Author Topic: Story Of Gweljyu/Golu Devta - ग्वेल्ज्यु या गोलू देवता की कथा  (Read 110995 times)

पंकज सिंह महर

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चितई गोल्ज्यू का मंदिर

चम्पावत गोल्ज्यू का मंदिर


घोड़ाखाल गोल्ज्य़ू का मंदिर


Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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Chitai aur Ghodakhaal to main gaya hua hun lekin Champawat nahi gaya wahan bhi jaana hai maine.

पंकज सिंह महर

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घोड़ाखाल का मंदिर





पंकज सिंह महर

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घोड़ाखाल मंदिर के कुछ और दृश्य




Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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Yeh Ghantian chadhane ki parampara bhi exclusively Uttarakhand ki lagti hai mujhe. Aap logon ka kya khayal hai?

पंकज सिंह महर

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Yeh Ghantian chadhane ki parampara bhi exclusively Uttarakhand ki lagti hai mujhe. Aap logon ka kya khayal hai?

अनुभव दा, मन्नत पूर्ण होने पर घंटी चढ़ाने का प्रावधान हिन्दू संस्कृति में ही है। हमारे यहां इसका प्रचलन ज्यादा है।


मेहर जी,
चितई, घोड़ाखाल के अलावा ग्वेलज्यू का एक प्रसिद्ध मन्दिर विनता के पास उदयपुर में भी है जो कि अपनी पुरानी वास्तुकला के लिहाज से  बहुत सुन्दर है.  मैं २ वर्ष पहले वहाँ गया था.  द्वाराहाट से दूनागिरी रोड से नीची बिनता जाना पड़ता है. वहाँ से करीब २.३० घण्टे का पैदल चढ़ाई करनी पड़्ती है. 
कहते हैं कि हरज्यू ग्वेलदेवता को यहाँ लाए थे. यहाँ उनका राजसी रूप में पूजा होती है.


Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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Gweljyu ka main mandir to Gadhi Champawat main hai jahan ke woh Raja the.

मेहर जी,
चितई, घोड़ाखाल के अलावा ग्वेलज्यू का एक प्रसिद्ध मन्दिर विनता के पास उदयपुर में भी है जो कि अपनी पुरानी वास्तुकला के लिहाज से  बहुत सुन्दर है.  मैं २ वर्ष पहले वहाँ गया था.  द्वाराहाट से दूनागिरी रोड से नीची बिनता जाना पड़ता है. वहाँ से करीब २.३० घण्टे का पैदल चढ़ाई करनी पड़्ती है. 
कहते हैं कि हरज्यू ग्वेलदेवता को यहाँ लाए थे. यहाँ उनका राजसी रूप में पूजा होती है.



betaal

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