Author Topic: Lets Recall Our Childhood Memories - आइये अपना बचपन याद करें  (Read 41371 times)

हेम पन्त

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पहाङ के स्कूलों में प्राथमिक पाठशाला से लेकर इन्टरमीडिएट तक सुबह की सामूहिक प्रार्थना के समय बच्चों में राष्ट्रवाद की भावना विकसित करने के लिये दिलाई जाने वाली प्रार्थना शायद मेरी तरह आपको भी यह फोटो देखकर याद आ जाए.


हेम पन्त

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आजकल ठण्ड शुरु हो चुकी है.. हम लोग जब प्राथमिक कक्षा (प्राइमरी) में थे तब स्कूल में कक्षों की कमी के कारण बारिश या ठण्ड अधिक होने पर छोटी क्लास (कक्षा 1-2-3) को स्कूल नहीं आने की हिदायत थी, या फिर छुट्टी कर दी जाती थी.

मुझे अच्छी तरह याद है कि एक बार सुबह मौसम ठीक था लेकिन अचानक बदला और बारिश होने लगी. कक्षा 1-2-3 बच्चों ने छुट्टी के लिये हल्ला मचाना शुरु कर दिया क्योंकि हम लोग खुले में बैठे थे. छुट्टी की घोषणा होते ही सब बस्ते पकङ के घर को भागे क्योंकि पहाङ में मौसम जल्दी बदल भी जाता है. और हुआ भी यही, आधे बच्चे भी स्कूल परिसर से बाहर नही जा पाये थे, धूप दुबारा आ गई. मास्टरनी जी ने सभी बच्चों को वापस आने के लिये कहा, लेकिन धनुष से निकले बाण की तरह सभी बच्चे उनकी बात को अनसुना करके फुर्र हो गये. अगली बार से तो जैसे ही थोङा सा मौसम खराब होता बच्चे २ मिनट के अन्दर ही घर की तरफ भाग निकलते थे जिससे अचानक मौसम ठीक होने पर वापस न जाना पङे.

सुधीर चतुर्वेदी

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हेम भाई की लगाई हुई प्रतिगा देख के स्कूल के दिन याद आ गये .............हमने इंटर रा.इ.का लोहाघाट से किया १० कक्षा तक तो पुरी प्रतिगा बोलते थे पर जब इंटर मे गया तो हम लोग सिर्फ़ यह नही बोलते थे की समस्त भारतवाशी मेरे भाई बहिन है................भाई तो फिर भी कभी कभी बोल देते थे पर बहिन है कभी नही बोला ........

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Sudhir Bhai,

Good morning.

Bachpan har gam se begana hota .. This is the song i dedicate to my childhood. In winters, when there was heavy snow hall, we used to make a huge "Gola" of snow after rolling it and finally, it was thrown from a height of of pahad.

In Summer, who can foget the sweet kafal.. .

There are several such memories which are still afresh in my mind but only think that we do not have ample resources of employment there otherwise, we would not never leave the beautiful pahad.



हेम भाई की लगाई हुई प्रतिगा देख के स्कूल के दिन याद आ गये .............हमने इंटर रा.इ.का लोहाघाट से किया १० कक्षा तक तो पुरी प्रतिगा बोलते थे पर जब इंटर मे गया तो हम लोग सिर्फ़ यह नही बोलते थे की समस्त भारतवाशी मेरे भाई बहिन है................भाई तो फिर भी कभी कभी बोल देते थे पर बहिन है कभी नही बोला ........

MR. M.S. NEGI

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sabhi mara pahar ke sadasyo ko mera namaskar,

main bachpan main bahut he sararati tha, meri badi mummy (jethi ija) bangal se hai, wah pahari muskil se bolti thi, jab bolti thi to hum sab maje lete the,

jeth ija ki gay ko bachhara hua tha to hum gay ko chidhane ke liye bahhade ko pareshan karte the, gay ham ko marne ke liye aati thi, to jethi ija ham ko gussa karti thi, bachur mukhi khel nakor-nakor, bachur bigadme, jagi-jagi main tor baju (father) hain kool.

dosto yadein to bahut saari hain fhir kabhi kahunga

M.S. NEGI

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Thanx u rawat ji for sharing this moment of your childhood with us.

Bachpan har gam se begana hota hai.. hota ha..

sabhi mara pahar ke sadasyo ko mera namaskar,

main bachpan main bahut he sararati tha, meri badi mummy (jethi ija) bangal se hai, wah pahari muskil se bolti thi, jab bolti thi to hum sab maje lete the,

jeth ija ki gay ko bachhara hua tha to hum gay ko chidhane ke liye bahhade ko pareshan karte the, gay ham ko marne ke liye aati thi, to jethi ija ham ko gussa karti thi, bachur mukhi khel nakor-nakor, bachur bigadme, jagi-jagi main tor baju (father) hain kool.

dosto yadein to bahut saari hain fhir kabhi kahunga

M.S. NEGI

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क्या बात है अपने बचपन की याद दिलादी है वो बचपन क्या होता है न तो कुछ काम करना पड़ता है और न ही किसी की बातें सुनानी पड़ती हैं और न कोई टेंसन और न ही कोई नौकरी का टेंसन और न ही किसी का दर बस खाओ और मौज करो बस टाइम पर खाना मिलना चाहिए

वाह री बचपन की यादें,
वो रो-रो कर अपनी बातें मनवाना,
और अब उसी जिद पर अपने बच्चों को डराना,
वाह री बचपन की यादें,
वो रुठकर किसी कमरे में छिप जाना,
और अब अपने बेटे को आदर्श दिखाना,
वाह री बचपन की यादें,
वो स्कूल ना जाने का बहाना बनाना,
और अब बच्चों को उसी बहाने पर चांटा दिखाना,
वाह री बचपन की यादें,
वो काम ना करने के डर से पापा के पीछे छिप जाना,
और अब बेटी को उसी डर के लिये ससुराल याद कराना,
वाह री बचपन की यादें,
वो मीठा खाने को आधी रात को मचल जाना,
और अब बच्चों को दांतों के कीटाणु दिखाना,
वाह री बचपन की यादें,
वो खेत में जाकर पेड पर चढ जाना,
और अब बच्चों को पलस्तर का डर दिखाना,
वाह री बचपन की यादें,
वो पढने का मन ना होने पर मुंह बनाना,
और अब बच्चों को उनसे साथी के आगे निकल जाने से,
उनके हारने की मन में हर वक्त तस्वीर बनाना,
वाह री बचपन की यादें,
काश आज भी हम दे पाते अपने बच्चों को ,
वो प्यारा-न्यारा हमारा सा बचपन,
पर ये “जिद करो दुनिया बदलो” का नारा,
जिसमें खो गया है बच्चों का बचपन प्यारा,
चलो क्या करें, जैसी बीमारी होती वैसी दवा,
नये जमाने की है बस ऐसी ही बस हवा,
वाह री बचपन की यादें,
वाह री बचपन की यादें,

Devbhoomi,Uttarakhand

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बचपन, याद बहुत आता है

हर पल मुझको अपना बचपन, याद बहुत आता है
कुछ देर को तो मन हंसता है, फिर जाने टूट क्‍यों जाता है
क्‍या हो जाता कुदरत को, यदि सच मेरा वो सपना होता
चाहत थी जिस बचपन की, काश मेरा वो अपना होता
नन्‍हीं सी मुस्‍कान देख जब, पापा का चेहरा खिल जाता
उन तोतले शब्‍दों में जब, मम्‍मी का मन खो जाता
भैया की अंगुली को थामे, जब मैंने चलना सीखा
पथरीली राहों पर जब, गिर-गिरकर फिर उठना सीखा
तूफानों के बीच घिरा, सदा अकेला खुद को पाया
कहने को सब साथ थे, पर नहीं साथ था अपना साया
याद नहीं वो सारी बातें, बस कुछ हैं भूली-बिसरी यादें
यादों के वो सारे पल, अब तक मेरे पास है
इतने सालों बाद भी, वो ही सबसे खास है
कुछ पंखुडियों के रंग है, कुछ कलियों की मुस्‍कान है
कुछ कागज की नावें हैं, कुछ रेतों के मकान है
कुछ आशाओं के दीप है, कुछ बचपन के मीत है
कुछ बिना राग के गीत हैं, कुछ अनजानों की प्रीत है
कुछ टूटे दिल के टुकड़े हैं, कुछ मुरझाए से मुखड़े हैं
कुछ अपनों के दर्द है, कुछ चोटों के निशान हैं
मेरे प्‍यारे बचपन की, बस इतनी सी पहचान है
मेरे प्‍यारे बचपन की, बस इतनी सी पहचान है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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I remember my childhood days when we used to play Cricket in small field.

Our bat was made of Baaj ke paid ka

and ball

polythene ko pighala kar. JO ki pathar jaisa ban jata tha.

Helmet kahan kitini baar chote kayee?.

 

Devbhoomi,Uttarakhand

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WO BACHPAN KI YAADEN
कुछ अरमान, अरमान ही रह गए,
और जिंदगी यूँ बस बढ़ चली,
झाँक रहा था मैं सपनो में,
और यहाँ वक्त बढ़ चली

सोच रहा था कितनी बातें,
कहानियों के चर्चे चल पड़े,
होश में आया देखा मैंने,
ज़िन्दगी के हैं कुछ अपने ही किस्से

मुलाकात हुई फ़िर तजुर्बे से,
और हँसी आ रही लड़कपन पर अपने,
कुछ ऐसे वक्त भी जिए हैं मैंने,
हंस रहा हूँ आज किस्सों पे अपने

हर उन छोटी छोटी बातों की लड़ी,
और हर किस्से की अपनी यादें,
जी करता है जी आऊं फ़िर से,
फ़िर से उन बीतें वक्त की हर घड़ी

हर उस दोस्त की वो बात,
हर उस उमर के जज़्बात,
वो गिरकर फ़िर से गिरने का मज़ा,
और उन मौज मस्ती की बात

ज़िन्दगी बस आगे बढ़ता चला,
और हम हो लिए ज़िन्दगी के साथ,
काश कह पाते ज़िन्दगी को कभी,
कभी फ़िर से सच बना दे वो बीती हुई बात
वो जो जिए थे मैंने तुमने
हर वो बीती हुई बात
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