Author Topic: Today's Thought - पहाड़ के मुहावरों/कथाओं एवं लोक गीतों पर आधारित: आज का विचार  (Read 32548 times)


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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महाकवि कालिदास ने हिमालय के बारे में यह वर्णन किया था! 
 
 अस्तुरत्तरस्यांम दिशि देवतात्मा, हिमालयो नाम नगाधिराजः !
 पूर्वापरो तोय विधि गाह्रा, स्थितिः पृथ्वी व्याम इव मानदण्डः !!

The Great poet Kalidas, a fifth Century AD Poet described the Lord Himalaya:- In the northern quarter is divine Himalayas, the lord of the Mountains, reaching from Eastern to Western Ocean, firm as a rod to measure the earth. There demigods rest in the shade of clouds, which spread like girdle below the peaks but when the rains disturb them, they fly to sunlit summits..

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गाँव के ।
अब अँधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गाँव के ।

कह रही है झोपडी औ' पूछते हैं खेत भी,
कब तलक लुटते रहेंगे लोग मेरे गाँव के ।

बिन लड़े कुछ भी यहाँ मिलता नहीं ये जानकर,
अब लड़ाई लड़ रहे हैं लोग मेरे गाँव के ।

कफ़न बाँधे हैं सिरों पर हाथ में तलवार है,
ढूँढने निकले हैं दुश्मन लोग मेरे गाँव के ।

हर रुकावट चीख़ती है ठोकरों की मार से,
बेडि़याँ खनका रहे हैं लोग मेरे गाँव के ।

दे रहे हैं देख लो अब वो सदा-ए-इंक़लाब,
हाथ में परचम लिए हैं लोग मेरे गाँव के ।

एकता से बल मिला है झोपड़ी की साँस को,
आँधियों से लड़ रहे हैं लोग मेरे गाँव के ।

तेलंगाना जी उठेगा देश के हर गाँव में,
अब गुरिल्ले ही बनेंगे लोग मेरे गाँव में ।

देख 'बल्ली' जो सुबह फीकी दिखे है आजकल,
लाल रंग उसमें भरेंगे लोग मेरे गाँव के ।
---रचनाकार: बल्ली सिंह चीमा ___

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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"दैण्या होयां खोलि का गणेश, दैण्या होयां मोरि का नारैण!"
हे बाबा केदार तेरू जनि ऊँचो थान, तनि ऊँचो राखि ये देश कु मान।
जुग-जुग बटि या दुनिया रे बाबा, त्यारा दर्शनो कु आणि छ,
दु:ख विपदा त्वैमा छोड़िकि, सुख उकरि ली जाणी छ,
हे शम्भो! जो जस दे भगवान, जो जस दे भगवान..........।"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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 सड़का की घूमा, सड़का की घूमा

सड़का की घूमा, सड़का की घूमा

सदानि नि रैंदी सुवा, जवानी की धूमा

सदानि नि रैंदी सुवा, जवानी की धूमा

सदानि नि रैंदी सुवा हो...

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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 गौड़ी कू मखन, गौड़ी कू मखन

गौड़ी कू मखन, गौड़ी कू मखन

दुनिया न मरि जाण, क्या ल्हिजाण यखन

दुनिया न मरि जाण, क्या ल्हिजाण यखन

दुनिया न मरि जाण.....

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Mahi Singh Mehta
15 hours ago
One of the famous song of Narendra singh Negi ji on migration.

न दोड़- न दोड़ तै उन्दरी का बाटा
उन्दारीयु का बाटा

उन्दरी कु सुख द्वि -चार घड़ी को
उकळी को दुःख सदनी को सुख लाटा

सौन्गु (आसन ) चितेंद अर दोडे भी जांद
पर उन्दरी को बाटा उन्द जांद मनखी
खैरी त आन्द पर उत्याडू (ठोकर) नि लगदु
उबू (उपर) उठ्द मनखी उकाल चडी की

न दोड़ - न दोड़ तै उन्दरी का बाटा
उन्दारीयु का बाटा

ऍच गोंउ मुख मा ज्वा गंगा पवित्र
उन्दरियो मा दनकीक कोजाल ह्वे गे

गदनीयू मा मिलगे जो हियूं उन्द बौगी
जो रेगे हिमालय म वी चमकणुच आ

न दोड़ - न दोड़ तै उन्दरी का बाटा
उन्दारीयु का बाटा

बरखा बातोणियो मा भी उन्द नी रडनी जू
तुक पहुची गनी खैरी खै-खै की
जोल नी बोटी धरती माँ पर अंग्वाल
उन्द बौगी गनी अपणी खुशीयून

न दोड़ - न दोड़ तै उन्दरी का बाटा
उन्दारीयु का बाटा................
.
गीत : नरेन्द्र सिह नेगी जी ...

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी = Mother and motherland are more respectable than even heaven

 

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