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Let Us be Effective Manager (Mangament Guru)-By Bi

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720:

Dosto,

Our Senior Member Sh Bhishma Kukreti Ji has compiled some exclusive information on "Management Guru" which we are sharing here for your information. Hope would appreciate the write-up by Kukreti Ji.  This is written in Garhwali Language.
Mangament Guru -1
प्रबंध शास्त्री -१

बृहस्पति : महान मैनजमेंट गुरु

बृहस्पति ko  जनम महात्मा बुद्ध से भौत पैल भारत मा ह्व़े छौ.
महाभारत मा इन लिख्युं च बल बृहस्पति न प्रबंध शास्त्र पर एक लाख से बिंडी श्लोक लेखी था. पण य़ी श्लोक कुजाण कख हरची गेन धौ. याने कि बृहस्पति काश्लोकुं तै रटि क च्यालों नि सम्बाळ .बृहस्पति सैत च चार्वक गुरु था. इन बुले जान्द बल बृहस्पति न शासन तंत्र पर अपणा नियम बणे छा अर बृहस्पति का

नियमतर्क शास्त्र सम्मत छया .अर बृहस्पति का शास्त्र को नाम नीति शास्त्र या दंड शास्त्र च!(By Bhishma Kukreti).

M S Mehta
 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720:
Mangament Guru -2
प्रबंध शास्त्री  -2 शुक्र : दुनया का महानतम शासन शास्त्र गुरु (Notes on Management Theories from Old age till date, Notes on Managemnt Thinkers )                   Bhishm Kukreti        
शुक्र का नाम भार्गव ऋषि बि च . ऋषि भार्गव या शुक्र का रच्यां श्लोकुं तैं शुक्र नीति बुले जान्द शुक्रनीति मा राजा , राजकुमार का कर्तव्य अर राजा क वास्ता मानक छन जो आज का हिसाब से कै बि चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर (सी.ई.ओ., C .E .O ) का वास्ता भौत इ काम की बात छन. क्वी बि चीफ एक्जीक्यूटिव शुक्र नीति तैं पौड़ी लयाल त वै तैं कुछ हौर पढ़णे जरोरात नी च शुक्र नीति मा यूँ विषय  पर नियम छन :
१-राजा या त दिवता जन ह्व़े सकद य राक्छ्ज जन
२-राजा तैं प्रजापालक hon चएंद याने कि आज को हिसाब से सी .ई.ओ. तैं कस्टमर अर एम्लोयीज ओरियेंटेड हूण  चएंद 
३-प्रबंधक का वास्ता उत्तराधिकारी की खोज अर वैकी शिक्षा पर ध्यान  दीण जरुरी च
४- राजा या मुख्य प्रबंधक तैं अधिकार्युं क रैण -सैण (रहण सहन ) को पूरो इंतजाम कर्ण जरोरी च
५- कै बि राज/प्रबंध/ मैनेजमेंट  मा राजा/सी.ई.ओ. , राजा/सी.ई.ओ. का दगडया,कोष (रिसोर्स ), सल्ला  दीण वल़ा(सलाहकार ),राष्ट्र /संगठन /कौर्पोरेसन, राष्ट्र /संगठन /कौर्पोरेसन तैं बचाणो ब्युंत (रणनीति )सेना ( कामकाजी )  आदि महत्व पूर्ण छन अर आँख, कंदुड़,मुख, मां, हाथ अर खुट्ट जन होंदन
६-मंत्रपरिषद या सलाकार समीति मा सुपात्र हूण च्यान्दन अर समीति मा  मनोविज्ञान, ऑटो सजेसन ,रण नीति कार, विचारक, जणगरु , कार्य निर्भाहक (एक्जीक्यूसन ), दूत या डिप्लोमसी का ज्ञांता होवन

 ७- मंत्री परिषद्/ टॉप लेवल  मैनेजमेंट मा गुण संपन, चरित्रवान, जणगरु/विद्वान्, बीर , हितैसी वल़ा लोक चएंदन 
८-सी.ई.ओ.या राजा का दायित्व च- योग्यता क हिसाब से अधिकार्युं तैं नियुक्त करे जौ अर वू तैं पूरो निर्देश दिए जाओ जन से वो अफिक काम कना रावन . सी.ई.ओ.या राजा तैं कर्म्चारियुं भरण पोसन को पूरो इंतजाम करण चएंद . सूचना को
९- कोष मा ब्रिधी अर खर्च को पूरो इंतजाम हूण चएंद (रिसोर्स मैनेजमेंट ) अर सूचना को औण -जौण  को समुचित प्रबंध.
१०- सी.ई.ओ. या राजा तैं  रण नीति को जणगरु हूण चएंद
११- राजा या सी.ई.ओ. तैं अपण अर प्रतियोग्युं क बल का बारा मा हर समौ पूरी जानकारी हूण चएंद
१२- कार्यालय सम्बन्धी जानकारी बि सी.ई.ओ./राजा तैं हूण जरोरी च                
भीष्म की सल्ला च जब भी क्वी बड़ो पद पर जान्दो वै तैं शुक्र नीति जरोर पढ़ण चएंद . मीन सी.ई.ओ का वास्ता लिखीं भौत सी किताब बांचिन पण सी. ई.ओ का वास्ता शुक्र नीति से बढ़िया किताब अबी तलक रचे ही नि गे अगर कैन सी.ई.ओ का बान लिखी त जेनेरल मैनेजमेंट पर ल्याख अर रण नीति पर कुछ नि ल्याख अर रण नीति पर लेखी त जनरल मैनेजमेंट पर नि ल्याख पण शुक्र नीति मा सौब बथों पर लिख्युं च

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720:
बकै अग्वाड़ी फड़की -३ मा

Mangament Guru -3 प्रबंध शास्त्री  -३ महाभारत : मैनेजमेंट इनसाईक्लोपीडिया 
Mahabharat : Mangement Encyclopedia (Notes on Management Theories from Old age till date, Notes on Managemnt Thinkers ) Bhishm kukreti महाभारत मा प्रबंध शास्त्र अर जुद्ध नीति का हरेक सूत्र छन . महाभारत की हरेक कथा मा प्रबंध विज्ञान की सीख  विदुर नीति, पाराशर नीति , श्रीमद भगवद  गीता , या विष्णु शहस्त्र नामा सी.ई.ओ  का वास्तामैनेजमेंट का सूत्रों की व्याख्या करदन विष्णु सह्श्त्र नामा मा विष्णु का जो हजार नाम छन वो सी.ई. ओ. का गुण छन चूंकि महाभारत भौत ही बड़ो च सी.ई.ओ का वास्ता पढ्न मा दिक्कत को काम च पण मैनेजरूं  अर सी .ई ओ सणि विदुर नीति , भगवद गीता अर विष्णु शहस्त्र नामा बंचन ही चयेंद
 
Mangament Guru -4 प्रबंध शास्त्री  -4
श्रीमद भगवद गीता अर अष्टावक्र की महागीता : ऑटो सजेसन को महामंत्र

Shrimad Bhagvad Geetaa : The best books on Auto Sugession (Notes on Management Theories from Old age till date, Notes on Managemnt Thinkers )                                                                            Bhishm Kukreti हिंदुऊँ न छै भरत का दर्शन शास्त्र , भगवद गीता , अष्टावक्र की महागीता तैं हिंदुऊं धर्म या सनातन पंथ  क शास्त्र बथैक दुनिया का भौत बड़ो नुकसान करी दे.  छै दर्शन शास्त्र,  भगवद गीता या महागीता कै बि रूप मा धार्मिक या पंथ शास्त्र नी छन सबी मनोविज्ञान का बाबत लिख्याँ शास्त्र छन ना कि हिंदु मुतालिक शास्त्र .

  श्रीमद भगवद गीता या अष्टवक्र की महागीता निपत्त मनोविज्ञान की किताब छन यूँ किताबों मा भगवान् या पंथ की क्वी इन बात नी च जो सनातन धर्म से समबन्धित ह्वावन ऑटो सजेसन समझणो बान द्वी किताब भली छन .
  ऑटो सजेसन मैनेजमेंट मा एक भौत ही जरुरी कौंळ च. मैनेजर अपणा  अधिकार्युं तैं ऑटो सजेसन का बल पर काम तैं पुरो करान्दन अर गीता या महागीता ऑटो सजेसन तैं बिन्गान्दन

      भीष्म कुकरेती की सलाह च जब बि मैनेजर गीता या अष्टावक्र की महागीता बांचन त धर्म का हिसाब से कत्तई नि बांचन बलकण मा ऑटो सजेसन का प्वाइंट से बांचन Copyright@ Bhishm Kukreti, Mumbai 2011
 

Bhishma Kukreti:


Mangament Guru -6

प्रबंध शास्त्री -6

   

                             जौन अडायर ; कार्य केन्द्रित नेतृत्व कू  पुरोधा     

                  John Adair : famous for Action Centred Leadership       

   ( Notes on Management Theories from Old age till date, Notes on Managemnt Thinkers


and Management Practices )

           

                              Bhishm Kukreti           
 

                जौन अडायर कू जनम १९३४ ब्रिटेन मा मा ह्व़े . वैन अपण शुरुवाती नय्करी मा भौत प्रकार का काम करीन

यन से ही जौन अडायर तैं पर्वाण गिरी (नेतृत्व ) क बारा मा भौत सा अनुभव ह्वेन. जब जौन अडायर

स्कोट गार्ड मा छौ त जौन अरब लीजन मा बेड़ोऊइन  रेजिमेंट मा राई . विश्व विद्यालय मा भर्ती

हों से पैल जौन अडायर ट्राव्लर मा काम कौर अर एक अस्पताल मा अर्दली बि राई

            कैम्ब्रिज विश्व  विद्यालय  मा डिग्री ल़ीणो बाद जौन रौयल मिलट्री अकादमी , सैंडहर्स्ट

मा लेक्चरर बौण . जब जौन अडायर इण्डस्ट्रियल सोसिएटी मा अस्सिस्टेंट दैरेक्त्र थौ

त जौन न Action Centred Leadership  सिद्धांत गढ़ी अर कार्य केन्द्रित सिद्धांत  लोगूँ समणी धार .
 
   १९७८ मा जौन अडायर दुनिया मा  पर्वाण गिरी ( नेतृत्व) अध्ययन   (Leadership Studies) को  पैलो प्रोफेस्सर बौण.

 जौन अडायर को कारण ही आज प्रबंध विज्ञानं मा  पर्वाण गिरी (नेतृत्व) पढाये जांद .

  जौन अडायर का कार्य केन्द्रित नेतृत्व का तीन मुख भाग छन :
 
 १- कार्य तैं पूरो कारो अर कार्य को निर्धारण  साफ़ हूण चएंद . 

२- काम पुरो करणों बान टीम बणाओ अर टीम तैं पूरी तरां संभाल़ो: एक व्यक्ति से क्वी बि काम नि ह्व़े सकुद

कार्य  पूर्ति का वास्ता टीम की जरुरत पड़दी . टीम मा टीम भावना हों जरूरी च. हरेक टीम मेम्बर तै जाणण

चएंद बल टीम मा एक्का (एकता) से हम जितला अर टीम मा ना-एक्का  (मतैक्य) हूण से  हमन फेल हूण .

३- व्यक्ति विकास पर संसाधन लगाओ : टीम व्यक्त्युं से बणद .कूड एक एक पथर से चिणे जांद.
 
इलै हरेक व्यक्ति को विकास जरूरी च. हरेक व्यक्ति तैं भौतिक सुख (ठीक तनख्वा) , मानसिक सुख जन कि

व्यक्ति की विशेष पच्छ्याणक (रेकोग्निसन ), उद्देस्यात्मक जिन्दगी , जिंदगी मा कुछ पाणे  इच्छा,

पद प्राप्ति, दान दीणे इच्छा पूर्ति अर कुछ ल़ीणे इच्छा संगठन से प्राप्त हूण चएंद

                पर्वाणु/नेतृत्व क  ख़ास काज/काम/कार्य 

 

 हरेक संगठन मा परवाणु बान  मुख्य काज/काम इन होंदन:

१- काम को साफ़ साफ़ निर्धारण : टीम अर हरेक व्यक्ति क बान काज /कार्य बिलकुल साफ़ हूण चयान्दन

याने कि काम निर्दिष्ट या उल्लेखित, नापण लैक, पुरु होंण  लैक,   यथार्थ, एंड समौ मा बंध्यू (टाइम बौंड टास्क) होंण चयांद .

२- योजना ; हर काज योजनाबद्ध होण चएंद

३-  काम की जानकारी ; काम काज की जानकारी सबि टीम सदस्यों तैं ठीक से दिए जाण चएंद

४-नियंत्रण अर निरीक्षण  : हरेक काम तबी पुरु होंद जब काम पर ठीक से नियंत्रण ह्वाऊ , नियंत्रण को नियम च

कम से कम संसाधन मा ठीक  काम . यि तबी होंद जब समन्वय पुर्बक नियंत्रण सिस्टम ह्वाऊ

५-  परीक्षा : हरेक काम समौ समौ पर परीक्षा होण  चएंद अर निरीक्षण मा य़ी तत्व होण जरुरी छन

६- प्रेरक शक्ती : हरेक काम मा प्रेरक शक्ति हों जरुरी च .  सन्गठन मा प्रेरक शक्ति ल़ाणो/आणो वास्ता -

नेता तैं अफिक प्रेरित होंण  चएंद, उन तैं संगठन मा ल्याओ जो प्रेरित छन, हरेक व्यक्ति तैं व्यक्ति मानो याने

हरेक व्यक्ति महत्वपूर्ण च, काम हूण लैक अर कुछ ललकार लैक काम हूण चएंद, काम काज्यूँ  तैं सफलता/ विकास की जानकारी

दीणो इंतजाम होण  चएंद , सफलता/विकास प्रेरणास्पद होंद, काम काज्यूँ इनाम आदि मिलण चएंद अर काम काज्युं तैं

पच्छ्याणक मिलण  चएंद.

७- संगठन शक्ति : पर्वाण/नेता/नेतृत्व  मा संगठन बणोण अर संगठन चलाणे सक्यात /शक्ति होंण  चएंद

८- पर्वाण उदाहरण जरोर प्रस्तुत करदो

                  पर्वाण /नेता तैं समौ  पर काज पूरो करणे नीयत   
 
              जौन अडयार न पर्वाण  का बान कुछ नियम काज समौ पर पुरा करणो बान बणेन :

१- समौ पर काज पुरो करणो बान तत्पर रौ

२- लम्बा समौ क बान गोल/साफ़ उद्देश्य  बणाण

३- मध्य क्रम का गोल बि बणाण जरोरी च

४- दिन की योजना बणये जौ अर वां पर पूरी तरां से काम करण चएंद

५- जब बढिया समौ होऊ त भौत काम कारो म

६- काम तैं संगठित ह्वेक कारो

७- बैठक /मीटिंग को ठीक से प्रबंधन जरुरी च

८- काम दुसरो तैं दीण जरोरी च अर इन काम प्रभावी ढंग से हूण चएंद

९- टाइम पर काम पूरो करणे आदत अर चाहत हूण जरोरी च

१०- स्वास्थ्य पैलो बकै काम पैथर 

          जौन अडायर क लिखीं किताब

 जौन अडायर की किताबु ब्यौरा इन च :

1- Action Centered Leadership 1984

2- The Skills of Leadership, 1984

3- Effective Motivation , 1987

4- Understanding Motivation , 1990

5- Hand book of Management and Leadership, 1998

 

 बकै फड़की 6 मा बाँचो.....

To be continued on part 6.....
 


Copyright @ Bhishm Kukreti

Bhishma Kukreti:
Management Guru -7

प्रबंध गुरु -७


                    इगौर अनसौफ्फ़ : संस्थान मा रणनीति को पुरोधा         

             

                      Igor Ansoff : Famous for Corporate Strategy


                                                    Bhishm Kukreti
                 
इगोर अन्सौफ्फ़ पैलू प्रबंध गुरु छौ जैन  दुनया तै  संस्थानु मा रण नीति कि जरोरात का बारा मा चितळ/सचेत  कार .

 इगोर अन्सौफ्फ़ को जनम रूस मा १९१८ मा ह्व़े छौ अर फिर परिवार सैत  वो १९३६ मा अमेरिका ऐ गे चौ. अमेरिका मा इगोर न

गणित मा पी एच डी कार . अन्सोफ्फ़ न पैली रैंड संस्थान मा काम करी अर फिर १९५० मा लौक्कहीड   एयर क्राफ्ट कौर्परेसन 

मा चले गे जख इगोर वैस प्रेजिडेंट बौण.

    १९६३ मा इगौर कर्निएज विश्व विद्यालय  मा प्रोफेसर बौण .अर फिर अमेरिका अर यूरोप का कथगा इ विश्व विद्यालायुं मा गौन्त्या

प्रोफ़ेसर ( विजिटिंग प्रोफ़ेसर )  बौण .

          जब तलक १९६८ मा इगौर की किताब ' कोरपोरेट स्ट्रेटिजी ' नि छापे छे , तैबारी तलक संस्थानु मा फैदमंद भविष्य क वास्ता योजना , रण नीति

क बारा मा क्वी घड्यान्द(सोचना  )  इ नि छौ . 'कोरपोरेट स्ट्रेटिजी' किताब छपणो परांत   संस्थानु मालिकुं अर बड़ा मैनेजरूं  क बिंगण/समज  मा आई

बल हरेक संस्थान का वास्ता एक सै रण नीति चएंद 


              अगौर का 'संस्थान- रणनीति ' का ख़ास नियम

१- वस्तुओं क बाज़ार मा कथगा स्कोप च ? संस्थान तै पता होण चएंद कि वास्तव मा संस्थान कै ब्योपार मा च अर वै ब्यापार अर

वस्तुओ का बाज़ार मा कथगा अवसर, कथगा क्षेत्र, कथगा विस्तार ह्व़े सकुद .

२- विकास /बढ़ोतरी का बारा मा चेतना अर अगने बढ़ोतरी का अवसर क्या छन ?

३- प्रतिस्पर्धा का लाभदाई गुण प्राप्त करण : हेरेक कम्पनी मा कुछ खासियत हुंदी जवा खासियत प्रतिस्पर्धा मा हौरी प्रतियोग्युं से

बढिया हुंद. कंपनी तैं वै प्रतिस्पर्धी गुण को ख़ास विकास करण चएंद ( Taking Competative Advantage)

4- समन्वय : सब्बी जांणदन कि कै बि संस्थान मा २ + २ = ४ ना बल्कण   मा चार से जादा हुंद (The whole is greater than sum of parts)

समग्र  हिस्सौं जोड़ से जादा ही होंद . इन मा संस्थान मा हरेक विभाग अर व्यक्ति का हौरी विभाग अर व्यक्त्युं से समन्वय जरुरी च जां से समग्र

हिसौं को जोड़ से जादा ह्व़े जाव.

                        बदलाव से कठिनाई

बदलौ त एक सत्य च अर बदलीन परिस्थिति मा संस्थान मा बदलाव जरुरी च . पण हरेक संसथान मा बदलाव अलग ढंग से, अपण माफिक  ही होण चएंद

१- कुछ बदलाव इन होंदन जु धीमी  गति से हुन्दन अर पैलि पछ्याँणन मा ऐ जान्दन

२- विस्तार ; कुछ वस्तु इन होंदन जौंक बाज़ार स्थिर होंद अर बढ़ोतरी धीरे धीरे हुंद

३- ग्राहकुं मानसिकता मा फटाफट बदलाव औण  वस्तु या इंडस्ट्री मा फटाफट बदलाव आन्दन

४- वस्तुं मांग ख़तम : कुछ कारणों से वस्तु मांग  या इंडस्ट्री ख़तम ह्व़े जांद अर संस्थान अंदाज लगै ल्युन्द

५- अचाणचको बदलाव : कै बि कारणु से अचाणचक बदलाव आन्द अर इन बदलाव क बारा मा संस्थानु तै अंथाजण /अंदाज करण मुस्किल ही होंद.


The Important works of Igor Ansoff

1- Article ' Strategies for Diversification , 1957

Books किताब


1- Corporate Strategy' 1968

2- From Strategic Planning to Strategic Management 1975 (coo-authorship)

3-Strategic Managemnt 1979

4-Implanting Strategic management 1984



To be Continued on Part 8th

बकै फड़कि -८ मा

Copyright @ Bhishm Kukreti 

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