Author Topic: Famous Waterfall Of Uttarakhand - उत्तराखंड मे प्रसिद्ध झरने  (Read 32611 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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नीड़गड्डु जलप्रपात
नीड़गड्डु जलप्रपात पहुंचना तो मुश्किल है लेकिन, अगर आपके पास शारीरिक दमखम है तो यहां पहुंचा जा सकता है। यह मुनी की रेती से बद्रीनाथ के रास्ते में 15 किलोमीटरों की दूरी पर अवस्थित है। आखिर के 3 किलोमीटर चुनौती पेश करते हैं क्योंकि आपको आगे के ऊंचे-नीचे भू-भाग में चढ़ाई चढ़नी पड़ेगी।

यह जलप्रपात पहाड़ियों की मनोरम हरियाली के बीच अवस्थित है। इसमें 60 से 70 मीटरों की ऊंचाई से पानी एक छोटे से जलाशय में गिरता है। पानी का कोहरेदार छिड़काव और प्रपात की जोरदार आवाज से इस स्थान की छटा और निराली हो जाती है। पर्यटक इस जलाशय में स्नान करते हैं तथा तैरते हैं तथा इसके किनारे पिकनिक मनाते हैं। उत्तराखंड सरकार निकट भविष्य में इस स्थान को पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने की योजना बना रही है।


MR. M.S. NEGI

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पंकज सिंह महर

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पिथौरागढ़-टनकपुर मार्ग पर पिथौरागढ़ से ११ कि०मी० दूर गुरना का झरना प्रकृति के इस अदभुत सौगात स्वरुप शहर में प्रवेश करने पर आपका स्वागत करता है।


इस झरने को देखते ही लम्बी यात्रा की थकान खत्म हो जाती है।

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वसुधारा

अलकनन्दा के तट पर धर्मवन से आगे ’वसुधारा‘ नामक तीर्थ है। बदरीनाथ से लगभग 7 कि0मी0 दूर यह स्थल अत्यन्त रमणीय तथा प्राकृतिक वैभव से परिपूर्ण है। यहां पर जलधारा अति ही उच्च शिखर से गिरती है तथा वायु के थपेडों से बिखर कर जल के कण मोती से झरते हैं। उनके स्पर्श मात्र से मन-प्राण पुलकित हो जाते हैं। जब अष्टवसुओं ने देवर्षि नारद से इस स्थान की प्रशंसा सुनी तो उन्होंने यहां पर 30,000 वर्षों तक तप किया और भगवान विष्णु के प्रत्यक्ष दर्शन एवं अविचल षिक्त का वर प्राप्त किया। वसुओं की तपस्थली ही ’वसुधारा‘ के रूप में प्रसिद्ध हैं।



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सलधर-गर्म झरना

जोशीमठ से 18 किलोमीटर दूर एवं तपोवन से 3 किलोमीटर दूर।तपोवन से मात्र 3 किलोमीटर दूर आगे सड़क के दाहिने किनारे एक गर्म जल का स्रोत है, सलधर। यहां कि लाल मिट्टी से उबलते पानी का बुलबुला फूटता रहता है, जिसे छूआ भी नहीं जा सकता। गर्म झील के निकट का कीचड़ लोगों द्वारा ले जाया जाता है क्योंकि यह कई रोगों को ठीक कर देता है।

इस स्थान से संबंधित एक दिलचस्प कहावत है। कहा जाता है कि जब रावण (मेघनाद) के साथ युद्ध में घायल हो लक्ष्मण मरणासन्न अवस्था में थे, तब राम ने हिमालय से संजीवनी बूटी लाने के लिये हनुमान को भेजा जो लक्ष्मण को पूरी तरह स्वस्थ कर देता, जो संभवत: पुष्पों की घाटी होगी। इस बीच रावण ने एक भयंकर राक्षस कालनेमि को वहां भेज दिया, ताकि हनुमान उस बूटी को न ला पाएं।

कालनेमि ने रूप बदलकर तपोवन के निकट उन्हें देख लिया तथा उन्हें आस-पास के प्राकृतिक सौंदर्य में फंसाकर उन्हें उद्देश्य विमुख करने का प्रयास किया। हनुमान ने पास की एक शिला पर अपने वस्त्र रखकर, नदी में स्नान करने का निर्णय किया। वह शिला एक शापग्रस्त सुंदर परी की थी, उसका उद्धार हो गया तथा उसने कालनेमि के बारे में हनुमान को बता दिया। हनुमान ने वहां कालनेभि को मार डाला और इसीलिये यहां का कीचड़ एवं जल रक्त की तरह लाल है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Waterfall in Uttarahkand



 

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