Author Topic: Live Chat with Mr Madhavanand Bhatt Producer & Builder -सीधी बात एम् एन भट्ट से  (Read 22555 times)

पंकज सिंह महर

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भट्ट ज्यू, पैलाग हो महाराज। 

jagariya/जगरिया

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महाराज पैलाग हो, मैं तुमारा गौं को ढोली महाराज,
जै हो तुमरी, भौते भल काम करन मरिछा, जी रया, जागी रया।

Dinesh Bijalwan

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namaskaar bhatt ji.  siphai ji  ke liye badhai

Madhavanand Bhatt

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मनीष मेहता जी,
धन्यवाद...
नमस्कार भट्ट जी....मेरा पहाड़ पोर्टल में आपका स्वागत है...उत्तराखंड कि संस्कृति और भाषा रूपी धरोहर को सँभालने और सजोहने के लिए आपके द्वारा किये जा रहे प्रयाश अतुलनीय है...हमें आप पै गर्व है...

Ajay Tripathi (Pahari Boy)

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My heartiest congratulation for making such an astonishing movie on our soldiers. Being living in Mumbai your heart is still toward Uttrakhand as in today’s world people hide their native place.

हुक्का बू

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ओहो, आज त म्योरा माधव नाति आ रिछ........भल करिछ्य नाति, जो इन ननतिनाक का बिच आछे,
घर में ब्वारी, नाति-नतिना भल ह्वै रया हुन।
यां अछ्यालन पानि नै ऊन मरयो, तेरि आमा जै रैछ हरद्यौ का धारा पानि ल्यूनाकि,
कि करनु इजा पहाड़ि भया, जिंदगी ले पहाड़ेकि जसि भै।

Madhavanand Bhatt

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राजेन जी स्वागत करने के लिये धन्यवाद

A warm welcome to Bhatt jee.

Madhavanand Bhatt

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Mere Pitaji Indian Army mein Sipai the aur uske baad unhone Mumbai mein 30saal naukri ki.
Hamara bachpan Mumbai mein gujra. Bade bhai ne 30saal Indian Air-Force mein service ki.
Meri dharmpatni school teacher thi aur is waqt yoga teacher hain. mera beta Tourism field mein hai aur uski hardik iccha hai ki woh Uttarakhand Tourism ke vikas ke liye kaam kare.

maine 20 saal bank mein naukri ki aur VRS lene ke baad pichle 12 saalo se bhavan nirmata ke roop mein Navi-Mumbai mein karyarath hoon.

baaki saari details ke liye www.shreeanmolproduction.com pe login ki jiye.

jagmohan singh jayara

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भट्ट जी प्रणाम,

आपने उत्तराखंड के फौजी जवानों के जीवन पर "सिपैजी" फिल्म बनाकर समाज के सामने प्रस्तुति की है.  कैसा रहा आपका अनुभव और क्या भविष्य देखते हैं आप....उत्तराखंडी फिल्म जगत का.  आशा करता हूँ आप समाज को सही दिशा, अतीत की  झलक, अपनी भाषा के प्रसार  का  प्रयास फिल्मांकन के द्वारा करते रहेंगे.  पहाड़ के लोग प्रवासी हो गए हैं.....आशा करता हूँ आप एक सुन्दर सी फिल्म "प्रवासियों की पीड़ा"  पर आधारित बनाकर....फिल्मांकन करके.....हम प्रवासिओं को प्रस्तुत करेंगे.

"प्रवासियों की पीड़ा"

देश के महानगरों में,
उत्तराखंड के लाखों लोग,
झेल रहे हैं प्रवास,
प्यारे पर्वतों से दूर,
जहाँ चाहकर भी नहीं मिलता,
पहाड़ जैसा परिदृश्य,
जनु,
ठण्डु पाणी, ठण्डु बथौं,
हरीं भरीं डांडी,हिंवाळि कांठी,
बांज, बुरांश,घुगती,हिल्वांस,
मनख्वात, भलि बात,पैन्णु पात,
परिवार अर् दगड़्यौं कू साथ,
ढोल-दमौं, मशकबीन बाजू,
डोला पालिंग, रंगमता पौंणा,
औजि का बोल अर् ब्यौ बारात,
अर् झेल्दा छौं,
हो हल्ला, मंख्यों कू किबलाट,
मोटर गाड़ियौं कू घम्म्ग्याट,
जाम मा जकड़िक,
पैदा होन्दि झुन्झलाट,
सब्बि धाणी छोड़िक,
पराया वश ह्वैक,
ड्यूटी कू रगरयाट,
सोचा, यानि छ हम सब्बि,
"प्रवासियों की पीड़ा",
अपन्णु घर बार त्यागिक,
कनुकै ह्वै सकदन,
हमारा तुमारा ठाट बाट.

रचनाकार: जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु" 
19.2.2009 को रचित

Madhavanand Bhatt

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