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शुद्धपूर्व म गीत विधान
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भरत नाट्य शाश्त्र  अध्याय  पंचों ५ वों  ( पूर्व रंग विधान)  , पद /गद्य भाग  ५६  बिटेन  ६५ तक
(पंचों वेद भरत नाट्य शास्त्रौ प्रथम गढवाली अनुवाद)
  पंचों वेद भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद भाग -   १४७
s = आधा अ
 पैलो आधुनिक गढवाली नाटकौ लिखवार - स्व भवानी दत्त थपलियाल तैं समर्पित
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गढ़वळिम सर्वाधिक  पढ़े जण वळ  एक मात्र लिख्वार -आचार्य  भीष्म कुकरेती   
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ये पूर्व रंगम विहित निर्गीत अर  संगीत प्रयोग जथगा दैत्यों तै प्रसन्न करदन  तथगा इ देवगन बि  संतुष्ट हूंदन।  ५६।
ये जगत म जु विद्याएं , शिल्प , गतियां व चेष्टाएँ छन अर  जो प्राणियों व जड़ प्रकृति स्वरूप छन वो बि नाट्याश्रित  ह्वेका पूर्वरंग म स्थिर रंदन।  ५७।
आप तै मि येमा अयाँ निर्गीत , संगीत अर वर्धमानक लक्षण अर प्रयोग ध्रुवविधान बतौल।  ५८।
शुद्धपूर्वरंग म गीत विधान -
गीतों क विधि अर वर्धमानक क प्रयोग उपरान्त 'उत्थापनी' ध्रुवा प्रयोग हूण  चयेंद।  ५९।
उत्थापनी ध्रुवा -
ये ध्रुवा क पाद म ११ अक्षर हूंदन। अर येमा  आदि क द्वी चौथो अर ११ वों अक्षर दीर्घ /गुरु हूंद। एक चार पाद हूंदन अर  चौताल हूंद। चार सन्निपात अर तीन प्रकारै लय (द्रुत , मध्य अर वलम्बित ) हूंदन। यु तीन यतियों(समा ,स्रोतोंवहा , गोपुच्छा )  से युक्त हूंद। येमा  चार 'परिवर्त '(पादमागादि,ताल को दुहराव  )  हूंदन अर  तीन पाणि (सम , अवर ,उपरि पाणि ) हूंदन। येमा  जातिवृत (मात्रावृत ) म विश्लोक छंद हूंद अर उनी  चौताल प्रयोग हूंद।  ५९-६२। 
येमा हूण  वळि तालक जो योजना च वो द्वी कला की प्रमाण वळि शम्या ,फिर दो कला की ताल फिर एक कला की शम्या  अर आखिरैं  तीन कला क सन्निपात हूंद। ६३ । 
ये हिसाबन एक सन्निपात तै आठ कलाओं वळ जाणो अर चार सन्निपातों से एक परिवर्त बणद।  ६४ ।
नाट्यवेताजन ये प्रथम परिवर्तक को विलबित लय अर स्थित लय म प्रयुक्त कारन अर तिसर सन्निपात का समय परिवर्त म भांड वाद्य का ग्रहण करे जाय। ६५ ।

 


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  सन्दर्भ - बाबू लाल   शुक्ल शास्त्री , चौखम्बा संस्कृत संस्थान वाराणसी , पृष्ठ -   १७०
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 भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
  भरत नाट्य शास्त्र का प्रथम गढ़वाली अनुवाद , पहली बार गढ़वाली में भरत नाट्य शास्त्र का वास्तविक अनुवाद , First Time Translation of   Bharata Natyashastra  in Garhwali  , प्रथम बार  जसपुर (द्वारीखाल ब्लॉक )  के कुकरेती द्वारा  भरत नाट्य शास्त्र का गढ़वाली अनुवाद   , डवोली (डबरालः यूं ) के भांजे द्वारा  भरत नाट्य शास्त्र का अनुवाद ,

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Place branding and tourism Development through manufacturing Food Spreads

The 10 arts of Ayurveda useful tool for Place branding, Tourism Development – 4
Strategies for Executive for Place Branding
Strategies for Executive for Destination Branding
Tactics for the Chief Executive Officers responsible for Export
Approaches   for the Chief Executive Officers responsible for Country Image
Strategies for the Chief Executive Officers responsible for Tourism
Immutable Strategic Formulas for Chief Executive Officer
(CEO-Logy, the science of CEO’s working based on Shukra Niti)
(Examples from Shukra Niti helpful for Chief executive Officer)
Successful Strategies for successful Chief executive Officer – 364
Guidelines for Chief Officers (CEO) series – 364
s= आधी अ
By Bhishma Kukreti (Management Acharya)
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हीनादि रससंयोगान्नदि सन्पाचनं कला I
वृक्षादिप्रसवारोपपालनादिकृति: कला स्मृता: II
Cooking Bread and food with the aid of Heeng, organic or inorganic salts or other spread is an art.
 Tee plantation and Raising, protecting fruits is an Art.
(Shukraneeti, Chapter 7 Vidya VA Kala Nirupan- II50 II
Reference –
Shukraniti, Manoj Pocket Books, Delhi pp 220
Copyright@ Bhishma Kukreti, 2021



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मिसेज बलबीर सिंह : कुकबुक लेखिका जैन सैकड़ों तै प्रेरित कार


 भारतीय महिलाऊं  द्वारा कुकबुक प्रकाशन श्रृंखला
भारतम म पाक शास्त्र ग्रंथ रचना इतिहास   भाग  -२६
  Cookbooks  Publicatins in India  series - 26   
भारतम  स्वतंत्रता उपरान्त    कुक  बुक प्रकाशन को ब्यौरा  भाग - ११ 
Cookbooks after  Independent  India  -  11
-। 
संकलन -भीष्म कुकरेती
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 मिसेज बलबीर सिंह एक  सरयू ळ , रसोई अध्यापिका , रसोई पाक सलहाकार , कुकबुक लेका व टीवी कमेंटेटर छे।  मिसेज बलबीए सिंहन सैकड़ों महिलाओं तै कुक बणनो  अर रसोई लेख लिखणौ प्रेरित कार।
मिसेज बलबीर सिंह का जन्म पंजाब म १९१२ म ह्वे  छौ।  लंदन बटें १९५५ म मिसेज बलबीर सिंहन कुकिंग म ग्रेजुएशन की डिग्री पायी।  सन १९५५ ब्रिटेन मिसेज बलबीर सिंहन दिल्ली म भोजन पाक कला व्  घर व्यवस्था की शिक्षा  दीण  शुरू कार। ४० वर्षों तक मिसेज बलबीर सिंहन कुकिंग पढ़ाई। 
 सन १९६१  म मिसेज बलबीर सिंह न मिसेज बलबीर सिंहज इंडियन कुकरी पुस्तक  लंदन बिटेन प्रकशित कार।  मिसेज सिंह न भौत सा कुकरी लेख बी प्रकाशित करिन।  १९९४ म मिसेज बलबीर सिंह की कॉन्टिनेंटल कुकरी फॉर इंडियन होम्स
  भारत से भैर भारतीय भोजन तै प्रसिद्धि दिलान म मिसेज बलबीर सिंह को बड़ो हाथ च। 
मिसेज बलबीर सिंह तै भौत सा  सरकारी व  गैर सरकारी संस्थानों से पारितोषिक व प्रशस्ति पत्र बि मिलेन।  फ़ूड नेटवर्क जज साइमन मजूमदारन मिसेज बलबीर सिंह तै जूलिया चाइल्ड या मिसेज बीटोन ऑफ़ इण्डिया की उपाधि दे।
मिसेज बलबीर सिंह की लाखों प्रति पुस्तक बिकेन।  सैकड़ों  प्रसिद्ध कुक मिसेज बलबीर सिंह का शिष्य शिष्या रैन। 
सन १९९४ म  मिसेज बलबीर सिंगक देहावसान पर सैकड़ों शिष्यों व शिष्याओं न मिसेज बलबीर सिंह तै भावभीनी श्रद्धांजलि दे।  -

 सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती
भारत में पाक शास्त्र / cookbooks  ग्रंथ इतिहास; ब्रिटिश राज में  भारत में पाक शास्त्र / cookbooks  ग्रंथ इतिहास;    ग्रंथ इतिहास;  श्रृंखला जारी रहेगी , Cookbooks in British Period in India ; भारत म ब्रिटिश युग म पाक शास्त्र  ग्रंथ प्रकाशन, भारत म स्वतन्त्रता बाद कुक बुक्स प्रकाशन , भारतीय महिलाऊं  द्वारा कुकबुक प्रकाशन श्रृंखला जारी , भारतीय महिलाओं द्वारा प्रसिद्ध कुकबुक प्रकाशन , प्रसिद्ध महिला सेफ , भारत में महिलाओं  का कुकबुक प्रकाशन में योगदान , स्वतंत्रता पश्चात महिलाओं द्वारा कुकबुक प्रकाशन

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  हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर इतिहास संदर्भ में कत्यूरी राजवंश का दंदर्भ    
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 उत्तराखंड पर कत्यूरी राज - १

Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  312                   
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -    ३१२             


                  इतिहास विद्यार्थी ::: आचार्य भीष्म कुकरेती
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 पंचाल क्षेत्र में राजनीतिक उलट फेर के अध्ययनों से पता चलता है कि -
यशोवर्मन से  इंद्रायुध  तक  की राजनीती अर्थात ७४० िश्वि से लेकर ८०० ईश्वी  तक उत्तराखंड ( बिजनौर सहारनपुर सहित )  पर कत्यूरियों का शासन था।  इस समय वसन्तं परिवार की राज्यावधि माना जा सकता है (१ )। 
चक्रायुध से लेकर भोज प्रतिहार दिग्विजय अभियान आरम्भ तक अर्थात ८०० -८७५ तक कत्यूरी के निंबर का राज्य माना जा जा सकता है। 
८७६- १००० ईशवी  तक सलोण आदित्य का राज उत्तराखंड पर माना जा सकता है। 

 .
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संदर्भ :
  १- शिव प्रसाद डबराल 'चारण ' ,  उत्तराखंड का इतिहास भाग ३ वीरगाथा प्रेस दुगड्डा , उत्तराखंड , पृष्ठ   ४३९
Copyright @ Bhishma  Kukreti
हरिद्वार, बिजनौर , सहारनपुर का प्राचीन इतिहास   अगले खंडों में 

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धानाचूली (नैनीताल )  के भवन संख्या ७ की एक खिड़की में अभिनव  काष्ठ कला अंकन,अलंकरण, उत्कीर्णन

   Traditional House Wood Carving Art in Dhanachuli,  Nainital; 
   कुमाऊँ, गढ़वाल, केभवन ( बाखली,तिबारी,निमदारी, जंगलादार मकान,  खोली, )  में कुमाऊं शैली की  काष्ठ कला अंकन,अलंकरण, उत्कीर्णन  - 492

संकलन - भीष्म कुकरेती
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 धानाचुली में कई काष्ठ कला युक्त भवनों की सूचना  मिली है।  आज हम धानाचूली के भवन संख्या ७ की खिड़की की काष्ठ कला व उत्कीर्णन पर चर्चा होगी।  खड़की चौखट है व खिड़की के सिंगाड़ (स्तम्भ ) व मुरिन्ड /म्वार /शीर्ष header भी चौखट व ज्यामितीय कटान के उदाहरण है।  चौखट के अंदर खिड़की के दरवाजे पर  उत्कृष्ट काष्ठ कला अंकित हुयी है।  दरवाजे के तख्ते में चतुर्भुज बैठे गणपति की मूर्ति उत्कीर्णित है।  गणपति के नीचे केले के पत्ते नुमा या कमल दल नुमा आकृति उत्कीर्ण हुयी हैं।  गणपति व केले पत्र या कमल दल के मध्य में तीन सूरजमुखी नुमा फूल उत्कीर्णित हैं।  गणपति के ऊपर तोरणम हैं जिसके स्कंध सपाट हैं। 
 मुरिन्ड के ऊपर एक आवर मुरिन्ड है जिसमे किसी लिपि में कुछ लिखा है। 
खिड़की ब्रिटिश काल की याद दिलाती है क्योंकि खिड़की के बाहर ऊपर पत्थर के चाप है जो ब्रिटिश स्टाइल की है अर्थात भवन १८९० से पहले का नहीं होगा। 
 धानाचूली के भवन ७ की खिड़की  की काष्ठ कला महीन व उत्कृष्ट व स्मरणीय है। 
सूचना व फोटो आभार:मुक्ता नायक
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021 

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अवगाह , जेंताक  अर कटघर स्वेदन विधि
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चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद   
 खंड - १  सूत्रस्थानम ,  चौदवां , स्वेद अध्याय    )  ४५  पद   बिटेन  ४६  - तक
  अनुवाद भाग -  ११३
गढ़वाळिम  सर्वाधिक पढ़े  जण  वळ एकमात्र लिख्वार-आचार्य  भीष्म कुकरेती
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      !!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!!
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अवगाह  स्वेद - वात्त नाशक द्रव्यों क्वाथ , घी , तेल ,मांस रस ,ग्राम पाणी बणैक मनिख तै  काठो कुठार म बंद करी  स्नानौ  कुण   अवगाह स्वेद बुल्दन। ४५।
१ -जेंताक स्वेद -जेंताक स्वेद करणों इच्छा करण /सलाह दीण वळ  वैद्य तै भवन का उत्तर या पूर्व दिशा म जु भूमि भली ह्वावो ,काळ या पील माट  वळी ह्वावो ,तलाव बावड़ी क किनार म  दक्षिण म ह्वावो , भूमि सामान ह्वावो ,
२ कूटगार निर्माण - इखम पाणी से साथ आठ हथ जलाशय क पछ्मी छोर पर पूर्वाभिमुख या जलाशय क दखिन किनारा पर उत्तराभिमुख कूटगार निर्माण करण  चयेंद।  यु कूटगार ऊंचाई म १६ हाथ अर  चौड़ाई म १६ हाथ , चरी तरफ बिटेन  गोळ , भौत  सा दूज्यळ  (रोशनदान ) वळ निर्माण करण  चयेंद, लिप्युं , पुत्युं , साफ़ सुथरा  हूण  चएंद । ये घर क भितर दिवारक चारों तरफ  किवाड़ तक एक हाथ भर चबूतरा हूण चयेंद। मध्यम चार हथ  लम्बो संदूक आकर व दुंळ  वळ  अंगार कोष्ठ स्तम्भ हूण चयेंद जैमा  ढकण  बि हूण चयेंद। 
३- स्वेदन  विधि -  ये स्तम्भ /अंगीठी म खैर ,धाक क लखड़ जळाइक , धुंवा बंद ह्वे जावो तो स्वेद /पसीना दीण ;लैक  ह्वे जांद  तो  पुरुष पर तेल को स्नेह लग्यूं ह्वाओ ,कपड़ा से ढक्यां पुरुष तै स्वदन का वास्ता प्रवेश कराये जाय।  प्रवेश से पैल  व्यक्ति तै समजाण  चयेंद कि सौम्यता , आरोग्यता व मंगल व कल्याण  वास्ता घर म  प्रवेश  कारो अर चबूतरा मक मथि सुख से पोड़ों लेटो  ,अर पसीना आण पर बि , व्याकुल हूण पर बि चबूतरा नि छुड़न , जब सब तरह का छिद्रों  से पसीना आयी जाय , सब छिद्र खुल जावन सरैल हळको  ह्वे  जाय ,मल बंध जड़ता ,स्पर्श ज्ञान आभाव पीड़ा खत्म ह्वे जावो तब चबूतरा क साथ साथ चली द्वार तक आयी जावो अर आँखों पर एकदम ठंडो जल नि डळण , जब थकन , गर्मी , शीतलता आदि खतम ह्वे  जावो तबि  मंतततो पाणी म नयाण चयेंद।  ४६। 
 -
*संवैधानिक चेतावनी : चरक संहिता पौढ़ी  थैला छाप वैद्य नि बणिन , अधिकृत वैद्य कु परामर्श अवश्य
संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस ,पृष्ठ  १८०    बिटेन  १८१   तक
सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2021
शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम

चरक संहिता कु  एकमात्र  विश्वसनीय गढ़वाली अनुवाद; चरक संहिता कु सर्वपर्थम गढ़वाली अनुवाद; ढांगू वळक चरक सहिता  क गढवाली अनुवाद , चरक संहिता म   रोग निदान , आयुर्वेदम   रोग निदान  , चरक संहिता क्वाथ निर्माण गढवाली  , चरक संहिता का प्रमाणिक गढ़वाली अनुवाद

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Place branding and tourism Development through Surgery Art


The 10 arts of Ayurveda useful tool for Place branding, Tourism Development – 3
Successful Strategies for successful Chief executive Officer – 363
Guidelines for Chief Officers (CEO) series – 363
s= आधी अ
By Bhishma Kukreti (Management Acharya)
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मकरंदासवादनां म्द्यादीनां कृति कला:I
शल्यगूढ़ा ज्ञानं  शिराव्रणव्यधे कला II
(As per Ayurveda there are ten arts).  Making Flower Extracts (Ark, Attar, and perfumes) is an art. Alcohol distillation is an art. Taking out the spikes from the body without pain is an art. Surgery is an Art.
Shukraneeti, Chapter 7 Vidya VA Kala Nirupan- II49 II
Surgery is part of Medical expertise. Therefore in this chapter, Medical tourism or art of medicines and surgery the medium for destination branding will be discussed.
 The medical expertise including surgery expertise had been attracting foreign travellers travelling other countries. 
   Medical tourism is defined as people travelling to abroad for medical treatment including surgery.
Usually, people travel abroad for surgery including cosmetic surgery.
People travel abroad for medical aids either more knowledgeable medical expertise or technical knowledge are  available in foreign countries or the medical treatment is cheaper there in foreign countries.
 The market of medical tourism is growing by around CAGR 8.5 %. The people are travelling abroad for following objectives (mostly Surgeries)  –
Cosmetic Surgery or treatment
Dental Treatment
Cardiovascular Treatment 
Orthopaedic Treatment
Bariatric Surgery
Fertility Treatment
Ophthalmic Treatment
Other treatment
The market size of Medical tourism was estimated for  US $ 54.4 billion and expected to grow to  US $ 207.9 Billion. However, Covid 19 pandemic will  definitely make changes in  the forecast
The  top major countries in medical destination are –
Canada
Singapore
Japan
Spain
UK
Dubai
Costa Rica
Israel
Abu Dhabi
India
 Surgery or Medical treatment is an art hence it is one of best mediums for tourism development, destination branding , and country or place branding. 
Reference –
Shukraniti, Manoj Pocket Books, Delhi pp 220
Copyright@ Bhishma Kukreti, 2021
Strategies for Executive for Place Branding
Strategies for Executive for Destination Branding
Tactics for the Chief Executive Officers responsible for Export
Approaches   for the Chief Executive Officers responsible for Country Image
Strategies for the Chief Executive Officers responsible for Tourism
Immutable Strategic Formulas for Chief Executive Officer
(CEO-Logy, the science of CEO’s working based on Shukra Niti)
(Examples from Shukra Niti helpful for Chief executive Officer)




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नीता मेहता : ४००  कुकबुक  प्रकाशन  वळि  प्रतिष्ठित लेखिका 
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 भारतीय महिलाऊं  द्वारा कुकबुक प्रकाशन श्रृंखला
भारतम म पाक शास्त्र ग्रंथ रचना इतिहास   भाग  -२५

भारतम  स्वतंत्रता उपरान्त    कुक  बुक प्रकाशन को ब्यौरा  भाग - १०
Cookbooks after  Independent  India  -  10

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संकलन -भीष्म कुकरेती
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नीता मेहता  भारतीय भोजन रेसिपी  संसार म एक बड़ो नाम च।  नीता मेहता क नाम मीडिया , भारतीय भोजन पकाण विधि /कलनिरी , कुकिंग क्लासेज , होटल मालकण , टेलीविजन शो म जज आदि आदि अर नीता मेहता क झोली म ४०० लगभग कुकबुक प्रकाशित छन अर  ६० लाख सी बिंडी कुकबुक पुस्तक बिकिन।  नीता  मेहता तै सन  १९९९ म नीता मेहता तैं  'फ्लेवर्स ऑफ़ इंडियन कुकिंग ' पुस्तकौ  कुण  बेस्ट एसियन कुकबुक को पुरुष्कार बी मील। 
नीता मेहता क  दिल्ली म क्लनिरि एकेडमी च जु  वींन  सन  2001  म खोली। 
नीता मेहता का कुछ कुकबुक निम्न छन जु  अति प्रसिद्ध ह्वेन-
इंडियन कुकिंग विद  ऑलिव आयल
वेजिटेरियन  चाइनीज
जीरो आयल कुकिंग
डाइबिटीज डेलिकेसीज
रेसिपीज फॉर चिल्ड्रन
बेस्ट ऑफ़  चिकन ऐंड पनीर
स्टेप बाई स्टील लिबेनीज कुकिंग
नीता मेहता 'ज थाई कुकिंग
स्टेप बाई स्टेप मैक्सिकन कुकिंग
माइक्रोओवन कुकिंग
इनि  ४०० तक पुस्तक छन। 
नीता मेहता तै भौत सा पुरूस्कार मिल्यां  छन।
नीता मेहता क कार्य प्रत्येक गृहणी तै प्रेरणा दींद बल महिला प्रत्येक क्षेत्र म प्रसिद्धि पायी सकदन। 
 सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती
भारत में पाक शास्त्र / cookbooks  ग्रंथ इतिहास; ब्रिटिश राज में  भारत में पाक शास्त्र / cookbooks  ग्रंथ इतिहास;    ग्रंथ इतिहास;  श्रृंखला जारी रहेगी , Cookbooks in British Period in India ; भारत म ब्रिटिश युग म पाक शास्त्र  ग्रंथ प्रकाशन, भारत म स्वतन्त्रता बाद कुक बुक्स प्रकाशन , भारतीय महिलाऊं  द्वारा कुकबुक प्रकाशन श्रृंखला जारी , भारतीय महिलाओं द्वारा प्रसिद्ध कुकबुक प्रकाशन , प्रसिद्ध महिला सेफ , भारत में महिलाओं  का कुकबुक प्रकाशन में योगदान , स्वतंत्रता पश्चात महिलाओं द्वारा कुकबुक प्रकाशन

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केरल शैली रिब्बन मुरूक्कू (पकौड़े)  रेसिपी

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भारत पकोड़ा यात्रा- ७।
उषा बिज्लवाण

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सामगी- २ कप चावला, १ कप बेसण ,१ चम्मच तिल, १/२ चम्मच जीरु, १ चम्मच कश्मीरी लाल मर्च, १/४चम्मच हल्दी, चुटकी भर हींग, १/२ चम्मच लोण, १ कप पाणी, रिब्बन पकोड़ा प्लेट, तेल तलना तै
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विधी-
१ डौंगा पर २ कप चौंलौ का आटा मा तेल छोड़ीक सबी सामग्री डाल द्या खूब मिलै द्या अब २ चम्मच गरम तेल डाल द्या तेल इतना गरम हो कि डाल दा ही आवाज होण चैंदी यन करना से पकोड़ा कुरकुरा और तेल फ्री बणदन चम्मच से अच्छे से ममिलै द्या अब अच्छे से रगडें अपणा दुया हाथों का बीच रखीक खूब बरीक कर द्या अब पाणी डालीक आटु गूंद द्या आटा तै मुलायम नौन स्टिकी होण तक गूंद ल्या अब रिब्बन पकौड़ा मोल्ड ल्या और चकली पर फिक्स कर द्या तेल से ग्रीस कर द्या अब सिलेंडरिकल आकार मा आटु ल्या और मेकर का भितर रख द्या हैकि तरफ तेल गरम होण रख द्या और अब रिब्बन मुरूक्कू तै गरम तेल मा दबा हाथों तै गोलाई मा घुमा मुरूक्कू तै पलटा गोल्डन भूरा होण तक तला पेपर टावल पर निकालिक मसाला अथवा दचध का साथ परोसा
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ब्रैड स्लाइस से बनी चमचम
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गढ़वाली शैली भोजन  रेसिपी

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सरोज शर्मा सहारनपुर बटिक
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सामग्री
ब्रैड के 8 स्लाइस ( ज्यादा बणाण चन्दो वै हिसाब से ले ल्याव )
चिन्नी एक कटवर
मलाई ( फ्रेस ) 4-5 चम्मच
नरयूल कु बुरादा 100 ग्राम
काजू किशमिश बदाम पिस्ता बारीक कटयूं
सगोर
ब्रैड स्लाइस कटवर से गोल आकार म काटिक धैर दयाव
मलाई मा सबया ड्राई फ्रूट मिलाव
अब गोल आकार क ब्रैड स्लाइस मा
ड्राई फ्रूट मिलीं मलाई लगावा
दुसरी स्लाइस ल ढकै दयाव और हल्का हथल दबाव, सबया इन्नी तैयार कैरिक धैर ल्याव
अब एक पैन मा चिन्नी डालिक पौन कटवरि पाणि डालिक तब तक पकाव थोड़ा-बहुत गाढ़ु न ह्वै जाव, चाशनी नि बणाणि ये मा केसर या खाण कु रंग मिलाव अब ये मा तैयार ब्रैड स्लाइस डिप कैरिक निकाल ल्याव नरयूल क बुरादा मा ये थैं लपेट ल्याव ह्वै गै तैयार, खाण मा लाजवाब

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