Author Topic: Uttarakhand Hills Religious Point of View-उत्तराखंड के हिमालय & धार्मिक सम्बन्ध  (Read 8183 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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NANDA KOT------------Nanda Kot (Hindi-नन्दा कोट) is a mountain peak of the Himalaya range located in the Pithoragarh district of Uttarakhand state in India. It lies in the Kumaon Himalaya, just outside of the ring of peaks enclosing the Nanda Devi   Sanctuary, 15 kilometres (9 mi) southeast of Nanda Devi itself. The   name Nanda Kot literally means "Nanda's Fortress" and refers to the   abode of one of the sacred forms of the Hindu Goddess Parvati who in legend has made her sanctuary amongst the ring of lofty mountains in the region

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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RAJ RAMBHA
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Rajrambha is the name of a Himalayan mountain peak, situated in the Pithoragarh district of Uttarakhand state of India. It means 'celestial nymph' (Apsara) in Hindi. This peak is situated south of the Kalabaland Glacier in eastern Kumaun in the Ralam valley. The summit of the peak is 6,537 m. The nearby peaks which form the north-south massif are Suitilla 6,373 m, Chaudhara 6,510 m, and Ngalaphu 6,410 m.
Rajrambha forms a wall between Lasser Yankti and Ralam Valley. It can be approached through the Uttari Balati glacier passing the Balati plateau. Dhakar or Tidang is the base camp from where one can climb the Rajrambha peak (6537m). Dhakar is near Tawaghat in Pithoragarh district as the last motorable station on the way.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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RISHI PAHARRishi Pahar is a Himalayan mountain peak, located in the Pithoragarh district of Uttarakhand state in India. It lies at the northeast corner of the ring of peaks surrounding the Nanda Devi Sanctuary, and on the eastern rim of the Nanda Devi Biosphere Reserve, just south of Trishuli and Hardeol. The Milam Glacier   lies on its east flank. It marks the triple divide between the Milam,   Dunagiri, and Uttari Rishi Ganga valleys. Rishi Pahar means 'The Peak of   Saint' in Hindi.

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त्रिशूल पर्वत


त्रिशूल हिमालय की तीन चोटियों के समूह का नाम है, जो पश्चिमी कुमाऊं में स्थित हैं। यह उत्तराखंड राज्य के मध्य में बागेश्वर जिला के निकट हैं। ये नंदा देवी पर्वत से पश्चिम दक्षिण-पश्चिम दिशा में १५ कि.मी. (९ मील) दूर नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान को घेरते हुए शिखरों के समूह का दक्षिण-पूर्वी भाग हैं। इन तीन शिखरों के कारण ही इनका नाम हिन्दू भगवान शिव के अस्त्र त्रिशूल का नाम दिया गया है। मुख्य शिखर त्रिशूल-१ की ऊंचाई ७००० मीटर (२२९७० फीट) है। यह शिखर ७००० मी. से ऊंची पहली चोटी है, जिस पर (१९०७ में) चढ़ाई की गई थी।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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कामेट पर्वतकामेट पर्वत (तिब्बती:कांग्मेद), भारत के गढ़वाल क्षेत्र में नंदा देवी पर्वत के बाद सबसे ऊंचा पर्वत शिखर है। तह ७,७५६-मीटर (२५,४४६ फुट) ऊंचा है।[१] यह उत्तराखंड राज्य के चमोली जिला में तिब्बत की सीमा के निकट स्थित है। यह भारत में तीसरा शबसे ऊंचा शिखर है (हालांकि भारत के अनुसार इसका स्थान बहुत बाद में आता है, जो कि पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित हिमालय की बहुत सी चोटियों के बाद आता है)। विश्व में इसका २९वां स्थान है।[२] कामेट शिखर को ज़ांस्कर शृंखला का भाग और इसका सबसे ऊंचा शिखर माना जाता है। यह हिमालय की मुख्य शृंखला के उत्तर में सुरु नदी एवं ऊपरी करनाली नदी के बीच स्थित है। देखने में यह एक विशाल पिरामिड जैसा दिखाई देता है, जिसके चपटे शिखर पर दो चोटियां हैं।


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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TUNGNAATH.

तुंगनाथ उत्तराखंड के गढ़वाल मण्डल के चमोली जिले   में स्थित एक पर्वत है। तुंगनाथ पर्वत पर स्थित है तुंगनाथ मंदिर, जो   ३,६८० मीटर की ऊँचाई पर बना हुआ है, और पंच केदारों में सबसे ऊँचाई पर   स्थित है। यह मंदिर १,००० वर्ष पुराना माना जाता है, और यहाँ भगवान शिव की पंच केदारों में से एक के रूप में पूजा होती है। ऐसा माना जाता है की इस मंदिर का निर्माण पाण्डवों   द्वारा भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया गया था, जो कुरुक्षेत्र में   हुए नरसंहार के कारण पाण्डवों से रुष्ट थे। तुंगनाथ की चोटी तीन धाराओं का   स्रोत है, जिनसे अक्षकामिनी नदी बनती है। मंदिर चोपता से ३ किलोमीटर दूर   स्थित है।

 

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