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क्या आप सहमत है  की पहाडो मे छल - मसान पूजा बढ रही है ?

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Author Topic: Evil Powers in Uttarakhand - क्या पहाडो मे छल/मसान पूजा बढ रही है?  (Read 15383 times)

dayal pandey/ दयाल पाण्डे

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ye to Dev bhumi hai maharaj yahan par Deveta waas karate hain, ye sab bas Deveta hole ka ahsaas hai, so mera sujhav hai ki ghar ja kar apane isht dev ko jarur yaad karana, Jai ho Bhumiya deveta sab tumhari hi mahima hai

Pratap Mehta

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आजकल पहाडो मै यह आम बात हो चुकी है

umeshbani

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देव भूमि है उत्तराखंड ................. " मनो तो पत्थर भगवान ना मनो तो पत्थर "
मेरा अपना मानना है की जहाँ भगवान होंगे वाहां दानव भी होंगे ................. अगर हम कभी किसी से डरे नहीं तो हम कुछ न कुछ जो गलत होता है वो जर्रूर करेंग हमे जब किसी का डर होता है तो हम वो काम नहीं करते या जो भी हमारे मन मई है मन मे ही रख लेते है ............ अगर भुत पिचेश नहीं होते तो हनुमान चलिषा नहीं होती ...........  भुत या मसान की पूजा आदमी क्यों करता है जब उसके मन में संका होती है की मेने उसके साथ वः गलत किया था अब वो मुझसे बदला ले रहा है ..........
या सता रहा है जब कुछ  ऐसा रहा होगा की हमारे पूरवजों से ये परंपरा चली आ रही है देखा किसी ने नहीं ......... फिर भी हम उस भगवान को पूजते आ रहे है ..............  और हम ये क्यों बोलते रहते है की आपके कर्मों का फल आपके बच्चों को लगता है ....? क्यों की हम सब एक प्रथा एक संकृति से बधे हुए है .......... राम तो किसी ने देखा नहीं फिर भी हम राम राम बोलते है ....
क्यों की राम नाम में भी शक्ति है ..... ऐसा हमारा मन कहता है विज्ञानं जबकि ऐसा कुछ नहीं कहता .........
मेने गलत काम किया होगा तो हमेसा  मेरे मन मै भय रहेगा और  कभी मेरे साथ कुछ गलत होगा तो नि संदेह मेरा मन उस समय को याद करेगा जब मेने   गलत किया होगा चाहे वो किसी के साथ भी किया हो और मै अब जब कि   मेरे साथ गलत हो रहा है तब में अपनी गलती के लिया शर्म महसूस करूँगा ............. यही सब होता है .....................

मदन मोहन भट्ट

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Jab population hi itni badh rahi hai to masaan pooja bhi to badegi hi na bhai. Pahley log kum they to masaan bhi kum rahey honge.  Parantu jab population bad gayi to masaan bhi to bad gaye honge.  Unki pooja to phir badni hi thi. 

हेम पन्त

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अन्धविश्वास ने पहाङ के लोगों को अभी भी अपने चंगुल में फंसा कर रखा है, शिक्षित वर्ग भी इस वैज्ञानिक युग में बलि और पूजा पाठ पर विश्वास करता है. इसी विषय पर कुमांउंनी कवि उदय किरौला जी की एक कविता-

भूता बजाय मैंस पूजो

पुराण सब खतम हैगो, गौं बाखई उज्याव हैगोI
कम्प्यूटर गौं-गौं पुजिगो, विज्ञानौ जमान ऐगोII

भूता रूणीं जगां आब, मकान बणि गयींI
तिथांणा* ढूंग माटैल, मकान सब सजि गयींII

भूता चक्कर में आज गौं मैंस खतम हैगो,
घर कुङि बेचि बेर, हिरदा पित्तर बगै ऐगोII

अस्पताल नामैके छन देपाता पर्च खतम हैगींI
सैणीं भूत पुजना लिजि डाक्टर सैब घर ऐगींII

बीमार कैं अस्पताल दिखाओ मन पक्को करि भै पूजोI
नान कूंणी भूत पुजणियोI भूता बजाय मैंस पूजोII
 

*तिथांण - श्मशान घाट

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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पहाड़ मैं बलि अभी भी जारी है उसका उदाहरण:



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Garhwali Folk Literature
                    Secret of Rakhwali -2
                          Bhishma Kukreti             
 
                    Eradication of Bhot and Pichass (Evil Sprit)
               When aperson is effected by Bhoot/Pichas /Evil Spirit , the tantrik reads following mantra
                मसाण = (भूत पिचास )
             भूत उतारने की रख्वाळी
              प्रस्तुति : भीष्म कुकरेती
              स्रोत्र : अबोध बंधु बहुगुणा , धुंयाळ , पृष्ठ ७५
             ओम नमो रे बाबा गुरु को आदेस , जल मसाण
             जल मसाण को भयो थल मसाण
             थल मसाण को भयो वायु मसाण
             वायु मसाण को भयो वर्ण मसाण
             वर्ण मसाण  को भयो बहुतरी मसाण 
             बहुतरी मसाण को भयो चौडिया मसाण
             चौडिया मसाण को भयो मुंडिया मसाण
             मुंडिया मसाण को भयो सुनबाई मसाण
              सुनबाई मसाण को भयो बेसुनबाई मसाण 
              लेटबाई मसाण  , दरद बाई मसाण  , मेतुलो मसाण
               तेतुलो मसाण , तोप मसाण , ममड़ादो मसाण
              बबड़ान्दो मसाण धौण तोड़ी मसाण
              तोड़दो मसाण , घोर मसाण, अघोर मसाण
             मन्तर दानो मसाण , तन्त्र दानौ  मसाण
             बलुआ मसाण कलुआ मसाण  , तातु मसाण आदि

Anil Arya / अनिल आर्य

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A good topic to discuss. I have read few posts so far and I would like to share with you my rural life's (I have enjoyed 14 years in my pahad) some incidents. I think the migrated/ friends who born out of Uttarakhand are not aware. Masan's are specially soul's of murdered / accidental deaths. Mostly in river areas & forests. I have seen that when a Barat crosses a river, people through a potli of khichadi over the river. It's for masan . You all would have heard about Bhoot Bangla & Fasik Gadhiyar, Nainital. These are the best well known examples. As more and more accidental deaths and murders are happening, such souls are increasing resulting in increasing MASAN PUJA, because everyone needs happiness. Some masan's are helpful for localities too. thats in brief. Can any one inform me about BHOOTASHAN ? I have heard about it but very curious to know all about bhootashan .

 

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