Author Topic: Lohaghat : Hill Station - लोहाघाट  (Read 70465 times)

Rajen

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Re: Lohaghat : Hill Station
« Reply #20 on: February 13, 2009, 11:19:57 AM »
इस बहुत अच्छी जानकारी के लिए धन्यबाद.  कई बर्षों से लोहाघाट के रास्ते आ-जा रहा हूँ लेकिन इतनी जानकारी आज मिली तो लग रहा है की अब लोहाघाट -  चम्पावत में दो-तीन दिन कैम्प करना पड़ेगा.

Rajen

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Re: Lohaghat : Hill Station
« Reply #21 on: February 13, 2009, 11:21:21 AM »
सुधीर जी और अनुभव जी को एक-एक करमा.

पंकज सिंह महर

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Re: Lohaghat : Hill Station
« Reply #22 on: February 13, 2009, 11:43:06 AM »
माउंट एबॉट
(मरोड़ाखान होकर लोहाघाट से 11 किलोमीटर दूर।)


विश्व विस्मृत अंग्रेजी संस्कृति का एक छोटा द्वीप एबॉट शिखर, समुद्र तल से 7,000 फीट ऊपर स्थित एक दर्शनीय स्थल है। यूरोपीय समुदाय के लिये एक पहाड़ी स्थल बनाने की इच्छा से झांसी के एक अंग्रेज व्यापारी जॉन हेरॉल्ड एबॉट ने वर्ष 1914 में एबॉट शिखर का पता लगाया, जिनके नाम पर ही यह कस्बा है। इसी निजी पहाड़ी पर 13 घर फैले हैं। यहां जंगलों के बीच एक सुंदर चर्च तथा एक प्राचीन क्रिकेट का मैदान है जहां से पहाड़ों का अनोखा दृश्य उपस्थित होता है। सितंबर से मई के बीच साफ दिनों में इसकी बयीं ओर गंगोत्री शिखर तथा दायीं ओर धौलागिरि पर्वत ऋंखला और बीच में नंदा देवी एवं पंचचुली शिखरों को देखा जा सकता है।





हेम पन्त

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Re: Lohaghat : Hill Station
« Reply #23 on: February 13, 2009, 11:50:17 AM »
Source : champawat.nic.in

Mayavati Adwait Ashram


22 km from Champawat and 9 km from Lohaghat, this ashram is situated at an altitude of 1940 meters. Mayawati shot into prominence after the Advait Ashram was established here. The ashram attracts spiritualists from India and abroad. Amid and old tea Estate, is the Advait Ashram of Mayawati. During his third visit to Almora in 1898, Swami Vivekanand decided to shift the publication office of 'Prabuddh Bharat' from Madras to Mayawati, from where it is published since then. The only presence that has become a part of the peace and solitude of Mayawati, is that of the mighty Himalaya in all its splendor. On request the Ashram provides board and lodging to visitors. There is also a library and a small museum at Mayawati.

पंकज सिंह महर

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Re: Lohaghat : Hill Station
« Reply #24 on: February 13, 2009, 11:52:06 AM »
पंचेश्वर

(लोहाघाट से 39 किलोमीटर पक्की सड़क।)


काली एवं सरयु नदी का संगम पंचेश्वर, नेपाल की सीमा बनाता है तथा चामू मंदिर के लिये प्रसिद्घ है। यहां चामू या भगवान शिव की पूजा जानवरों के संरक्षक के रूप में की जाती है। यहां एक वार्षिक जाट (यात्रा) का आयोजन होता है जिस दौरान देवता की डोली को 5 किलोमीटर ऊपर की पहाड़ी से नीचे सैल गांव से लाया जाता है। संगम पर लोग स्नान कर पंचेश्वर मंदिर में घंटी एवं दूध अर्पण करते हैं।

मछली पकड़ने में दिलचस्पी रखने वाले के लिये पंचेश्वर एक अद्भुत स्थल है। हिमालयी क्षेत्र में बचे इन स्थानों में से यह एक है, जहां 50 पाउंड से अधिक वजन की महसीर मछलियां पकड़ी जा सकती हैं। यह एक मात्र नदी ऋंखला है, जहां चार किस्म की महासीरें पायी जाती हैं, स्वर्णिम, रेडफिन, कॉपर तथा चॉकलेट। मछली पकड़ने का सर्वोत्तम समय सितंबर से अप्रैल होता है।

 

पंकज सिंह महर

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Re: Lohaghat : Hill Station
« Reply #25 on: February 13, 2009, 11:56:07 AM »
[justify]अद्वैत आश्रम, मायावती
(लोहाघाट से 9 किलोमीटर दूर।)


यह आश्रम विख्यात विचारक एवं दार्शनिक स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित बंगाल के बेलूर मठ की शाखा का केंद्र है। मायावती आश्रम की स्थापना कप्तान जे एम सेवियर एवं उनकी पत्नी द्वारा की गयी जो स्वामी विवेकानंद के परामर्श से हुआ। सेवियर दम्पत्ति तथा स्वामी विवेकानंद के शिष्य स्वरूपानंद ने मिलकर स्वामी विवेकानंद के इस सपने को साकार किया। आश्रम का निर्माण मेजर मैकगवर्नर के एक चाय बागान में हुआ और आज भी इस जगह आप चाय के कुछ पौधे देख सकते हैं।

वर्ष 1898 में अपने तृतीय आगमन के बाद स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति एवं दर्शन से संबंधित अंग्रेजी की पत्रिका प्रबुद्ध भारत के प्रकाशन कार्यालय को मद्रास से मायावती लाने का निर्णय लिया और तब से ही यह यहां से प्रकाशित हो रहा है। पुराना मुद्रण प्रेस जहां से पत्रिका प्रकाशित होती थी, वह आज भी कायम है। इसे वर्ष 1898 में सेवियर दम्पत्ति द्वारा कोलकाता में लाया गया और इसे अल्मोड़ा के थॉमसन हाउस में लगाया गया। अगले वर्ष इसे मायावती लाया गया जहां इसका इस्तेमाल पत्रिका एवं स्वामी विवेकानंद के प्रवचनों के अन्य साहित्यों का प्रकाशन करने में हुआ तथा स्वामी विवेकानंद जब वर्ष 1901 में यहां आये तो उन्होंने स्वयं ही इस प्रेस को चलाया। वर्ष 1930 में इसे पुनेथा परिवार के हाथों बेच दिया गया तथा वर्ष 1994 में इस परिवार ने इसे आश्रम को दान कर दिया।
 
समुद्र तल से 1,940 मीटर ऊंचाई पर स्थित यह आश्रम हिमालय का अद्भुत नजारा प्रस्तुत करता है। यह भारत तथा विदेशों से अध्यात्मवादियों को आकर्षित करता है, खासकर उन बंगाल वासियों को जो आश्रम से निकटता से जुड़े थे। आश्रम आगंतुकों के अनुरोध पर उन्हें रहने की सुविधा प्रदान करता है तथा यहां एक छोटा पुस्तकालय एवं संग्रहालय भी है।


आश्रम परिसर में शामिल है: प्रमुख भवन जिसमें कार्यालय, एक प्रार्थना भवन, रसोईघर तथा भोजन कक्ष निचले तल में है एवं संयासियों का आवास दूसरी मंजिल पर है तथा यही पुस्तकालय भवन एवं अस्पताल आदि भी हैं। अधिकांश आकर्षणों की संबद्घता स्वामी विवेकानंद, स्वरूपानंद एवं सेवियर दम्पत्ति की स्मृतियों यथा एक आराधना शिविर, एक झील, धर्मघर, सेवियर दंपत्ति का आवास आदि से ही है। धर्मघर जो चार किलोमीटर के घने जंगलों के अंत में स्थित है, जाते समय एक मार्गदर्शक का साथ होना उचित है।

आश्रम हिमालयी ऋंखला खासकर नंदा देवी, नंदकोट एवं त्रिशूल शिखरों का कुछ अद्भुत दृश्य पेश करता है।

 

राजेश जोशी/rajesh.joshee

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Re: Lohaghat : Hill Station
« Reply #26 on: February 13, 2009, 12:17:55 PM »
Mahar ji,
Thank you very much for this wonderful information

हेम पन्त

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Re: Lohaghat : Hill Station
« Reply #27 on: February 16, 2009, 04:16:53 PM »
देवीधूरा का यात्रा-वृतांत

http://yashswi.blogspot.com/2008/11/blog-post_24.html

सुधीर चतुर्वेदी

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Re: Lohaghat : Hill Station
« Reply #28 on: February 16, 2009, 04:28:34 PM »
Thanks Hem Bhai

सुधीर चतुर्वेदी

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Re: Lohaghat : Hill Station
« Reply #29 on: February 17, 2009, 06:21:03 PM »
Devidhura Temple : 39 Km from Lohaghat, 52 Km from Champawat,104 Km from Pithoragarh


 

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