Author Topic: Folk Gods Of Uttarakhand - उत्तराखण्ड के स्थानीय देवी-देवता  (Read 87654 times)

पंकज सिंह महर

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Haru

Harish Chandra was a famous king of Champawat, who after his death was worshipped as the folk god Haru. Haru's mother's name was Kainar and he is said to be Gwall' s maternal uncle. The temples of Haru and Saim, the god of boundaries, are generally together.

Besides these, many other folk gods are worshipped in Kumaon e.g. Bhumia, Balchan, Nagnath, Bhandari Golla, Badhan, Narsingh, Lataul, Gabla, Chhurmal etc. Anyari and Ujyali are the popular goddesses. Garh Devis are to be found in cremation grounds and are worshipped on the night of Amavasya. Although Bafaul, Ramol, Sangram Karki are also mentioned as folk heroes, they are not treated like gods
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हरु :

एक अच्छी प्रकृति का देवता है, और कुमाऊँ के ग्रामों में बहुत पूजा जाता है।  कहा जाता है कि वह चंपावत कुमाऊँ का राजा हरिशचन्द्र था।  वह राजा राजपाट छोड़ हरिद्वार में जाकर तपस्वी हो गया।  कहते हैं कि हरिद्वार में हर की पौड़ी उसी ने बनाई।  हरिद्वार से कहा जाता है कि उसने चारों धामों (बद्रीनाथ, जगन्नाथ, रामनाथ, द्वारिकानाथ) की परिक्रमा की।  चारों धामों से लौटकर चंपावत में राजा ने अपना जीवन धर्म-कर्म में ही बिताया, और अपना एक भ्रातृमंडल कायम किया।  उसके भाई लाटू तथा उनके नौकर स्यूरा, त्यूरा, रुढ़ा कठायत, खोलिया, मेलिया, मंगिलाया और उजलिया सब उनके शिष्य हो गये।  सैम व बारु भी चेले बने।  राजा उनका गुरु हो गया।


पंकज सिंह महर

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बधाणा

चौमू की तरह यह भी गायों का देवता है।  वह किसी को चिपटता नहीं और न पूजने पर सताता है।   गाय के बच्चा होने के ११वें दिन उसका पूजन होता है।  पहले जल से उसकी मूर्ति साफ की जात है, फिर दूध चढ़ाया जाता है तब भात, पूरी, प्रसाद व दूध नैवेद्ध लगाया जाता है।  तभी गाय का दूध पिया जाता है।  यहाँ बलिदान नहीं होता।


पंकज सिंह महर

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क्षेत्रपाल या भूमियाँ

यह खेतों का तथा ग्राम सरहदों का छोटा देवता है।  यह दयालु देवता है।  यह किसी को सताता नहीं।  हर गाँव में एक मंदिर होता है।  जब अनाज बोया जाता है या नवान्न उत्पन्न होता है, तो उससे इसकी पूजा होती है, ताकि यह बोते समय ओले (डाल बायल) या जंगली जन्तुओं से उनका बचाव करे, और भंडार में जब अन्न रखा जाये, तो कीड़े और चूहों से उसकी रक्षा करें।  यह न्यायी देवता है।  यह अच्छे को पुरस्कार तथा धूर्त को दंड देता है।  गाँव की भलाई चाहता है।  विवाह, जन्म या उत्सव में इसकी पूजा होती है।  रोट व भेंट चढाई जाती है।  यह सीधा इतना है कि फल-फूल से भी संतुष्ट हो जाता है। जागीश्वर में क्षेत्रपाल का मंदिर है।  वहाँ वह झाँकर-क्षेत्र का रक्षक माना जाता है और झाँकर सैम कहलाता है।  (सैम शब्द स्वयंभू शब्द का अपभ्रंश है, जो नेपाल में बुद्ध का नाम है - अठकिन्सन) कभी यहाँ बकरे भी मारे जाते हैं।  बौरारौ में भी एक मंदिर है।  सैम व क्षेत्रपाल के कर्तव्यों में कुछ भेद है।  पर यह भी भूत-कक्षा मंे।  कभी-कभी वह लोगों को चिपट जाता है जिसका निशान यह है कि सिर के बालों की जटा बन जाती है।  काली कुमाऊँ में सैमचंद भूत हरु का अनुगामी माना जाता है।


पंकज सिंह महर

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मसान खबीस :

ये शमशान के भूत हैं, जो प्राय: दो नदियों के संगम में होते हैं।  काकड़ीघाट तथा कंडारखुआ पट्टी में कोशी के निकट इनके मंदिर भी हैं।  जिस किसी को भूत लगने का कारण ज्ञात न हो, तो वह मसान या खबीस का सताया हुआ कहा जाता है।  मसान काला व कुरुप समझा जाता है।  वह चिता-भ से उत्पन्न होता है।  लोगों के पीछे दौड़ता है।  कोई उसके त्रास से मर जाते हैं, कोई बीमार हो जाते हैं, कोई पागल।  जब किसी को मसान लगा तो 'जागर' लगाते हैं।  कई लोग नाचते हैं।  भूत-पीड़ित मनुष्य पर उर्द व चाँवल जोर से फेंकते हैं।  बिच्छु घास भी लगाते हैं।  गरम राख से अंगारे फेंकते हैं।  भूत-पीड़ित मनुष्य कभी-कभी इन उग्र उपायों से मर जाता है।  खबिस भी मिसान ही सा तेज मिजाज वाला होता है।  वह अँधेरी गुफाओं, जंगलों में पाया जाता है।  कभी वह भैंस की बोली बोलता है कभी भेड़-बकरियों या जंगली सुअर की तरह चिल्लाता है।  कभी वह साधु भेष धारण कर यात्रियों के साथ चल देता है।  पर उसकी गुनगुनाहट अलग मालूम होती है।  यह ज्यादातर रात को चिपटता है।

पंकज सिंह महर

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सत्यनाथ :

यह संभव है कि सत्यनारायण से इनका संबंध हो।  यह सिद्ध सत्यनाथ या सिद्ध भी कहलाते हैं।  इनकी पूजा गढ़वाल में ज्यादा होती है।  कुमाऊँ में मानिला में ही एक मंदिर इस देवता का है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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उत्तराखंडी के स्थानीय देवताओं के नाम

दोस्तो,

वैसे उत्तराखंड देव भूमि के नाम से भी जाना जाता है! इ इसका मतलब जहाँ पग -२ पर देवी देवताओं के वास है और इनके मन्दिर है ! अनेक भागो मे उत्तराखंड के देवी अलग दंग से पूजा जाता है !

इस थ्रेड मे कुछ इस प्रकार के देवी देवताओ के बारे मे जानकारी देंगे !

एम् एस मेहता 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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भूमि देवता -  सथानीय देवता जो की भूमि की रक्षा करता है ... जैसे गानों मे वर्णन मिलता है .. भूमि का भुमिवा

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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Gwelyu jinhe Golu Devta, Bala Goriya aur Krishnavtaari ke naamon se bhi jaana jaata hai.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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रमोल -   रमोल देवता भी उत्तराखंड के कई भागो मे पूजे जाते है ! खासतौर से अल्मोड़ा, बागेश्वर आदि जगहों पर.. सिधुआ और विधुआ दो भाई ( देवता हो रमोल ने नाम के जाने जाते है) ! ये एक प्रकार के गावाला देवता है !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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वैसे नंदा देवी उत्तराखंड की ईस्ट देवी है घर-२ पूजी जाती है!

नंदा देवी के मदिर उत्तराखंड के हर जगह पर देखने को मिलगे !..

श्री नरेन्द्र सिह नेगी जी "नंदा राज जात " एल्बम मे यह गाना ..जय भोला जय भगवती नंदा" .. पूरे नंदा देवी के मंदिरों का व्याख्यान करता है !

 

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