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मगध सम्राट देवपाल

हर्षवर्धन पश्चात बिजनौर , हरिद्वार , सहारनपुर का 'अंध युग' अर्थात तिमर युग  इतिहास ३१

Dark  Age of History after Harsha Vardhan death -31

Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -   308                 
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -३०८                 


                  इतिहास विद्यार्थी ::: आचार्य भीष्म कुकरेती
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धर्मपाल की मृत्यु पश्चात मगध राजगद्दी पर उसका पुत्र देवपाल राजगद्दी पर बैठा।  उसकी  मां  का  नाम राणादेवी व पत्नी का नाम महत्ता देवी था . देवपाल की राज्य समय ८१० से ८५० ईश्वी माना जाता है (१ ) ।
देवपाल ने पाल वंश की राज्य का क्षेत्रीय प्रसार भी किया था।  देवपाल के मुंगेर  ताम्रशासन से विदित होता है कि उसका राज्य समस्त उत्तर भारत , हिमालय से विंध्याचल, अर्ब सागर  से बंगाल तक था।  प्रतिहार नरेश नागभट ने कन्नौज पर आक्रमण किया व  देवपाल से पराजित हुआ (२ )।
देवपाल भी बौद्धमत मानता था।  अनुमान है की इसी युग में गुरु गोरखनाथ ने धौला उड्यारी नामक गुफा में तपस्या की थी (१ ) । 
देवपाल का उत्तराखंड क्षेत्र नरेशों से मित्रता थी (२ )। 
धर्मपाल व देवपाल वीर नरेश थे। 
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संदर्भ :
१- त्रिपाठी , एज ऑफ़ इम्पीरियल कन्नौज , परइ ५०-५२
  २- शिव प्रसाद डबराल 'चारण ' ,  उत्तराखंड का इतिहास भाग ३ वीरगाथा प्रेस दुगड्डा , उत्तराखंड , पृष्ठ   ४३५-४३६ 
Copyright @ Bhishma  Kukreti
हरिद्वार, बिजनौर , सहारनपुर का प्राचीन इतिहास  आगे खंडों में   ..

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 प्रसिद्ध कुकबुक लेखिका जुली साहनी : प्रत्येक महिला कुण प्रेरणा

भारतम म पाक शास्त्र ग्रंथ रचना इतिहास   भाग  -२१

भारतम  स्वतंत्रता उपरान्त    कुक  बुक प्रकाशन को ब्यौरा  भाग - ६
Cookbooks after  Independent  India  - 
-। 
संकलन -भीष्म कुकरेती
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 क्लासिक  इंडियन कुकिंग की लेखिका, भोजन कला अध्यापक , भोजन कला सम्पादिका ,  जूंली साहनी  की जीवनी करोड़ों महिलाओं तैं  प्रेरित करदी।
जुली साहनी क जन्म १६ अक्टूबर १९४५ म पूना म ह्वे।  जुलीक पिता क नाम छौ वेंकट रमण अर मांक  नाम पद्मा रंगनाथन। 
जुलीन बी इस सी (आर्किटेक्ट ) की डिग्री दिल्ली बिटेन १९६७ म कार।  जुलीन १९७० म  अर्बन प्लानिंग म मास्टर ऑफ़ साइंस न्यू आर्क से कार।
 सबसे पैल  जूलिया न न्यूआर्क सिटी क प्लानर रूप म काय कार।  फिर झुकाव भोजन कला तरफ गे।  अर फ़ूड कंपनयूं सलाहकार आदि कार्य कार। ार भोजन कला शिक्षिका रूप म प्रसिद्ध ह्वे।
 जुली साहनी क निम्न कूक बुक भौत प्रसिद्ध ह्वेन -
क्लासिक इंडियन कुकिंग (१९८० ) -  यीं   पुस्तक म सम्पूर्ण भारतीय भोजन पढ़ाण वळ कोर्स च। कुकबुक  पुस्तक म सौ से अधिक लाइन ड्राइंग छन जु  आधारभूत से शिक्षण दीणम कामयाब छन।  कुकबुक पुस्तक म मसाला , उप भोज्य पदार्थ व मुख्य पदार्थों क विवरण दिए गे।  क्लासिक इंडियन कुकिंग म  छुट सि भारत क मुगल  कुकिंग इतिहास बि  समाहित च।  या कुकबुक वास्तव म कुक बुक क्षेत्र म  उत्कृष्ट  कृति  च।   
जुली साहनी अन्य  कुकबुक पुस्तक छन -
२- क्लासिक इंडियन वेजिटेरियन ऐंड  ग्रेन कुकिंग
३-सेवरिंग इंडिया
४- इंट्रोडक्शन टु इंडियन कुकिंग
५- मुगल माइक्रोवेव :
६- इंडियन रीजनल क्लासिक्स
७-सेवरिंग स्पाईसीज ऐंड  हर्ब्स
८- इन माय मदर्स किचन
९- क्लासिक इंडियन वेजेटेरियन कुकिंग
१०-इंडियन हेरिटेज कुकरी। 
जुली साहनी न १९७३ म न्यूआर्क म इंडियन कुकिंग स्कूल की बि  स्थापना कार। 
जुली जन मनिख हरेक तै प्रेरित करदी कि  संभव च , संभव च , पूना म जन्मी नौनी न्यूआर्क म स्कूल खोल  सकदी  व कति  कुकबुक छपै सकदी
 सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती
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 मलारी (चमोली ) के भवन संख्या १० में  काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन  अंकन


  Traditional  House Wood Carving Art  from  Malari  , Chamoli   
 गढ़वाल,कुमाऊंकी भवन (तिबारी, निमदारी,जंगलादार मकान, बाखली,खोली) में पारम्परिक गढ़वाली शैली की  काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन  अंकन, -
(अलंकरण व कला पर केंद्रित) 
 
 संकलन - भीष्म कुकरेती     
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 धौली गंगा तट के गाँव मलारी  से कई  भवनों की तस्वीरें उपलब्ध हुयी हैं।  आज मलारी के  भवन १० की काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन  अंकन पर चर्चा होगी।
प्रस्तुत मलारी भवन संख्या १० नितांत  आदिम शैली , आधारिक व बर्फीले प्रदेश के घर जैसा ही है।  प्रस्तुत घर संभवतया तिपुर या चौपुर  है।  भवन की दीवारें सभी हिस्से लकड़ी से निर्मित हुए हैं।  पत्थर व मिटटी केवल छत पर ही प्रयोग हुआ है।  इसमें शक नहीं होना चाहिए की दीवारें देवदारु की लकड़ी से निर्मित हैं। 
साड़ी लकड़ियां दो प्रकार से हैं तख्ते व कड़ियाँ व ज्यामितीय कला कटान के उमड़े उदाहरण  हैं। 
लकड़ी का जो  भी कार्य  दृष्टिगोचर हो रहा है व सपाट व ज्यामितीय कटान से ही हुआ है।   
सूचना व फोटो आभार: हेमंत डिमरी संग्रह 
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत:  वस्तु स्थिति में  अंतर   हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021

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पूर्वरंग का अंग
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भरत नाट्य शाश्त्र  अध्याय  पंचों ५ वों  ( पूर्व रंग विधान)  , पद /गद्य भाग  १२   बिटेन १८  तक
(पंचों वेद भरत नाट्य शास्त्रौ प्रथम गढवाली अनुवाद)
  पंचों वेद भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद भाग -   १४२
s = आधा अ
 पैलो आधुनिक गढवाली नाटकौ लिखवार - स्व भवानी दत्त थपलियाल तैं समर्पित
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गढ़वळिम सर्वाधिक  पढ़े जण वळ  एक मात्र लिख्वार -आचार्य  भीष्म कुकरेती   
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फिर यवनिका तै हटैक नृत्य व  पाठ (संवाद) का संयुक्त प्रयोग वाद्यों वादन का साथ किये जाय।  मुद्रक /लक्षणों गीतों म से एक गीतौ  या जब तांडव की योजना करे जाय त  वर्धमानक गीतों मा से एक  गीतों संयोजन करे जाय फिर क्रमश: पूर्वरंग म उत्थापन , परिवर्तन , नांदी, शुष्कप्रकृष्टा , रंगद्वार ,चारी , महाचारी ,त्रिक ,अर प्ररोचना कु प्रयोग करे जाय। १२- १५।
'पूर्वरंग' म यूं अंगों अवश्य प्रयोग करण  चयेंद। अब मि क्रमश: यूंक लक्षण बतांदो।  १६। 
प्रत्याहार - वाद्य यंत्रों उचित या निर्धारित स्थानों पर व्यवस्थित स्थापन 'प्रत्याहार' बुले जांद। १७।
अवतरण - गितांगों तै निश्चित स्थान म बिठाण  'अवतरण' हूंद। १७। 
आश्रावण - वादन से पैल वाद्यों की व्यवस्थापूर्वक  एकरूपता लाण  'आश्रावण' हूंद।  १८।
वक्त्रपाणि -वाद्यों कु विभिन्न वृत्यों का वादन की दशा म ध्यान से पुनः सुणन वक्त्रपाणि हूंद।  १८। 
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  सन्दर्भ - बाबू लाल   शुक्ल शास्त्री , चौखम्बा संस्कृत संस्थान वाराणसी , पृष्ठ - १५४  बिटेन   १५७
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 भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
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स्वेद औषधि क्या च ?
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चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद   
 खंड - १  सूत्रस्थानम ,  चौदवां  अध्याय (स्वेद अध्याय )     )   पद  १   बिटेन  -६  तक
  अनुवाद भाग -  १०६
गढ़वाळिम  सर्वाधिक पढ़े  जण  वळ एकमात्र लिख्वार-आचार्य  भीष्म कुकरेती
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      !!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!!
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                       स्वेद अद्ध्याय , १४ वां अध्याय
स्नेह विवरण पश्चात अब स्वेद संबंधु अध्याय का  ब्याख्यान  करला जन भगवान आत्रेय न बोली छौ। १, २।
अब स्वेद  (पसीना ) विधियों उपदेश करला। जौंक  उचित प्रकार से करण  से स्वेदन से शांत हूण वळ  कफ , वात जन्य रोग शांत ह्वे जांदन। ३।
पैल स्नेहन कार्य करी वायु को शमन करण से शरीर म मल , मूत्र व वीर्य कै  बि  तरां से नि  रुकदन। ४।
सुक्यां काठ /बांस बि  स्नेहन अर स्वेदन  द्वारा मन अनुसार  मुड़े   जांदन।  फिर जीवित मनुष्यों वैद्य स्नेहन व स्वेदन से इच्छानुसार परिवर्तित नि कौर सकद क्या ?५।
व्याधि , काल रोगी , पुरुष ,इच्छा यूंको अनुसार न गरम /तातो ,न भौत कोमल , वे वे रोग तै नाश करण  वळ द्रव्यों द्वारा स्वेदन करण वळ स्थानों से दिए गे स्वेद कार्य करणम समर्थ हूंद।  ६।

 -
*संवैधानिक चेतावनी : चरक संहिता पौढ़ी  थैला छाप वैद्य नि बणिन , अधिकृत वैद्य कु परामर्श अवश्य
संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस ,पृष्ठ  १७२   बिटेन १७३    तक
सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2021
शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम

चरक संहिता कु  एकमात्र  विश्वसनीय गढ़वाली अनुवाद; चरक संहिता कु सर्वपर्थम गढ़वाली अनुवाद; ढांगू वळक चरक सहिता  क गढवाली अनुवाद , चरक संहिता म   रोग निदान , आयुर्वेदम   रोग निदान  , चरक संहिता क्वाथ निर्माण गढवाली

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Honey Moon Tourism or Romantic Traveling Marketing
or
Elements of Honeymoon Destination Marketing

The 7 arts of Gandharva Veda useful tool for Place branding – 4
Strategies for Executive for Place Branding
Tactics for the Chief Executive Officers responsible for Export
Approaches   for the Chief Executive Officers responsible for Country Image
Strategies for the Chief Executive Officers responsible for Tourism
Immutable Strategic Formulas for Chief Executive Officer
(CEO-Logy, the science of CEO’s working based on Shukra Niti)
(Examples from Shukra Niti helpful for Chief executive Officer)
Successful Strategies for successful Chief executive Officer – 358
Guidelines for Chief Officers (CEO) series – 358
s= आधी अ
By Bhishma Kukreti (Management Acharya)
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शय्यास्तरणसंयोग पुष्पादिग्रन्थनं  कला  I
Laying out the   bed, bedding, and decorating bed (on the sheets) by flowers is an art that is part of Gandharva Veda.
Shukraneeti, Chapter 7 Vidya VA Kala Nirupan- II47 II
In India, mainly, laying out the bed, bedding and decorating beds are related to the Honey moon.  Therefore, this author took the above stanza for the honey moon or romantic travelling.
 Honeymoon tourism is to refer the inbound or outbound tourists visiting a destination either for marriages, honeymooning or as romance travelling.
 There are following top honeymoon destinations outside India-
Mauritius
Phuket or Krabi
Lucerne and Paris
Maldives
Greece.
 The followings are top honeymoon destination in India –
Goa
Andaman (Neil Island)
Kerala
Kashmir (Gulmarg)
Rajasthan (Udaipur)
 Elements of Honeymoon Destination Branding –
There are following main elements of Honeymoon Destination branding or marketing –
Name-
Logo – and Slogan
Imagery design style
Verbal Elements

Now, the destination branding through Wedding tourism is common phenomenon.
The Honeymoon goers consider the following factors for choosing the wedding or romance destination-
Season /Weather
Safety
Budget
Romantic Localities
Happenings in and around the place
Other important aspects of marketing for Honeymoon Destination are same of a marketing of a  tourist place or territory.
Reference –
1-Shukraniti, Manoj Pocket Books, Delhi pp 220

Copyright@ Bhishma Kukreti, 2021

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कुमाउंनी शैली क  (पहाड़ी स्टाइलक)  च्यौ ( मशरूम)
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सुमीता प्रवीण
-
चार मैसन लिजी
सौमान
एक पैकेट मशरूम
एक प्याजक दाण
एक चमच जीर
2 चमच ग्यों पिश्यूँ
2 चमच घरौक घ्यू
लूँण सवाद अनुसार
तरीक
च्यौ भली के ध्वे भेर द्वि टुकुड़ में काट ल्यो। लुआ भदै में घी खित भेर प्याज काट भेर भुन ल्यो। वी बाद 2 चमच ग्यों पिश्यूँ खित भेर भुन लियो लाल हुण जाणे। भड़ाया झन तभे असल सवाद आल। वी बाद मशरूम खित दियो।खूब भलीचार भुनया। जीर पिस भेर खितो, लूँण सवाद अनुसार खित भेर 15 मिनिट तक मिश्यूँण आग में पकावो। बिल्कुल च्यौ जस सवाद भात दगड़ी सपोडने लिजी तैयार छू।
नोट- मश्याल जतुक कम हुनी उतुक भल हुनी प्योर पहाड़ी व्यंजन।
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सुमीता प्रवीण
मुंबई

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ब पैली और आख़री बेर झुंगारू भात बणै छे।
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हरी लखेड़ा
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शीर्षक देखीक अंदाज लगि गे होलु कि क़लम कना जांणै च।
जै तै पता नी बतै द्यूं कि झुंगारू बरसाती फ़सल हूंद। बारीक बीज हूंदन और साट्टी क तरां कूटीक सफेद दाना निकलदन जै कुण झंगरियाल बोलदन। आज त कत्ती तरह क पकवान माँ इस्तेमाल हूंद पर गाँव मा पलेऊ मा डालद छे। झंगवारे की खीर भी बणांद छे। झंगवार कु भात भी बणद छे।
म्यार झंगवार कु अनुभव भात तक ही च।
मी चार मा पढदु छे। अब जब तक मी नी बतौं कि मी पढदु भी छे त आप तैं कनकै पता चलण कि मी पढदु भी छे। उमर रै ह्वेली दस साल। बनचूरी क गौंखड्या स्कूल माँ हम द्वी भै पढदु छे। बडु भै पाँच मा और मी चार मा। वे टैम पर चार और पाँच क विद्यार्थी रात कुण भी स्कूल मा रंद छे। पाँचवीं की बोर्ड की परीक्षा हूंदि छे त मास्टर जी कुछ त विद्यार्थीयों क ख़ातिर और कुछ अपर नौकरी क ख़ातिर कोशिश माँ रंद छे कि रिज़ल्ट बढिया रौ। यन भी ह्वे सकद कि रात अकेला डर लगदी रै ह्वेली।
मे पर विशेष क्रिपा छे किलै की प्रधानाचार्य गोकुल देव कुकरेती जी मेरी माता जी क नानी क गाँव बणांस क छे मतलब मेरी मा क मामा जी। जान पहचान तब भी काम आंदि छे जी।
ह्वे यन च कि वे दिन माँ तै पुंगड क्वी काम रै ह्वाल। चुल्लू माँ झुंगारू चढ़ै गे और मे कुण ब्वाल की कर्ची चलाणै रै और पक जालु त आग बुझा दे। दादा आलु द्वी भै फांणु झुंगारू ख़ै कन चलि जैन। पकुद कन च बतै त ह्वालू पर याद नी। हाँ त मी जोबरी क ढक्कन उठै क कर्ची चलैक क दिखणै रौं कि पक च कि ना। मितै पता छे कि चावल पकांदन त पाणी पस्यै कन माँड़ निकालि दींदन। झुंगारू क भी यनि हूंद ह्वाल। काफ़ी देर तक थडकणै रै और फिर एकदम सुखी गे। मीन स्वाच पाणी कम ह्वे गे मिज़ाण और द्वी गिलास पाणी डालि दे। खूब थडीकि गे त पसाण शुरु कर। हाथ लगै त रबड़ी बण्यूं छे।
दादा रात क स्कूल करीक सुबेर दस बजे तक खाणुक आंद छे ख़ै कन स्कूल जांद छे । मीन स्वाच हरि तेरी त बजण वाली च! बस्ता उठै और भुखि स्कूल क बाट लगि ग्यूं । वे ज़माना मा दरवाज़ों पर तालु नि लगांद छे, बस बंद करीक चलि जांद छे। बीच मा दादा मील पर बात ही नी कैरि। बताण भि क्या छे। दादा भी भुखि वापस ऐ गे!
स्कूल हाफ टैम हुयूं छे। भूख से बेहाल। माता जी मुंड माँ एक थैला धर्यूं आंद दिखे गे। रोटी सब्जी बणै क लाईं छे।
दादा तै जब सब पता चल त द्वी चार ज़रूर जमै ह्वेली पर याद नी!
वे क बाद कभी झुंगारू क भात बणाणू क मौका नी मील।

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निखालिश गढवाली शैली का उड़द का परोंठा
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संकलन – अनिता नैथानी ढौंडियाल
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द्वि माबतू
सामान
एक कटोरी साबुत उड़द,
हींग
हल्दी चुटकी भर,
लाल मर्च आधा चम्मच,
लासण चार फोली,
लोण स्वादानुसार
बणाणू सगोर
उड़द तैं साफ ध्वेकी रात भर पाणी डालिकि भिजै द्या
सुबेर दालि कू पाणी अच्छी तरह निथारि कि मोटू मोटू पीसकि सब्या मसला मिलै द्या
आटू गूंदिकि रवटी से जरा मोटी गुंथगी बेलिकि मसेटू भ्वौरा
आराम से बेला परौंठौं जन तेल लकैकि सेका
गरम गरम घी दगड़ खावा
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सर्वाधिकार @ अनिता नैथानी ढौंडियाल

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आज च छुट्ट छुट्ट घरया अमाक  गढवाली शैली का आमरस 
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संकलन --बिमला रावत
सामग्री –
10-15 दांणी आम ,
पिस्युं लूंण (हर मर्च, जीरु , पुदीना पत्ता , नमक )
आम खट्ट छन त थोड़ी सी चिन्नी ।
बणांणा तरीक़ा --- आमों थै ध्वैकी छील द्यावा और हथन निचोड़ी ल्यावा । हडैल भि रस्स दगड़ि डोंगा मा हि रन द्यावा और बस पिस्युं लुंण मिलै ल्यवा । आम ख़ट्टटु च तथोड़ी सी चिन्नी मिलै सकदा । बस आमरस च तैयार । रूट्टी मा भात दगड़ि खावा और हडैल भि चूसा मजा आल ।
धन्यवाद  कन लगि यूँ आमरस , जरूर बथयां ।
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सर्वाधिकार @ बिमला रावत


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