Author Topic: Champawat - चम्पावत  (Read 44312 times)

Rajen

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Re: चम्पावत जिला - CHAMPAWAT -
« Reply #10 on: January 03, 2008, 12:43:37 PM »
क्रान्‍तेश्‍वर महादेव

          यहां पर कूर्म पर्वत के शखिर पर बहुत ही सुंदर भव्‍य मंदिर बना है ऐसा माना जाता है कि कूर्म पर्वत के नाम पर ही कुमायु शब्‍द बना है कुमायु शब्‍द संस्‍क्रत के कूर्म शब्‍द का ही अपभ्रंश है माना जाता है कि भगवान विष्‍णु का कूर्म अवतार इसी क्षेत्र् में हुआ था जहा एक शिला पर भगवान विष्‍णु के पद चिन्‍ह आज भी दिखाई देते है इन्‍ही पद चिन्‍हों की पूजा की जाती है स्‍कंन्‍द पुराण में भी इसका वर्णन है स्‍कन्‍ध पुराण के खण्‍ड में भी कूर्म नाम के इस पर्वत का नाम आया है शहर से 6 किमी तथा यमुद्र तल से 6000 फीट ऊंचाई पर बसा है यहा से पूरे चम्‍पावत जनपद का द्रश्‍य बहुत ही सुदर दिखाई देता है मैदानी क्षेत्र् का भू- भाग भी यहा से द्रष्टिगोचर होता है संचलान समिति का गठन नही हुआ है

Rajen

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Re: चम्पावत जिला - CHAMPAWAT -
« Reply #11 on: January 03, 2008, 12:51:28 PM »
मानेश्‍वर महादेव

         शिखर पर बना मंदिर काफी प्राचीन है चम्‍पावत शहर से करीब 7 किमी दूर चम्‍पावत – पिधौरागढ मोटर मार्ग से 1 किमी की दूरी पर प्राक़तिक सुषमायुक्‍त पर्वत शिखर पर बसा है कहावत है कि जब पांडव लोग अपने पितरो का श्राद्व करने मान सरोवर को जा रहे थे तब इस स्‍थान पर पहुचते –पहुचते श्राद्व का दिन आ गया तब पांडव पुत्र् अर्जुन ने अपने गान्‍डीव से बाण मार चला कर जल धारा उत्‍तपन्‍न की व पितरों का श्राध तर्पण किया उसी वाण की गंगा से एक नौला वावली बना जो हमेशा जल से भरी रहती है इसका पानी अम़त तुल्‍य माना जाता है इस वावरी के जल से स्‍नान करने का अपना अलग ही आनन्‍द तथा महात्‍मय है यहां से चम्‍पावत शहर का द़श्‍य बहुत ही सुन्‍दर दि खाई देता है

Rajen

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Re: चम्पावत जिला - CHAMPAWAT -
« Reply #12 on: January 03, 2008, 01:06:20 PM »
कांकर

         शारदा नदी के किनारे बूम नामक स्‍थान पर टनकपुर – पूर्णागिरी मोटर मार्ग पर टनकपुर से 5 किमी की दूरी पर स्थित है पुराणों के अनुसार स़ष्टिकर्ता ब्रह्रमा ने एक यज्ञ किया जिसमें सभी देवी देवता पधारे आज भी यहां पर प्राचीन यज्ञ स्‍थली हवन कुण्‍ड आदि दखाई देते है जब सूर्य उत्‍तरायण होता है तो इस जगह पर हवन, मुन्‍उन एवं यज्ञोपवीत करने का महत्‍व है

Rajen

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Re: चम्पावत जिला - CHAMPAWAT -
« Reply #13 on: January 03, 2008, 01:07:28 PM »
मागेश्‍वर महादेव

        देवदार बनी के बीचों-बीच पैडी के ऊपर बना शिव – मन्दिर बहुत ही सुंदर है रहने के लिए धर्मशाला है यहां यात्रीयों को फल-फूल खाकर ही पूजा पाठ करनी पडती है नमक तथा अनाज वर्जित है यहां चम्‍पावत से पैदल जाया जाता है मोटर सडक चम्‍पावत –खेतीखान से 2 किमी की दूरी पर है स्‍थान बडा ही रमणीय है

Rajen

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Re: चम्पावत जिला - CHAMPAWAT -
« Reply #14 on: January 03, 2008, 01:08:45 PM »
व्‍यानधुरा

        आस्‍था का केन्‍द्र व्‍यानधुरा विभिन्‍न प्रकार के वन्‍य जन्‍तुओं से भी भरा पूरा है यह मंदिर मनोहारी प्राक़तिक सौन्‍दर्य से भरपूर्व है तथा टनकपुर से 25 कि,मी दूर अवस्थित है इस मंदिर की बनावट अन्‍य मंदिरो से भिन्‍न है  जिसमें छत और कलश नहीं है इसमें धनुश –वाण, ि‍त्रशूल  इकठठे है ऐडी को अर्जन का अवतार तथा व्‍यान को धर्मराज युधिष्टिर का अवतार मानते है मान्‍यताहै कि पांडव की तपोभूमि होने से भगवती  व्‍यान, देव ,ऐडी ने तुर्क आक़मणकारी को जिसे माल का भराडा कहते है को रोका पांडवो ने व्‍यानधुरा में अज्ञातवास के समय भगवती की आराधना की ओर अस्‍त्र् शस्‍त्रों को इसी स्‍थान पर छिपाया भीम ने कीचक का वद्य भी इसी क्षेत्र् मे किया था दस क्षेत्र् में मुगल कालीन लेख भी मिला है एडी व व्‍यान राजांशी देव के रूप में पूजयनीय है और न्‍याय केप्रतीक माने जाते है इसकी कई शाखायें है एक शाखा चम्‍पावत से 3 किमी, चम्‍पावत – ललुवापानी मोटर मार्ग से मात्र् 1.50 किमी पर है तथा एक अन्‍य शाखा गहतोडा फटक्‍ शिला के नाम से सेन धुरा में अवस्थित है इन मंदिरों में पशु बलि वर्जित है जन मानस में ऐडी व्‍यानधुरा की महीमा बहुत है

पंकज सिंह महर

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Re: चम्पावत जिला - CHAMPAWAT -
« Reply #15 on: January 03, 2008, 01:51:31 PM »
HISTORICAL BACKGROUND

The district of Champawat constituted in the year1997 is situated between 29 degree 5 minutes and 29 degree 30 minutes in northern altitude and 79 degree 59 minutes and 80 degree 3 minutes at the center of eastern longitude. The Ram Ganga River acts as a border between Champawat and Pithoragarh in north while Jabgura and Pannar rivers in south and west act as a border between Champawat, Udham Singh Nagar and Almora districts simultaneously. The long chain of mountain in southwestern region acts as a border between the district Champawat and Nainital district. It is important from the defence point of view as in the east Kali river acts the international border between Nepal and India. The geographical coverage of Champawat is about 1613 sq. km. It includes two Tahsil and four development blocks and 691 revenue villages.

            The district owes its name to King Arjun Deos daughter Champawati. Earlier this district was a part of district Almora. In 1972 the Champawat Tahsil of Almora district was transferred to Pithoragarh. On 15th Sep, 1997 Champawat district was given an independent identity.

            Since the time in memorial Champawat district is having it’s own importance in terms of religious and social aspects. It is believed that Champawat district is the source and origin of religion and culture of Uttarakhand. In the ancient time this region was the origin of Naga, Kinnar and Khas Raja’s. The available historical pillars, manuscripts, archeological collection and folk-lore describe the greatness of the area during the period of Maha Bharata.  Barahi Temple of Devidhura, Tarkeshwar Mandir of Champawat, Vanasur Fort of Vishung, Baleshwar Mandir of Champawat, Sapteshwar Mandir of Sipti and Ghatotkasha temples are believed to be of the great period of Maha Bharat. The ample evidence is also available about the Katiyur dynasty, and its prosperity in ancient times. There is a belief that the king Brahma Deo was having his capital at Suie and his contemporary King Raja Arjun Deo was having his capital at Daman Kot. The marriage of the daughter of the King Arjun Deo with Sam Deo opened a door for Chandra dynasty in this region. In around 1790, with the establishment of the Gorkharaj, the Chandra Vansha came to its end. In 1814, the Britishers forced the Gorkhas to leave the place. In the history of Indian independence the history of the warriors of this region has been written in golden letters for their sacrifices.

पंकज सिंह महर

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Re: चम्पावत जिला - CHAMPAWAT -
« Reply #16 on: January 03, 2008, 01:54:15 PM »
जनपद का सृजन : 15 सितम्‍बर 1997

अक्षांश - 280 58’ अक्षांश उत्‍तर से 290  38’ अक्षांश उत्‍तर

देशान्‍तर - 790 48’ देशान्‍तर पूर्व से 800  19’ देशान्‍तर पूर्व

सीमा : पूर्व में नेपाल के जनपद महेन्‍द्रनगर, कंचनपुर, डंडेलधुरा, बैतड़ी उत्‍तर में जनपद पिथौरागढ़ पश्चिम में जनपद नैनीताल तथा दक्षणि में जनपद उधमसिंहनगर ।

जनपद मुख्‍यालय - चम्‍पावत

तहसील - 04 (चम्‍पावत, लोहाघाट, श्री पूर्णागिरी टनकपुर, पाटी)

उप तहसील -  01 (बाराकोट)

विकास खण्‍ड – 04 (चम्‍पावत, लोहाघाट, पाटी, बाराकोट)

लोक सभा क्षेञ -  02

           1. अल्‍मोड़ा

        2. नैनीताल

विधान सभा क्षेञ - 02

           1. 64- चम्‍पावत

        2. 65- लोहाघाट

नगर क्षेञ –

           1. नगर पालिका परिषद टनकपुर

           2. नगर पंचायत – चम्‍पावत

           3. नगर पंचायत – लोहाघाट

           4. जनगणना शहर – बनबसा

जनपद का क्षेञफल -  1955.26 वर्ग किमी

वन क्षेञ - 831.65 वर्ग किमी

जनसंख्‍या (वर्ष 2001) - 224542

          पुरूष - 111084

          महिला - 113458

साक्षरता प्रतिशत (वर्ष 2001) - 70.39

          पुरूष - 71.04

          महिला - 44.97

आबाद ग्राम - 651

गैर आबाद ग्राम - 36

कुल ग्रामों में वन ग्राम - 30

राजस्‍व ग्राम - 687

न्‍याय पंचायत - 24

ग्राम पंचायत - 283

वन पंचायत - 259

पुलिस थाना - 06 (चम्‍पावत, लोहाघाट, टनकपुर, वनबसा किमतोली, रीठा साहिब)

राजस्‍व पुलिस चौकी - 69

पटवारी/लेखपाल क्षेञ - 71

कानूनगो क्षेञ मुख्‍यालय - 08 (चम्‍पावत, लोहाघाट, बाराकोट, देवीधुरा, पुल्‍ला, अमोड़ी, मंच, भिगराड़ा )

            महाविधालय - 03

               1. राजकीय महाविधालय चम्‍पावत

           2. राजकीय महाविधालय लोहाघाट

           3. राजकीय महाविधालय टनकपुर

पॉंलीटेक्‍नीक संस्‍थान - 01 (राजकीय पॉंलीटेक्‍नीक लोहाघाट)

 

            औधोगिक प्रशिक्षण संस्‍थान - 03

                     1. राजकीय औधोगिक प्रशिक्षण संस्‍थान चम्‍पावत

               2. राजकीय औधोगिक प्रशिक्षण संस्‍थान टनकपुर

                3. राजकीय औधोगिक प्रशिक्षण संस्‍थान खेतीखान

पंकज सिंह महर

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Re: चम्पावत जिला - CHAMPAWAT -
« Reply #17 on: January 03, 2008, 01:56:48 PM »
चम्पावत - कुमाऊँ में चम्पावत का ऐतिहासिक महत्व है। अल्मोड़ा आने से पूर्व चंद्रवंश के राजाओं की यह राजधानी थी। एक समय चम्पावत का इतना प्रभाव था कि सम्पूर्ण पर्वतीय अंचल ही नहीं, अपितु मैदानों के कुछ भागों तक इस नगर के राजाओं का आतंक छाया रहाता था।

१४ वीं शताब्दी में चम्पावत नगर स्थापित हुआ था। उसी समय वहाँपर वालेश्वर मंदिर समूह का निर्माण हुआ था। कुमाऊँनी वास्तुकला की चरम परिणति यहीं के मंदिरों में देखी जा सकती है। कुछ वास्तुकारों का मानना है कि यहाँ के चम्पादेवी, रत्नेश्वर और दुर्गा मंदिरों की शैली उत्तर भारत के मंदिरों के अनुरुप है। जबकि यहाँ के नागनाथ मंदिर समूह की वास्तुकला को विशुद्ध कुमाऊँनी वास्तुकला का आदर्श माना गया है।

धरती के विशाल आंगन में चम्पावत का ऐतिहासिक नगर पिथौरागढ़ से ७६ कि. मी. की दूरी पर समुद्रतल से १६१५ मीटर की ऊँचाई पर बसा हुआ है। पिथौरागढ़ से टनकपुर को जानेवाली मोटर सड़क पर इस स्थान का महत्व इस अंचल में सबसे अधिक आंका गया है।

चम्पावत के अंचल से ही कुमाऊँ को नाम मिली है। इसी क्षेत्र को 'कुमूँ' कहते हैं। इसी नगर के पास विष्णु का कूर्मावतार होना बताया जाता है। कूर्मावतार से ही कुमार्चल नाम पड़ा, जिसे आज कुमाऊँ कहते हैं।

चम्पावत में पुरानी राजधानी के खण्डहर आज भी देखने को मिलते हैं। यहाँ के पुराने किले के स्थान पर तहसील मुक्यालय है। अन्य भवन भी पुराने किले में बने हैं। यहाँ का पुराना किला ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण माना जाता है।

बालेश्वर मंदिर चम्पावत का विशेष आकर्षण है, तो नागनाथ मंदिर कुमाऊँणी स्थापत्य कला का अनुकरणीय उदाहरण है। इसके अलावा चम्पावत में कई ऐसे आकर्षक स्थल हैं। जिनका प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व है और जिन्हें देखने के लिए देश-विदेश के पर्यटक निरन्तर आते रहते हैं।

चम्पावत में पर्यटकों के लिए पर्यटन विभाग का २४ शैय्याओं का एक सुन्दर आवासंगृह है। इसके अलावा इस नगर में रहने आर खाने की उत्तम व्यवस्था हो जाती है। पिथौरागढ़ और टनकपुर से आनेवाली बसों की सवारियों का चमेपावत एक ऐसा स्टेशन है जहां वे चाय पीते हैं या भोजन करते हैं।

पंकज सिंह महर

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Re: चम्पावत जिला - CHAMPAWAT -
« Reply #18 on: January 03, 2008, 01:58:27 PM »
मायावती आश्रम: चम्पावत

मायावती स्वामी विवेकानन्द को यह स्थान अति प्रिय लगा। उन्होंने यहाँ पर " अद्वेत आश्रम" की स्थापना की थी। यह आश्रम आजकल मायावती ट्रस्ट के द्वारा संचालित होता है।

मायावती का शान्त और सुखद वातावरण प्रकृति-प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण पैदा करता है। इस स्थान से हिमालय की रजत-रुपहली हिम-मंडित पर्वत श्रृंखला को देखा जा सकता है। गढ़वाल हिमालय से कुंमाऊँ और नेपाल हिमालय की प्रायः सभी ऊँची-ऊँची हिम मंडित-चोटियों के दर्शन मायावती से हो जाते हैं। दर्शक इन्हीं पर्वत-चोटियों की अलौकिक सुषमा को देखने यहाँ निरन्दर आते रहते हैं। १ मई से १५ जुलाई और १५ सितम्बर से १५ नवम्बर के बीच का समय यहाँ की सुन्दरता देखने के लिए उपयुक्त समझा जाता है।

मायावती का पावन स्थल लोहाघाट से केवल ९ किमी. की दूरी पर है। यहाँ पर आश्रम की तरफ से उत्तम आवास व भोजन की व्यवस्था की जाती है। पर्यटक एवं धार्मिक यात्री यहाँ वर्ष भर आते-जाते रहते हैं।

पंकज सिंह महर

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Re: चम्पावत जिला - CHAMPAWAT -
« Reply #19 on: January 03, 2008, 02:00:07 PM »
देवीधूरा : चम्पावत
 
देवीधूरा पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा का विशिष्ट धार्मिक स्थान है। यहाँ पर बाराही देवी का सुप्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर की मान्यता सम्पूर्ण कुमाऊँ मंडल में है। इस स्थान की जहाँ धार्मिक महत्ता है, वहाँ इसके प्राकृतिक सौन्दर्य की भी विशेष ख्याति है।

प्रतिवर्ष रक्षावंधन के दिन यहाँ पर एक विशेष मेला लगता है। इस मेले में कुमाऊँ के ही नहीं अपितु गढ़वाल, नेपाल और मैदानों के हजारों लोग पहूँचते हैं। 'कुमाऊँ' के लोकगीतों और लोकनृत्यों की सही झलक यहीं दिखाई देती है। नृत्यदल इस मेले में अलग-अलग नाचते रहते हैं। इस मेले में कई खेल भी खेले जाते हैं। एक ऐसा खेल 'बगवाल' भी खेला जाता है जिसमें एक पक्ष के लोग दूसरे पक्ष के लोगों पर पत्थर फेंककर अपनी विजय सुनिश्चित करता है।

देवीधूरा, लोहाघाट से ५८ किमी. की दूरी पर समुद्रतल से २५०० मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ से अल्मोड़ा को सीधा मार्ग चला गया है। देवीधूरा के मेले में नैनीताल ऐर अल्मोड़ा के दर्शक तथा पर्यटक अल्मोड़ा से लमगड़ा होते हुए देवीधूरा के पावन स्थल तक पहुँचते हैं। वह सुन्दर मोटर मार्ग का रास्ता है।

 

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