Author Topic: Jawalamukhi Sidhipeeth, District Tehri Uttarakhand-ज्वालामुखी सिधिपीठ टेहरी  (Read 4291 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Dosto,

We are sharing here information about famous Sidhpeeth which is situated in Tehri District of Uttarakhand. This place is at a height of 6000 ft from sea level.

 इस स्थान के उत्तर और हिमालय पर्वत, सहस्त्र ताल, पूर्व भाग में खतलिंग, पवाली कांठा, दक्षिण में राज राजेश्वरी, चन्द्र बदनी, सुरकुंडा, कुंजापुरी सिधिपीठ और पश्चिम में अप्सरा गिरी, भृग पर्वत है ! बाल गंगा नदी के बाए तट के शिखर पर स्थित देवदारु, चीड के मिश्रित वन है ! (Information - Kedarkhand Book. Hema Uniyal)


M S Mehta

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Jwalamukhi Devi Temple in Garwal
 
 
 
 
Jwalamukhi Devi Temple in Garwal
Photo by Causal_Reverie

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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देवी भगवती के जाग्रत सिधि पीठो में हिमांचल प्रदेश में धर्मशाला से ५६ किलोमीटर तथा काँगड़ा से ३४ किलोमीटर की डोरी ख्याति प्राप्ति ज्वालामुखी सिधि पीठ है जिसकी गणना शिव चरित वर्णित ५१ सिधिपीठो में की जाती है ! वर्णित है इस स्ताहन पर सती की जिह्रा कट कर गिरी थी!  इस स्थल पर आदि काल से प्रथ्वी के गर्म से अग्नि की शिखाये (जो देवी के जिह्रा है) निकलने की बात प्रकाश में जाती है ! प्राचीन काल समय से हिमांचल के श्री जवालामुखी देवी के पूओजक भुजंगी भट्ट लोगो के साथ यह देवी इस स्थान पर लाई गयी! कालांतर में गढ़वाल नरेशो द्वारा देवी हेतु दान एवं गूंठ दी जाती रही! इस मंदिर की प्राचीनता गढ़वाल के पंवार वंशीय राज्य फतेसिंह के १६९३ इ के एक ताम्र लेख से लगाई जा सकती है , जिसमे ज्वालामुखी मंदिर ko bhog आदि nirman bhoomi दान karne ka ullekh है !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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इतिहास शिव प्रसाद चारण, के अनुसार, अभिलेख एव औरंगजेब के फरमान के आधार पर फतेशाह की राजविधि १६६४ के १७१६ इ तक है ! इस आधार पर मंदिर की प्रछेनता ३०० वर्षो से अधिक है ! गढ़वाल नरेश महराजा, प्रदीप शाह, (१७१७-१७७२) के सिहाशन गढ़ होने के उपरांत देवदुंग (जवाला मुखी का वर्तमान स्थल) के आसपास के जंगल का बन्दोवस्त जवालामुखी के रावल के अधिकार प्राप्त हो गया!

गढ़ नरेश की परम्परा में देवी के चडावे के लिए रजा प्रद्युमन शाह (राज्विधि १७८६ से १८०४) द्वार पूजन सामग्री भेजी गयी!  टेहरी नरेश महराजा सुरदर्शन शाह (राजविधि १८१५-१८५९) द्वारा भी  ज्वालामुखी माता की भेट सामग्री प्रदान किये जाने के प्रमाण मंदिर समित ज्वालामुखी के पास उपलब्ध है!



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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देवी ज्वालामुखी का मुख्य भण्डार तिसरियाडा में है जो वर्णित आधा किलोमीटर नीचे की तरफ है ! शारदीय नवरात्रिया तिसराडिया में व् वासंतिक नवरात्रियाँ श्री ज्वालामुखी मंदिर में विस्तृत धार्मिक आयोजनों के साथ संपन्न हो जाते है है! मंदिर पुजारी, ग्राम तिसरियाडा के भुजंगी भट्ट है ! जिनके विशेष में ज्ञात होता है इन्ही के पूर्वज कांगड़ा हिमांचल के ज्वालामुखी मंदिर स्थान से एक प्रज्वलित ज्योति लेकर इस स्थान पर आये थे और देवी के साथ इसी क्षेत्र के प्रविष्ट हो गये है !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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The priest of this temple are Semwal. During the Dhol Player (Das) from Grame Chani and Tilsara come to play the Dhol. ज्ञात होता है चानी ग्राम में भगवती अवतरण होता है और तिसरियाडा में पूजन भंडारा होता है ! वहां नियमित पूजा होती है ! जवालामुखी की यात्रा (जात) ज्वालामुखी यात्रा के दौरान बूडा केदार, ग्राम चानी तिस रियाडा इन तीनो स्थानों में दोल वो वादी पहुचना अनियार्य है! इस मूर्ती यात्रा के दौरान देवी की डोली सबसे अंत में रहती है! डोली की पीछे कोई व्यक्ति नहीं रहता है अन्यथा उसे दोष माना जाता है! कुछ विशेष पूजा अव्शारो पर भी देवी की डोली तिस रियाडा से इसी प्रकार आती जाती है !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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ज्वालामुखी मंदिर में एक समय बलि प्रथा थी! संन १९८२ से यह बंद चुकी है ! तब यह प्रतिवर्ष वासंतिक नवरात्रियों के दौरान इस मंदिर में देवी भागवत पुराण एवं यज्ञ पुराण हवन संपन्न किये जाते है ! विद्वान वेद पाठियों एवं आचार्यो द्वारा यह संपन्न किया जाता है !

 

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