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Gangnath: God Of Justice - न्याय का देवता "गंग नाथ"

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Risky Pathak:
Rajen Jee +2 Karma....

1 Abhi Tak Jitni sunayti and 1 aage ki jaldi sunaane ke liye..

Rajen:
सुनो भाना अपने बारे में मैं जो कुछ भी तुम्हें बताने जा रहा हूँ तुम उसे अपने तक ही रखना.  मैं नेपाल के महाराजा का भतीजा हूँ.  महाराज मुझे बहुत प्यार करते थे.  महारानी की जवानी मैं ही मृत्यु हो गयी थी और महाराज की अपनी कोई औलाद नही थी तो उन्होंने मुझे अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया.  फ़िर धीरे-२ समय बीतता गया. अचानक एक युवती महाराज के संपर्क में आई उसने महाराज का दिल जीत लिया और फ़िर वह राजमहल में महारानी बन गयी.  नई महारानी को जब इस बात का पता चला की महाराज मुझे अपना उत्तराधिकारी पहले ही घोषित  कर चुके हैं तो वह मन ही मन मुझसे बैर रखने लगी.  उसे लगा कि मेरे रहते उसकी औलाद राजगद्दी की उत्तराधिकारी नही हो सकती. तब उसने सोचा कि बिना मुझे रास्ते से हटाये उसे चैन नही आएगा.  उसने राजमहल के कुछ चापलूस कर्मचारियौं को अपने पाले मैं मिला लिया और उनके साथ गुप्त रूप से मुझे मरवाने के लिए षड़यंत्र रचाने लगी.

Rajen:
महारानी ने सबसे पहले मुझे दूध में जहर मिला कर दिया और मुझे मारा जान कर नदी में फिकवा दिया.  दो दिन पानी के अन्दर रहने के बाद मुझे होश आ गया और मैं राजमहल में लौट आया.  फ़िर एक दिन रानी ने मेरे कमरे में जहरीले सांप छोड़ दिए जिनको मैंने अपने पैरों से कुचल कर मार डाला.  महारानी बाहर से मुझसे बड़े स्नेह से बात करती थी.  एक बार महाराज के सामने बोली कि राज्य का उत्तराधिकारी होने के नाते मुझे हर काम में माहिर होना चाहिए और राजकुमारों की तरह आखेट कराने भी यदा-कदा जाना चाहिए.  और अगले ही दिन उसने कुछ सैनिकों को मेरे साथ आखेट पर यह कह कर भेज दिया कि वे मेरी सुरक्षा के लिए मेरे साथ चलेंगे.  मार्ग में उन सैनिकों ने मुझसे मेरी तलवार यह कह कर ले ली कि राजकुमार आखेट के समय जब आपको जरूरत होगी यह तलवार आपको दे देंगे अभी आप इसका बोझ क्योँ उठाते हैं.  जंगल में पहुँच कर वे सब सैनिक जो कि महारानी के बिस्वासपात्र थे, मुझ पर टूट पड़े.  मेरे पास मात्र एक छोटी खुकरी थी.  मुझमें न जाने अचानक इतनी शक्ति कहाँ से आगई मैंने उस छोटी खुकरी से उन सभी दुष्ट सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया और देर रात को राजमहल लौट आया.  अगली ही रात मुझे नीद में मारने के लिए रानी ने एक सैनिक को जो कि मेरी ही सुरक्षा  में था, भेजा और स्वयम भी परदे के पीछे खड़ी हो कर यह देखने का प्रयास कराने लगी कि आख़िर मुझे कोई मार क्योँ नही पा रहा.  मुझे मारने के लिए उस सैनिक ने जैसे ही तलवार उठाई, मैंने जोर की एक लात उसके सीने में मार दी.  मेरा प्रहार इतना कठोर था कि सैनिक ने वहीं दम तोड़ दिया.  यह देख कर रानी की चीख निकल गयी.  अब रानी का सारा भेद मेरे सामने खुल चुका था.  मैंने रानी की ओर एक दृष्टी डाली और महल से यह कह कर निकल गया कि अब मैं यहाँ कभी नही आऊंगा.  किंतु रानी मुझे किसी भी कीमत पर जीवित नहीं छोड़ना चाहती थी.  उसे डर था कि यदि मैं जीवित रहा तो किसी न किसी दिन अवश्य लौट आऊंगा.  रानी ने राज्य के एक योद्धा कलुवा डोटियाल के मेरे पीछे लगा दिया और उसे निर्देश दिया कि वह मुझे डोटी की सीमा पर ही मार डाले.  तब डोटी की सीमा पर मेरी और कलुवा डोटियाल की भयंकर लड़ाई हुई.  यह लड़ाई छः दिन छः  रात तक चली और मैंने कलुवा डोटियाल को परस्त कर दिया.  कलुवा डोटियाल ने मुझ से माफी मागी और मेरे साथ मेरा सेवक बनकर चलने को कहने लगा.  मैंने कलुवा को यह कह कर वापस भेज दिया कि वह जाकर रानी को यह बताये कि उसने मुझे मार डाला है इससे रानी प्रसन्न हो जायेगी और वह अपने परिवार के साथ रह सकेगा अन्यथा रानी भेद खुलने के भय से उसे ही मरवा  देती.  फ़िर मैं वहाँ से चल दिया और तुमसे मिला.  आगे तुम जानती ही हो.    मैंने तुमसे यह बात अपने तक ही रखने को इसलिए कहा कि वहा डोटी में सभी मुझे मारा हुवा समझते हैं.  रानी को मेरे जीवित होने की ख़बर लगी तो वह मेरे प्रिय जनों पर भी जुल्म ढाना शुरू कर देगी.

क्रमश:

हेम पन्त:
कहानी की निरन्तरता भंग होने की आशंका से बीच में कोई बात नहीं रखना चाह रहा था लेकिन अब अपने आप को रोक नहीं पा रहा हूं.

राजेन दा इस अद्वितीय कार्य के लियी आपको शत-शत प्रणाम...

Rajen:
 गंगनाथ की बात सुन कर भाना की आखौं से अश्रुओं की धारा बहने लगी और कहने लगी तुम मेरे सौभाग्य से ही मुझे मिले हो अब मैं तुम्हें अपने से अलग नही होने दूंगी और तुम्हारी इतनी सेवा करूंगी की तुम अपने सारे कष्ट भूल जाओगे.  गंगनाथ ने कहा भाना तुम्हे ढूढने और पाने को ही तो मैं इतनी दूर आया हूँ किंतु तुम्हारे पिता हमें एक होने देंगे इसमें मुझे संदेह है.  भाना बोली कुछ भी हो मैं अपने बाबा को मना लूंगी लेकिन तुम इस प्रतियोगिता में भाग मत लो हम दोनों यहाँ से कही दूर चले जायेंगे.  गंगनाथ ने कहा भाना अब तुम कुछ भी कहो मैं इस बात से पीछे हट नही सकता.

दूसरे दिन प्रतियोगिता आरम्भ हुई.  भाना भी दर्शक दीर्घा में बैठी थी.  गंगनाथ की बीरता को देखते हुए राजा ने घोषणा की की पहले अन्य प्रतियोगी आपस में लड़ंगे जो बिजयी होगा अंत में वही गंगनाथ से टकराएगा. सबसे पहले पहलवानी के मुकाबले हुए फ़िर तलवारबाजी के.  तलवारबाजी में अनेकों प्रतियोगियों को गंभीर चोटें आयी जिसे देख कर भाना का दिल बैठा जा रहा था. 

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