Author Topic: RELIGIOUS ASSOCIATION उत्तराखंड की प्रमुख धार्मिक संस्थाएं एवं धार्मिक विभूतियाँ  (Read 11651 times)

Devbhoomi,Uttarakhand

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उत्तराखंड की धार्मिक संस्थाएं


उत्तराखंड देवभूमि हैं!जो अनेक ऋषि मुनियों की तपस्थली रह चुकी है, अट्टू आस्था का छेत्र होने के कारण यहाँ पर अनेक

 धार्मिक संस्थाएं स्थापित हैं!जो पूरे विश्व मैं आध्यात्मिक विकास एवं धार्मिक आस्था की ज्योति जलाये हुए हैं!राज्य की प्रमुख

 धार्मिक नगरी हरिद्वार साधू सन्यासियों के अखाडों का प्रमुख केंद्र है!

 यहाँ पर लोक कल्याण के लिए अनेक आश्र्सम हैं,जहां प्रतिदिन सत्संग होते रहते हैं प्रदेश के कुछ धार्मिक संघठन इस प्रकार हैं!

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अखिल भारतीय अखाडा परिषद्


इस परिषद् के अर्न्तगत १३ अखाडे हैं!इनमें साधू संतों के चार वर्ग है,

१-नागा सन्यासी -यह शैव मतावलंबी हैं इनके निम्न सात अखाडे हैं !
अखाडा                                       इस्ट

१-श्री निरंजनी                          कार्तिकेय

२-श्री जुना                               दतात्रेय

३-श्रे महानिर्वानी                        कपिल

४-श्री अटल                               गणेश

५-श्रे आवाहन                            गणेश

६-श्री आनंद                               सूर्य

७-श्री पंचाग्नि                           गायत्री


इनका मुख्यालय कनखल मायापुर हरिद्वार मैं है!अधिकांस नागा सन्यासी निर्वस्त्र रहते हैं !

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२-वैरागी -ये वैष्णव मतावलंबी हैं,और रामभक्त होते हैं इनके अर्न्तगत निम्न अखाडे आते हैं!

अखाडा                                  इस्ट

१-श्री निमोही अनी अखाडा         हनुमान

२-श्श्री दिगाम्वर अनी अखाडा     हनुमान

३श्री  निर्वाणी अखाडा                हनुमान

वैरागी संत कनखल वैरागी छेत्र मैं निवास करते हैं
 
     

३-उदासीन -ये दो प्रकार के होते हैं !


अखाडा                                                    इस्ट

१-श्री पंचायती अखाडा बड़ा उदासीन            चन्द्र

२-श्रे पंचायती अखाडा छोटा उदासीन          चन्द्र

इनका मुख्यालय राजघाट हरिद्वार मैं है!

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४-निर्मल अखाडा - इसका मुख्यालय सती घाट हरिद्वार मैं है!कुम्भ के अवसर पर इन अखाडों के सही जुलुस निम्न क्रम से निकलते हैं !

१-निरंजनी जुना

२-मह्निर्वानी

३-वैरागी

४-बड़ा उदासीन

५-नया उदासीन

६-निर्मल अखाडा

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५-गंगा सभा हरिद्वार

सन १९१६ मैं कर्नल प्रोबी कौट्ले द्बारा गंगा नहर निर्माण के समय गंगा पर बाँध बनाने को लेकर

महामना मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व मैं गंगा की धार को अविछिन्न रखने हेतु एक जन आन्दोलन चलाया गया था!

जिसके कारण हर पैडी पर गंगा की अविरल धारा लाकर हिन्दू समाज का इस तीर्थ पर स्थाई प्रतिनिधित्व बनाए रखने के

लिए पुरोहितों की संस्था का गठन कर "गंगा सभा " का नाम दिया गया !

गंगा सभा के तत्वावधान मैं हर पैडी पर प्रतिदिन प्रात काल व सांयकाल श्री गंगा जी की आरती का आयोजन किया गया है!

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६-अखिल भारतीय संत समिति हरिद्वार
प्रमुख संत महंतों द्बारा गोरक्षा धर्म रक्षा हेतु इस समिति का गठन किया गया है!

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७-श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति

इस समिति का कार्य मंदिर मैं पूजा -अर्चना,श्रृंगार,आरती,प्रसाद आदि ब्य्वास्थाएं करना तथा दर्सनार्थियों की सुविधा ब्यवस्था बनाना है !

मंदिर समिति के पूर्णकालिक अध्यक्ष राज्य सरकार द्वारा नामित होते हैं,जबकि मुख्य पुजारी दक्षिण के नम्बूदरी ब्राहमण होते हैं !

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8-धार्मिक व सामाजिक संगठन

मां पार्वती का साक्षात रूप मानी जाने वाली देविका की उपेक्षा करने वालों की फेहरिस्त में राजनीतिज्ञों के बाद इलाके के सामाजिक व धार्मिक संगठन का नंबर आता है। कहने को तो इलाके में दर्जनों सामाजिक व धार्मिक संस्थाएं हैं। परंतु यदि देविका से जुड़ी दो संस्थाओं की बात छोड़ दें तो अन्य किसी संस्था ने आज तक देविका के संरक्षण के लिए कुछ नहीं किया।

धर्म और समाज की दुहाई देने वाली यह हिंदूवादी व धार्मिक सगठनों ने भी आज तक पावन देविका को बचाने के लिए आवाज तक नहीं उठायी है।

चनैनी में सहस्त्रधारा नामक स्थान से प्रकट हुई पावन देविका उत्तरवाहिनी नामक स्थान से कुछ आगे जाकर बसंतर नदी में विलुप्त हो जाती है। पूरी तरह से डुग्गर प्रदेश में बहने के कारण इतिहास के पन्नों में इसे डुग्गर की गंगा का नाम भी दिया है।

इस पौराणिक व पवित्र नदी के प्रति लोगों ने जिस प्रकार का उपेक्षापूर्ण रवैया अपना रखा है। उससे न सिर्फ इसका अनादर हो रहा है, बल्कि इससे मोक्ष दायिनी नदी का अस्तित्व भी खतरे में पड़ चुका है। राजनीतिज्ञों के बाद इस पवित्र नदी की दुर्दशा के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार इलाके की धार्मिक व समाज सेवी संस्थाएं है।

 धर्म व समाज के उत्थान की बड़ी बड़ी बातें करने वाले इन संगठनों की जुबान देविका को बचाने के लिए आज तक हलक से बाहर नहीं आई। जहां लाभ हो वहां छोटी सी बात का बतंगड़ बनाने वाली संस्थाओं को देविका का अपमान होता आखिर क्यों नजर नहीं आता। शायद इसलिए क्योंकि देविका को बचाने की आवाज उठाने से उनको कोई विशेष लाभ नहीं मिलेगा।

पर्यावरण पर काम करने वाले कई संस्थाओं को भी आज तक देविका में फैला प्रदूषण नजर नहीं आया। इन धार्मिक और समाज सेवी संस्था का एक मात्र एजेंडा धर्म व समाज सेवा के नाम पर अपना स्वार्थ सिद्ध करना भर रह गया है।

 चंद एक धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं की बात छोड़ दी जाए तो सभी संस्थाओं का ध्यान जनमानस के कल्याण से ज्यादा अपने कल्याण की ओर है।

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इलाके में दर्जनों पंजीकृत व गैर पंजीकृत सामाजिक संगठन हैं। हिंदू धर्म व संस्कृति की रक्षा करने के दम भरने वाली हिंदूवादी और धार्मिक संस्थाओं की भी कमी नहीं है, लेकिन इनमें से शायद ही किसी ने कभी देविका को अपवित्र या प्रदूषित से बचाने के लिए कुछ करने या लोगों को जागरूक करने की जहमत उठाई हो।

देविका को बचाने के लिए यदि कुछ थोड़ा बहुत प्रयास किया तो, वह देविका के नाम से जुड़ी दो संस्थाओं ने। सभी लोगों की तरह धार्मिक संस्थाओं के पदाधिकारी देविका के पावन व पौराणिक महत्व को भली भांति जानते है, लेकिन इसकी स्वच्छता व पवित्रता बरकरार रखने के लिए जमीनी स्तर पर कुछ करने को आज तक आगे नहीं आई है।


इलाका वासियों को देविका को दूषित व अपवित्र न करने के लिए प्रेरित व जागरूक करने में धार्मिक व सामाजिक संस्थाएं अहम भूमिकाएं निभा सकती है। इसलिए इन संस्थाओं को लोगों को देविका को दूषित व अपवित्र न करने के लिए प्रेरित करने की पहल करनी होगी। उनकी यह पहल देविका को बचाने लिए एक महत्वपूर्ण योगदान साबित होगा।

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९-मंदिर समिति गंगोत्री

इस समिति का कार्य गंगोत्री मंदिर मैं दरसन,पूजा,आरती तथा दर्सानार्थियों के लिए ब्यवस्था करना है!

१०-मंदिर समिति यमनोत्री

इस समिति के पदेन अध्यक्ष उप जिलाधिकारी बड़कोट होते हैं!यह समिति मंदिर के समस्त ब्य्वाथाएं करती है !

 ११-स्वामी राम्किर्ष्ण मिशन

यहाँ मिशन हरिद्वार ऋषिकेश व देहरादून मैं कार्यरत है !

१२-स्वामी चिन्यन मिशन - इसका मुख्यालय उत्तरकाशी मैं है ! तथा  इसकी शाखाएं हरिद्वार ऋषिकेश और देहरादून मैं हैं !

 

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