधारा पर केन्द्रित है. अभावग्रस्त तथा दूर-दराज़ के ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करवाना ही ‘आरोग्य’ प्रकल्प की विशिष्टता है. ‘आरोग्य’ के अंतर्गत देश भर में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर (रक्तदान, पोलियो इम्यूनाइजेशन, डेंटल चिकित्सा, नेत्र चिकित्सा, माँ एवं शिशु कल्याण), निःशुल्क OPDs तथा पुरातन भारतीय मेधा पर आधारित विलक्षण योग शिविर तथा आयुर्वैदिक चिकित्सा प्रबंधों का आयोजन किया जाता है.[/color]JOURNEY THROUGH TIME | 13 YEARS | 66 VILLAGES | NORTH WEST DELHI JATKHOR & VICINITY[/font][/color] अक्टूबर 2012-2016 | DJJS व AIIMS द्वारा पश्चिमी दिल्ली के जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों के लिए संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में संयुक्त ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’ (PEC)     खोला गया[/color]नवम्बर 14, 2015 | बवाना में मोज़ान चौपाल, नज़दीक धाधुराम मार्किट, शनिवार को एक विशाल व् भव्य ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’ आयोजित किया गया| [/color]फरवरी 22-23, 2013 | जटखोड़ के निकट बहादुरगढ़ क्षेत्र में 2 दिवसीय ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’[/color]अक्टूबर 6, 2012 | संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में साप्ताहिक ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’ (PEC)  का शुभारंभ[/color]सितम्बर 29, 2012 | संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में दूसरा ‘नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’[/color]नवंबर 19, 2011 | संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में प्रथम ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’[/color]जवनरी 2006 – मार्च 2008 | Dr. N. C. Pal के सौजन्य से संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में साप्ताहिक नेत्र जांच’ OPD[/color]अगस्त – दिसम्बर 2004 | जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों में ‘नेत्र चिकित्सा शिविर’[/color]फरवरी 8-10, 2003 | जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों के लिए संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में 3 दिवसीय ‘ग्रामीण स्वास्थ्य अभियान’[/color]सन 2003 में दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान द्वारा संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम के निकटतम क्षेत्रों में स्वास्थ्य आधारित सर्वेक्षण किये गए. परिणाम स्वरुप तथाकथित क्षेत्रों में अनेकों स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं पाई गई. अतः संस्थान के सम्पूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रम – आरोग्य द्वारा जन मानस को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने हेतु प्रयास शुरू किये गए. 8 से 10 फरवरी 2003 तक संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में तीन दिवसीय “ग्रामीण स्वास्थ्य अभियान” चलाया गया जिसके अंतर्गत स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ साथ बिमारियों की रोकथाम हेतु स्वास्थ्य सम्बन्धी विभिन्न विषयों पर जागरूकता भी उत्पन्न की गयी. AIIMS, Broadways, CATS तथा केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय जैसी कई सरकारी, गैर सरकारी तथा सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से तीन दिवसीय “ग्रामीण स्वास्थ्य अभियान” द्वारा 3 लाख लाभार्थियों तक स्वास्थ्य सुविधाएँ मुह्हैया करवाई गयी. उपस्थित रोगियों में सर्वाधिक नेत्र सम्बन्धी समस्याएं पाई गयीं.[/color] क्या आप जानते हैं?[/color]विश्वभर में करीबन 28.5 करोड़ लोग नेत्रहीन हैं (WHO Visual Impairment & Blindness, 2013)
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      • इसमें से 62.4% लोगों की नेत्रहीनता वास्तव में मोतिया-बिन्द (Cataract) के कारण होती है[/color][/color][/font][/font]
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      • अतः जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों में उप-लिखित नेत्र सम्बन्धी समस्याओं को देखते हुए, सन 2004 में अगस्त से दिसम्बर माह तक विशेष नेत्र चिकित्सा मुहीम चलायी गई. इसके बाद इन्ही ग्रामीण निवासियों के सम्पूर्ण स्वास्थ्य हेतु संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में स्थायी ‘आयुर्वैदिक चिकित्सा केंद्र’ OPD शुरू कर दी गयी. तदुपरांत, अगस्त 2006 से Dr. N. C. Pal के सहयोग से दिव्य धाम आश्रम में विशेष रूप से साप्ताहिक ‘नेत्र चिकित्सा केन्द्र’ OPD चलायी जाने लगी और साथ साथ ‘नेत्र चिकित्सा शिविर’ भी लगाये गए.  सन 2008 तक चली इस साप्ताहिक चिकित्सा सुविधा के अंतर्गत 4791 नेत्र रोगियों को लाभ प्रदान किया गया. परन्तु, निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी अस्पतालों की व्यवस्था न होने के कारण लोगों में मोतिया बिन्द, कान्चबिंदु तथा अन्य नेत्र रोग कभी समाप्त नहीं हो पाए. अतः पश्चिमी दिल्ली के जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों की स्थायी नेत्र सम्बन्धी समस्याओं के निदान हेतु सन 2012 में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के Dr. R. P. Centre of Opthalmic Sciences के साथ चार वर्षीय संयुक्त ‘विस्तृत नेत्र चिकित्सा प्रकल्प’ (Comprehensive Eye Care Project) शुरू किया. इसके अंतर्गत दिव्य धाम आश्रम में साप्ताहिक ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’ (PEC) OPD शुरू की गयी तथा समय समय पर क्षेत्रीय समुदायों में ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’(Eye Screening Camps) आयोजित किये जाने लगे. ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा’ PEC (Primary Eye Care) OPD में प्रत्येक सप्ताह AIIMS के Dr. R. P. Centre of Opthalmic Sciences के नेत्र चिकित्सा विशेषज्ञ एवं टीम (an Ophthalmologist with paramedical staff) द्वारा नेत्र रोगियों को चिकित्सीय परामर्श प्रदान किया जाने लगा.[/color][/color][/font]
        दायित्व | अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS)[/font][/color]नेत्र चिकित्सा विशेषज्ञों एवं टीम अपने बुनियादी आवश्यक साधनों और उपकरणों द्वारा दिव्य धाम आश्रम में साप्ताहिक ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा’ केन्द्र व समय समय पर विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’ में बड़ी संख्या में नेत्र रोगियों को चिकित्सीय परामर्श एवं इलाज़[/color][/font][/font]
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      • साप्ताहिक ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा’ OPD व ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित ‘नेत्र चिकित्सा शिविरों’ का प्रबंधन[/color][/color][/font][/font]
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      • सफलताDJJS व AIIMS के चार वर्षीय (नवंबर 2012-2016 तक) संयुक्त प्रयास – ‘विस्तृत नेत्र चिकित्सा प्रकल्प’ (‘Comprehensive Eye Care’ Project) के अंतर्गत 16,640 रोगियों को दृष्टिविहीन से पुनः दृष्टियुक्त किया गया जिसके अंतर्गत 1000 से जयादा मोतियाबिन्द के operations निःशुल्क किये गए.लाभार्थियों के अनुभव (कुछ)[/color][/size]श्री भगीरथ, लाढोथ गाँव, रोहतक | “मैंने अपने गाँव में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की van के द्वारा  ‘नेत्र चिकित्सा शिविर’ की anouncement सुनी. मैं सुबह 9 बजे दिव्य-धाम आश्रम में पहुंचा, मुझे AIIMS में ऑपरेशन की डेट मिली. 11 बजे तक मैं वहाँ से अपने घर के लिए निकल चुका था. दो घंटे में मेरा सारा काम हो गया. इतना समय तो मुझे अपने घर से AIIMS पहुँचाने मात्र में लग जाता. हमारे नज़दीक  इन स्वास्थ्य सुविधाओ को लाने के लिए मैं संस्थान का आभारी हूँ.”[/font][/size][/font]
      • [/size][/font]
      • श्री रणधीर सिंह, कुलसी गाँव, झज्जर | “11 अक्टूबर 2012 को दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की मदद से AIIMS में मेरा मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ. गरीब होने के कारण अपने बल पर मैं ये ऑपरेशन कभी भी नहीं करवा सकता था. मैं श्री आशुतोष महाराज जी का दिल से शुक्रियादा करता हूँ और संस्थान द्वारा किये गए प्रबंध सराहनीय हैं.”[/color][/color][/font][/font]
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      • भारत भूषण, 9 वर्षीय, चौथी कक्षा का छात्र, कुतुबगढ़ | भारत के दादा ने बताया की भारत को बचपन से नेत्र रोग है. वो अत्यंत नज़दीक से और एक विशेष angle से ही देख पाता था. AIIMS के डॉक्टरों को दिखाने के बाद एक उम्मीद जागी है कि वह ठीक हो जायेगा और यहाँ पर निशुल्क चिकित्सा मिलने पर हमें बहुत ख़ुशी है.[/color][/color][/font][/font]
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      • तारावती, 65 वर्षीय | “मुझे पिछले कुछ महीनों से मोतियाबिंद की शिकायत थी. आर्थिक तंगी के कारण मैं इलाज नहीं करवा पाती थी. लेकिन, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की मदद से मेरा AIIMS में निःशुल्क ऑपरेशन हुआ. और अब मैं ठीक से देख सकती हूँ.”[/color][/color][/font][/font]
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      Raje Singh Karakoti

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      Re: Divya Sandesh by "Divya Jyoti Jagriti Sansthan"
      « Reply #72 on: December 12, 2016, 11:33:57 AM »
      दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (DJJS) तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के मध्य चल रहे प्राथमिक नेत्र चिकित्सा (PEC) प्रयास का विस्तारण अगले चार वर्षों तक
      [/color]
      दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य-धाम आश्रम के निकटतम 66 ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों (लगभग 2,00,000) को नेत्र रोगों से मुक्त करने हेतु, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (DJJS) तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली के मध्य चल रहे ‘Comprehensive Eye Care Project’ गत एक  अक्टूबर 2016 से अगले चार वर्षों तक के लिए विस्तारण किया गया. इस उपलक्ष में AIIMS के Dr. R. P. Centre for Opthalmic Sciences के प्रमुख डॉ. प्रवीण वशिष्ठ जी ने दिव्य-धाम आश्रम में चल रहे ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’(Primary Eye Care Clinic,PEC) स्वयं उपस्थित रहे. इस मोक़े पर अपने वक्तव्य में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की सराहना करते हुए डॉ. प्रवीण वशिष्ठ ने कहा, “दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान ने AIIMS के साथ मिलकर यह बहुत अच्छा initiative शुरू किया है. इसमें 2 लाख लोगों की आँखों की तकलीफ और अंधेपन को दूर करने का target है. अंधापन एक major public health problem है. भारत में 1% लोग अंधे माने जाते हैं. और 50 वर्ष से ऊपर की आयु वर्ग में तो 8% लोगों में अंधापन है. Vision 2020 ‘Right to Sight’ नाम से एक international program चल रहा है, जिसके अंतर्गत सन 2020 तक हमें पूरी तरह से अंधापन ख़त्म करना है. और यहाँ दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान के साथ जो प्रयास चल रहा है, वो इसमें बहुत बड़ी contribution है. हमें बहुत ख़ुशी होती है दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान के कार्यकर्ताओं की इतनी बड़ी टीम इसमें लगी हुई है. वे यहाँ पर भी सेवा करते हैं, AIIMS अस्पताल तक मरीजों को लेकर भी जाते हैं. उनका पूरा ख़याल भी रखते हैं. और ये सारा प्रबंध संस्थान की ओर से सभी मरीजों के लिय निःशुल्क होता है. मुझे नहीं लगता की eye care में इससे अच्छा  program कोई और हो सकता है.” अंत में, इस अवसर पर डॉ. प्रवीण वशिष्ठ ने ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’(PEC) से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं को AIIMS की ओर से certificates प्रदान कर उनका उत्साह वर्धन किया.[/color] दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान का सम्पूर्ण स्वास्थ्य प्रकल्प – ‘आरोग्य’, “स्वस्मिन् तिष्ठति इति स्वस्थः” की विचारधारा पर केन्द्रित है. अभावग्रस्त तथा दूर-दराज़ के ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करवाना ही ‘आरोग्य’ प्रकल्प की विशिष्टता है. ‘आरोग्य’ के अंतर्गत देश भर में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर (रक्तदान, पोलियो इम्यूनाइजेशन, डेंटल चिकित्सा, नेत्र चिकित्सा, माँ एवं शिशु कल्याण), निःशुल्क OPDs तथा पुरातन भारतीय मेधा पर आधारित विलक्षण योग शिविर तथा आयुर्वैदिक चिकित्सा प्रबंधों का आयोजन किया जाता है.[/color]JOURNEY THROUGH TIME | 13 YEARS | 66 VILLAGES | NORTH WEST DELHI JATKHOR & VICINITY[/font][/color] अक्टूबर 2012-2016 | DJJS व AIIMS द्वारा पश्चिमी दिल्ली के जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों के लिए संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में संयुक्त ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’ (PEC)     खोला गया[/color]नवम्बर 14, 2015 | बवाना में मोज़ान चौपाल, नज़दीक धाधुराम मार्किट, शनिवार को एक विशाल व् भव्य ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’ आयोजित किया गया| [/color]फरवरी 22-23, 2013 | जटखोड़ के निकट बहादुरगढ़ क्षेत्र में 2 दिवसीय ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’[/color]अक्टूबर 6, 2012 | संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में साप्ताहिक ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’ (PEC)  का शुभारंभ[/color]सितम्बर 29, 2012 | संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में दूसरा ‘नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’[/color]नवंबर 19, 2011 | संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में प्रथम ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’[/color]जवनरी 2006 – मार्च 2008 | Dr. N. C. Pal के सौजन्य से संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में साप्ताहिक नेत्र जांच’ OPD[/color]अगस्त – दिसम्बर 2004 | जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों में ‘नेत्र चिकित्सा शिविर’[/color]फरवरी 8-10, 2003 | जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों के लिए संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में 3 दिवसीय ‘ग्रामीण स्वास्थ्य अभियान’[/color]सन 2003 में दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान द्वारा संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम के निकटतम क्षेत्रों में स्वास्थ्य आधारित सर्वेक्षण किये गए. परिणाम स्वरुप तथाकथित क्षेत्रों में अनेकों स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं पाई गई. अतः संस्थान के सम्पूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रम – आरोग्य द्वारा जन मानस को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने हेतु प्रयास शुरू किये गए. 8 से 10 फरवरी 2003 तक संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में तीन दिवसीय “ग्रामीण स्वास्थ्य अभियान” चलाया गया जिसके अंतर्गत स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ साथ बिमारियों की रोकथाम हेतु स्वास्थ्य सम्बन्धी विभिन्न विषयों पर जागरूकता भी उत्पन्न की गयी. AIIMS, Broadways, CATS तथा केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय जैसी कई सरकारी, गैर सरकारी तथा सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से तीन दिवसीय “ग्रामीण स्वास्थ्य अभियान” द्वारा 3 लाख लाभार्थियों तक स्वास्थ्य सुविधाएँ मुह्हैया करवाई गयी. उपस्थित रोगियों में सर्वाधिक नेत्र सम्बन्धी समस्याएं पाई गयीं.[/color] क्या आप जानते हैं?[/color]विश्वभर में करीबन 28.5 करोड़ लोग नेत्रहीन हैं (WHO Visual Impairment & Blindness, 2013)
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        • इनमे से 1.5 करोड़ नेत्रहीन लोग भारत के निवासी हैं (WHO Visual Impairment & Blindness, 2013)[/color][/color][/font][/font]
        • [/size][/font]
        • 80% नेत्रहीनता साध्य (curable) है क्योंकि नेत्रहीनता जिन नेत्र रोगों द्वारा होती है वे नेत्र-रोग साध्य (curable) होते हैं. जैसे की – Corneal Disorder, Diabetic Retinopathy, Cataract, Glaucoma & Refractive Error इत्यादि[/color][/color][/font][/font]
        • [/size][/font]
        • इसमें से 62.4% लोगों की नेत्रहीनता वास्तव में मोतिया-बिन्द (Cataract) के कारण होती है[/color][/color][/font][/font]
        • [/size][/font]
        • अतः जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों में उप-लिखित नेत्र सम्बन्धी समस्याओं को देखते हुए, सन 2004 में अगस्त से दिसम्बर माह तक विशेष नेत्र चिकित्सा मुहीम चलायी गई. इसके बाद इन्ही ग्रामीण निवासियों के सम्पूर्ण स्वास्थ्य हेतु संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में स्थायी ‘आयुर्वैदिक चिकित्सा केंद्र’ OPD शुरू कर दी गयी. तदुपरांत, अगस्त 2006 से Dr. N. C. Pal के सहयोग से दिव्य धाम आश्रम में विशेष रूप से साप्ताहिक ‘नेत्र चिकित्सा केन्द्र’ OPD चलायी जाने लगी और साथ साथ ‘नेत्र चिकित्सा शिविर’ भी लगाये गए.  सन 2008 तक चली इस साप्ताहिक चिकित्सा सुविधा के अंतर्गत 4791 नेत्र रोगियों को लाभ प्रदान किया गया. परन्तु, निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी अस्पतालों की व्यवस्था न होने के कारण लोगों में मोतिया बिन्द, कान्चबिंदु तथा अन्य नेत्र रोग कभी समाप्त नहीं हो पाए. अतः पश्चिमी दिल्ली के जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों की स्थायी नेत्र सम्बन्धी समस्याओं के निदान हेतु सन 2012 में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के Dr. R. P. Centre of Opthalmic Sciences के साथ चार वर्षीय संयुक्त ‘विस्तृत नेत्र चिकित्सा प्रकल्प’ (Comprehensive Eye Care Project) शुरू किया. इसके अंतर्गत दिव्य धाम आश्रम में साप्ताहिक ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’ (PEC) OPD शुरू की गयी तथा समय समय पर क्षेत्रीय समुदायों में ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’(Eye Screening Camps) आयोजित किये जाने लगे. ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा’ PEC (Primary Eye Care) OPD में प्रत्येक सप्ताह AIIMS के Dr. R. P. Centre of Opthalmic Sciences के नेत्र चिकित्सा विशेषज्ञ एवं टीम (an Ophthalmologist with paramedical staff) द्वारा नेत्र रोगियों को चिकित्सीय परामर्श प्रदान किया जाने लगा.[/color][/color][/font]
          दायित्व | अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS)[/font][/color]नेत्र चिकित्सा विशेषज्ञों एवं टीम अपने बुनियादी आवश्यक साधनों और उपकरणों द्वारा दिव्य धाम आश्रम में साप्ताहिक ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा’ केन्द्र व समय समय पर विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’ में बड़ी संख्या में नेत्र रोगियों को चिकित्सीय परामर्श एवं इलाज़[/color][/font][/font]
        • [/size][/font]
        • आवश्यकता अनुसार मोतियाबिन्द रोगियों को AIIMS में निःशुल्क Operation/Surgery की सुविधा[/color][/color][/font][/font]
        • [/size][/font]
        • DJJS कार्यकर्ताओं के लिए समय समय पर प्रशिक्षण कार्यशालाएं[/color][/color][/font][/font]
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        • दायित्व | दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान (DJJS)[/color][/size]ग्रामीण समुदायों में संस्थान के कार्यकर्ताओं द्वारा ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा’ प्राप्त करने हेतु प्रोत्साहन एवं  जागरूकता[/font][/size][/font]
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        • संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य-धाम आश्रम में साप्ताहिक ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’  तथा ग्रामीण समुदायों में समय समय पर ‘नेत्र चिकित्सा शिविरों’ (Comprehensive Screening Eye Camps) का आयोजन व प्रबंध[/color][/color][/font][/font]
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        • नेत्र रोगियों को आवश्यकता अनुसार कम से कम खर्चे में चश्में उपलब्ध कराना[/color][/color][/font][/font]
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        • नेत्र रोगियों को आवश्यकता अनुसार निःशुल्क दवाइयां[/color][/color][/font][/font]
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        • नेत्र रोगियों व संग उपस्थित स्वजनों के लिए नेत्र रोग सम्बन्धी स्वास्थ्य जागरूकता[/color][/color][/font][/font]
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        • AIIMS में निःशुल्क ऑपरेशन की कागज़ी कार्यवाही व सम्पूर्ण प्रबंध[/color][/color][/font][/font]
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        • AIIMS में ऑपरेशन हेतु आने जाने की निःशुल्क वाहन सुविधा[/color][/color][/font][/font]
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        • AIIMS के चिकित्सा विशेषज्ञों के वेतन का दायित्व[/color][/color][/font][/font]
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        • साप्ताहिक ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा’ OPD व ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित ‘नेत्र चिकित्सा शिविरों’ का प्रबंधन[/color][/color][/font][/font]
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        • सफलताDJJS व AIIMS के चार वर्षीय (नवंबर 2012-2016 तक) संयुक्त प्रयास – ‘विस्तृत नेत्र चिकित्सा प्रकल्प’ (‘Comprehensive Eye Care’ Project) के अंतर्गत 16,640 रोगियों को दृष्टिविहीन से पुनः दृष्टियुक्त किया गया जिसके अंतर्गत 1000 से जयादा मोतियाबिन्द के operations निःशुल्क किये गए.लाभार्थियों के अनुभव (कुछ)[/color][/size]श्री भगीरथ, लाढोथ गाँव, रोहतक | “मैंने अपने गाँव में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की van के द्वारा  ‘नेत्र चिकित्सा शिविर’ की anouncement सुनी. मैं सुबह 9 बजे दिव्य-धाम आश्रम में पहुंचा, मुझे AIIMS में ऑपरेशन की डेट मिली. 11 बजे तक मैं वहाँ से अपने घर के लिए निकल चुका था. दो घंटे में मेरा सारा काम हो गया. इतना समय तो मुझे अपने घर से AIIMS पहुँचाने मात्र में लग जाता. हमारे नज़दीक  इन स्वास्थ्य सुविधाओ को लाने के लिए मैं संस्थान का आभारी हूँ.”[/font][/size][/font]
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        • श्री रणधीर सिंह, कुलसी गाँव, झज्जर | “11 अक्टूबर 2012 को दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की मदद से AIIMS में मेरा मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ. गरीब होने के कारण अपने बल पर मैं ये ऑपरेशन कभी भी नहीं करवा सकता था. मैं श्री आशुतोष महाराज जी का दिल से शुक्रियादा करता हूँ और संस्थान द्वारा किये गए प्रबंध सराहनीय हैं.”[/color][/color][/font][/font]
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        • भारत भूषण, 9 वर्षीय, चौथी कक्षा का छात्र, कुतुबगढ़ | भारत के दादा ने बताया की भारत को बचपन से नेत्र रोग है. वो अत्यंत नज़दीक से और एक विशेष angle से ही देख पाता था. AIIMS के डॉक्टरों को दिखाने के बाद एक उम्मीद जागी है कि वह ठीक हो जायेगा और यहाँ पर निशुल्क चिकित्सा मिलने पर हमें बहुत ख़ुशी है.[/color][/color][/font][/font]
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        • तारावती, 65 वर्षीय | “मुझे पिछले कुछ महीनों से मोतियाबिंद की शिकायत थी. आर्थिक तंगी के कारण मैं इलाज नहीं करवा पाती थी. लेकिन, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की मदद से मेरा AIIMS में निःशुल्क ऑपरेशन हुआ. और अब मैं ठीक से देख सकती हूँ.”[/color][/color][/font][/font]
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        Re: Divya Sandesh by "Divya Jyoti Jagriti Sansthan"
        « Reply #73 on: December 12, 2016, 11:34:15 AM »
        दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (DJJS) तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के मध्य चल रहे प्राथमिक नेत्र चिकित्सा (PEC) प्रयास का विस्तारण अगले चार वर्षों तक
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        दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य-धाम आश्रम के निकटतम 66 ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों (लगभग 2,00,000) को नेत्र रोगों से मुक्त करने हेतु, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (DJJS) तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली के मध्य चल रहे ‘Comprehensive Eye Care Project’ गत एक  अक्टूबर 2016 से अगले चार वर्षों तक के लिए विस्तारण किया गया. इस उपलक्ष में AIIMS के Dr. R. P. Centre for Opthalmic Sciences के प्रमुख डॉ. प्रवीण वशिष्ठ जी ने दिव्य-धाम आश्रम में चल रहे ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’(Primary Eye Care Clinic,PEC) स्वयं उपस्थित रहे. इस मोक़े पर अपने वक्तव्य में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की सराहना करते हुए डॉ. प्रवीण वशिष्ठ ने कहा, “दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान ने AIIMS के साथ मिलकर यह बहुत अच्छा initiative शुरू किया है. इसमें 2 लाख लोगों की आँखों की तकलीफ और अंधेपन को दूर करने का target है. अंधापन एक major public health problem है. भारत में 1% लोग अंधे माने जाते हैं. और 50 वर्ष से ऊपर की आयु वर्ग में तो 8% लोगों में अंधापन है. Vision 2020 ‘Right to Sight’ नाम से एक international program चल रहा है, जिसके अंतर्गत सन 2020 तक हमें पूरी तरह से अंधापन ख़त्म करना है. और यहाँ दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान के साथ जो प्रयास चल रहा है, वो इसमें बहुत बड़ी contribution है. हमें बहुत ख़ुशी होती है दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान के कार्यकर्ताओं की इतनी बड़ी टीम इसमें लगी हुई है. वे यहाँ पर भी सेवा करते हैं, AIIMS अस्पताल तक मरीजों को लेकर भी जाते हैं. उनका पूरा ख़याल भी रखते हैं. और ये सारा प्रबंध संस्थान की ओर से सभी मरीजों के लिय निःशुल्क होता है. मुझे नहीं लगता की eye care में इससे अच्छा  program कोई और हो सकता है.” अंत में, इस अवसर पर डॉ. प्रवीण वशिष्ठ ने ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’(PEC) से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं को AIIMS की ओर से certificates प्रदान कर उनका उत्साह वर्धन किया.[/color] दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान का सम्पूर्ण स्वास्थ्य प्रकल्प – ‘आरोग्य’, “स्वस्मिन् तिष्ठति इति स्वस्थः” की विचारधारा पर केन्द्रित है. अभावग्रस्त तथा दूर-दराज़ के ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करवाना ही ‘आरोग्य’ प्रकल्प की विशिष्टता है. ‘आरोग्य’ के अंतर्गत देश भर में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर (रक्तदान, पोलियो इम्यूनाइजेशन, डेंटल चिकित्सा, नेत्र चिकित्सा, माँ एवं शिशु कल्याण), निःशुल्क OPDs तथा पुरातन भारतीय मेधा पर आधारित विलक्षण योग शिविर तथा आयुर्वैदिक चिकित्सा प्रबंधों का आयोजन किया जाता है.[/color]JOURNEY THROUGH TIME | 13 YEARS | 66 VILLAGES | NORTH WEST DELHI JATKHOR & VICINITY[/font][/color] अक्टूबर 2012-2016 | DJJS व AIIMS द्वारा पश्चिमी दिल्ली के जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों के लिए संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में संयुक्त ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’ (PEC)     खोला गया[/color]नवम्बर 14, 2015 | बवाना में मोज़ान चौपाल, नज़दीक धाधुराम मार्किट, शनिवार को एक विशाल व् भव्य ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’ आयोजित किया गया| [/color]फरवरी 22-23, 2013 | जटखोड़ के निकट बहादुरगढ़ क्षेत्र में 2 दिवसीय ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’[/color]अक्टूबर 6, 2012 | संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में साप्ताहिक ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’ (PEC)  का शुभारंभ[/color]सितम्बर 29, 2012 | संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में दूसरा ‘नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’[/color]नवंबर 19, 2011 | संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में प्रथम ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’[/color]जवनरी 2006 – मार्च 2008 | Dr. N. C. Pal के सौजन्य से संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में साप्ताहिक नेत्र जांच’ OPD[/color]अगस्त – दिसम्बर 2004 | जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों में ‘नेत्र चिकित्सा शिविर’[/color]फरवरी 8-10, 2003 | जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों के लिए संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में 3 दिवसीय ‘ग्रामीण स्वास्थ्य अभियान’[/color]सन 2003 में दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान द्वारा संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम के निकटतम क्षेत्रों में स्वास्थ्य आधारित सर्वेक्षण किये गए. परिणाम स्वरुप तथाकथित क्षेत्रों में अनेकों स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं पाई गई. अतः संस्थान के सम्पूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रम – आरोग्य द्वारा जन मानस को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने हेतु प्रयास शुरू किये गए. 8 से 10 फरवरी 2003 तक संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में तीन दिवसीय “ग्रामीण स्वास्थ्य अभियान” चलाया गया जिसके अंतर्गत स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ साथ बिमारियों की रोकथाम हेतु स्वास्थ्य सम्बन्धी विभिन्न विषयों पर जागरूकता भी उत्पन्न की गयी. AIIMS, Broadways, CATS तथा केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय जैसी कई सरकारी, गैर सरकारी तथा सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से तीन दिवसीय “ग्रामीण स्वास्थ्य अभियान” द्वारा 3 लाख लाभार्थियों तक स्वास्थ्य सुविधाएँ मुह्हैया करवाई गयी. उपस्थित रोगियों में सर्वाधिक नेत्र सम्बन्धी समस्याएं पाई गयीं.[/color] क्या आप जानते हैं?[/color]विश्वभर में करीबन 28.5 करोड़ लोग नेत्रहीन हैं (WHO Visual Impairment & Blindness, 2013)
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          • इनमे से 1.5 करोड़ नेत्रहीन लोग भारत के निवासी हैं (WHO Visual Impairment & Blindness, 2013)[/color][/color][/font][/font]
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          • 80% नेत्रहीनता साध्य (curable) है क्योंकि नेत्रहीनता जिन नेत्र रोगों द्वारा होती है वे नेत्र-रोग साध्य (curable) होते हैं. जैसे की – Corneal Disorder, Diabetic Retinopathy, Cataract, Glaucoma & Refractive Error इत्यादि[/color][/color][/font][/font]
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          • इसमें से 62.4% लोगों की नेत्रहीनता वास्तव में मोतिया-बिन्द (Cataract) के कारण होती है[/color][/color][/font][/font]
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          • अतः जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों में उप-लिखित नेत्र सम्बन्धी समस्याओं को देखते हुए, सन 2004 में अगस्त से दिसम्बर माह तक विशेष नेत्र चिकित्सा मुहीम चलायी गई. इसके बाद इन्ही ग्रामीण निवासियों के सम्पूर्ण स्वास्थ्य हेतु संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य धाम आश्रम में स्थायी ‘आयुर्वैदिक चिकित्सा केंद्र’ OPD शुरू कर दी गयी. तदुपरांत, अगस्त 2006 से Dr. N. C. Pal के सहयोग से दिव्य धाम आश्रम में विशेष रूप से साप्ताहिक ‘नेत्र चिकित्सा केन्द्र’ OPD चलायी जाने लगी और साथ साथ ‘नेत्र चिकित्सा शिविर’ भी लगाये गए.  सन 2008 तक चली इस साप्ताहिक चिकित्सा सुविधा के अंतर्गत 4791 नेत्र रोगियों को लाभ प्रदान किया गया. परन्तु, निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी अस्पतालों की व्यवस्था न होने के कारण लोगों में मोतिया बिन्द, कान्चबिंदु तथा अन्य नेत्र रोग कभी समाप्त नहीं हो पाए. अतः पश्चिमी दिल्ली के जटखोड़ व निकटतम ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों की स्थायी नेत्र सम्बन्धी समस्याओं के निदान हेतु सन 2012 में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के Dr. R. P. Centre of Opthalmic Sciences के साथ चार वर्षीय संयुक्त ‘विस्तृत नेत्र चिकित्सा प्रकल्प’ (Comprehensive Eye Care Project) शुरू किया. इसके अंतर्गत दिव्य धाम आश्रम में साप्ताहिक ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’ (PEC) OPD शुरू की गयी तथा समय समय पर क्षेत्रीय समुदायों में ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’(Eye Screening Camps) आयोजित किये जाने लगे. ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा’ PEC (Primary Eye Care) OPD में प्रत्येक सप्ताह AIIMS के Dr. R. P. Centre of Opthalmic Sciences के नेत्र चिकित्सा विशेषज्ञ एवं टीम (an Ophthalmologist with paramedical staff) द्वारा नेत्र रोगियों को चिकित्सीय परामर्श प्रदान किया जाने लगा.[/color][/color][/font]
            दायित्व | अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS)[/font][/color]नेत्र चिकित्सा विशेषज्ञों एवं टीम अपने बुनियादी आवश्यक साधनों और उपकरणों द्वारा दिव्य धाम आश्रम में साप्ताहिक ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा’ केन्द्र व समय समय पर विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित ‘निःशुल्क नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर’ में बड़ी संख्या में नेत्र रोगियों को चिकित्सीय परामर्श एवं इलाज़[/color][/font][/font]
          • [/size][/font]
          • आवश्यकता अनुसार मोतियाबिन्द रोगियों को AIIMS में निःशुल्क Operation/Surgery की सुविधा[/color][/color][/font][/font]
          • [/size][/font]
          • DJJS कार्यकर्ताओं के लिए समय समय पर प्रशिक्षण कार्यशालाएं[/color][/color][/font][/font]
          • [/size][/font]
          • दायित्व | दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान (DJJS)[/color][/size]ग्रामीण समुदायों में संस्थान के कार्यकर्ताओं द्वारा ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा’ प्राप्त करने हेतु प्रोत्साहन एवं  जागरूकता[/font][/size][/font]
          • [/size][/font]
          • संस्थान के जटखोड़ स्थित दिव्य-धाम आश्रम में साप्ताहिक ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा केन्द्र’  तथा ग्रामीण समुदायों में समय समय पर ‘नेत्र चिकित्सा शिविरों’ (Comprehensive Screening Eye Camps) का आयोजन व प्रबंध[/color][/color][/font][/font]
          • [/size][/font]
          • नेत्र रोगियों को आवश्यकता अनुसार कम से कम खर्चे में चश्में उपलब्ध कराना[/color][/color][/font][/font]
          • [/size][/font]
          • नेत्र रोगियों को आवश्यकता अनुसार निःशुल्क दवाइयां[/color][/color][/font][/font]
          • [/size][/font]
          • नेत्र रोगियों व संग उपस्थित स्वजनों के लिए नेत्र रोग सम्बन्धी स्वास्थ्य जागरूकता[/color][/color][/font][/font]
          • [/size][/font]
          • AIIMS में निःशुल्क ऑपरेशन की कागज़ी कार्यवाही व सम्पूर्ण प्रबंध[/color][/color][/font][/font]
          • [/size][/font]
          • AIIMS में ऑपरेशन हेतु आने जाने की निःशुल्क वाहन सुविधा[/color][/color][/font][/font]
          • [/size][/font]
          • AIIMS के चिकित्सा विशेषज्ञों के वेतन का दायित्व[/color][/color][/font][/font]
          • [/size][/font]
          • साप्ताहिक ‘प्राथमिक नेत्र चिकित्सा’ OPD व ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित ‘नेत्र चिकित्सा शिविरों’ का प्रबंधन[/color][/color][/font][/font]
          • [/size][/font]
          • सफलताDJJS व AIIMS के चार वर्षीय (नवंबर 2012-2016 तक) संयुक्त प्रयास – ‘विस्तृत नेत्र चिकित्सा प्रकल्प’ (‘Comprehensive Eye Care’ Project) के अंतर्गत 16,640 रोगियों को दृष्टिविहीन से पुनः दृष्टियुक्त किया गया जिसके अंतर्गत 1000 से जयादा मोतियाबिन्द के operations निःशुल्क किये गए.लाभार्थियों के अनुभव (कुछ)[/color][/size]श्री भगीरथ, लाढोथ गाँव, रोहतक | “मैंने अपने गाँव में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की van के द्वारा  ‘नेत्र चिकित्सा शिविर’ की anouncement सुनी. मैं सुबह 9 बजे दिव्य-धाम आश्रम में पहुंचा, मुझे AIIMS में ऑपरेशन की डेट मिली. 11 बजे तक मैं वहाँ से अपने घर के लिए निकल चुका था. दो घंटे में मेरा सारा काम हो गया. इतना समय तो मुझे अपने घर से AIIMS पहुँचाने मात्र में लग जाता. हमारे नज़दीक  इन स्वास्थ्य सुविधाओ को लाने के लिए मैं संस्थान का आभारी हूँ.”[/font][/size][/font]
          • [/size][/font]
          • श्री रणधीर सिंह, कुलसी गाँव, झज्जर | “11 अक्टूबर 2012 को दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की मदद से AIIMS में मेरा मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ. गरीब होने के कारण अपने बल पर मैं ये ऑपरेशन कभी भी नहीं करवा सकता था. मैं श्री आशुतोष महाराज जी का दिल से शुक्रियादा करता हूँ और संस्थान द्वारा किये गए प्रबंध सराहनीय हैं.”[/color][/color][/font][/font]
          • [/size][/font]
          • भारत भूषण, 9 वर्षीय, चौथी कक्षा का छात्र, कुतुबगढ़ | भारत के दादा ने बताया की भारत को बचपन से नेत्र रोग है. वो अत्यंत नज़दीक से और एक विशेष angle से ही देख पाता था. AIIMS के डॉक्टरों को दिखाने के बाद एक उम्मीद जागी है कि वह ठीक हो जायेगा और यहाँ पर निशुल्क चिकित्सा मिलने पर हमें बहुत ख़ुशी है.[/color][/color][/font][/font]
          • [/size][/font]
          • तारावती, 65 वर्षीय | “मुझे पिछले कुछ महीनों से मोतियाबिंद की शिकायत थी. आर्थिक तंगी के कारण मैं इलाज नहीं करवा पाती थी. लेकिन, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की मदद से मेरा AIIMS में निःशुल्क ऑपरेशन हुआ. और अब मैं ठीक से देख सकती हूँ.”[/color][/color][/font][/font]
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          Raje Singh Karakoti

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          « Reply #74 on: December 17, 2016, 04:08:14 PM »
          Respect Women, Elevate the World | 16 Day Awareness Campaign against Gender Based Violence from Nov 25, 2016 (End Violence Day) to Dec 10, 2016 (Human Rights Day)[/size]International Day for the Elimination of Violence against Women being a global observance evinces existence of violence against women across globe. Having its roots in discrimination and patriarchal mindsets, the disease is swelling in every sphere including households, workplaces and society, endangering women survival. Since last year, post introduction by UN, pledge to end violence is not made just on 25th[/size] November, but commemorated globe over in the form of a campaign from November 25 i.e. International Day for the Elimination of Violence against Women till December 10 which is Human Rights Day, tagging violence as a gross violation of human right.[/color]Acknowledging the magnitude of the problem and then address it, during this period, Santulan observes 16 days’ campaign under the banner of ‘Respect Women, Elevate the World’ across India to spread the word among masses for re-establishing lost status of women and reiterating Zero Tolerance to violence. After creating thousands of beneficiaries last year, this year, the organization objects to create awareness in the institutions that witness varied mindsets & age groups where such violence breathes and is thus conducting workshops in schools, colleges and offices. This year, the campaign is being conducted as a sub-campaign under the ongoing women empowerment drive against * selective abortions-‘Tu Hai Shakti’. From raw mindsets to prejudiced, it endeavours to cater to the root cause by rectifying the falsely created values against women and wiping mud of myths and misconceptions over real facts.[/font][/color][/size]The workshop encompasses showcase of forum theatre, a powerful and influential visual tool, to explain various forms of violence viz, female feticide, gender discrimination resulting in stereotyping, domestic violence and exploitation, with a window inviting attendees’ opinions on the displayed scenario. A video summarising various forms of crime against women and their inter-linkage is also being screened. Further, an edifying presentation supported with discourse is presented highlighting appalling statistics of rising crime against women, female feticide being the worst form and foundation of other crimes. By means of presentation, a vigorous attempt is being made to elucidate the illusions in regards to women respect and value, right to funeral pyre, responsibility of * of the child, less no. of girls means less crime, educated people do not contribute to crime rate, to name a few. Moreover, special emphasis is being laid on the two-pronged solution to this hazard, one is to recreate respect for women in society and other is to make woman understand her self-worth, as directed by head and founder of the organization Shri Ashutosh Maharaj Ji.[/color][/size]The organization is working ceaselessly to put a full stop to the pervasive and entrenched ill practices against girl child and bring the situation back to state of ‘Santulan’. With its numerous ongoing campaigns during the year in this regard, it is targeting majorly on eradication of female feticide, not from society but mindsets, reiterate value for girl child and empower woman through self-realization.[/color][/font]

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          « Reply #75 on: December 17, 2016, 04:10:23 PM »
          Respect Women, Elevate the World | 16 Day Awareness Campaign against Gender Based Violence from Nov 25, 2016 (End Violence Day) to Dec 10, 2016 (Human Rights Day)
          International Day for the Elimination of Violence against Women being a global observance evinces existence of violence against women across globe. Having its roots in discrimination and patriarchal mindsets, the disease is swelling in every sphere including households, workplaces and society, endangering women survival. Since last year, post introduction by UN, pledge to end violence is not made just on 25th November, but commemorated globe over in the form of a campaign from November 25 i.e. International Day for the Elimination of Violence against Women till December 10 which is Human Rights Day, tagging violence as a gross violation of human right.

          [/color]Acknowledging the magnitude of the problem and then address it, during this period, Santulan observes 16 days’ campaign under the banner of ‘Respect Women, Elevate the World’ across India to spread the word among masses for re-establishing lost status of women and reiterating Zero Tolerance to violence. After creating thousands of beneficiaries last year, this year, the organization objects to create awareness in the institutions that witness varied mindsets & age groups where such violence breathes and is thus conducting workshops in schools, colleges and offices. This year, the campaign is being conducted as a sub-campaign under the ongoing women empowerment drive against * selective abortions-‘Tu Hai Shakti’. From raw mindsets to prejudiced, it endeavours to cater to the root cause by rectifying the falsely created values against women and wiping mud of myths and misconceptions over real facts.The workshop encompasses showcase of forum theatre, a powerful and influential visual tool, to explain various forms of violence viz, female feticide, gender discrimination resulting in stereotyping, domestic violence and exploitation, with a window inviting attendees’ opinions on the displayed scenario. A video summarising various forms of crime against women and their inter-linkage is also being screened. Further, an edifying presentation supported with discourse is presented highlighting appalling statistics of rising crime against women, female feticide being the worst form and foundation of other crimes. By means of presentation, a vigorous attempt is being made to elucidate the illusions in regards to women respect and value, right to funeral pyre, responsibility of * of the child, less no. of girls means less crime, educated people do not contribute to crime rate, to name a few. Moreover, special emphasis is being laid on the two-pronged solution to this hazard, one is to recreate respect for women in society and other is to make woman understand her self-worth, as directed by head and founder of the organization Shri Ashutosh Maharaj Ji.The organization is working ceaselessly to put a full stop to the pervasive and entrenched ill practices against girl child and bring the situation back to state of ‘Santulan’. With its numerous ongoing campaigns during the year in this regard, it is targeting majorly on eradication of female feticide, not from society but mindsets, reiterate value for girl child and empower woman through self-realization.

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          « Reply #76 on: December 17, 2016, 04:11:52 PM »
          Respect Women, Elevate the World | 16 Day Awareness Campaign against Gender Based Violence from Nov 25, 2016 (End Violence Day) to Dec 10, 2016 (Human Rights Day)[/size]International Day for the Elimination of Violence against Women being a global observance evinces existence of violence against women across globe. Having its roots in discrimination and patriarchal mindsets, the disease is swelling in every sphere including households, workplaces and society, endangering women survival. Since last year, post introduction by UN, pledge to end violence is not made just on 25th November, but commemorated globe over in the form of a campaign from November 25 i.e. International Day for the Elimination of Violence against Women till December 10 which is Human Rights Day, tagging violence as a gross violation of human right.[/size][/font]
          [/color][/size]Acknowledging the magnitude of the problem and then address it, during this period, Santulan observes 16 days’ campaign under the banner of ‘Respect Women, Elevate the World’ across India to spread the word among masses for re-establishing lost status of women and reiterating Zero Tolerance to violence. After creating thousands of beneficiaries last year, this year, the organization objects to create awareness in the institutions that witness varied mindsets & age groups where such violence breathes and is thus conducting workshops in schools, colleges and offices. This year, the campaign is being conducted as a sub-campaign under the ongoing women empowerment drive against * selective abortions-‘Tu Hai Shakti’. From raw mindsets to prejudiced, it endeavours to cater to the root cause by rectifying the falsely created values against women and wiping mud of myths and misconceptions over real facts.[/color][/size]The workshop encompasses showcase of forum theatre, a powerful and influential visual tool, to explain various forms of violence viz, female feticide, gender discrimination resulting in stereotyping, domestic violence and exploitation, with a window inviting attendees’ opinions on the displayed scenario. A video summarising various forms of crime against women and their inter-linkage is also being screened. Further, an edifying presentation supported with discourse is presented highlighting appalling statistics of rising crime against women, female feticide being the worst form and foundation of other crimes. By means of presentation, a vigorous attempt is being made to elucidate the illusions in regards to women respect and value, right to funeral pyre, responsibility of * of the child, less no. of girls means less crime, educated people do not contribute to crime rate, to name a few. Moreover, special emphasis is being laid on the two-pronged solution to this hazard, one is to recreate respect for women in society and other is to make woman understand her self-worth, as directed by head and founder of the organization Shri Ashutosh Maharaj Ji.[/color][/size]The organization is working ceaselessly to put a full stop to the pervasive and entrenched ill practices against girl child and bring the situation back to state of ‘Santulan’. With its numerous ongoing campaigns during the year in this regard, it is targeting majorly on eradication of female feticide, not from society but mindsets, reiterate value for girl child and empower woman through self-realization.[/color]

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          « Reply #77 on: December 17, 2016, 04:12:40 PM »
          Respect Women, Elevate the World | 16 Day Awareness Campaign against Gender Based Violence from Nov 25, 2016 (End Violence Day) to Dec 10, 2016 (Human Rights Day)[/color][/font]International Day for the Elimination of Violence against Women being a global observance evinces existence of violence against women across globe. Having its roots in discrimination and patriarchal mindsets, the disease is swelling in every sphere including households, workplaces and society, endangering women survival. Since last year, post introduction by UN, pledge to end violence is not made just on 25th November, but commemorated globe over in the form of a campaign from November 25 i.e. International Day for the Elimination of Violence against Women till December 10 which is Human Rights Day, tagging violence as a gross violation of human right.[/color][/size][/size]Acknowledging the magnitude of the problem and then address it, during this period, Santulan observes 16 days’ campaign under the banner of ‘Respect Women, Elevate the World’ across India to spread the word among masses for re-establishing lost status of women and reiterating Zero Tolerance to violence. After creating thousands of beneficiaries last year, this year, the organization objects to create awareness in the institutions that witness varied mindsets & age groups where such violence breathes and is thus conducting workshops in schools, colleges and offices. This year, the campaign is being conducted as a sub-campaign under the ongoing women empowerment drive against * selective abortions-‘Tu Hai Shakti’. From raw mindsets to prejudiced, it endeavours to cater to the root cause by rectifying the falsely created values against women and wiping mud of myths and misconceptions over real facts.[/size][/color]The workshop encompasses showcase of forum theatre, a powerful and influential visual tool, to explain various forms of violence viz, female feticide, gender discrimination resulting in stereotyping, domestic violence and exploitation, with a window inviting attendees’ opinions on the displayed scenario. A video summarising various forms of crime against women and their inter-linkage is also being screened. Further, an edifying presentation supported with discourse is presented highlighting appalling statistics of rising crime against women, female feticide being the worst form and foundation of other crimes. By means of presentation, a vigorous attempt is being made to elucidate the illusions in regards to women respect and value, right to funeral pyre, responsibility of * of the child, less no. of girls means less crime, educated people do not contribute to crime rate, to name a few. Moreover, special emphasis is being laid on the two-pronged solution to this hazard, one is to recreate respect for women in society and other is to make woman understand her self-worth, as directed by head and founder of the organization Shri Ashutosh Maharaj Ji.[/font][/font][/size][/color]The organization is working ceaselessly to put a full stop to the pervasive and entrenched ill practices against girl child and bring the situation back to state of ‘Santulan’. With its numerous ongoing campaigns during the year in this regard, it is targeting majorly on eradication of female feticide, not from society but mindsets, reiterate value for girl child and empower woman through self-realization.[/font][/font]

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          « Reply #78 on: December 17, 2016, 04:13:47 PM »
          Respect Women, Elevate the World | 16 Day Awareness Campaign against Gender Based Violence from Nov 25, 2016 (End Violence Day) to Dec 10, 2016 (Human Rights Day)[/color][/font]
          International Day for the Elimination of Violence against Women being a global observance evinces existence of violence against women across globe. Having its roots in discrimination and patriarchal mindsets, the disease is swelling in every sphere including households, workplaces and society, endangering women survival. Since last year, post introduction by UN, pledge to end violence is not made just on 25th November, but commemorated globe over in the form of a campaign from November 25 i.e. International Day for the Elimination of Violence against Women till December 10 which is Human Rights Day, tagging violence as a gross violation of human right.[/color][/size][/size]Acknowledging the magnitude of the problem and then address it, during this period, Santulan observes 16 days’ campaign under the banner of ‘Respect Women, Elevate the World’ across India to spread the word among masses for re-establishing lost status of women and reiterating Zero Tolerance to violence. After creating thousands of beneficiaries last year, this year, the organization objects to create awareness in the institutions that witness varied mindsets & age groups where such violence breathes and is thus conducting workshops in schools, colleges and offices. This year, the campaign is being conducted as a sub-campaign under the ongoing women empowerment drive against * selective abortions-‘Tu Hai Shakti’. From raw mindsets to prejudiced, it endeavours to cater to the root cause by rectifying the falsely created values against women and wiping mud of myths and misconceptions over real facts.[/size][/color]The workshop encompasses showcase of forum theatre, a powerful and influential visual tool, to explain various forms of violence viz, female feticide, gender discrimination resulting in stereotyping, domestic violence and exploitation, with a window inviting attendees’ opinions on the displayed scenario. A video summarising various forms of crime against women and their inter-linkage is also being screened. Further, an edifying presentation supported with discourse is presented highlighting appalling statistics of rising crime against women, female feticide being the worst form and foundation of other crimes. By means of presentation, a vigorous attempt is being made to elucidate the illusions in regards to women respect and value, right to funeral pyre, responsibility of * of the child, less no. of girls means less crime, educated people do not contribute to crime rate, to name a few. Moreover, special emphasis is being laid on the two-pronged solution to this hazard, one is to recreate respect for women in society and other is to make woman understand her self-worth, as directed by head and founder of the organization Shri Ashutosh Maharaj Ji.[/font][/font][/size][/color]The organization is working ceaselessly to put a full stop to the pervasive and entrenched ill practices against girl child and bring the situation back to state of ‘Santulan’. With its numerous ongoing campaigns during the year in this regard, it is targeting majorly on eradication of female feticide, not from society but mindsets, reiterate value for girl child and empower woman through self-realization.[/font][/font]

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          « Reply #79 on: December 17, 2016, 04:14:42 PM »
          Respect Women, Elevate the World | 16 Day Awareness Campaign against Gender Based Violence from Nov 25, 2016 (End Violence Day) to Dec 10, 2016 (Human Rights Day)[/color][/font]International Day for the Elimination of Violence against Women being a global observance evinces existence of violence against women across globe. Having its roots in discrimination and patriarchal mindsets, the disease is swelling in every sphere including households, workplaces and society, endangering women survival. Since last year, post introduction by UN, pledge to end violence is not made just on 25th November, but commemorated globe over in the form of a campaign from November 25 i.e. International Day for the Elimination of Violence against Women till December 10 which is Human Rights Day, tagging violence as a gross violation of human right.[/color][/size][/size]Acknowledging the magnitude of the problem and then address it, during this period, Santulan observes 16 days’ campaign under the banner of ‘Respect Women, Elevate the World’ across India to spread the word among masses for re-establishing lost status of women and reiterating Zero Tolerance to violence. After creating thousands of beneficiaries last year, this year, the organization objects to create awareness in the institutions that witness varied mindsets & age groups where such violence breathes and is thus conducting workshops in schools, colleges and offices. This year, the campaign is being conducted as a sub-campaign under the ongoing women empowerment drive against * selective abortions-‘Tu Hai Shakti’. From raw mindsets to prejudiced, it endeavours to cater to the root cause by rectifying the falsely created values against women and wiping mud of myths and misconceptions over real facts.[/size][/color]The workshop encompasses showcase of forum theatre, a powerful and influential visual tool, to explain various forms of violence viz, female feticide, gender discrimination resulting in stereotyping, domestic violence and exploitation, with a window inviting attendees’ opinions on the displayed scenario. A video summarising various forms of crime against women and their inter-linkage is also being screened. Further, an edifying presentation supported with discourse is presented highlighting appalling statistics of rising crime against women, female feticide being the worst form and foundation of other crimes. By means of presentation, a vigorous attempt is being made to elucidate the illusions in regards to women respect and value, right to funeral pyre, responsibility of * of the child, less no. of girls means less crime, educated people do not contribute to crime rate, to name a few. Moreover, special emphasis is being laid on the two-pronged solution to this hazard, one is to recreate respect for women in society and other is to make woman understand her self-worth, as directed by head and founder of the organization Shri Ashutosh Maharaj Ji.[/font][/font][/size][/color]The organization is working ceaselessly to put a full stop to the pervasive and entrenched ill practices against girl child and bring the situation back to state of ‘Santulan’. With its numerous ongoing campaigns during the year in this regard, it is targeting majorly on eradication of female feticide, not from society but mindsets, reiterate value for girl child and empower woman through self-realization.[/font][/font]

           

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