Author Topic: Wild Animal Menace In Uttarakhand-उत्तराखण्ड में जंगली जानवरों का आतंक  (Read 25588 times)

Devbhoomi,Uttarakhand

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अलग-अलग गांवों में गुलदार ने तीन लोगों को किया घायल
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घनसाली, निज प्रतिनिधि : भिलंगना प्रखंड की पट्टी ग्यारहगांव के तीन ग्राम पंचायतों में गुलदार का आतंक बना हुआ है। गुलदार ने इन गांव में हमला कर 2 महिलाओं सहित एक बालक को बुरी तरह घायल कर दिया। ग्रामीणों ने कई बार वन विभाग को सूचना दी, लेकिन वन विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है।

प्रखंड के पट्टी ग्यारहगांव के कई गांवों में एक माह से गुलदार का आतंक बना हुआ है। जिला पंचायत सदस्य डॉ. नरेन्द्र डंगवाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य राजेश डंगवाल, संजीव, गौतम सिंह, दाताराम तिवारी ने बताया कि शनिवार को ग्राम पंचायत चौंरा के आकाश पुत्र सरोप सिंह रावत अपने ही घर में आंगन में टहल रहा था, तभी मकान की छत पर घात लगाए गुलदार ने उस पर हमला कर उसे घायल कर दिया। रविवार की सुबह ग्राम पंचायत जाख की 40 वर्षीय गुड्डी देवी पत्‍‌नी अतर सिंह अन्य महिलाओं के साथ घास लेने जंगल में गई थी, इस दौरान झाड़ियों के पीछे बैठे गुलदार ने घास काटते समय महिला पर हमला कर दिया। दोपहर 12 बजे के करीब ग्राम पंचायत खसेती की रजनी देवी पत्‍‌नी बलवीर लाल उम्र 24 वर्षीय अपने खेत में घास काट रही थी कि गुलदार ने उस पर भी हमला कर दिया किसी तरह ग्रामीणों ने उसे बचाया। घायल दोनों महिलाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिलखी में भर्ती कराया गया, जहां पर रजनी देवी की स्थिति नाजुक बनी हुई है।

क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे गुलदार के आतंक से भारी दहशत का माहौल बना हुआ है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने विभाग से गुलदार को आदमखोर घोषित कर उसे मारने की मांग की है। उधर प्रभागीय वनाधिकारी मुकुल जोशी का कहना है कि घटना की सूचना मिलते ही रेंज अधिकारी को क्षेत्र में भेज दिया गया है तथा गुलदार को पकड़ने के लिए शीघ्र ही पिंजरा भेज दिया जाएगा।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7120076.html

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गुलदार ने बालक पर किया हमला
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नई टिहरी : जिले के भिलंगना प्रखंड के ग्यारहगांव हिंदाव के कोटी गांव में गुलदार ने एक बालक पर हमला कर उसे घायल कर दिया। गंभीर रूप से घायल बालक को 108 सेवा से पिलखी उपचार के लिए भर्ती करवाया गया है। घटना के बाद से क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार देर शाम कोटी गांव निवासी रणवीर सिंह के 14 वर्षीय पुत्र आशु को गुलदार ने कमरे से उठाने का प्रयास किया। गुलदार के हमले की खबर लगते ही परिजनों व ग्रामीणों के शोर-शराबे के बाद आशु को किसी तरह से गुलदार के चुंगल से छुड़ाया। क्षेत्र में गुलदार हमले की यह चौथी घटना है। जिला पंचयत सदस्य डॉ. नरेन्द्र डंगवाल ने बताया कि वन विभाग इस मामले में पूरी तरह से सोया हुआ है। उन्होंने क्षेत्र के वन क्षेत्राधिकारी पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उनके स्थानांतरण की मांग की है। डखवाण गांव के प्रधान उत्तम सिंह पंवार ने बताया कि कोटी, गबणी, सिलोस व डखवाण गांव में पिछले कुछ समय से गुलदार का आतंक बना हुआ है। उन्होंने बताया कि वन विभाग को पिछले समय हुई घटनाओं के बारे में सूचना देने के बाद भी अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7125262.html

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उत्तराखंड गांवों का राज्य और उत्तराखंड के ज्यादा गाँव जंगलों से सटे हुए हैं,जिस के कारण से यहाँ जंगली बाघों का आतंक दिन प्रतिदिन बड रहा है, मेरा गान मैं एक हप्ते के अन्दर चार  लोगों को बाघ ने घायल कर दिए हैं जिन में से दो बच्चे हैं दो ओरतें हैं इस भिलंगना प्रखंड में कम से कम चार से पांच बाघ हैं जो की गाँव के लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं !

इन पांच बाघों में से एक को तो वन विभाग ने पकड़ लिया है लेकिन अभी और भ बाकी हैं अब क्या करेगी उत्ताराखंड की बाघ बचाने वाली टीम अब बस या तो बाघों को बचाओ या तो गाँवों में रहने वाले उन गरीब गाँव वालों को !

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कई क्षेत्रों में भालुओं का भय
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चौखुटिया: तहसील क्षेत्र के कई गांवों से लगे जंगलों में भालुओं का भय बना है। बताया गया है कि भालू लोगों पर हमला करने का भी प्रयास कर रहे हैं। इससे गांवों की महिलायें जंगलों में जाने से डर रही हैं। महत्तगांव, ग्वाली, बसभीड़ा व दंतोला सहित आसपास के अन्य जंगलों में घास लेने गई महिलाओं द्वारा भालू को देखा गया।

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जंगली जानवरों के आतंक से जीना दूभर
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कनालीछीना (पिथौरागढ़): विकासखंड के भागीचौरा क्षेत्र में जंगली जानवरों का आतंक छाया हुआ है। सुअर और बंदरों ने काश्तकारों का जीना दूभर कर दिया है। तमाम शिकायतों के बावजूद वन विभाग द्वारा इनके आतंक से निजात नहीं दिलाए जाने से क्षेत्रवासियों में आक्रोश व्याप्त है। परेशान क्षेत्रवासियों ने अब संघर्ष समिति का गठन कर शासन-प्रशासन की उपेक्षा के खिलाफ आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है।

शुक्रवार को डांगटी व नरेत क्षेत्रवासियों की बैठक में जंगली जानवरों की समस्या पर चर्चा हुई। ग्रामीणों का कहना था कि बंदरों और सुअरों के कारण महिलाओं और बच्चों का घरों से बाहर निकलना दूभर हो गया है। बच्चों के हाथों से बंदर सामग्री छीनकर ले जा रहे हैं। फसलों को बर्बाद करने से भगाने पर लोगों को काटने के लिए दौड़ रहे हैं। इस समस्या से लगातार वन विभाग को अवगत कराने के बाद भी इन्हें आबादी से दूर खदेड़ने के अभी तक कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। पूर्व प्रधान कृष्णानंद अवस्थी ने इसके खिलाफ संघर्ष समिति का गठन करने की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र उन्हें जंगली जानवरों से छुटकारा नहीं दिलाया जाता है तो वह पूरे क्षेत्रवासियों को संगठित कर आंदोलन छेड़ देंगे।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7146620.html

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कुत्ता भी नहीं ढ़ूढ़॒पाया घायल बाघिन॒
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ढिकुली॒के समीप गर्जिया॒गांव की महिलाओं को मारने वाली घायल बाघिन॒को खोजने के लिए॒बृहस्पतिवार को पुलिस के कुत्ते बुलाए गए,॒पर तीसरे दिन भी उसके फुट प्रिंट और कुछ ब्लड स्पॉट के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा। इसके साथ ही, जंगल में कुछ पार्टियों की कांबिंग का नतीजा भी शून्य रहा। अब इस आशा में कि घायल बाघिन॒अपने शिकार के पास लौटेगी, शिकारी फिर मचान पर डट गए॒हैं। साथ ही, वहां एक कटरा भी बांध दिया गया है।
गर्जिया॒निवासी शांति देवी को मौत के घाट उतारने वाली बाघिन॒को १०॒जनवरी की रात गोली मारी गई थी, इसके बाद वह अंधेरे॒के बीच घनी झाड़ियों में छिप गई। उसकी तलाश में तीन दिनों से कांबिंग की जा रही है, लेकिन बाघिन॒का पता नहीं चला। बृहस्पतिवार को काठगोदाम थाने के पुलिसकर्मी डाग स्क्वायड॒मनी के साथ घटनास्थल॒पर पहुंचे। वहां उन्होंने घायल बाघिन॒का रक्त सुंघाकर उसे खुला छोड़ दिया। मनी भी वनकर्मियों को धुलवा बीट नंबर १३॒के नाले तक ले गया। वहां वनकर्मी पहले भी पहुंच चुके थे, इससे आगे मनी भी नहीं चल सका। घंटेभर॒की मशक्कत के बाद उसे काठगोदाम भेज दिया। इसके बाद घटनास्थल पर एक कटरा बांधकर॒विभागीय शिकारी मथुरा सिंह मावड़ी॒और गढ़वाल के शिकारी लखपत सिंह नेगी को फिर मचान पर बैठाया गया है।
वहीं, उत्तराखंड वन्य एवं पर्यावरण सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष अनिल बलूनी, एनटीसीए॒के सदस्य सचिव डा. राजेश गोपाल, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक श्रीकांत चंदोला, चीफ कुमाऊं एससी पंत, उपनिदेशक सीके कविदयाल॒ने भी आपरेशन सर्च की निगरानी की। उधर,॒एसडीएम॒एके॒नौटियाल, सीओ पीसी आर्या ने भी ग्रामीणों, वनाधिकारियों॒के मध्य सामंजस्य बनाने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित ग्रामीणों ने निदेशक, उपनिदेशक पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए॒उनके स्थानांतरण की मांग की। पार्क वार्डन यूसी तिवारी ने ग्रामीणों से अभियान में सहयोग की अपील की है। इस पर ग्रामीणों ने तीन दिन का अल्टीमेटम देकर हमलावर बाघिन॒को मारने की मांग की। इनमें ईडीसी॒के अध्यक्ष चंद्रशेखर खुल्बे,॒गणेश छिम्वाल,॒राकेश नैनवाल,॒नारायण दत्त जोशी, अशोक खुल्बे,॒खजान छिम्वाल,॒वीरेंद्र सिंह रावत आदि शामिल रहे।

http://www.amarujala.com/state/Uttrakhand/6420-2.html

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भालू के हमले में श्रमिक जख्मी
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थलीसैंण पौड़ी गढ़वाल में श्रमिक पर भालू ने अचानक हमला बोल जख्मी कर दिया। चीखपुकार मचने पर आसपास मौजूद लोगों ने जैसे-तैसे मजदूर को भालू के चंगुल से बचाया। श्रमिक को संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है।

जनपद पौड़ी गढ़वाल के ग्राम घनस्याली तहसील थैलीसैंण निवासी भीम बहादुर पुत्र गब्बर सिंह के गांव में मनरेगा के तहत कार्य चल रहा है। इसमें भीम सिंह भी मजदूरी करता है। वह रविवार की शाम घर लौट रहा था तभी भालू ने उस पर हमला बोल दिया। अचानक हुए घटनाक्रम से घबराये ग्रामीणों ने शोर मचाकर बीचबचाव किया। इस पर भालू श्रमिक को छोड़ जंगल को ओर भाग निकला। इसके बाद इमर्जेसी 108 सेवा से भीम सिंह को संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के अनुसार उसकी हालत में सुधार है।

Dainki jagran

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तोणखंड में गुलदार का आतंक, दो दर्जन पशु बने निवाला
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घनसाली : पट्टी नैलचामी के तोणखंड गांव में विगत छ: माह से गुलदार का आतंक बना हुआ है। ग्रामीणों ने शीघ्र ही वन विभाग से गुलदार को पकड़ने की मांग की है।

विकासखंड भिलंगना की ग्राम पंचायत तोणखंड में विगत छह माह के भीतर गुलदार ने दो दर्जन से भी अधिक पशुओं का निवाला बना लिया है , साथ ही कई लोगों पर हमला किया है। ग्रामीण गुलदार के डर से शाम ढलते ही अपने घरों में कैद हो जाते हैं। क्षेत्र पंचायत सदस्य लक्ष्मी प्रसाद जोशी, बुद्धि वल्लभ पाण्डेय, राजेश्वरी देवी आदि लोगों का कहना है कि गुलदार अभी तक ग्रामीणों के दो दर्जन से अधिक पशुओं को निवाला बना चुका है। यही नहीं गुलदार दोपहर में ग्रामीणों के खेतों में नजर आ रहा है जिससे ग्रामीण महिलाएं पशुओं के लिए घास पत्ती लाने तथा बच्चे स्कूल जाने में भी कतरा रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में शीघ्र पिंजरा लगाकर गुलदार को पकड़ने की मांग की है।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7218236.html

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जंगल के राजा से हारे ग्रामीण
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रामनगर: सुंदरखाल गांव में बाघ का खौफ किस कदर हावी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ग्रामीण अपने मवेशियों को औने-पौने दामों में बेचने लगे हैं। जंगल का रुख बंद हो गया है। चारा संकट गहराने से मवेशी भूख से तड़प रहे हैं। कुछ ने दम तोड़ दिया है, जबकि तमाम कमजोर पड़ चुके हैं। कइयों ने अपनी-अपनी गाय-भैंस दूसरे गांवों में रिश्तेदारों के पास पहुंचाना शुरू कर दिया है।

सुंदरखाल वासियों ने जिन मवेशियों को अपने बच्चों की तरह पाला, उन्हें भूख से तड़पता देख वे विचलित हो उठे हैं। लाजिमी भी है क्योंकि आदमखोर के खौफ से उन्हें जंगल से चारा लाना ही बंद कर दिया है। ऐसे में गाय-भैंसों के भरपेट चारा जुटाना चुनौती बन गया है। गांव के उदय राम ने कहा, वह अपने बैलों को सांवल्दे गांव निवासी रिश्तेदार के यहां भेज रहा है। बाघ का शिकार बनने या अपने मवेशियों को भूखा मारने का और कोई विकल्प भी नहीं है। उधर चारे के साथ ही जलौनी लकड़ी का संकट भी गहरा गया है। चूल्हा आगे कैसे जलेगा, ग्रामीणों को यह चिंता भी सताने लगी है।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7250017.html

Anil Arya / अनिल आर्य

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बालिका को घर से उठा ले गया गुलदार
कोटद्वार (ब्यूरो)। बीरोंखाल ब्लाक के अंतर्गत ग्राम लैंगल में बृहस्पतिवार देर शाम गुलदार बालिका को उसके घर से उठा ले गया। काफी खोजबीन के बाद भी बालिका का पता नहीं चल पाया। घटना से ग्रामीणों में दहशत है।
गुलदार के हमले की घटना बृहस्पतिवार देर शाम उस वक्त हुई, जब लैंगल निवासी चंद्र शाह की 11 वर्षीय पुत्री शालू घर के दरवाजे पर खड़ी थी। अचानक आ धमके गुलदार ने शालू पर झपट्टा मारा और उसे उठाकर ले गया। अचानक हुई घटना से मौजूद परिजन घबरा गए और उन्होंने चीख-पुकार मचानी शुरू की। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने शालू की तुरंत खोज शुरू की। लेकिन उसका कोई पता नहीं चल पाया। समाचार लिखे जाने तक ग्रामीण शालू की खोजबीन में लगे थे। ग्रामीणों ने गुलदार के हमले पर चिंता जताई है।
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