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लौकी का कोफ्ता और काखड़ी कू रैतू।
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             उषा बिजल्वाण
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लोगो-२।
समय-१/२ घंटा
सामग्री- लौकी १/२ किलो कदुकस करयूं,काखड़ी
 १/२ किलो कदूकस करयूं, २ बड़ा प्याज़
अर २ बडा़ टमाटर पिस्यां,
२ हरी मिर्च , लसण आदो कु पेस्ट,
धणिया- १ चम्मच,
हल्दी आधा चम्मच,
कसूरी मेथी आधा चम्मच,
कश्मीरी लाल मिर्च आधा चम्मच,
लोण स्वादानुसार,
थोड़ा सा फेंटीं मलाइ,
दही फेंटीं ११/२ कटोरी,
कालु लोण १/२ चम्मच,
थोड़ा सा राई और जीरु ,
 तेल १कटोरी
,हरु धणिया थोड़ा सा ,
बेसण १ कटोरी ,
अजवाइन चुटकी भर
 विधी- गैस खोलीक कढै रखा तेल डाला जबतक तेल गरम होन्दू कस्यां लौकी कू पूरू पाणी निचोड़ीक बेसण, कसूरी मेथी, लोण थोडा सा अजवाइन अर बरीक कट्यूं हरू धणिया डाल द्या अच्छा सा मिलैक छोटि छोटि गोली बणैक तल द्या अब सारा कोफ्ता अलग निकालीक वै ही तेल मा टमाटर प्याज़ कु पेस्ट डाल द्या जब तेल छोडण लगो तब सब सामग्री डाल द्या तेल छोडण तक भुना अब आधा गिलास पाणी डाल द्या ५ मिनट पकोणा का बाद परोसा
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सर्वाधिकार @ उषा बिजल्वाण
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                डालडा कुकबुक कु योगदान

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भारतम म पाक शास्त्र ग्रंथ रचना इतिहास   भाग  -१३
Coockbooks in India  - 13

भारतम  स्वतंत्रता उपरान्त   कुक  बुक प्रकाशन को ब्यौरा  भाग - १
Cookbooks in Independent  India  -  1
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   भीष्म कुकरेती
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 डालडा कम्पनी क स्थापना १९३७ म हिंदुस्तान लिवर न करी।  १९३० तक  हिंदुस्तान वनस्पति मैन्यू फैक्चरिंग वनस्पति कम्पनी  घी आयात हून्द  छौ।  तब हिंदुस्तान  वनस्पति कम्पनी (अब यूनिलीवर ) न फैक्ट्री स्थापित कार।  १९३७ बिटेन  डच कम्पनी क डाडा  अर लिवर क मेल से डालडा बण।  यु लम्ब सालुं तक चलण  वळ ब्रैंड च।
 डालडा न कई मार्केटिंग इनोवेशन  बि  करिन  एक च लोगुं  तै भिन्न भिन्न क्षेत्रों भोजन पकाण  सिखाण।  हम्म जानकारी च बल १९४७ म डालडा  एडवाइजरी सर्विस न  हिंदी , अंग्रेजी , तमिल  व बंगाली म एक कुकरी  बुक प्रकाशित कार।   पाकिस्तान म यांक प्लेटिनम संस्करण बि  छप अर खूब पढ़े जांद प्रशंसित हूंद। 
डालडा कुक बुक क तिसर  संस्करण १९५१ म प्रकाशित ह्वे।  १९६६ अर १९७८ का संस्करण नेट पर उपलब्ध छन। 
 डालडा कम्पनी क वनस्पति घी को प्रसार ही ना एक क्षेत्र क रेसिपी दुसर  क्षेत्र वळ तै उपलब्ध कराण म भौत च। 
डालडा न कुकबुक  परकसन संस्कृति  तै अगवाड़ी   बढ़ाई  । 
 
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 सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती
भारत में पाक शास्त्र / cookbooks  ग्रंथ इतिहास; ब्रिटिश राज में  भारत में पाक शास्त्र / cookbooks  ग्रंथ इतिहास;    ग्रंथ इतिहास;  श्रृंखला जारी रहेगी , Cookbooks in British Period in India ; भारत म ब्रिटिश युग म पाक शास्त्र  ग्रंथ प्रकाशन

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    भवाली  (नैनीताल ) के एक भवन में  कुमाऊं शैली की '' की काष्ठ कलाअंकन,अलंकरण, उत्कीर्णन 

   Traditional House Wood Carving Art in  Bhovali  ,Nainital; 
   कुमाऊँ, के भवन ( बाखली,तिबारी,निमदारी, जंगलादार मकान,  खोली, )  में कुमाऊं शैली की '' की काष्ठ कलाअंकन,अलंकरण, उत्कीर्णन  - 482
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संकलन - भीष्म कुकरेती
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 नैनीताल के ग्रामीण क्षेत्र भवन काष्ठ कला हेतु प्रसिद्ध रहे है हैं।   इसी  क्रम में अज्ज भवाली के एक भवन की काष्ठ अलंकरण कला पर चर्चा होगी। 
प्रस्तुत भवन संभवतया कोई होम स्टे है।  हमें भवन के एक छाज की ही सूचना मिली है।  छाज याने झरोखा जो पहले या दुसरे तल में होते हैं।  छाज के  उप  स्तम्भ , ऊपर तोरणम व आधार में पटिला या  तख्ते पर काष्ठ चित्रकारी हुयी हैं। 
एक छाज  के दोनों मुख्य स्तम्भ  चार चार  उप स्तम्भों के युग्म से  निर्मित  हुए है। एक उप स्तम्भ अलग है जबकि तीन उप स्तम्भ  एक सामान कला युक्त हैं.  चरों उप स्तम्भों के आधार में उलटे कमल दल , ड्यूल ,  सीधा  कमल दलों से हंडे /कुम्भी निर्मित हुए हैं।  चौथे विशेष उप स्तम्भ में सीधे कमल दल के बात रस्सी या लता नुमा आकृति ांकन हुयी है जो शीर्ष /मुरिन्ड /header  की सतह में भी दृष्टिगोचर होती है।
अन्य तीन उप स्तम्भों में सीधे कमल दल के बाद स्तम्भ लौकी आकर ले ऊपर बढ़ते हैं जहां सबसे कम मोटाई है वहां आधार वाली आकृतियों का दोहराव  दो बार हुआ है।  यहीं मेहराब या तोरणम का अर्ध चाप भी है।  तोरणम के स्कन्धों में फर्न पत्ती  व अन्य प्रकार की पत्तियों के आकृति अंकन हुआ है।
इस छाज के आधार में पटिल्या /तख्ते में  विशेष प्राकृतिक  आकर्षक आकृतियां अंकित हुए हैं। 
दूसरे  छाज में एक स्तम्भ तो पहले छाज के स्तम्भ भाग ही है।
 दूसरे  छाज के दूसरा उप स्तम्भ चौखट नुमा है प्राकृतिक व सरल सपाट कला अंकन का समावेश  हुआ है।   नीचे का पटिला  में सपाट पन  व आईने के फ्रेम जैसे ाँकब हुआ है।
 निष्कर्ष निकलता है कि भवन का छाज रंगीन व ज्यामितीय व प्राकृतिक अलंकरण से सजा है। 
सूचना व फोटो आभार: अमित शाह  संग्रह
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021 

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सुबेर कु ब्रेक फास्ट आयुर्वेदिक  नमकीन दलिया,
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सरोज शर्मा सहारनपुर
,
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2 से 3 लोगों खुण
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सामान -
एक छोटी कटोरी गेहुं कु दलिया
चौथाई कटोरी मूंग दाल
प्याज मध्यम आकार कू एक
आलू एक छोटु सि
टमाटर एक बड़ु सि
शिमला मर्च आधधा
हींग ,जीरा,हल्दी ,नमक
सबया सब्जि बरीक काटिक अलग धैरिक
विधि -
गैस मा कुकर चढाव, एक टेबल स्पून घी डालिक
हींग जीरा कु छौंक लगाईक प्याज टमाटर भूना
अब सरया सब्जि भी डालिक भूनिक पकाव
दलिया मूंग दाल डालिक चलाव, मसाला भि मिला दयाव पाणि आवश्यकतानुसार डालिक
2,3 सीटी लगाव, ।हवै ग्या तैयार। आयुर्वेदिक दलिया।

सर्वाधिकार@सरोज शर्मा (सहरानपुर से )
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आयुर्वेदिक   करारी बेसन अचारी भिन्डी अचारी –
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अंजना हिंदवाण कुकरेती (खेड़ा , यमकेश्वर )
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समान –
भिन्डी लम्बी
बेसन
तेल
मसाला- धनिया छोरा , लूण, हल्दी आदि 
अचार मसाला
व अन्य  एनी मसालों –
अचारी करारी भिन्डी पककाणो विधि –
 सबसे पैली भिन्डी थे लम्बा आकर मा काटो फिर वैमा .....धनिया, हल्दी,लाल मिर्च,जीरा पाउ डर,नमक और आचार कु मसाला डाल देउ फिर बेसन डाल कै मिक्स कर् दैव और फिर डीप फ्राई कैर द्यावा...... होग्या आपकि करारी भिन्डी तैयार धन्यवाद
सर्वाधिकार @ अंजना हिन्दवाण कुकरेती (खेड़ा यमकेश्वर )






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                Curd Mint Mushroom Recipe
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Pradeep Badoni

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Ingredients-
 Ingredients button mushroom 700 grams
3 big onion
2 medium tomatoes
3 Green Chilli
 1 full garlic clove
 2 inch ginger fresh
Fresh Mint a leaves 150 grams
Hhung curd. Masaley
2 tez patta
20 grams salted butter
2 tb spoon oil
2 clove
 10 Black Pepper
 1tea spoon Conundrum powder
half tea spoon Cumin  powder
half tea spoon kitchen king
one fourth tea spoon Turmeric  powder
salt to taste and
one fourth tea spoon ‘Garam’ masala.
Recipe Procedure
Cut mushroom as shown in pic chopo onion tomatoes hari mirch. Make rough paste of garlic and zinger. Put oil in pan now add butter put sliced mushroom and sote it till soft cook for 10 mins. Now take another pan take 2 tb spoon oil heat it add tez patta long kali mirch till you get aroma now add grated onion sote it till pink colour add green chilli adrak lehsun paste cook till rwness of paste dis appear add chopped tomatoes add salt according to taste. Now mix all dry masala with hung curd in bowl to make thick paste. Now add the mixture to the pan and steer it continuously till the mixture starts ozzing oil from side of the pan slow down the flame now add the mushroom to the prepared masaley cover the lid and cook for another 10 to 15 mins till mushroom is done if required add one eighth cup of water while cooking. Lastly add finely chopped mint leaves to the done mushroom cook for one min..Here is the ultimate dahi mint mushroom ready to serve. Garnish it with a bit hara dhaniya and zinger zillions.
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              घी, तेल व वसा सेवन


चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद   
 खंड - १  सूत्रस्थानम ,   तेरवां   स्नेह अध्याय    )   पद   बिटेन  ३८  -४९  तक
  अनुवाद भाग -  ९९
गढ़वाळिम  सर्वाधिक पढ़े  जण  वळ एकमात्र लिख्वार-आचार्य  भीष्म कुकरेती
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      !!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!!
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बुड्या नौन्याळ /नौन्याळी ,कोमल, नाजुक प्रकृति का , ऐशै  जिंदगी जीण वळ , खाली पेट रण वळ जौंक  पुटुक डा हूंद, मंदाग्नि , निर्बल जठराग्नि ,  जौं तै - जौर पुरण खासू , निर्बल अर अलप बल वळ कम मात्रा म स्नेह लेवन।  या मात्रा पचण लैक हूंद , सुखपूर्वक पच जांदी, शरीर तै चिपुळ  करदी । पुरुषत्वकारक च ,बलकारक निरापद व देर तक सेवन म लाये जै सक्यांद। ३८-४०। 
जौंकि प्रकृति वात पित्त की हो , वात पित्त रोगी ,उत्तम दृष्टि चाहक , उरक्षत रोगी; निर्बल , क्षीण -बृद्ध , बाल; निर्बल व्यक्ति , आयु वृद्धि चाहक , बल , वर्ण ,कांति , स्वर चाहक ,शरीर पुष्टि इच्छुक ,संतति इच्छुक ,सुकमारता -कोमलता इच्छुक ,तेज , आज , बुद्धि स्मृति ,अग्नि धरणै  शक्ति अर इन्द्रिय बल चाहकों , अर आग ,जल , शस्त्र ,विष से आक्रांत रोगी घी क सेवन कारन। ४१-४३।
जौंम चर्बी अर कफ बिंडी हो ,जौंक पुटुक , गौळ म्वाट अर  ढिल्लि हो ,वात  रोगों से पीड़ित ,वात प्रकृति का ,जु बल , हळकोपन पतळोपन , मजबूती , शरीर की स्थिरता ,चिकनापन , कोमलत्वचा ,चाहक हों , कृमि रोग से पीड़ित , क्रूर कोष्ठ वळ , नाड़ीव्रण से आक्रांत , जौं तै तेल सेवन कु हभ्यास  च वो हेमंत म दिन म तेल सेवन कारन।  ४४-४६।
वायु अर घाम तापन करण वळ ,रुक्ष प्रकृति , भार उठाण वळ  या लगातार चलण वळ,परिश्रम से कमजोर गेयां ,वीर्य या रक्त सुक गे हो; कफ क्षीण हो ,मेद क्षीण हो , जौं तै अंथि , संधि सेरा, स्नायु मर्म कोष्ठ के भयानक रोग ह्वावन , जौंक इन्द्रियों तै बलवान वायु घेर्युं ह्वावो , जौंक  अग्निबल जठराग्नि  बलवान  ह्वावो   ,अर जु  वसा सेवन हभ्यासी होवन ऊँ  तै वसा सेवन करण  चयेंद।  ४७ , ४९।   
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*संवैधानिक चेतावनी : चरक संहिता पौढ़ी  थैला छाप वैद्य नि बणिन , अधिकृत वैद्य कु परामर्श अवश्य
संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्तम , भार्गव पुस्तकालय बनारस ,पृष्ठ  १६१   बिटेन  १६३   तक
सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2021
शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम

चरक संहिता कु  एकमात्र  विश्वसनीय गढ़वाली अनुवाद; चरक संहिता कु सर्वपर्थम गढ़वाली अनुवाद; ढांगू वळक चरक सहिता  क गढवाली अनुवाद , चरक संहिता म   रोग निदान , आयुर्वेदम   रोग निदान  , चरक संहिता क्वाथ निर्माण गढवाली

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नृत्य , संगीत वाद्य यंत्र म बंधन
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भरत नाट्य शाश्त्र  अध्याय  चौथो ४ (ताँडव लक्षण )    , पद /गद्य भाग  २९३  बिटेन  २९८ तक
(पंचों वेद भरत नाट्य शास्त्रौ प्रथम गढवाली अनुवाद)
  पंचों वेद भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद भाग -   १३५
s = आधा अ
 पैलो आधुनिक गढवाली नाटकौ लिखवार - स्व भवानी दत्त थपलियाल तैं समर्पित
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गढ़वळिम सर्वाधिक  पढ़े जण वळ  एक मात्र लिख्वार -आचार्य  भीष्म कुकरेती    
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छंदक गीत विधि व लक्षण -
अब मि  दुबर  छंदक,  गीत विधि  व लक्षणों विषय म बुल्दु।  यीं  विधिम जु गीत विषय वस्तु से ठीक से आबद्ध छन अर जु  अंगों से बि आबद्ध छन अब ऊंको नृत्य तथा वाद्यों  दगड़ हूण वळ  प्रयोग बथांदु।  (यूं ) गीतों समय नर्तकी क प्रवेश करवाण  चयेंद।  ( तब )  सबि  वाद्यों (भांड  व अवनद्ध ) प्रयोग हो ,अर  सबि तंतुवाद्य अर प्रतिक्षेप से बजाए  जाण  चएंदन।   सबसे पैल , समग्र विषय वस्तु तै मुद्राओं द्वारा अभिनीत करे जाय अर फिर वी गीत विषय वस्तु नृत्य द्वारा अभिनीत करे जाय।  २९३- २९७
नृत्य , अभिनय , संगीत अर वाद्य वादनै  ज्वा विधि पैल बताए गे वैइ  आसारित विधि गीतों व विषय वस्तु प्रयोग म बि  लागू हूंद।  ये प्रकारन मीन विषय वस्तु से निबद्ध गीतों की विधि निरूपण बताई।  २९७-२९८

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  सन्दर्भ - बाबू लाल   शुक्ल शास्त्री , चौखम्बा संस्कृत संस्थान वाराणसी , पृष्ठ - १४२   -१४३
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 भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
  भरत नाट्य शास्त्र का प्रथम गढ़वाली अनुवाद , पहली बार गढ़वाली में भरत नाट्य शास्त्र का वास्तविक अनुवाद , First Time Translation of   Bharata Natyashastra  in Garhwali  , प्रथम बार  जसपुर (द्वारीखाल ब्लॉक )  के कुकरेती द्वारा  भरत नाट्य शास्त्र का गढ़वाली अनुवाद   , डवोली (डबरालः यूं ) के भांजे द्वारा  भरत नाट्य शास्त्र का अनुवाद ,

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    Dance is  related to Gandharva Veda   

Strategies for Executive for Place Branding
Tactics for the Chief Executive Officers responsible for Export
Approaches   for the Chief Executive Officers responsible for Country Image
Strategies for the Chief Executive Officers responsible for Tourism
Immutable Strategic Formulas for Chief Executive Officer
(CEO-Logy, the science of CEO’s working based on Shukra Niti)
(Examples from Shukra Niti helpful for Chief executive Officer)           
Successful Strategies for successful Chief executive Officer – 348
Guidelines for Chief Officers (CEO) series – 348   
s= आधी अ     
By Bhishma Kukreti (Management Acharya)
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हावभावादिसंयुक्तं नर्तनं  तू  कला स्मृता I
As per Gandharva Veda Dancing or Nartan is an art and is about appropriate and movements ( Performing by  Body parts).
(Shukraneeti, Chapter 7 Vidya VA Kala Nirupan- II4 II
 Each art is a useful tool for increasing or creating export, tourism, migration, and for creating a positive platform for direct foreign investment by enhancing local images or place branding.
As today or in the early times, dance art is one of the strong factors for creating place image and attracting tourists from other places. Thus dance is an indirect tool for attracting direct foreign investment.
Dance is a very common and strong medium for entertaining the foreign delegates who come to the country. Dance is one medium for creating the country image in foreign countries.
References:
1-Shukra Niti, Manoj Pocket Books Delhi, page –220   
Dancing as plate form for enhancing Tourism and creating Place Identity
Copyright@ Bhishma Kukreti, 2021

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मलगा पड़ि पौडर ( आंध्र की सूखी चटणी )
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सरोज शर्मा सहारनपुर से,
सामग्री
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1 कप उड़द दाल
2 टेबल स्पून चना दाल
12 सुखीं कश्मीरी लाल मर्च
10,12 कड़ी पत्ते
1/2 स्पून हींग
लूण   स्वादानुसार
विधि –
नान स्टिक पैन गर्म कारवा, वै मा उड़द दाल 2,3 मिनट भुना एक प्लेट मा अलग धैर दयाव, वै पैन मा हि चना दाल भी भूना उड़द दाल दगड़ धैर दयाव, अब पैन मा कड़ी पत्ता, लाल मर्च मध्यम आंच मा 30 सेकंड भूना, सरया मिश्रण ठंडू हवै जाव त मिक्सर मा दरदरू पीस ल्याव। हवाबंद डब्बा मा रख दयाव, जरूरत का मुताबिक प्रयोग कारवा।
या चटणी इडली , डोसा दगड परोसे जान्द
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 सर्वाधिकार @ सरोज शर्मा सहारनपुर से

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