Author Topic: Mahakali Temple Gangolihat, Pithorgarh - गंगोलीहाट कालिका  (Read 40766 times)

पंकज सिंह महर

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Re: गंगोलीहाट
« Reply #10 on: March 31, 2008, 01:38:27 PM »
जब मां महाकाली राक्षसों का नाश करते-करते उग्र हो गईं तो महादेव शिव जी उनके रास्ते में लेट गये, जिन पर पांव पढ़ते ही मां शांत हुई थी, उससे बाद मां महाकाली गंगोलीहाट के जंगल में (वर्तमान में जहां पर मंदिर है) निवास करने लगी, जब शंकराचार्य जी यहां पहुंचे तो उन्होंने मां को एक पिण्डी रूप में यहां पर स्थापित कर दिया था, फोटो में आपने देखा होगा कि वहां पर प्रतिमा की जगह एक पिण्डी है, जिसके ऊपर छत्र लगा हुआ है।
     इसी के ठीक पीछे एक बिस्तर भी आपने देखा होगा, तो इस बिस्तर पर मां रात में आराम करती हैं, रोज पुजारी बिस्तर लगाकर जाते हैं और मंदिर को बंद कर दिया जाता है, सुबह उस बिस्तर पर ऎसे चिन्ह आज भी मिलते हैं कि रात में कोई वहां पर सोया हो।

जय मां महाकाली!

पंकज सिंह महर

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Re: गंगोलीहाट
« Reply #11 on: April 30, 2008, 02:12:43 PM »
हाट कालिका मंदिर, मुख्य द्वार


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: Gangolihat - गंगोलीहाट
« Reply #12 on: February 09, 2011, 02:42:52 AM »

मुझे माँ काली के मंदिर में जाने का सौभाग्य २-३ बार मिला है! अत्यंत रमणीय स्थान पर स्थित है यह मंदिर!

जनश्रुतियो पर सुनी एक चमत्कारी कथा महाकाली माता के बारे में
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कुमाऊ रेजिमेंट में एक भारत माता की रक्षा में भर्ती था!  एक समय सेना की टुकड़ी पानी के जहाज में यात्रा कर रही थी और जहाज में अचानक तकनीकी खराबी के कारण जहाज डूबने लगा! जहाज चालक ने अपने हाथ खड़े कर दिए और उसने कहा आप अपने-२ ईष्ट देवता को याद कर लो अब जहाज को डूबने से केवल कोई चमत्कार ही बचा सकता है!

तबी गंगोलीहाट का रहने वाला एक सैनिक ने कहा मै अपने ईष्ट देवी महा काली की अर्चना करता हूँ और माँ काली कोई न कोई चमत्कार करके इस जहाज को डूबने से बचा लेगी ! तब यह सैनिक थोडा अलग जाके माँ काली की स्तुति करने लगा और थोड़ी देर में जहाज धेरे२- किनारे आने लगा!

यह एक अद्भुत चमत्कार था जब जहाज का इंजन ख़राब हो गया था और वह डूबने के कगार पर था! माँ काली की कृपा रही जहाज किनारे लौट आया और जहाज में बैठ सभी यात्रियों की जान बच गयी!

तब से कुमाऊ रेजिमेंट ने महा काली के मंदिर में कार्य किये है! इस रेजिमेंट के कई गेट मंदिर पर बने है और बड़े-२ घंटिया भी लगी है !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Gangolihat

Gangolihat is a small Himalayan hill town in the Pithoragarh district of Uttarakhand, India. It is tehsil and sub divisional headquarter of the district. Gangolihat is famous for its Shakti Peethas of Hat Kalika of goddess Kali. Hat Kalika website Nearby at 'Patal Bhubneshwar', underground caves are major tourist attraction. Also nearby are the tiny hill stations of Chaukori and Berinag.From Gangolihat Panchchuli peaks and Nanda Devi are clearly visible.



Geography
Gangolihat is located at . Falling Rain Genomics, Inc - Gangolihat It has an average elevation of 1,760 metres (5,773 feet). It is 78 km from Pithoragarh.

Gangolihat is native of Pant Brahmins


Places of interest
Gangolihaat is famous for its ancient temples and underground caves. 'Haat Kalika', 'Ambika Dewaal', 'Chamunda Mandir', 'Vaishnavi Mandir' are some of the famous temples here. 'Vaishnavi Mandir' is a special one because from here one can clearly view the Himalayas. This temple is situated on a mountain that is called 'Shail Parvat', which is notable in Hindu holy books.

There are many beautiful underground caves in Gangolihaat. 'Patal Bhuvneshwar', 'Shailashwer Gufa' and 'Mukteshwar Gufa' are most notable ones. A new underground cave has been also found recently and that is called 'Bholeshwar Gufa'.

'Haat Kalika Mandir' was chosen by Sankaracharya for installation of Mahakali Shaktipeeth. It is believed that the Original Goddes Kalika Mata, which supposed to be in West Bangal , shifted her place form Bangal to Gangolihat. This Temple is very famous all over the India , specially among Indian Army Forces. Posthumous Param Veer Chakra award winner Capt. Bikram Batra was a great devotee of Goddess and had created an Army Rest House near the Temple for Army Personnel , who come Gangoihat to get the blessing of Goddess , when they are at borders and fighting against the enemy .
(Souce - http://gangolihat.co.tv/_

विनोद सिंह गढ़िया

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मुझे भी गंगोलीहाट में कालिका माँ के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। जब मुझे यह सौभाग्य प्राप्त हुआ, मैं उस समय 5वीं कक्षा का छात्र था। हमारे विद्यालय द्वारा हमें यहाँ सभी विद्यार्थियों को दर्शन के लिए लाया गया था।

देवदार के झुरमुटों के बीच मन्दिर विराजित है।जोकि अति शोभायमान है। माँ की शक्ति ही भक्तों को यहाँ खींच लाती है। भक्तों की मान्यता है कि जो माँ से सच्चे दिल से याचना करता है माँ  उसकी मनोकामना पूर्ण करती है। जैसा कि श्री मेहता जी ने अपने लेख में माँ की महिमा का वर्णन करते हुए लिखा है कि एक बार कुमांऊ रेजिमेंट की एक टुकड़ी समुद्री जहाज में यात्रा कर रही थी, तकनीकी खराबी के कारण जहाज समुद्र में डूबने लगा। तभी गंगोलीहाट निवासी एक सैनिक ने अपनी ईष्ट देवी माँ काली से प्रार्थना की, उसकी प्रार्थना माँ काली ने सुनी और उनकी जान बचाई।  यह सत्य है, आज भी यहाँ सैनिकों द्वारा माँ को याद किया जाता है और माँ भी उनकी
रक्षा के लिए हमेशा तत्पर है।

जय माँ कालिका 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Gangolihaat Temple Photo.



विनोद सिंह गढ़िया

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पूरे कुमाऊं में हाट कालिका के नाम से विख्यात गंगोलीहाट के महाकाली मंदिर की कहानी भी उसकी ख्याति के अनुरूप है। पांच हजार साल पूर्व लिखे गए स्कंद पुराण के मानसखंड में दारुकावन (गंगोलीहाट) स्थित देवी का विस्तार से वर्णन है। छठी सदी के अंत में भगवान शिव का अवतार माने जाने वाले जगत गुरु शंकराचार्य  महाराज नेकूर्मांचल (कुमाऊं) भ्रमण के दौरान हाट कालिका की पुनर्स्थापना की थी।

कहा जाता है कि छठी सदी में गंगोली (गंगोलीहाट का प्राचीन नाम) क्षेत्र में असुरों का आतंक था। तब मां महाकाली ने रौद्र रूप धारण कर आसुरी शक्तियों का विनाश किया लेकिन माता का गुस्सा शांत नहीं हुआ। क्षेत्र में हाहाकार मच गया। इलाका जनविहीन होने लगा। इसी दौर में कूर्मांचल के भ्रमण पर निकले आदि गुरु शंकराचार्य महाराज ने जागेश्वर धाम पहुंचने पर गंगोली में किसी देवी का प्रकोप होने की बात सुनी। शंकराचार्य के मन में विचार आया कि देवी इस तरह का तांडव नहीं मचा सकती। यह किसी आसुरी शक्ति का काम है। लोगों को राहत दिलाने के उद्देश्य से वह गंगोलीहाट को रवाना हो गए।बताया जाता है कि जगतगुरु जब मंदिर के 20 मीटर पास में पहुंचे तो वह जड़वत हो गए। लाख चाहने के बाद भी उनके कदम आगे नहीं बढ़ पाए। शंकराचार्य को देवी शक्ति का आभास हो गया। वह देवी से क्षमा याचना करते हुए पुरातन मंदिर तक पहुंचे। पूजा, अर्चना के बाद मंत्र शक्ति के बल पर महाकाली के रौद्र रूप को शांत कर शक्ति के रूप में कीलित कर दिया और गंगोली क्षेत्र में सुख, शांति व्याप्त हो गई। मंदिर के पुजारी रिटायर्ड शिक्षाधिकारी किशन सिंह रावल बुजुर्गों से सुनी बातें बताते हुए कहते हैं कि आदि गुरु शंकराचार्य ने क्षेत्र में चामुंडा, वैष्णवी, अंबिका, छिन्नमस्ता, शीतला, त्रिपुरासुंदरी, कोकिला (कोटगाड़ी), भुवनेश्वरी नाम से शक्ति स्थलों की स्थापना की। इन सभी मंदिरों की क्षेत्र में ही नहीं दूर-दूर तक ख्याति है। नवरात्रियों में पूजा के लिए देशभर से भक्तजन पहुंचते हैं।


मोहन जोशी

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मुझे गर्व है की मैं पतित पावनी धरा गंगावाली छेत्र का रहने वाला हु मैंने पूर्व जनम मैं जरुर कोइ आचे काम किये होगे जो मुझे मेरा जनम स्थान मतोली खिर्मंडे गंगोलिहत मिला जब भी घर जाता हूँ माँ के दर्शनों का आनद जरुर लेता हु

बहुत बहुत धन्यवाद मेरी माँ कलिका

 

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