Author Topic: Lets Recall Our Childhood Memories - आइये अपना बचपन याद करें  (Read 41091 times)

Anil Arya / अनिल आर्य

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 1,547
  • Karma: +26/-0
Sudhir Ji, Wo Lamhe.. yadai yad ati hai. Pasand karne ke liye dhanyavaad.

PratapSingh Bharda

  • Newbie
  • *
  • Posts: 49
  • Karma: +4/-0
Jai Baghnath ji..

PratapSingh Bharda

  • Newbie
  • *
  • Posts: 49
  • Karma: +4/-0
My Village - Simar

PratapSingh Bharda

  • Newbie
  • *
  • Posts: 49
  • Karma: +4/-0
Cutting of Wheats.. Ghar ke Aagan mai.

PratapSingh Bharda

  • Newbie
  • *
  • Posts: 49
  • Karma: +4/-0
Mera gaaon ka pool

PratapSingh Bharda

  • Newbie
  • *
  • Posts: 49
  • Karma: +4/-0
Mera Gaao Simar.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,904
  • Karma: +76/-0

हेम पन्त

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 4,326
  • Karma: +44/-1
इसकी पूंछ पर धागा बाँधकर "हेलीकाप्टर" किस-किसने उडाया है.. 


C.S.Mehta

  • Full Member
  • ***
  • Posts: 248
  • Karma: +2/-0
” प्यारा बचपन “
 
एक बचपन का ज़माना था !
वो खुशियों का खज़ाना था !!
चाहत थी चाँद को पाने की !
दिल तितली का दीवाना था !!
खबर ना थी कुछ सुबह की !
ना शाम का ठिकाना था !
थक हार के आना स्कूल से !
पर खेलने भी जाना था !
बारिश में कागज़ की कश्ती थी !
हर मौसम भी सुहाना था !!
हर खेल में साथी थे !
हर रिश्ता निभाना था !!
गम की जुबान ना होती थी !
ना खुशियों का पैमाना था !!
रोने की वजह ना थी !
ना हसने का बहाना था !!
वो खिलोने की दुनिया थी !
हर एक खिलौना दिल का खजाना था !!
शरारत करते थे तो मम्मी डैडी से पिटते थे !
पर कुछ देर बाद फिर कोई नयी शरारत करके दिखाना था !!
अब तो सब यादे रह गयी है , ना दोस्त ऐसे ना ही रिश्ते !
अब ना रही वो जिन्दगी ,
जैसा की बचपन का ज़माना था !!

C.S.Mehta

  • Full Member
  • ***
  • Posts: 248
  • Karma: +2/-0
बेसहारा बचपन

आँखों में सपने हैं,
उड़ने की चाहत है,
लेकिन उड़ें कैसे ?
अपनों ने छोड़ा है,
भूख ने तोड़ा है,
आगे बढ़ें कैसे ?
मासूम बचपन,
क्यों है सवाली,
तन पर न कपड़ा,
पेट है खाली,
हैं ये खड़े कैसे?
बचपन बुढाता,
हर दिन रुलाता,
जाने क्या होगा,
प्रश्न उठाता,
कुछ भी करें कैसे?
मासूमियत पर,
मार पड़ी है,
गणतंत्र की यह,
कैसी घडी है,
आखिर हँसे कैसे?

 

Sitemap 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22