Author Topic: Folk Songs Of Uttarakhand : उत्तराखण्ड के लोक गीत  (Read 44689 times)

पंकज सिंह महर

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मार झपुका सिलगडी का पारा चाला मार झपुक |
मार झपुका मैता का असुरज्यु हो मार झपुक |
मार झपुका सब दिन दयाल होला मार झपुक |
मार झपुका गंगा ज्यू का बगड़ में हो मार झपुक |
मार झपुका भूरा भुरा मेल ज्यू हो मार झपुक |
मार झपुका धोपरी को ग़म लाग्यो हो मार झपुक |
मार झपुका ना पानी ना सैल ज्यू हो मार झपुक |
मार झपुका घौल बलद कैका होला मार झपुक |
मार झपुका नौं घर हरी का ज्यू हो मार झपुक |
मार झपुका यसा दिनां रौल हुन कि मार झपुक |
मार झपुका जनम भरी का ज्यू हो मार झपुक |
मार झपुका खणना खणाना गौबि जांछ मार झपुक |
मार झपुका उ गड में तिकोण ज्यू हो मार झपुक |
मार झपुका ना मैले जोड़ी को पायो मार झपुक |
मार झपुका ना जोड़ी को देखण ज्यू हो मार झपुक |

Hisalu

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कुंमाँऊनी लोक गीत ------

कै करूँ सासू लम चरयो लै रेवती बौज्यू बुड |
चपल पैरछी चुड , चुडे चल मेरी दुकाना ,चपल पैरछी चुड |

खुकुरी को म्याना , जोगी बैठी ध्याना |
च्याल वालौं का च्याला. जीरौं , फकतों की जाना |
कैकी करूँ मनवसी , कैकी अभिमाना |
नानछिना की पिरीति की त्वे नि रूनी फामा |
करी गेछे वो खडयूँणी रुख डावा चाणा |

चपल पैरंछी चुड , चुडे चल मेरी दुकाना ,चपल पैरछी चुड |
कै करूँ सासू ठुल कुडैलै रेवती बौज्यू बुड |

मडुवे की मानी , जतिये की कानी ,
जैकि हूँ फोसडी खोरी पापिणी उ धिनाली नी खानी |
जनम सबूं ले लियो छ पापिण करमै कि खानी |

चपल पैरछी चुड , चुडे चल मेरी दुकाना ,चपल पैरछी चुड |
केलडी को खाना , धुरी पाको आमा |
नानछिना की पिरीति की त्वे धरिये फामा |

चपल पैरछी चुड , चुडे चल मेरी दुकाना ,चपल पैरछी चुड |
कै करूँ सासू लम चरयो लै रेवती बौज्यू बुड |
कै करूँ सासू ठुल कुडैलै रेवती बौज्यू बुड |

भावार्थ
क्या करूँ सास जी , लम्बे मंगल सूत्र से रेवती के पिता जी अर्थात :मेरे पति तो बूढ़े हैं |
चप्पल पहनोगी या चूडियाँ , चलो मेरी दुकान में चलो |
चप्पल पहनोगी या चूडियाँ , चलो मेरी दुकान में चलो |
खुकुरी की म्यान , योगी ध्यान - मग्न बैठा है ,
सन्तान वालों के पुत्र चिरजिंवी हों , और कुवारे दीर्घायु हों |
किस - किस की मर्जी पूरी करूँ और किस पर घमंड करूँ |
तुम्हें तो तुम्हारी वल्यापन की प्रीति याद ही नहीं रहती |
बुरा हो तेरा , मुझे तो तू बिलकुल एकांकी छोड़ गई |
चप्पल पहनोगी या चूडियाँ , चलो मेरी दुकान में चलो |
सास जी , मैं क्या करूँ इस बड़े मकान से , रेवती के पिता जी तो बूढ़े हैं |
मडुवा का भूसा , भैसे के कंधे ,
जिसका भाग्य ही रुखा हो उसे दही - दूध क्या मिलेगा ?|
जन्म तो सभी ने लिया है , पर तुम तो भाग्य की खान जन्मी हो |
चप्पल पहनोगी या चूडियाँ , चलो मेरी दुकान में चलो |
केले के वृक्ष का ताना , बगिया में आम पक गए ,
हमारी बचपन की प्रीति को याद रखना तुम |
चप्पल पहनोगी या चूडियाँ , चलो मेरी दुकान में चलो |
क्या करूँ सास जी , लम्बे मंगल सूत्र से मैं , ओ सास जी , रेवती के पिता जी तो बूढ़े हैं |
सास जी , मैं क्या करूँ इस बड़े मकान से , रेवती के पिता जी तो बूढ़े हैं |

(कुंमाँऊ का लोक साहित्य से )

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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प्रयाग पाण्डे
Thursday
हो सरग तारा , जुन्याली रात|
को सुनलो यो मेरी बात ?
पाणी को मसिक सुवा पाणी को मसिक |
तू न्है गये परदेस मैं रूंली कसीक ?
हो सरग तारा ,जुन्याली रात ,को सुनलो यो मेरी बात ?
विरहा कि रात भागी , विरहा की रात |
आखन वै आंशु झड़ी लागी वरसात |
हो सरग तारा ,जुन्याली रात ,को सुनलो यो मेरी बात ?
तेल त निमडी गोछ ,बुझरोंछ बाती |
तेरी माया लै मेडी दियो सरपे कि भांति |
हो सरग तारा ,जुन्याली रात ,को सुनलो यो मेरी बात ?
अस्यारी को रेट सुवा, अस्यारी को रेट |
आज का जईयां बटी कब होली भेंट |
हो सरग तारा ,जुन्याली रात ,को सुनलो यो मेरी बात ?|

(कुमांऊँ का लोक साहित्य )

पंकज सिंह महर

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यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा |
चमकनी गिलास सुवा रमकनी चाहा छ |
तेरी - मेरी पिरीत को दुनिये ड़ाहा छ |
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा |
जाई फ़ुली , चमेली फुली, देणा फुली खेत |
तेरो बाटो चानै - चानै उमर काटी मेता |
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा |
गाडा का गडयार मारा दैत्या पिसचे ले |
मैं यो देख दुबली भ्यूं तेरा निसासे लै |
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा |
तेरा गावा मूंगे की माला मेरा गावा जंजीरा |
तेरी - मेरी भेंट होली देबी का मंदीरा |
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा |
अस्यारी को रेट सुवा अस्यारी को रेट |
यो दिन यो मास आब कब होली भेंट |
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा |

भावार्थ :
इस राह से किधर जा रही हो तुम ? सीधे देवी के मंदिर की ओर |
चमकते गिलास में तेज रंग की चाय रही हुई है |
तुम्हारे , मेरे प्रेम से सभी लोग ईर्ष्या करने लगे हैं |
इस राह से किधर जा रही हो तुम ? सीधे देवी के मंदिर की ओर |
जाई और चमेली के फूल खिले हैं , खेतों में सरसों फूली है |
तुम्हारी राह देखते - देखते मैंने अपनी सारी उम्र मायके में ही बिता दी है |
इस राह से किधर जा रही हो तुम ? सीधे देवी के मंदिर की ओर |
दैत्य- पिचास ने छोटी नदी की मछलियाँ मार डाली हैं |
देखा , तुम्हारे विरह में कितनी दुर्बल हो गई हूँ |
इस राह से किधर जा रही हो तुम ? सीधे देवी के मंदिर की ओर |
तुम्हारे गले में मूंगे की माला है और मेरे गले में जंजीर |
तुम्हारे और मेरी भेंट होगी देवी के मन्दिर में |
इस राह से किधर जा रही हो तुम ? सीधे देवी के मंदिर की ओर |
असेरी (स्थानीय माप का बर्तन )का घेरा |
आज के दिन , इस माह ,हम मिले , अब कब भेंट होगी ?
इस राह से किधर जा रही हो तुम ? सीधे देवी के मंदिर की ओर |

(कुमांऊँ का लोक साहित्य )

Bhishma Kukreti

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                 Chhpti Geet  : Love Folk Song of Ravain Garhwal
                      Internet Presentation by Bhishma Kukreti

[Notes on folk love songs, Ravain folk love songs; Garhwali folk love songs; folk love songs of Uttarkashi; folk love songs of Tihri Garhwal; folk love songs of Pauri Garhwal; folk love songs of Chamoli Garhwal; folk love songs of Rudraprayag; folk love songs Of Kedarghati; folk love songs of Udham Singh Nagar; folk love songs of Ranikhet; folk love songs of Haldwani; folk love songs of Haridwar; folk love songs of Ranikhet; folk love songs of Neonatal; folk love songs Almora; folk love songs of Dwarhat; folk love songs Pithoragarh; folk love songs of Lainsdown; Mid Himalayan folk love songs; Himalayan folk love songs; North Indian folk love songs; Indian folk love songs; Asian folk love songs; Oriental folk love songs]

  Ravai is very exclusive area of Uttarkashi Garhwal for its exclusive and varied folk literature and culture. Late Dr Jagdish Naudiyal (Jaggu Naudiyal) provides us various aspects of culture and customs of Ravain.
  Chhopti genre is a folk love song of Ravain region. The Chhopti love songs are in question and answer type. There are are questions from female and male lovers in poetic pattern. The pattern of Chhopati poetry is in Bajuband format (that is first stanza is meaningless and is only for creating pad). The people may sing the song in crowd or singer may sings singularly. Usually the Chhopti love songs are sung on the top of hill.

                          छोपती गीत
(यह लेख स्व जग्गू नौडियाल को समर्पित है जिन्होंने रवांई क्षेत्र की संस्कृति को अपनी पुस्तक में समेटा )
पुरुष -
सरी जालो सांदो सरी जालो सांदो, मैणा चलकूड़ी सरी जालो सांदो
आछी रैणो मैणा मै भेडूक जांदो ,मैणा चलकूड़ी मै भेडूक जांदो
स्त्री -
घोली जाल्यो घेरो , घोली जालो घेरो , मैणा चलकूड़ी घोली जालो घेरो
तुई जो चली जान्दो मैकू लागे बुरो , मैणा चलकूड़ी मैकू लागे बुरो
The boy says to his lover that she be happy as he is going with his sheep to grazing field. The girl says that she is feeling bad by separation.

                      एक अन्य वियोग भरा छ्पोती गीत
गुल्यारी की गोरी , भै ले घास पियारी ,गुल्यारी की गोरी , भै ले घास पियारी।
कैज बाण होली घास पियारी , मन की पियारी , घास पियारी
झंगूरा कू वाला घास पियारी , घोरे झंगूरा कू वाला घास पियारी
देखि -देखि मेरा घास पियारी छोरी आंखी होइगे लाल घास पियारी
  The boy is separated from his lover and saying that where is is lover lost in forest. His eyes are red due to weeping for their separation. He is searching his lover here and there in forest


गीत संकलन- डा. जगदीश नौडियाल, २०११, उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर ( रवांइ क्षेत्र के लोकसाहित्य का सांस्कृतिक अध्ययन page 106-107), विनसर पब्लिशिंग कं. देहरादून

Copyright@ Bhishma Kukreti, 10/1/2013
Notes on folk love songs, Ravain folk love songs; Garhwali folk love songs; folk love songs of Uttarkashi; folk love songs of Tihri Garhwal; folk love songs of Pauri Garhwal; folk love songs of Chamoli Garhwal; folk love songs of Rudraprayag; folk love songs Of Kedarghati; folk love songs of Udham Singh Nagar; folk love songs of Ranikhet; folk love songs of Haldwani; folk love songs of Haridwar; folk love songs of Ranikhet; folk love songs of Neonatal; folk love songs Almora; folk love songs of Dwarhat; folk love songs Pithoragarh; folk love songs of Lainsdown; Mid Himalayan folk love songs; Himalayan folk love songs; North Indian folk love songs; Indian folk love songs; Asian folk love songs; Oriental folk love songs to be continued….

Bhishma Kukreti

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Contemporary political Subject in Ravai, Garhwali Folk Songs
               Internet Presentation: Bhishma Kukreti
[Notes on Contemporary political Subject in Folk Songs; Contemporary political Subject in Ravai, Uttarkashi Folk Songs; Contemporary political Subject in Folk Songs of Tihri; Contemporary political Subject in Folk Songs of Dehradun; Contemporary political Subject in Folk Songs of Haridwar; Contemporary political Subject in Folk Songs of Pauri Garhwal; Contemporary political Subject in Folk Songs of Rudrapryag; Contemporary political Subject in Folk Songs of Chamoli Garhwal; Contemporary political Subject in Folk Songs of Udham Singh Nagar; Contemporary political Subject in Folk Songs of Rani Khet; Contemporary political Subject in Folk Songs of Nainital; Contemporary political Subject in Folk Songs of Almora; Contemporary political Subject in Folk Songs of Dwarhat; Contemporary political Subject in Folk Songs Pithoragarh; Contemporary political Subject in Folk Songs of Uttarakhand; Contemporary political Subject in Mid Himalayans Folk Songs; Contemporary political Subject in Himalayan Folk Songs; Contemporary political Subject in Indian Folk Songs; Contemporary political Subject in Asian Folk Songs; Contemporary political Subject in Oriental Folk Songs]


 The folk songs of Ravai, Uttarkashi, Garhwal, are with varied subjects and tones. After studying the periodical folk music songs of Ravai, Uttarkashi, Garhwal; it is clear that the folk song creators have been creating songs on contemporary regional and national subjects as political subject. In the following song, there is description of killing of Indira Gandhi the former Indian prime minister. 
रवांइ गढ़वाल क्षेत्र का प्रचलित चलते लोक गीत
[यह लेख गढवाली और हिंदी के साहित्यकार स्व। जग्गू नौडियाल को समर्पित )

तरु डाल्यो पाजा इंदिरा तरु डाल्यो पाजा हे।
ज्वारी लाल की प्यारी इंदिरा चला ओली राजा हे।
पहले के जमाने इंदिरा , इंडिया चला ओली राजा हे।
.ज्वारी लाल की प्यारी इंदिरा,इंडिया चला ओली राजा हे।
सलोरिया की सेटी इंदिरा , सलोरिया की सेटी हे।
इंडिया चलाओली राजा इंदिरा ज्वारी लाल की बेटी हे।
फापीर की पोली इंदिरा ,फापीर की पोली हे।
खोयो ना खराव्यो इंदिरा , शूदी चलाई गोली हे।
खडिका को रूका इंदिरा , खडिक को रूका हे।
तउं मरी के प्यारे इंदिरा दुनिया करोली शोका हे।
संकलन व अन्वेषण : डा.जगदीश नौडियाल , २०११, उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर -रवांइ क्षेत्र के लोकसाहित्य का सांस्कृतिक अध्ययन , (पृष्ठ -110 )विनसर पब्लिशिंग कं देहरादून


Shrimati Indira Gandhi was ruling the country. Indira Gandhi was daughter of Jawahar Lal Nehru. Innocent Indira Gandhi was killed. There was sadness all over world on the killing of Indira Gandhi
                                  Chalta Dance
 The dancers dance on the above song and is called Chalta dance. The men and women dance in the circle.             
 Copyright@ Bhishma Kukreti 11/1/2013
Comments  on Contemporary political Subject in Folk Songs; Contemporary political Subject in Ravai, Uttarkashi Folk Songs; Contemporary political Subject in Folk Songs of Tihri; Contemporary political Subject in Folk Songs of Dehradun; Contemporary political Subject in Folk Songs of Haridwar; Contemporary political Subject in Folk Songs of Pauri Garhwal; Contemporary political Subject in Folk Songs of Rudrapryag; Contemporary political Subject in Folk Songs of Chamoli Garhwal; Contemporary political Subject in Folk Songs of Udham Singh Nagar; Contemporary political Subject in Folk Songs of Rani Khet; Contemporary political Subject in Folk Songs of Nainital; Contemporary political Subject in Folk Songs of Almora; Contemporary political Subject in Folk Songs of Dwarhat; Contemporary political Subject in Folk Songs Pithoragarh; Contemporary political Subject in Folk Songs of Uttarakhand; Contemporary political Subject in Mid Himalayans Folk Songs; Contemporary political Subject in Himalayan Folk Songs; Contemporary political Subject in Indian Folk Songs; Contemporary political Subject in Asian Folk Songs; Contemporary political Subject in Oriental Folk Songs to be continued…

Bhishma Kukreti

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Contemporary political Subject in Ravai, Garhwali Folk Songs
               Internet Presentation: Bhishma Kukreti
[Notes on Contemporary political Subject in Folk Songs; Contemporary political Subject in Ravai, Uttarkashi Folk Songs; Contemporary political Subject in Folk Songs of Tihri; Contemporary political Subject in Folk Songs of Dehradun; Contemporary political Subject in Folk Songs of Haridwar; Contemporary political Subject in Folk Songs of Pauri Garhwal; Contemporary political Subject in Folk Songs of Rudrapryag; Contemporary political Subject in Folk Songs of Chamoli Garhwal; Contemporary political Subject in Folk Songs of Udham Singh Nagar; Contemporary political Subject in Folk Songs of Rani Khet; Contemporary political Subject in Folk Songs of Nainital; Contemporary political Subject in Folk Songs of Almora; Contemporary political Subject in Folk Songs of Dwarhat; Contemporary political Subject in Folk Songs Pithoragarh; Contemporary political Subject in Folk Songs of Uttarakhand; Contemporary political Subject in Mid Himalayans Folk Songs; Contemporary political Subject in Himalayan Folk Songs; Contemporary political Subject in Indian Folk Songs; Contemporary political Subject in Asian Folk Songs; Contemporary political Subject in Oriental Folk Songs]


 The folk songs of Ravai, Uttarkashi, Garhwal, are with varied subjects and tones. After studying the periodical folk music songs of Ravai, Uttarkashi, Garhwal; it is clear that the folk song creators have been creating songs on contemporary regional and national subjects as political subject. In the following song, there is description of killing of Indira Gandhi the former Indian prime minister. 
रवांइ गढ़वाल क्षेत्र का प्रचलित चलते लोक गीत
[यह लेख गढवाली और हिंदी के साहित्यकार स्व। जग्गू नौडियाल को समर्पित )

तरु डाल्यो पाजा इंदिरा तरु डाल्यो पाजा हे।
ज्वारी लाल की प्यारी इंदिरा चला ओली राजा हे।
पहले के जमाने इंदिरा , इंडिया चला ओली राजा हे।
.ज्वारी लाल की प्यारी इंदिरा,इंडिया चला ओली राजा हे।
सलोरिया की सेटी इंदिरा , सलोरिया की सेटी हे।
इंडिया चलाओली राजा इंदिरा ज्वारी लाल की बेटी हे।
फापीर की पोली इंदिरा ,फापीर की पोली हे।
खोयो ना खराव्यो इंदिरा , शूदी चलाई गोली हे।
खडिका को रूका इंदिरा , खडिक को रूका हे।
तउं मरी के प्यारे इंदिरा दुनिया करोली शोका हे।
संकलन व अन्वेषण : डा.जगदीश नौडियाल , २०११, उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर -रवांइ क्षेत्र के लोकसाहित्य का सांस्कृतिक अध्ययन , (पृष्ठ -110 )विनसर पब्लिशिंग कं देहरादून


Shrimati Indira Gandhi was ruling the country. Indira Gandhi was daughter of Jawahar Lal Nehru. Innocent Indira Gandhi was killed. There was sadness all over world on the killing of Indira Gandhi
                                  Chalta Dance
 The dancers dance on the above song and is called Chalta dance. The men and women dance in the circle.             
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Bhishma Kukreti

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             Magh Tyauhaar Folk Songs of Ravain, Garhwal for festival

                       Internet Presentation: Bhishma Kukreti
[Notes on Folk Songs for Makar sankranti  festival ; Folk Songs of Ravai Garhwal for Makar sankranti festival; Folk Songs of Uttarkashi for Makar sankranti festival; Folk Songs of Tihri for Makar sankranti festival; Folk Songs of Uttarakhand for Makar sankranti festival ; Folk Songs of Mid Himalaya for Makar sankranti festival; Himalayan Folk Songs  for Makar sankranti festival; North Indian Folk Songs for Makar sankranti festival; Indian Folk Songs for Makar sankranti festival; Indian subcontinent Folk Songs for Makar sankranti festival; SAARC Countries Folk Songs for Makar sankranti festival; Asian Folk Songs for Makar sankranti ; Oriental Folk Songs for Makar sankranti festival]

Makar sankranti has many names as Makar Sankranti in Rajasthan, Andhra, and Haryana etc. In Gujrat it is called Uttaryan; In Himachal, Punjab it is called Maghi; In Tamil it is celebrated as Pongal; In Assam valley, this day is called magh Vihu.
  In Ravai, Magh tyauhar has very important place in its culture. Magh tyauhar songs are sung by male and females from first day of Paush till first day of Magh. The women come back to their mayka (parental village) and all those girls/women enjoy the month by singing different songs in houses. Males also participate in these Magh tyauhar dances and songs
Here are two popular songs of Magh tyauhar sung in the month of Posh in Ravai region of Garhwal
रवांइ गढ़वाल क्षेत्र का प्रचलित माघ त्यौहार लोक गीत
(यह लेखमाला  स्व जग्गू नौडियाल को समर्पित है )
1-कुकड़ी कु भीता

लडकियाँ चौक में बैठकर लम्बी धुन में गाती हैं -
कुकड़ी कु भीता पौष विचो माघ ले बौड़ी -बौड़ी गैना रीता मेरा पानू बो
बाजी जालो वाणों , बौड़ी गैन रीता सौरे सौरे पड़ा जाणो मेरी पानू बो .
Paudh moth is gone. Now are the days for farm works. Now we have to go to in laws houses
                2- मै रामा जुबली हे

2- मा शू को मेशारा रे , मै रामा जुबली हे
मैं आच्छो मानन्दो रे , मै रामा जुबली हे
पोश को त्योहारा रे , मै रामा जुबली हे
चूलूं भान्यो डेलो रे , मै रामा जुबली हे
मैं आच्छो मानन्दो रे , मै रामा जुबली हे
हिंडोडा को मेलो रे , मै रामा जुबली हे
बजी जालो वाणी रे , मै रामा जुबली हे
ताई भी जाई आणो रे , मै रामा जुबली हे
मैं आच्छो मानन्दो रे , मै रामा जुबली हे
संकलन व अन्वेषण : डा.जगदीश नौडियाल , २०११, उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर -रवांइ क्षेत्र के लोकसाहित्य का सांस्कृतिक अध्ययन , (पृष्ठ -109 )विनसर पब्लिशिंग कं देहरादून
 I like the festival of Paush month. I also like very much the fair Hindoda held in the day of Makar Sankranti. That is why my dear friend (Jubli) you also visit the Hindoba fair
Copyright@ Bhishma Kukreti 12/1/2013
Comments  on Folk Songs for Makar sankranti  festival ; Folk Songs of Ravai Garhwal for Makar sankranti festival; Folk Songs of Uttarkashi for Makar sankranti festival; Folk Songs of Tihri for Makar sankranti festival; Folk Songs of Uttarakhand for Makar sankranti festival ; Folk Songs of Mid Himalaya for Makar sankranti festival; Himalayan Folk Songs  for Makar sankranti festival; North Indian Folk Songs for Makar sankranti festival; Indian Folk Songs for Makar sankranti festival; Indian subcontinent Folk Songs for Makar sankranti festival; SAARC Countries Folk Songs for Makar sankranti festival; Asian Folk Songs for Makar sankranti ; Oriental Folk Songs for Makar sankranti festival to be continued…

Bhishma Kukreti

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             Magh Tyauhaar Folk Songs of Ravain, Garhwal for festival

                       Internet Presentation: Bhishma Kukreti
[Notes on Folk Songs for Makar sankranti  festival ; Folk Songs of Ravai Garhwal for Makar sankranti festival; Folk Songs of Uttarkashi for Makar sankranti festival; Folk Songs of Tihri for Makar sankranti festival; Folk Songs of Uttarakhand for Makar sankranti festival ; Folk Songs of Mid Himalaya for Makar sankranti festival; Himalayan Folk Songs  for Makar sankranti festival; North Indian Folk Songs for Makar sankranti festival; Indian Folk Songs for Makar sankranti festival; Indian subcontinent Folk Songs for Makar sankranti festival; SAARC Countries Folk Songs for Makar sankranti festival; Asian Folk Songs for Makar sankranti ; Oriental Folk Songs for Makar sankranti festival]

Makar sankranti has many names as Makar Sankranti in Rajasthan, Andhra, and Haryana etc. In Gujrat it is called Uttaryan; In Himachal, Punjab it is called Maghi; In Tamil it is celebrated as Pongal; In Assam valley, this day is called magh Vihu.
  In Ravai, Magh tyauhar has very important place in its culture. Magh tyauhar songs are sung by male and females from first day of Paush till first day of Magh. The women come back to their mayka (parental village) and all those girls/women enjoy the month by singing different songs in houses. Males also participate in these Magh tyauhar dances and songs
Here are two popular songs of Magh tyauhar sung in the month of Posh in Ravai region of Garhwal
रवांइ गढ़वाल क्षेत्र का प्रचलित माघ त्यौहार लोक गीत
(यह लेखमाला  स्व जग्गू नौडियाल को समर्पित है )
1-कुकड़ी कु भीता

लडकियाँ चौक में बैठकर लम्बी धुन में गाती हैं -
कुकड़ी कु भीता पौष विचो माघ ले बौड़ी -बौड़ी गैना रीता मेरा पानू बो
बाजी जालो वाणों , बौड़ी गैन रीता सौरे सौरे पड़ा जाणो मेरी पानू बो .
Paudh moth is gone. Now are the days for farm works. Now we have to go to in laws houses
                2- मै रामा जुबली हे

2- मा शू को मेशारा रे , मै रामा जुबली हे
मैं आच्छो मानन्दो रे , मै रामा जुबली हे
पोश को त्योहारा रे , मै रामा जुबली हे
चूलूं भान्यो डेलो रे , मै रामा जुबली हे
मैं आच्छो मानन्दो रे , मै रामा जुबली हे
हिंडोडा को मेलो रे , मै रामा जुबली हे
बजी जालो वाणी रे , मै रामा जुबली हे
ताई भी जाई आणो रे , मै रामा जुबली हे
मैं आच्छो मानन्दो रे , मै रामा जुबली हे
संकलन व अन्वेषण : डा.जगदीश नौडियाल , २०११, उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर -रवांइ क्षेत्र के लोकसाहित्य का सांस्कृतिक अध्ययन , (पृष्ठ -109 )विनसर पब्लिशिंग कं देहरादून
 I like the festival of Paush month. I also like very much the fair Hindoda held in the day of Makar Sankranti. That is why my dear friend (Jubli) you also visit the Hindoba fair
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Bhishma Kukreti

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Abhimanyu –Bjaj-Nrity-geet : a story of Pandau jagar about the Bravery of Abhimanyu

(Notes on Folk Songs of Kumaun, Folk Dance-Songs of Garhwal; Mid Himalayan Folk Songs; Himalayan Folk Dance-Songs, Uttarakhandi Folk Songs ; north Indian Folk Songs; Indian regional Folk Songs; Indian subcontinent  Folk Songs; SAARC Countries Folk Songs; Asian Folk Songs; Oriental Folk Songs]
                                                  Bhishm Kukreti

     Abhimanyu ‘s story brings bravery and pathos raptures  among the audience when Aujees sing the story of Abhimanyu’s entry into Chakravyuh  a circle strategy coined by Drona Chary the Army chief of Kaurava.
 Except Arjun, no other Pandavas knew about fighting against Chakravyuh. Arjun was away in another battle. Abhimanyu heard the story from his father Arjun while Abhimanyu was into womb, when Arjun was telling about breaking Chakravyuh to his wife Subhadra the mother of Abhimanyu. Kauravas killed Abhimanyu by wrong means against rules set before battle of Kurukhsetra. .
 In Garhwal, Abhimanyu Baja Nrity geet is also called ‘Bala Ghnadyal’ . ghandyal is one of the oldest deities  of Garhwal
अभिमन्यु बाजा- नृत्य-गीत

तुम रौंदा होला राजा जयंती Digpal 
तुम होला राजा छत्रसाल भौर
कपटी कौरवों न राजा कुचालू रचेली
जौन रचे राजा सात द्वारों की लड़ाई
जयंती राज भंज राजा सणि पत्री देंदा
जती रंदा पांडो तुम जीती राज मान
तुम आवा पंडो अब सात द्वारों की लड़ाई
जयंती मा ह्व़े ग्याई झोंळी झंकार
सीली त ओबरी राजा झिली ह्वेगे खाट
राजा अर्जुन जायुं च दक्खन का देस
साथ छ वैका किरसण सारथी
घर मा रयुं च बालो अभिमन्यु
मी जौंलो पिता रण भूमि -लड़ाई
छै किलों की कथा मैन मा का पेट मा सुणयाले
जब माता सुभद्रा तैं लगी छै पेट की वेद
अर्जुन न लगाई छै द्वारों की कथा
चक्रव्यूह तोड्नो कु जान्दो छ बालो घंडयाळ
बीरता से दंग रेने पापी कौरव
चालो कौरिक तौं मारे बालो अभिमन्यु

स्रोत्र डा. पुरुषोतम डोभाल
सन्दर्भ डा. शिवा नन्द नौटियाल
Notes on Folk Songs of Kumaun, Folk Dance-Songs of Garhwal; Mid Himalayan Folk Songs; Himalayan Folk Dance-Songs, Uttarakhandi Folk Songs ; north Indian Folk Songs; Indian regional Folk Songs; Indian subcontinent  Folk Songs; SAARC Countries Folk Songs; Asian Folk Songs; Oriental Folk Songs to be continued…

 

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