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केरल शैली रिब्बन मुरूक्कू (पकौड़े)  रेसिपी

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भारत पकोड़ा यात्रा- ७।
उषा बिज्लवाण

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सामगी- २ कप चावला, १ कप बेसण ,१ चम्मच तिल, १/२ चम्मच जीरु, १ चम्मच कश्मीरी लाल मर्च, १/४चम्मच हल्दी, चुटकी भर हींग, १/२ चम्मच लोण, १ कप पाणी, रिब्बन पकोड़ा प्लेट, तेल तलना तै
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विधी-
१ डौंगा पर २ कप चौंलौ का आटा मा तेल छोड़ीक सबी सामग्री डाल द्या खूब मिलै द्या अब २ चम्मच गरम तेल डाल द्या तेल इतना गरम हो कि डाल दा ही आवाज होण चैंदी यन करना से पकोड़ा कुरकुरा और तेल फ्री बणदन चम्मच से अच्छे से ममिलै द्या अब अच्छे से रगडें अपणा दुया हाथों का बीच रखीक खूब बरीक कर द्या अब पाणी डालीक आटु गूंद द्या आटा तै मुलायम नौन स्टिकी होण तक गूंद ल्या अब रिब्बन पकौड़ा मोल्ड ल्या और चकली पर फिक्स कर द्या तेल से ग्रीस कर द्या अब सिलेंडरिकल आकार मा आटु ल्या और मेकर का भितर रख द्या हैकि तरफ तेल गरम होण रख द्या और अब रिब्बन मुरूक्कू तै गरम तेल मा दबा हाथों तै गोलाई मा घुमा मुरूक्कू तै पलटा गोल्डन भूरा होण तक तला पेपर टावल पर निकालिक मसाला अथवा दचध का साथ परोसा
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ब्रैड स्लाइस से बनी चमचम
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गढ़वाली शैली भोजन  रेसिपी

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सरोज शर्मा सहारनपुर बटिक
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सामग्री
ब्रैड के 8 स्लाइस ( ज्यादा बणाण चन्दो वै हिसाब से ले ल्याव )
चिन्नी एक कटवर
मलाई ( फ्रेस ) 4-5 चम्मच
नरयूल कु बुरादा 100 ग्राम
काजू किशमिश बदाम पिस्ता बारीक कटयूं
सगोर
ब्रैड स्लाइस कटवर से गोल आकार म काटिक धैर दयाव
मलाई मा सबया ड्राई फ्रूट मिलाव
अब गोल आकार क ब्रैड स्लाइस मा
ड्राई फ्रूट मिलीं मलाई लगावा
दुसरी स्लाइस ल ढकै दयाव और हल्का हथल दबाव, सबया इन्नी तैयार कैरिक धैर ल्याव
अब एक पैन मा चिन्नी डालिक पौन कटवरि पाणि डालिक तब तक पकाव थोड़ा-बहुत गाढ़ु न ह्वै जाव, चाशनी नि बणाणि ये मा केसर या खाण कु रंग मिलाव अब ये मा तैयार ब्रैड स्लाइस डिप कैरिक निकाल ल्याव नरयूल क बुरादा मा ये थैं लपेट ल्याव ह्वै गै तैयार, खाण मा लाजवाब

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साबुत भिन्डी  रेसिपी
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गढ़वाली शैली भोजन रेसिपी


सरोज शर्मा सहारनपुर बटिक
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सामग्री
500 ग्राम भिन्डी
100 ग्राम तेल
एक निंबू रस
एक चम्मच धणया पौडर
तीन चम्मच लाल मर्च पौडर
अधा चम्मच हल्दी पौडर
कुछ फोली लासण ,आध चम्मच ,लूण स्वादानुसार
सगोर /रेसिपी
भिंडि ध्वै कि कपड़ा ल पूंछ दयाव
लम्बाई म चीर दयाव
लासण जीर कूटिक मसलों म मिला दयाव अब ये मसल थैं भिन्डी म भोरिक गर्म तेल म तल ल्याव, कुरकुरी हूण तक भून ल्याव आखिर म निंबू रस डालिक उतार ल्याव रवटटि दगड खाव सवदि भिन्डी।

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गडेरिक पपटोल
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(कुमाउंनी भोजन विधि /रेसिपी )
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आधा किलो घ्हौत की दाव या मासेक दाव
गडेरिक पत्त व डंडे हिसाबेल
तरिक
घ्हौतेक दाव कें रात भर भिजै दिया। रत्ते पिस लिया। गडेरिक पत्त व डंडन कें कुट भेर पिसि हुई घ्हौतेक दाव में मिला लिया। भली के मिस भेर उनार नान- नान बड़ि बणावो, प्लास्टिक में धर भेर तेज घाम में पन्दर दिन जाने भली के सुखा लियो।
नोट- ठंडी दीनान में जादा बनूनि । भौत सवाद हुनि। घ्हौत की दाव भौते पौष्टिक हुन्छ ये लिजि सप्पे खा सकनि।
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पपटोलक साग
चार मैशने लिजि
पौ भर पपटोल
एक दाण प्याज
एक गांठ लासण
एक ठुल डाड़ सरसों तेल
हींग, जिर छौंक लिजि
लूंण,हल्द,ख़ुश्याण,धणि सवादक हिसाबेल
थोड़ ग्यूंक पिश्यूँ
तरिक
लुआ भदै में सरसों तेल गरम कभेर पपटोल हल्क भुन भेर निकाव ल्यो। जिर व हींग क छौंक लगावो। ग्यूंक पिश्यूँ भुटेन व्है जावो तब जाणे भुटो। सप्पे मश्याल पिस भेर कौल ल्यो। पपटोल डालो पाणि व लूंण दाल भेर हलाते रवो जब तक उमाव न ऐ जवो। यो साग कें बन्यून में जादा समय नि लागूं। किलेकि पपटोल पैली बेटि भुनि हुनि।
नोट- भौते सवाद हुनि। लटपट सुखि हुई पपटोल ले बनाई जनि। कभे ले खा सकच्छा। पपटोल में घ्हौतेक दाल हुन्छ ये लिजि यो पौष्टिक हुन्छ।
सुमीता प्रवीण
मुंबई

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बिहारी गढ़ का लजीज पकोड़ा
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उषा बिज्लवाण देहरादून।
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मन्खी - ३। समै- २० मिनट।
सामग्री- आलु १/२ किलो,
हींग १/२ चम्मच,
चाट मसालू १/२ चम्मच,
अजवाइन १/२ चम्मच,
 हल्दी १ चम्मच,
लोण१ चम्मच,
कसूरी मेथी १ चम्मच,
लाल मर्च पौडर , १ चम्मच,
अमचूर १/२ चम्मच, बे
ल्या लोण १/२ चम्मच,
चाट मसालू १ २ चम्मच ,
चौंलौं कु आटु १/२ चम्मच,
बेसण २ चम्मच,
तेल तळणक।
विधी- आलू उबालिक छिली क मैश कर ल्या अब वैम तेल छोड़ीक सबी सामग्री मिलै द्या गैस मा कढै रखीक तेल डाला अब मिलाईं सामग्री की छोटि छोटि गोली बणैक तल ल्या करारा होण तक तला गरम गरम चाट मसाला बुरकीक परोसा
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पदम श्री बिकलीस लतीफ : एक सामजिक कार्यकर्त्री अर  कुकबुक लेखिका
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 भारतीय महिलाऊं  द्वारा कुकबुक प्रकाशन श्रृंखला
भारतम म पाक शास्त्र ग्रंथ रचना इतिहास   भाग  -२४

भारतम  स्वतंत्रता उपरान्त    कुक  बुक प्रकाशन को ब्यौरा  भाग - ९
Cookbooks after  Independent  India  -  9

-। 
संकलन -भीष्म कुकरेती
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पदम् श्री बिकलीस  लतीफ एक स्लम्स विकास हेतु  प्रसिद्ध सामजिक कायकर्त्री व कुकबुक लेखिका छे।  भारत सरकार न बिकलीस लतीफ की सामजिक कार्य हेतु पदम् श्री पुरुस्कार दे। बिकलीस भूतपूर्व एयर मार्शल लतीफ की जीवन संगनी छे।
 बिकलीस को जन्म  हैदराबाद का नबाब  परिवार अली यावर जंग क  घौर  सन  १९३१ म  ह्वे  ार देहावसान सन २०१७  म ह्वे।  युवा अवस्था से पैली बिकलीसक ब्यौ  एयर कमांडर लतीफ क दगड़  ह्वे  गे  छौ।
बिकलीस को नाम सामजिक कार्य म तो छैं  इ  च अपितु आंध्र भोजन तै प्रसिद्धि दिलाण  म बि  च। 
सन  १९९९ म बिकलीस की  असेंसियल आंध्रा कुक बुक प्रकाशित ह्वे।  असेंशियल ऑफ़ आंध्रा कुकबुक ३३० पृष्ठों  की  च। 
वास्तव म या पुस्तक हैदराबादी मुघलाई भोजन व तेलंगना भोजन पाक शैली  हेतु भौत काम की पुस्तक च।  पुस्तक म आंध्र क सांस्कृत व धार्मिक भोजन पाक कला पर भी केंद्रित पुस्तक च। पुस्तक म लगभग २००  भोजन रेसिपी संग्रहित छन।  असेंसियल आंध्रा कुक बुक पुस्तक की भाषा सरल च व जल्दी समज म आण  वळि  भाषा च। 
 

 सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती
भारत में पाक शास्त्र / cookbooks  ग्रंथ इतिहास; ब्रिटिश राज में  भारत में पाक शास्त्र / cookbooks  ग्रंथ इतिहास;    ग्रंथ इतिहास;  श्रृंखला जारी रहेगी , Cookbooks in British Period in India ; भारत म ब्रिटिश युग म पाक शास्त्र  ग्रंथ प्रकाशन, भारत म स्वतन्त्रता बाद कुक बुक्स प्रकाशन , भारतीय महिलाऊं  द्वारा कुकबुक प्रकाशन श्रृंखला जारी , भारतीय महिलाओं द्वारा प्रसिद्ध कुकबुक प्रकाशन , प्रसिद्ध महिला सेफ

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प्रतिहार नरेश महिपाल /क्षितपाल ( ९१३ -९४४ )

Pratihar King Mahipaal
हर्षवर्धन पश्चात बिजनौर , हरिद्वार , सहारनपुर का 'अंध युग' अर्थात तिमर युग  इतिहास -३४

Dark  Age of History after Harsha Vardhan death - 34

Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  311                   
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग - ३११                 


                  इतिहास विद्यार्थी ::: आचार्य भीष्म कुकरेती
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 महेन्द्रपाल की मृत्यु पश्चात उसका पुत्र भोज व पौत्र महिपाल सिंघसन पर बैठे।   महिपाल व उसके उत्तराधिकारी दुर्बल शासक ही साबित हुए। 
९१८ लगभग राष्ट्रकूट नरेश नरेश  इंद्र ने  कनौज नगर के तोरणों को नष्ट किया।       राष्ट्र कूट  सेना ने लगभग ९४० ईश्वी में कनौज  राज्य के दक्षिण भाग पर पर आक्रमण किया।  महिपाल को भागना पड़ा (२ )
 कवि राजशेखर भी महिपाल का राजकवि था।
महिपाल कीमृत्यु लगभग ९४४ में हुयी (१ )
 महिपाल के बाद पल वंश का   क्षरण होता गया व ९६० के लगभग कान्यकुव्ज पर विजयपाल के शासन की पुष्टि होती है (२ ) ।  इसके बाद किसी पल का कन्नौज संबंधी शासन  आदेश , शिलालेख नहीं मिलता  है (१ ) ।   महिपाल का एक वंशज देवपाल था जिसके सामंत चढेल बड़े शक्तिशाली थे।  ९२५ लगभग चंदेल नरेश हुए।  जो देवपाल को अपने अधीन मानते थे। 
अनुमान किया जाता है कि  उत्तराखंड नरेश कत्यूरी नरेश सलोणादित्य  ने देवपाल से दक्षिण सीमा पर लोहा लिया था
लगता है देवपाल नाम मात्र का उत्तराखंड यहां पर बिजनौर , सहारनपुर व हरिद्वार का शासक था। 
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संदर्भ :
१- रमाशंकर त्रिपाठी , १९८९ , हिस्ट्री ौफ़ कन्नौज , मोतीलाल बनारसी दास पृष्ठ २५९
  २- शिव प्रसाद डबराल 'चारण ' ,  उत्तराखंड का इतिहास भाग ३ वीरगाथा प्रेस दुगड्डा , उत्तराखंड , पृष्ठ   -438
Copyright @ Bhishma  Kukreti
हरिद्वार, बिजनौर , सहारनपुर का प्राचीन इतिहास  आगे खंडों में   ..

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  कोटि बनाल (जौनसार, देहरादून )  में रंजीत सिंह रावत के बहुमजले   भवन में काष्ठ कला
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गढ़वाल,  कुमाऊँ , के  भवन  ( कोटि बनाल   , तिबारी , बाखली , निमदारी)  में   पारम्परिक गढ़वाली शैली  की काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन -
Traditional House wood Carving art of Koti  Banal  , Jaunsar , Dehradun
 संकलन - भीष्म कुकरेती
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 कोटि बनाल जौनसार से कई भवनों की सूचना मिली है  . परस्तीत भवन दिनेश रावत के परिवार के बहुमंजिले भवन की काष्ठ कला पर चर्चा होगी।  प्रस्तुत रणजीत सिंह रावत का भवन जौनसार , रवाईं क्षेत्र के जमींदारों के  पारम्परिक बहुमंजिले  भवन जैसे ही जैसे रैथल राजा का  ५०० साल पुराना  बहुमंजिला भवन है।  प्रस्तुत भवन भी छह मंजिल से ऊँचा है।  कुछ मंजिल सीधे हैं किन्तु ऊपर की तीन चार मंजिलें पिरामिड नुमा हैं।  भवन कोटि  बनाल (अधिक लकड़ी बहुत कम गारा )  शैली का है।
भवन शैलगर रूप से अद्भुत है।   छह सात मंजिल तक भवन में व ऊपर पिरामिड नुमा संरचना में भी लकड़ी का काम ज्यामितीय कटान से ही तख्ते व कड़ियाँ स्थापित हैं।  छायाचित्र में कोई प्राकृतिक (फूल , पत्ती , लता आदि ) व मानवीय (देव आकृति , पशु , मनुष्य आदि ) के कोई चिन्ह नहीं मिल रहे हैं।  कुछ स्थलों में शंकुनुमा संरचना भी मिले  हैं। 
भवन शैल्ग्त सदा याद रखा जायेगा व  रैथल (उत्तरकाशी )  के भवन जैसा ही है। 
सूचना व फोटो आभार : दिनेश रावत
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत हेतु . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020
 कालसी जौनसार में भवन काष्ठ कला, नक्कासी  कोटि बनाल ;    त्यूणी जौनसार में भवन काष्ठ कला, नक्कासी  कोटि बनाल ;     चकरोता जौनसार में भवन काष्ठ कला, नक्कासी  कोटि बनाल ;  बड़कोट   जौनसार में भवन काष्ठ कला, नक्कासी  कोटि बनाल ;     भरम जौनसार में भवन काष्ठ कला, नक्कासी  कोटि बनाल ;   जौनसार में भवन काष्ठ कला, नक्कासी  कोटि बनाल ;  हनुमानचट्टी   जौनसार में भवन काष्ठ कला, नक्कासी  कोटि बनाल ;  यमुनोत्री   जौनसार में भवन काष्ठ कला, नक्कासी  कोटि बनाल ;

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झंगर्याल क‌ खीर/झंगोरा खीर
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एस पी जोशी (यमकेश्वर )
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घरक दूध लोहा क कड़ही मा चुल्ह मा रखो, वेक बाद झंगर्याल भिगाण धरी द्याओ, अब जब दूध पन उमाल आण बैठी जाओ त वेमा झंगर्याल डाली द्याओ, कुछ देर पकण क बाद स्वादानुसार चीनी या गुड डालो,दगडी आप ड्राई फ्रूट डाली सकदन, खूब पकैक झंगर्याल क खीर तैयार च, थाली मा खीर परोसिक वेमा देसी‌ घी डालिक मजा ल्याओ।

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कच्च गहथ(कुलथ की  दाल) क भरीं रुट्टी क रेसिपि
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गढवाली भजन रेसिपी
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एस पी जोशी (यमकेश्वर )


समान
एक कटोरी गहथ, द्वि कटोरी आटु,हरी मर्च,नमक,हल्दी,हींग आदि
विधि -
सबसे पैली रात कुन गहत ठण्डु पाणि मा भिगाण रखो, सुबेर पाणी खतिक सिल्वट मा गहत पीसो(गहथ ज्यादा बारीक भी नि हुण चयाण्दन,) वेक बाद आप रुट्टी कुन आटु गोंदिक रखो,आटु बढिया  करिक ओलण चयाणा,अब आप जु गहथ पिस्याँ छन वेमा सभी मसाला स्वादानुसार मिलाओ और हरी धनिया मिर्च भी मिलै द्याओ। आटु क पेडा बणैक रुट्टी क पुटुक मस्यठ भरो और तेल या बिना तेल क परोंठा क तरां ठण्डी आंच मा स्याको, गरमा गरम गहथ क भरी रुट्टी तैयार च , घी क दगड परोसो और आनन्द ल्याओ।

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