Author Topic: Tourism and Hospitality Industry Development & Marketing in Kumaon & Garhwal (  (Read 26706 times)

Bhishma Kukreti

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पक्षी निहारण  पर्यटन हेतु भूगर्भ, वनस्पति  व जीव वैज्ञानिक  अन्वेषण  आवश्यकता

पक्षी निहारण पर्यटन विकास हेतु आधारभूत संरचनायें /सुविधायें -2

Infrastructure for Bird Watching Tourism Development -2

उत्तराखंड पक्षी निहारण पर्यटन -8

Bird Watching Tourism/ Avitourism   in Uttarakhand -8

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 345

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -345

 

आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

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 पक्षी निहारक पर्यटन विकास हेतु कई प्रकार के साहित्य की आवश्यकता पड़ती है।  पक्षी निहारक जानकार पर्यटक ही नहीं होते वे विशेष प्रकार के पर्यटक होते हैं उन्हें  पर्यटक  स्थल विजिट से पहले ही कई जानकारियों की आवश्यकता पड़ती है।

  समर्पित व उत्साही पक्षी निहारक की सबसे पहली आवश्यकता होती है भूभाग व भूगोल जानकारी।  यह जानकारी जिओलॉजिस्टों द्वारा की गयी रिसर्च पर ही आधारित होती हैं अतः बर्डिंग टूरिज्म विकास हेतु भूगर्भ शास्त्रियों को विशेष भूभाग पर रिसर्च करना , रिसर्च को जॉर्नल में प्रकाशित करवाना व उन रिशर्चेज को आम जन भाषा में विपणन हेतु प्रकाशित करना भी आवश्यक  है।

   पक्षी निहारक पक्षी निहारण हेतु आते हैं अतः क्षेत्र में मिलने वाली सभी पक्षियों के बारे में वैज्ञानिक अन्वेषण आवश्यक होते हैं जिसमे पक्षियों के रहन सहन , खान पान , प्रवास , घोसले , न्र मादा पहचान , घोसले बनाने का समय , अंडे देने का से व चूजे निकलने व व्यस्क होने आदि का जीव वैज्ञानिक अन्वेषण आवश्यक हैं।  विश्वविद्यालय ही इस प्रकार के अन्वेषण में सहयोग दे सकते हैं।

क्षेत्र में वनस्पति अन्वेषण भी उतना ही आवश्यक है जितना भूगर्भीय व जीव वैज्ञानिक अन्वेषण क्योंकि तीनो एक दूसरे से पक्षियों हेतु जुड़े हैं। 

   वैज्ञानिक अन्वेषण साहित्य को आधार बनाकर पर्यटन विपणन लायक साहित्य बनाना भी आवश्यक है। 



Copyright@ Bhishma Kukreti, 2018, bjkukreti@gmail.com

 

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Need of various scientific Researches for Bird  Watching Tourism development in Garhwal , Uttarakhand ; Need of various scientific Researches for Bird  Watching Tourism development in Chamoli Garhwal , Uttarakhand;  Need of various scientific Researches for Bird  Watching Tourism development in  Rudraprayag Garhwal , Uttarakhand; Need of various scientific Researches for Bird  Watching Tourism development in   Pauri Garhwal , Uttarakhand; Need of various scientific Researches for Bird  Watching Tourism development in   Tehri Garhwal , Uttarakhand; Need of various scientific Researches for Bird  Watching Tourism development in  Uttarkashi  Garhwal , Uttarakhand; Need of various scientific Researches for Bird  Watching Tourism development in   Dehradun Garhwal , Uttarakhand; Need of various scientific Researches for Bird  Watching Tourism development in    Haridwar Garhwal , Uttarakhand; Need of various scientific Researches for Bird  Watching Tourism development in  Pithoragarh  Kumaon , Uttarakhand; Need of various scientific Researches for Bird  Watching Tourism development in Champawat    Kumaon , Uttarakhand; Need of various scientific Researches for Bird  Watching Tourism development in   Almora Kumaon , Uttarakhand; Need of various scientific Researches for Bird  Watching Tourism development in Nainital   Kumaon , Uttarakhand; Need of various scientific Researches for Bird  Watching Tourism development in  Udham Singh Nagar  Kumaon , Uttarakhand;

पौड़ी गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु कई वैज्ञानिक अन्वेषणों की आवश्यकता ; उधम सिंह नगर कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु कई वैज्ञानिक अन्वेषणों की आवश्यकता ;  चमोली गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु कई वैज्ञानिक अन्वेषणों की आवश्यकता  ; नैनीताल कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु कई वैज्ञानिक अन्वेषणों की आवश्यकता ;  रुद्रप्रयाग गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु कई वैज्ञानिक अन्वेषणों की आवश्यकता ; अल्मोड़ा कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु कई वैज्ञानिक अन्वेषणों की आवश्यकता  ; टिहरी   गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु कई वैज्ञानिक अन्वेषणों की आवश्यकता ; चम्पावत कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु कई वैज्ञानिक अन्वेषणों की आवश्यकता ;  उत्तरकाशी गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु कई वैज्ञानिक अन्वेषणों की आवश्यकता ; पिथौरागढ़ कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास;  देहरादून गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु कई वैज्ञानिक अन्वेषणों की आवश्यकता ; रानीखेत कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास; हरिद्वार  गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु कई वैज्ञानिक अन्वेषणों की आवश्यकता ; डीडीहाट  कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु कई वैज्ञानिक अन्वेषणों की आवश्यकता ;   नैनीताल  कुमाऊं पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु कई वैज्ञानिक अन्वेषणों की आवश्यकता :

 

Bhishma Kukreti

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पक्षी निहारण पर्यटन विकास हेतु राज्य सरकार के उत्तरदायित्व 



Government Role in Avitourism Development


पक्षी निहारण पर्यटन विकास हेतु आधारभूत संरचनायें /सुविधायें -3

Infrastructure for Bird Watching Tourism Development -3

उत्तराखंड पक्षी निहारण पर्यटन -9

Bird Watching Tourism/ Avitourism   in Uttarakhand -9

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 346

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -346

 

आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

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पर्यटन विकास में मुझे आरएसएस सुप्रीमो मोहन भागवत का कहना सही लगता है कि सरकार सब कुछ नहीं कर सकती किन्तु समाज सब कुछ कर सकता है।  पर्यटन विकास में समाज की भागीदारी सर्वोपरि होती है।  पक्षी निहारण अथवा बर्डवाचिंग टूरिज्म में समाज की भागीदारी अत्त्यावष्यक है किन्तु कुछ आयामों में  राज्य व केंद्रीय सरकार का उत्तरदायित्व ाहिक है।

प्रथम - एक बीस वर्षीय योजना निर्मित करना

अन्य -

 १- समाज को प्रेरित करना - राज्य सरकार का सर्वपर्थम कार्य है समाज को प्रेरित करना कि समाज  एवीटूरिज्म हेतु तैयार हो जाय और बर्ड वाचिंग टूरिज्म हेतु व्यवसाय में शामिल हो सके।

२- जनता तक प्रकृति व पर्यावरण नियमों की जानकारी व नियमों का पालन  .

 ३- बर्ड वाचिंग टूरिज्म हेतु सुविधा जुटाने हेतु व्यवसायियों को तैयार करना

४ - मूल बहुत सुविधाओं का जुटाना जैसे परिहवन , संचार , मचान , साहित्य व अन्वेषण

५- यदि आवश्यक हो तो सब्सिडी प्रावधान 

६- पुस्तकालयों व म्यूजियम निर्माण

७-इकोनॉमिक फ्रेम वर्क बनाना व उसे क्रियावनित  करना

८- प्रचार प्रसार

९- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जन सम्पर्क

१०- समय समय पर बर्डिंग फेस्टिवल्स व कॉन्फरेंसेज का आयोजन

११ - राष्ट्रीय व  अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बर्ड वाचेर्स संगठनों के  साथ तालमेल

१२- ब्र्डिंग टूरिज्म को केंरित कर विभागीय कार्य कलाप

१३- वन विभाग की भागीदारी बढ़ाना

१४- विभिन्न कार्यों हेतु प्रशिक्ष्ण का प्रबंध

१५- विश्वविद्यालयों व संस्थानों के साथ अन्वेषण हेतु समन्वय नीति

१६- निवेश हेतु कार्य /प्रेरक कार्य

१७- सुरक्षा व्यवस्था



        अतिमहत्वपूर्ण

१८  - सरकार बदलने पर कार्य  क्रम नही  टूटना अपितु प्लान व कार्य चलने चाहिए जो कि उत्तराखंड में एक बड़ी समस्या है एक दल की सरकार योजना बनाती है कार्य शुरू करती है और दूसरे दल की सरकार बनने पर योजनाये बंद कर दी जाती हैं।  कौंग्रेस व भाजपा दोनों राजनैतिक दल के नेताओं को समझना चाहिए कि योजनायें किसी दल हेतु नही बनती अपितु जनता हेतु बनती हैं।  नारायण दत्त तिवारी के समय बनी योजनायें भाजपा सरकार के वक्त बंद ही कर दीं गयीं थी। ..







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Uttarakhand  Government Role in Bird  Watching Tourism development in Garhwal , Uttarakhand ; Uttarakhand  Government Role in Bird  Watching Tourism development in Chamoli Garhwal , Uttarakhand;  Uttarakhand  Government Role in Bird  Watching Tourism development in  Rudraprayag Garhwal , Uttarakhand; Uttarakhand  Government Role in Bird  Watching Tourism development in   Pauri Garhwal , Uttarakhand; Uttarakhand  Government Role in Bird  Watching Tourism development in   Tehri Garhwal , Uttarakhand; Uttarakhand  Government Role in Bird  Watching Tourism development in  Uttarkashi  Garhwal , Uttarakhand; Uttarakhand  Government Role in Bird  Watching Tourism development in   Dehradun Garhwal , Uttarakhand; Uttarakhand  Government Role in Bird  Watching Tourism development in    Haridwar Garhwal , Uttarakhand; Uttarakhand  Government Role in Bird  Watching Tourism development in  Pithoragarh  Kumaon , Uttarakhand; Uttarakhand  Government Role in Bird  Watching Tourism development in Champawat    Kumaon , Uttarakhand; Uttarakhand  Government Role in Bird  Watching Tourism development in   Almora Kumaon , Uttarakhand; Uttarakhand  Government Role in Bird  Watching Tourism development in Nainital   Kumaon , Uttarakhand; Uttarakhand  Government Role in Bird  Watching Tourism development in  Udham Singh Nagar  Kumaon , Uttarakhand;

पौड़ी गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु  राज्य सरकार का योगदान आवश्यक ; उधम सिंह नगर कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु  राज्य सरकार का योगदान आवश्यक ;  चमोली गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु  राज्य सरकार का योगदान आवश्यक  ; नैनीताल कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु  राज्य सरकार का योगदान आवश्यक ;  रुद्रप्रयाग गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु  राज्य सरकार का योगदान आवश्यक ; अल्मोड़ा कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु  राज्य सरकार का योगदान आवश्यक  ; टिहरी   गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु  राज्य सरकार का योगदान आवश्यक ; चम्पावत कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु  राज्य सरकार का योगदान आवश्यक ;  उत्तरकाशी गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु  राज्य सरकार का योगदान आवश्यक ; पिथौरागढ़ कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास;  देहरादून गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु  राज्य सरकार का योगदान आवश्यक ; रानीखेत कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास; हरिद्वार  गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु  राज्य सरकार का योगदान आवश्यक ; डीडीहाट  कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु  राज्य सरकार का योगदान आवश्यक ;   नैनीताल  कुमाऊं पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु  राज्य सरकार का योगदान आवश्यक :


 

Bhishma Kukreti

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लैंसडाउन क्षेत्र में बर्ड वाचिंग टूरिज्म विकास हेतु  -डा कुकरेती , डा गौड़ , दिनेश कंडवाल , डा रावत जैसे विशेषज्ञों  की भूमिका !



Role of Local Scientists in developing Lansdowne Region for Avirourism 



पक्षी निहारण पर्यटन विकास हेतु आधारभूत संरचनायें /सुविधायें -4

Infrastructure for Bird Watching Tourism Development -4

उत्तराखंड पक्षी निहारण पर्यटन -10

Bird Watching Tourism/ Avitourism   in Uttarakhand -10

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 347

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -347

 

आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

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विशेष पर्यटन के कारण बर्ड वाचिंग टूरिज्म हेतु पर्यटक सुविधा हेतु साहित्य की अति आवश्यकता होती है।  जिसे पैंप्लेट्स या ब्रॉउचर भी कहा जाता है जिसमे  निम्न सूचना आवश्यक है -

सूक्ष्म भूगोल की जानकारी

पक्षियों की जानकारी

वनस्पतियों की जानकारी 

अन्य भौगोलिक व वन संबंधी नियमों की जानकारी

 उपरोक्त सभी जानकारियों हेतु विशेष विशेषज्ञों की आवश्यकता पड़ती है यथा -

       डा मोहन कुकरेती (ढांगळ उदयपुर ) द्वारा पक्षियों पर  शोध जानकारी



डा मोहन कुकरेती जंतु शास्त्री हैं और इन्होने लैंसडाउन क्षेत्र में पक्षियों पर गहन अध्ययन किया है।  डा मोहन कुकरेती व श अन्वेषक दिनेश भट्ट सुबह 5 बजे से सांय 6 बजे तक पक्षियों की जानकारी जुटाते रहे व क्षेत्र लगभग 216  पक्षी प्रजातियों की जानकारी हासिल की।  डा मोहन कुकरेती व दिनेश भट्ट ने अपने अन्वेषण विज्ञान जॉर्नल में भी प्रकाशित की हैं।



       डा रामेश्वर दत्त गौड़ (सौर उदयपुर पट्टी ) का वनस्पतियोन  पर शोध जानकारी

डा रामेश्वर गौड़ गढ़वाल वनस्पति के बेंथम हुकर  माने जाते हैं।  डा गौड़ की फ्लोरा ऑफ गढ़वाल  पोस्ट गढ़वाल हेतु संदर्भ पुस्तक है।  डा गौड़ सरीखे वनस्पति शास्त्रियों की लैंसडाउन क्षेत्र के जंगलों में पेड़ पौधों ही नहीं उनके घनत्व की जानकारी देने की आवश्यकता है। 

           दिनेश कंडवाल (किमसार ,  उदयपुर ) पक्षी प्रेमी व भूगर्भ शास्त्री

दिनेश कंडवाल  एक पक्षी प्रेमी , भूगर्भ शास्त्री ही नहीं कुशल फोटोग्राफर भी हैं व पक्षी फोटोग्राफी के जानकार तो हैं ही पत्रिका सम्पादक भी हैं।  पक्षी निहारन में भूमि जानकारी अति आवश्यक है।  दिनेश कंडवाल सरीखे जानकारों की सेवा अति आवश्यक है।  दिनेश कंडवाल वास्तव में समर्पित पक्षी प्रेमी हैं जिनकी इस तरह कार्यों में अति आवश्यकता पड़ती है

        डा धनजय मोहन (वाइल्ड लाइफ वार्डन उत्तराखंड



     बर्ड वाचिंग टूरिज्म में वन विभाग व वाइल्ड लाइफ कंजर्वेसन विभाग की सेवा की भी अति    आवश्यकता होती है।  डा धनजय मोहन, डा रमण  कुमार फोर्कत्याल  ने लैंसडाउन पक्षियों की चेक लिस्ट निर्माण में अहम् भूमिका निभायी है। वाइल्ड लाइफ जानकारी के बड़े जानकार हैं रमण  कुमार।

               इसी तरह चीफ कंजर्वेटर ऑफ़ फारेस्ट उत्तराखंड (2012 ) डा रघुबीर सिंह रावत भी वाइल्ड लाइफ प्रेमी हैं वन संबंधी जानकारियों व प्रबंधन में रावत सरीखे जणघरों की अति आवश्यकता पड़ती है।  आशा है धनंजय मोहन , रमन कुमार व डा रावत लैंसडाउन क्षेत्र को पक्षी निहारण पर्यटन मैप में स्थान दिलाने में भागीदारी निभाएंगे। 



 इस लेखक ने उपरोक्त नाम उदाहरण पेश करने के लिए दिए हैं कि इस तरह के जणगर / विशेष जानकार  लैंसडाउन  बर्ड वाचिंग टूरिज्म  हेतु लाभकारी साहित्य प्रदान कर  सकें। कहा जा सकता है कि पक्षी निहारण विकास हेतु विशेष प्रेमियों की आवश्यकता पड़ती है जैसे कि डा मोहन कुकरेती , दिनेश भट्ट , डा रामेश्वर दत्त गौड़ , दिनेश कंडवाल , डा धनंजय  मोहन , डा रमण कुमार फोर्कत्याल , डा रघुबीर सिंह रावत हैं। 

 हाँ वाइल्ड लाइफ टूरिज्म विकसित करने हेतु व्यवसायिक फोटोग्राफर्स की तो आवश्यकता पड़ती ही है। 




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   Bird watching Tourism development in   Dugadda  Block , Lansdowne Garhwal ; Bird watching Tourism development in  Jaharikhal  Block  , Lansdowne Garhwal ; Bird watching Tourism development in  Dwarikhal  Block  , Lansdowne Garhwal ; Bird watching Tourism development in  Rikhanikhal  Block  , Lansdowne Garhwal ; Bird watching Tourism development in  Yamkeshwar  Block  , Lansdowne Garhwal ;


द्वारीखाल ब्लौक, लैंसडाउन में पक्षी निहारण पर्यटन, बर्ड वाचिंग टूरिज्म हेतु  साहित्य सुविधा ; रिखणीखाल ब्लौक, लैंसडाउन में पक्षी निहारण पर्यटन, बर्ड वाचिंग टूरिज्म हेतु  साहित्य सुविधा ; जहारिखाल  ब्लौक, लैंसडाउन में पक्षी निहारण पर्यटन, बर्ड वाचिंग टूरिज्म हेतु  साहित्य सुविधा ; यमकेश्वर ब्लौक, लैंसडाउन में पक्षी निहारण पर्यटन, बर्ड वाचिंग टूरिज्म हेतु  साहित्य सुविधा ; ढांगू पट्टी , लैंसडाउन में पक्षी निहारण पर्यटन, बर्ड वाचिंग टूरिज्म हेतु  साहित्य सुविधा ; लंगूर पट्टी , लैंसडाउन में पक्षी निहारण पर्यटन, बर्ड वाचिंग टूरिज्म हेतु  साहित्य सुविधा ;उदयपुर  पट्टी , लैंसडाउन में पक्षी निहारण पर्यटन, बर्ड वाचिंग टूरिज्म हेतु  साहित्य सुविधा ; बदलपुर पट्टी , लैंसडाउन में पक्षी निहारण पर्यटन, बर्ड वाचिंग टूरिज्म हेतु  साहित्य सुविधा ; पैनों पट्टी , लैंसडाउन में पक्षी निहारण पर्यटन, बर्ड वाचिंग टूरिज्म हेतु  साहित्य सुविधा ;

Bhishma Kukreti

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पक्षी निहारण पर्यटन हेतु 'उत्तराखंड नेचर हैंडबुक ' महत्वपूर्ण पुस्तक

Role of Uttarakhand Nature Handbook for  Avirourism 



पक्षी निहारण पर्यटन विकास हेतु आधारभूत संरचनायें /सुविधायें -5

Infrastructure for Bird Watching Tourism Development -5

उत्तराखंड पक्षी निहारण पर्यटन -11

Bird Watching Tourism/ Avitourism   in Uttarakhand -11

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 348

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -348

 

आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

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  पिछले अध्यायों में इस लेखक ने कई बार पक्षी निहारकों हेतु साहित्य प्रकाशन का उल्लेख किया कि ऐसा साहित्य प्रकाशित होना चाहिए जो सम्भावी पर्यटकों को पक्षियों की जानकारी दे सके।  वास्तव में पक्षी निहारण पर्यटन एक दिशा पर्यटन नहीं अपितु वन्य प्राणी दर्शन पर्यटन है।  अतः पर्यटकों को पक्षियों के अतिरिक्त अन्य वन्य जीवन की जानकारी भी आवश्यक होती है।  सामन्य भषा में इको टूरिज्म इसी को कहते हैं।

      संजय सोंधी द्वारा सम्पादित व अमित व नेहा वर्मा (पक्षी ) ; अंचल सोंधी )वृक्ष ) ; डा जॉनसन (मछली ) डा पराग धाकटे (स्तनधारी ) ; सत्य प्रिया गौतम (सर्प जाति  ) और संजय सोंधी (तितली , अभयचर प्राणियों ) लिखित  पुस्तक 'उत्तराखंड नेचर हैंडबुक '  वन्य जीवन पर्यटकों हेतु बहुत ही लाभकारी पुस्तक है।  पुस्तक के लेखक अपने अपने खेत्र के विशेषज्ञ हैं। 

पुस्तक में

53 स्तनधारी प्रजातियों

106 पक्षी प्रजातियों

10  मत्स्य प्रजातियों

32 सर्प वर्ग प्रजातियां

12 उभयचर वर्ग प्रजातियां

50 तितली प्रजातियां

20 पतंगे प्रजातियों

का बॉयलोजिकल व पर्यटन उन्मुखी वर्णन है साथ में 25 वृक्ष प्रजातियों का भी वर्णन है।

पुस्तक में उत्तराखंड में आरक्षित क्षत्रों व डू ऐंड  डोंट डू  जानकारी भी पाठक उन्मुखी पृष्ठ हैं।

प्रत्येक प्रजाति की कलर फोटो व उनके रहन सहन , खानपान , प्रवास , प्रजनन , जीवन चक्र , पहचान सभी आवश्यक जानकारी लेखकों ने दी है।

 पुस्तक की भाषा सरल अंग्रेजी है व सामन्य पाठक भी इस भाषा को समझ सकते हैं।

प्रसन्नता की बात है कि लेखक अनावश्यक , गरिष्ट टेक्निकल वर्णन से बचे हैं। 

पुस्तक सभी तरह से पर्यटनोमुखी है और लेखकों , सम्पादक व फोटोग्राफरों को साधुवाद लायक है।

प्रस्तावना उत्तराखंड के मुख्य कंजर्वेटर डा रघुवीर सिंह रावत ने लिखी व उत्तराखंड वन विभाग के  इकोनॉमिक विंग ऑफ ने इस महत्वपूर्ण पुस्तक को प्रकाशित करवाया है या पहल की है

आशा है भविष्य में इसी प्रकार पक्षी पर्यटन पर अन्य विशेष पुस्तकें भी प्रकाश में आएँगी



उत्तराखंड नेचर हैंडबुक

(उत्तराखंड वन विभाग की पहल )

सम्पादन - संजय सोंधी ( तितली ट्रस्ट )

पृष्ठ 261

प्रकाशन  वर्ष - 2012

वन्य प्राणियों व पेड़ों के फोटो सहित

प्रकाशक

बिशन  सिंह महेन्द्रपाल सिंह

23 A न्यू कनाट प्लेस देहरादून





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Importance of Uttarakhand Nature Handbook for Bird  Watching Tourism development in Garhwal , Importance of Uttarakhand ; Importance of Uttarakhand Nature Handbook for Bird  Watching Tourism development in Chamoli Garhwal , Uttarakhand;  Importance of Uttarakhand Nature Handbook for Bird  Watching Tourism development in  Rudraprayag Garhwal , Uttarakhand; Importance of Uttarakhand Nature Handbook for Bird  Watching Tourism development in   Pauri Garhwal , Uttarakhand; Importance of Uttarakhand Nature Handbook for Bird  Watching Tourism development in   Tehri Garhwal , Uttarakhand; Importance of Uttarakhand Nature Handbook for Bird  Watching Tourism development in  Uttarkashi  Garhwal , Uttarakhand; Importance of Uttarakhand Nature Handbook for Bird  Watching Tourism development in   Dehradun Garhwal , Uttarakhand; Importance of Uttarakhand Nature Handbook for Bird  Watching Tourism development in    Haridwar Garhwal , Uttarakhand; Importance of Uttarakhand Nature Handbook for Bird  Watching Tourism development in  Pithoragarh  Kumaon , Uttarakhand; Importance of Uttarakhand Nature Handbook for Bird  Watching Tourism development in Champawat    Kumaon , Uttarakhand; Importance of Uttarakhand Nature Handbook for Bird  Watching Tourism development in   Almora Kumaon , Uttarakhand; Importance of Uttarakhand Nature Handbook for Bird  Watching Tourism development in Nainital   Kumaon , Uttarakhand; Importance of Uttarakhand Nature Handbook for Bird  Watching Tourism development in  Udham Singh Nagar  Kumaon , Uttarakhand;


पौड़ी गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु उत्तराखंड नेचर हैन्डबुक पुस्तक का महत्व ; उधम सिंह नगर कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु उत्तराखंड नेचर हैन्डबुक पुस्तक का महत्व ;  चमोली गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु उत्तराखंड नेचर हैन्डबुक पुस्तक का महत्व  ; नैनीताल कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु उत्तराखंड नेचर हैन्डबुक पुस्तक का महत्व ;  रुद्रप्रयाग गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु उत्तराखंड नेचर हैन्डबुक पुस्तक का महत्व ; अल्मोड़ा कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु उत्तराखंड नेचर हैन्डबुक पुस्तक का महत्व  ; टिहरी   गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु उत्तराखंड नेचर हैन्डबुक पुस्तक का महत्व ; चम्पावत कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु उत्तराखंड नेचर हैन्डबुक पुस्तक का महत्व ;  उत्तरकाशी गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु उत्तराखंड नेचर हैन्डबुक पुस्तक का महत्व ; पिथौरागढ़ कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास;  देहरादून गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु उत्तराखंड नेचर हैन्डबुक पुस्तक का महत्व ; रानीखेत कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास; हरिद्वार  गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु उत्तराखंड नेचर हैन्डबुक पुस्तक का महत्व ; डीडीहाट  कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु उत्तराखंड नेचर हैन्डबुक पुस्तक का महत्व ;   नैनीताल  कुमाऊं पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु उत्तराखंड नेचर हैन्डबुक पुस्तक का महत्व :

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क्षी निहारण हेतु  प्रोत्साहित करने वाले घटकों की भूमिका   


Motivational Factors fo Bird Watching Tourism
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उत्तराखंड पक्षी निहारण पर्यटन -12

Bird Watching Tourism/ Avitourism   in Uttarakhand -12

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 349

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -349

 

आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

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  पक्षी निहारण पर्यटन विकास हेतु इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की आवश्यकता होती है उसके लिए यह जानना आवश्यक होता है पक्षी निहारण के मोटिवेशनल फैक्टर्स क्या क्या हैं -

पक्षी निहारण हेतु निहारकों को निम्न कारक प्रोत्साहित करते हैं -

    भावनात्मक कारण या घटक

१-  दृश्य व पक्षियों की आवाज सुनना आनंद

२-पक्षी संरक्षण में योगदान

३- बाहर  घूमने के आनंद व वन्यव जीवन व प्राकृतिक छटा आनंद

४-चुनौतियों व अनजानी आयामों से  से आनंद उठाना

५- दिनचर्या से दूर रहना



      बौद्धिक घटक



६- पक्षों की नई प्रजातियां देखना

७- जीवन में नए पक्षियों को जोड़ना

८- पक्षी व्यवहार व प्रवास का अध्ययन

९- पक्षिओं के प्राकृतक वास , रहन सहन का अध्ययन

१०- पक्षी पहचान स्किल में वृद्धि

११- अधिक से अधिक पक्षियों को देखना

१२- अधिक से अधिक नए पक्षी देखना

१३- अपने ज्ञान को दूसरों में बांटना

  सामाजिक घटक या कारण

१४-अन्य पक्षी निहारकों से प्रतियोगिता

१५-मित्रों के साथ

१६- अपने जैसे अन्यों से मिलना , मित्रता करना

१७- परिवार के साथ आनंद लेना



  आध्यात्मिक घटक



१८- पक्षियों से शान्ति अनुभव

१९-प्रकृति से जुड़ने का अनुभव

२० आत्मा से प्रकृति द्वारा मिलन या अनुभूति

२१- कुछ समय बिलकुल अकेला होना

२२- जिंदगी की अनावश्यक मांगों से दूर होना



फोटोग्राफी

२३-पक्षियों के फोटो लेना

२४- पक्षियों के  असामन्य /अनोखे फोटो या वीडियो लेना

२५-प्रकृति व वन्य जीवन फोटो

२६-पक्षी फोटोग्राफी में विशेषग्यता प्राप्तिकरण



भौतिक अभ्यास

२७- पक्षी निहारन के शारीरिक अभ्यास

२८- ताजी  हवा , पानी जंगल अनुभव

२९-  वन में चलना



 प्रेरक कारक

 

३०- नए स्थल दर्शन

३१-ऐतिहासिक स्थल दर्शन

३२- वन्य जीवन के अतरिक्त अन्य स्थल यात्रा

३३-पक्षी निहारन अतिरिक्त अन्य स्थल भ्रमण

३४-असाम्य प्राकृतिक स्थल दर्शन



संदर्भ व कॉपी राइट

ऐन कोनराडी , सी वी जाईल , इ स्ट्राशीम , २०१३ , व्हट इन्स्पायर ब्रदर्स टु माइग्रेट साउथ टुवर्ड्स अफ्रिका ? अ क्वांटिटेटिव मेजर्स ऑफ इंटरनेशनल एवीटूरिस्ट  मोटिवेशन , सॉउथर्न अफ्रीकन बिजिनेस रिव्यू जिल्द १७ , पृष्ठ १२७ --१६७ , से साभार (बिना इजाजत )

 





Motivational factors for Bird Watching , Bird Watching Tourism development in Garhwal , Uttarakhand ; Motivational factors for Bird Watching , Bird Watching Tourism development in Chamoli Garhwal , Uttarakhand;  Motivational factors for Bird Watching , Bird Watching Tourism development in  Rudraprayag Garhwal , Uttarakhand; Motivational factors for Bird Watching , Bird Watching Tourism development in   Pauri Garhwal , Uttarakhand; Motivational factors for Bird Watching , Bird Watching Tourism development in   Tehri Garhwal , Uttarakhand; Motivational factors for Bird Watching , Bird Watching Tourism development in  Uttarkashi  Garhwal , Uttarakhand; Motivational factors for Bird Watching , Bird Watching Tourism development in   Dehradun Garhwal , Uttarakhand; Motivational factors for Bird Watching , Bird Watching Tourism development in    Haridwar Garhwal , Uttarakhand; Motivational factors for Bird Watching , Bird Watching Tourism development in  Pithoragarh  Kumaon , Uttarakhand; Motivational factors for Bird Watching , Bird Watching Tourism development in Champawat    Kumaon , Uttarakhand; Motivational factors for Bird Watching , Bird Watching Tourism development in   Almora Kumaon , Uttarakhand; Motivational factors for Bird Watching , Bird Watching Tourism development in Nainital   Kumaon , Uttarakhand; Motivational factors for Bird Watching , Bird Watching Tourism development in  Udham Singh Nagar  Kumaon , Uttarakhand;

पौड़ी गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास में पक्षी निहारण कारणो की भूमिका ; उधम सिंह नगर कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास में पक्षी निहारण कारणो की भूमिका ;  चमोली गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास में पक्षी निहारण कारणो की भूमिका  ; नैनीताल कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास में पक्षी निहारण कारणो की भूमिका ;  रुद्रप्रयाग गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास में पक्षी निहारण कारणो की भूमिका ; अल्मोड़ा कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास में पक्षी निहारण कारणो की भूमिका  ; टिहरी   गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास में पक्षी निहारण कारणो की भूमिका ; चम्पावत कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास में पक्षी निहारण कारणो की भूमिका ;  उत्तरकाशी गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास में पक्षी निहारण कारणो की भूमिका ; पिथौरागढ़ कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास;  देहरादून गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास में पक्षी निहारण कारणो की भूमिका ; रानीखेत कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास; हरिद्वार  गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास में पक्षी निहारण कारणो की भूमिका ; डीडीहाट  कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास में पक्षी निहारण कारणो की भूमिका ;   नैनीताल  कुमाऊं पक्षी निहारण टूरिज्म विकास में पक्षी निहारण कारणो की भूमिका :


 

Bhishma Kukreti

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उत्तराखंड हेतु  औषधि  पादप व आयुर्वेद औषधि निर्यात की अपार संभावनायें 



Huge Potential for Herbs and Herbal Medicine Export from Uttarakhand

 

Health Services Export Strategies -46

चिकित्सा सेवा निर्यात रणनीति - 46

उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन  रणनीति - 229

Medical Tourism development Strategies -229

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 350

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -350 

 

आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

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 विश्व भर में जागरूकता आयी है कि   पादप औषधियां याने हर्बल मेडिसिन्स रोग को जड़ से उखाड़ने के सिद्धांत  चलती हैं व अन्य दुष्परिणाम भी नहीं होते हैं। 

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक विश्वसनीय एजेंसी अनुसार सं 2014  में आयुर्वेद पादप औषदि बाजार  US $ 63 बिलियन्स  का था जो सन  2024 तक US $ 117 बिलियन्स  तक पनच जाएगा जिसका सीधा अर्थ है आम जन आयुर्वेद या पादप औषधि प्रयोग अधिक करेंगे। पादप औषधि बाज़ार सन 2050 तक US $ 5  ट्रिलियन्स तक पंहुच जाएगा।  याने आयुर्वेद औषधि बाज़ार दिन प्रति दिन बढ़ता ही जायेगा।

  उत्तराखंड से ौसढ़ पादप व आयुर्वेद औषधियों निर्यात की आपा संभावनाएं हैं।  निम्न स्तर पर पादपों व आयुर्वेद औषधियों का निर्यात होता है -

  औषधि निर्माण हेतु पादप अवयव (कच्चा माल )

      जड़

पत्तियां

फूल

डंठल

बीज

 सुक्सा या आधा निर्मित माल

तथापि निम्न फॉर्म में भी निर्यात होते हैं

तेल

लॉसन

द्रव

चूर्ण

  पूर्ण ओषधि

  मुख्य बाज़ार

जर्मनी

फ़्रांस

ब्रिटेन

स्विटजर लैंड

जापान

अमेरिका

अफ्रीकी देश जैसे केनिया

     ऑर्गेनिक पादप औषधियों की मांग अधिक बढ़ रही है

उत्तराखंड को पादप औषधि या आयुर्वेद निर्यात में अग्ल्यार लेना चाहिए









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 चीन भारतीय युवाओं को कुरियर ब्वाय  बना रहा है

औषधि पादप व वनस्पति  औषधि निर्यात हेतु चीन से प्रतियोगिता नीति की आवश्यकता


 Competing with China for Herbal , Medicinal Plants Export


Health Services Export Strategies -47

चिकित्सा सेवा निर्यात रणनीति - 47

उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन  रणनीति - 230

Medical Tourism development Strategies -230

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 351

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -351 

 

आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

-

     जागतिक आयुर्वेद या पादप औषधि व्यापार हेतु सबसे पहले चीन व्यापार नीति को समझना आवश्यक है।  प्राचीन गढ़वाल , कुमाऊं , नेपाल व तिब्बत इतिहास की ओर झांकें तो आज भी कुछ नहीं बदला है।  तिब्बत हिमाचल , गढ़वाल , कुमाऊं व नेपाल से हर समय सीमा रेखा पर झगड़ता रहता था किन्तु व्यवपार कभी बंद नहीं करता था। तिब्बत हेतु सीमा  रेखा उलझाव व व्यापार दो अलहदा विचार थे।  आज चीन भी यही नीति अपनाये है।  आज भारतीय ब्रैंड मालिक कुछ नहीं चीन के  हाइली पेड  कुरियर ब्यॉय का काम कर रहे हैं।  चीन व भारत का व्यापार असंतुलन उच्च स्तर पर पंहुच चूका है। चीन का भारत निर्यात व भारत का चीन को निर्यात में 63 बिलियन US $ का अंतर् है और भारत बार बार चीन के समक्ष यह मुद्दा उठा रहा है किन्तु इतिहास अपने को दुहरा रहा है।  तिबत -गढ़वाल में भी यही होता रहा है।  चीन बहुत से भारतीय उद्यमों /निर्यात जैसे आईटी , मीट , दवाईयों में  रोड़े  नहीं हटा रहा है। हाँ  भारतीय चावल  आयात पर टैक्स बैरियर हटा दिया गया है। 
        यही नहीं बहुत से उद्यमों में चीन अपने संसाधनों के बल पर व टैक्स नीति के बल पर वैश्विक व्यापार में भारत से कहीं आगे जा चुका है।  इसमें दोष चीन का नहीं अपितु भारतीय राज्यों का अधिक है जो चीन के साथ प्रतियोगिता को तब्बजो नहीं देते हैं। 
              चीन -भारत पादप औषधि निर्यात में अंतर

          औषधि पादप व पादप औषधि निर्यात  व्यापार का उदाहरण ही ले लें तो पाएंगे कि चीन व भारत हर्बल मार्किट में शीसरह स्थान पर हैं।  किन्तु व्यापार में चीन व भारत का अनुपात है US $ 5 बिलियन : US $ 240  मिलियन। 
  यही नहीं औषधि पपादपों का लोक औषधि निर्माण (folk medicines  ) में प्रयोग का  भी अंतर् है।  एक अनुमान से -
चीन में  10000 से 11225  वनस्पति प्रजातियों से औषधि प्रयोग होती है
भारत में 7500  वनस्पति प्रजातियों से औषधि प्रयोग होती है   
मेक्सिको में 2237 वनस्पति प्रजातियों से औषधि प्रयोग होती है   
उत्तरी अमेरिका में 2572 वनस्पति प्रजातियों से औषधि प्रयोग होती है
 एक अन्य अंतर भी स्पष्ट है -
    500 -600  पादप   परम्परागत  चीनी  औषधि निर्माण में प्रयोग होते हैं
         1430  पादप   परम्परागत  मंगोली   औषधि निर्माण में प्रयोग होते हैं 
   1106 -3600 पादप   परम्परागत   तिब्बती  औषधि निर्माण में प्रयोग होते हैं   
   1250 -1400 पादप      आयुर्वेद  औषधि निर्माण में प्रयोग होते हैं
        342 पादप   परम्परागत   यूनानी  औषधि निर्माण में प्रयोग होते हैं 
      328  पादप   परम्परागत  सिद्ध  औषधि निर्माण में प्रयोग होते हैं   
      उपरोक्त संख्या विश्लेषण से सिद्ध होता है कि भारत में कई ऐसे पादप है जो लोक औषधियों में प्रयोग होते हैं किन्तु उन पादपों का वैज्ञानिक या औषधीय परीक्षण नहीं हुआ है। 

        प्रत्येक राज्य को चीन से पर्तिस्पर्धा करनी होगी उत्तराखंड को भी

    यह सही है कि चीन से सीधी  टक्क्र कठिन है और विपणन नीति तहत सही भी नहीं है किन्तु पर्तिस्पर्धा तो करनी ही पड़ेगी और प्रत्येक राज्य को  आयुर्वेद , यूनानी , सिद्ध औषधि या पादप निर्यात हेतु चीन से प्रतिष्पर्धा हेतु नीति बनानी ही होगी।
       
    उत्तराखंड को तो आयुर्वेद निर्यात व औषधि पादप निर्यात को सबसे अधिक महत्व देने की आवश्यकता है और इसके लिए चीन की पादप औषधि निर्यात रणनीति का गहन अध्ययन आवश्यक है।  उत्तराखंड सरकार को बांज पड़े खेतों में औषधि पादप उत्पादन को तुरंत कार्य जामा पंहुचना आवश्यक है।  आयुर्वेद निर्माणशालाएँ व् औषधि पादप उत्पादन ही उत्तराखंड के पास सही विकल्प हैं -विकास हेतु। 
 


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पौड़ी गढ़वाल मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु चीन से प्रतियोगिता ; उधम सिंह नगर कुमाऊं  मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु चीन से प्रतियोगिता ;  चमोली गढ़वाल मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु चीन से प्रतियोगिता  ; नैनीताल कुमाऊं  मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु चीन से प्रतियोगिता ;  रुद्रप्रयाग गढ़वाल मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु चीन से प्रतियोगिता ; अल्मोड़ा कुमाऊं  मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु चीन से प्रतियोगिता  ; टिहरी   गढ़वाल मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु चीन से प्रतियोगिता ; चम्पावत कुमाऊं  मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु चीन से प्रतियोगिता ;  उत्तरकाशी गढ़वाल मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु चीन से प्रतियोगिता ; पिथौरागढ़ कुमाऊं  मेडिकल  सेवा निर्यात विकास;  देहरादून गढ़वाल मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु चीन से प्रतियोगिता ; रानीखेत कुमाऊं  मेडिकल  सेवा निर्यात विकास; हरिद्वार  गढ़वाल मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु चीन से प्रतियोगिता ; डीडीहाट  कुमाऊं  मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु चीन से प्रतियोगिता ;   नैनीताल  कुमाऊं मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु चीन से प्रतियोगिता :

Bhishma Kukreti

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अमेरिका में आयुर्वेद विकास इतिहास 

संयुक्त राज्य अमेरिका को आयुर्वेद निर्यात अवसर -१


 Ayurveda Development in the United States of America 

Health Services Export Strategies -48

चिकित्सा सेवा निर्यात रणनीति - 48

उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन  रणनीति - 231

Medical Tourism development Strategies -231

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 352

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -352 

 

आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

-

     भारत  को आयुर्ववेद औषधि या औषध पादप निर्यात पर ध्यान देना ही चाहिए।  आयुक्त राज्य अमेरिका , यूरोप , जापान व अफ़्रीकी देश मुख्य बाजार हैं।

    भारत हेतु संयुक्त राज्य अमेरिका एक महत्वपूर्ण बाज़ार है।  अमेरिका में  पादप निर्मित औषधियों की मांग निरंतर बढ़ रही है भारत को इस जागरण से लाभ उठाना चाहिए। 

 अमेरिकी बजार पर दृष्टिगोचर करने से पहले संयुक्र राज्य अमेरिका में आयुर्वेद विकास इतिहास पर दृष्टि आवश्यक है



                     महर्षि महेश योगी का योगदान



  भारतीय राजनैतिक दल गर्व  कर सकते  है कि इनका अमेरिका में आयुर्वेद के प्रति जागरूकता हेतु कोई योगदान नहीं है।  इन  दलों की अदूरदर्शिता हेतु धन्यवाद।

   अमेरिका में आयुर्वेद के प्रति आकर्षण सहत्तर  के दशक में महर्षि महेश के संस्थान ट्रांसिडेंटल मेडिटेसन के प्रयासों से आयुर्वेद प्रति जागरण शुरू हुआ।  अमेरिका में अस्सी  के दशक में  भी आकर्षण बना रहा और इसका  श्रेय जाता है जब डा वसंत लाड , डा सुनील जोशी व डा बी दी त्रिगुण  अमेरिका पधारे।  अस्सी दशक अंत में डा दीपक चोपड़ा की 'परफेक्ट हेल्थ '  तो प्र पश्चिमी देशों में कृतिक चिकित्सा के प्रति जागरूकता ही नहीं लायी , अपितु कई अमेरिकियों को आयुर्वेद प्रशिक्षण की तरफ  भी आकर्षित किया।  इनमे अमेरिकन वैदिक स्टडीज के डा डेविड फ्राउले व डा राबर्ट सोबोडा BAMS  के  नाम प्रमुख हैं।

 सन 1995 आ फ्राउले के दो शिष्यों ने अमेरिका में आयुर्वेद अध्ययन संस्थान  खोलने में धन दिया  - द कैलिफोर्निया कॉलेज ऑफ आयुर्वेद व न्यू इंग्लैण्ड इंस्टीच्यूट ऑफ आयुर्वेद मेडिसिन्स।

 डा मार्क हालपर्न  ने कैलिफोर्निया संस्थान को आर्थिक मदद की।  कैलिफोर्निया कॉलेज अमेरिका का प्रथम आयुर्वेद संस्थान था जिसे प्रशिक्षण देने हेतु सरकारी इजाजत मिली।  संभवतया भारत से बाहर कैलिफोर्निया कॉलेज ऑफ़ आयुर्वेद पहला आयुर्वेद प्रशिक्षण संस्थान है भारत से बाहर खुला।  कैलिफोर्निया कॉलेज ऑफ आयुर्वेद ने कई दिशाओं में पहल की व आज भी अमेरिका का आयुर्वेद शिक्षण संस्थाओं में अग्रणी संस्थान है।  डा मार्क हालपर्न के रयासों को आयुर्वेद कभी नहीं भूल सकेगा। कॉलेज के ग्रजुएटों ने कई तरह से अमेरिका में आयुर्वेद विकास में योगदान दिया। हालपर्न की सहयोगी कोएलज की 1997 ग्रेजुएट ममता लैंडर मैं के प्रयास भी महत्वपूर्ण हैं। ममता व मार्क ने  कैलिफोर्निया असोसिएसन ऑफ़ आयुर्वेद की स्थापना की।  इसी तरह कॉलेज ग्रेजुएट देवी मुलर नेशनल असोसिएसन ऑफ़ आयुर्वेद मेडिसिन्स की अध्यक्ष बने। 

 डा अब्बास क़ुतुब ने न्यू इंग्लैण्ड आयुर्वेद संस्थान की नींव रखी किन्तु सरकार से कोई औपचारिक इजाजत नहीं ली।  यद्यपि यह संस्थान कुछ वर्षों में बंद हो गया था किन्तु इस संतान ने पूर्वी अमेरिका में आयुर्वेद जागरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।  इस संस्थान के ग्रेजुएटों जिनमे हिलेरी गरीवल्टीज व जिनिवि राइडर का नाम प्रमुख है। 

            आयुर्वेद शिक्षण में   मानक स्थापना

  2004 में नेशनल आयुर्वेद असोसिएसन ने आयुर्वेद शिक्षण हेतु मानक निर्धारित किये जैसे कम से कम 500 घंटे की अनिवार्य पढ़ाई व आयुर्वेद ग्रेजुएट हेतु प्रैक्टिस हेतु मानक।  कैलिफोर्निया कॉलेज ने कई प्रतिमान भी स्थापित किये

 अमेरिका में आयुर्वेद शिक्षण निम्न तरह से चलते हैं -

१- पत्राचार द्वारा प्रशिक्षण

२- पूर्ण कालिक शिक्षण - कैलिफोर्निया आयुर्वेद कॉलेज के अतिरिक्त डा वसंत लाड के नेतृत्व में खुला आयुर्वेद संस्थान पूर्ण कालीन शिक्षण देते हैं।

३- सप्ताहन्त  आयुर्वेद प्रशिक्षण - अमेरिका में इस तरह के दस ट्रेनिंग सेंटर हैं जो 12 सप्ताहंत से 35 सप्ताहंत ट्रेनिंग देते हैं। 

४- लघु कालीन सेमिनार्स - स्व चिकत्सा शिक्षा में ये संस्थान योगदान देते हैं व अमेरिका मे पॉपुलर हो रहे हैं

५- इटर्नशिप प्रोग्रैन - भी चलते हैं

         सरकारी इजाजत

यद्यपि अमेरिका में मेडिकल ट्रेनिंग हेतु सरकारी इजाजत आवश्यक है फिर भी बिना इजाजत ट्रेनिंग दी जा रही हैं

    आयुर्वेद असीसिएसंन्स

अमेरिका में आयुर्वेद असोसिएशन्स कई तरह के प्रोग्रैम्स व सेमीनार संयोजन करते हैं व आयुर्वेद प्रति जागरूकता व आयुर्वेद शिक्षण , प्रशिक्षण हेतु मानक नियमावली बनाते हैं

  अमेरिका में आयुर्वेद प्रैक्टिस हेतु कोई मानक नहीं हैं

  अभी तक अमेरिका में औपचारिक रूप से कोई नियम नहीं बने हैं तो बाह्य देश से आयुर्वेद चिकित्स्क डा उपाधि नहीं प्रयोग क्र सकता व प्रैक्टिस में भी कई रुकावटें हैं

  भारत की भूमिका

   जिस तरह से भारत में योग व आयुर्वेद बिना किसी सरकारी सहयोग के ज़िंदा रहा उसी तरह अमेरिका में बिना भारत सरकार के सहयोग के आयुर्वेद प्रसारित हुआ या हूँ रहा है।  आयुर्वेद को सरकारी स्तर पर औपचारिक पहचान हेतु भारत को पहल करनी चाहिए। 



      (कैलिफोर्निया कॉलेज ऑफ आयुर्वेद के वाउचर से साभार )   





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Ayurveda Medicines  Export Opportunities to  USA, Medical Services  Export  development in Garhwal , Uttarakhand ; Ayurveda Medicines  Export Opportunities to  USA, Medical Services  Export  development in Chamoli Garhwal , Uttarakhand;  Ayurveda Medicines  Export Opportunities to  USA, Medical Services  Export  development in  Rudraprayag Garhwal , Uttarakhand; Ayurveda Medicines  Export Opportunities to  USA, Medical Services  Export  development in   Pauri Garhwal , Uttarakhand; Ayurveda Medicines  Export Opportunities to  USA, Medical Services  Export  development in   Tehri Garhwal , Uttarakhand; Ayurveda Medicines  Export Opportunities to  USA, Medical Services  Export  development in  Uttarkashi  Garhwal , Uttarakhand; Ayurveda Medicines  Export Opportunities to  USA, Medical Services  Export  development in   Dehradun Garhwal , Uttarakhand; Ayurveda Medicines  Export Opportunities to  USA, Medical Services  Export  development in    Haridwar Garhwal , Uttarakhand; Ayurveda Medicines  Export Opportunities to  USA, Medical Services  Export  development in  Pithoragarh  Kumaon , Uttarakhand; Ayurveda Medicines  Export Opportunities to  USA, Medical Services  Export  development in Champawat    Kumaon , Uttarakhand; Ayurveda Medicines  Export Opportunities to  USA, Medical Services  Export  development in   Almora Kumaon , Uttarakhand; Ayurveda Medicines  Export Opportunities to  USA, Medical Services  Export  development in Nainital   Kumaon , Uttarakhand; Ayurveda Medicines  Export Opportunities to  USA, Medical Services  Export  development in  Udham Singh Nagar  Kumaon , Uttarakhand;


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Bhishma Kukreti

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आयुर्वेद औषधि निर्माताओं को औषध पादप आपूर्ति समस्याएं

Ayurveda Drugs Manufacturers facing Herbs Cultivation Problems
 
चिकित्सा सेवा निर्यात रणनीति - 49

उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन  रणनीति - 232

Medical Tourism development Strategies -232

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 353

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -353   

 

आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

-

  इसमें संदेह नही किआयुर्वेद औषधियों की मांग बढ़ रही है और निर्यात संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।  यह एक सत्य तथ्य है कि आयुर्वेद औषधि निर्माता निम्न समस्याओं से जूझ रहे हैं -

      १- कच्चे माल की समस्या -

अधिकतर लघु , मध्यम व बड़े स्तर के औषधि निर्माता सभी औषधि पादप विशेषत" बन औषधि पादप की समस्या से जूझ रहे हैं।  मनरेगा व अन्य उविधाओं से वन औषधि पादप एकत्रीकरण में भयंकर गिरावट आई है।

उत्तराखंड सरीखे राज्यों में औषधि पादप उत्पादन पर समग्र ध्यान न होना भी एक कारण है।

    वन औषधि पादपों का कृषिकरण न होना तो समस्या बनी ही है।

     २- संसाधन या धन समस्या

लघु व मध्यम स्तर के आयुर्वेद औषधि निर्माता धन की समस्याओं से जूझ रहे हैं

    ३- श्रमिक समस्याएं

लघु निर्मातों को कम लागत में श्रमिक उपलब्धता मुख्य समस्याओं में एक समस्या है।

 ४- विपणन समस्याएं - शिव नन्द आश्रम सरीखे निर्माताओं ने विपणन समस्याके कर्ण निर्माण बंद ही कर दिया है।

  ५- सरकारी नीतियाँ

   ६- उर्जा समस्या

 ७- प्रबंध व मानव संसाधन स्स्यायें

 ८- कैपेसिटी यूटिलाइजेशन की समस्या

 ९ -नई निर्माण व पादप   परिष्करण तकनीक समस्याएं

    राज्य सरकारों को उपरोक्त समस्याओं का निदान करना चाहिए     



 

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Bhishma Kukreti

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लोक औषधि विज्ञान को आयुर्वेद की मुख्य धारा में लाना आवश्यक



 Bringing Folk Medicines in Mainstream Ayurveda for Export

चिकित्सा सेवा निर्यात रणनीति - 50

 Medical Service Export Strategies - 50

उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन  रणनीति - 233

Medical Tourism development Strategies -233

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 354

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -354   

 

आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

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   वैकल्पिक कोडिफायड औषधि क्षेत्र में भारत में आयुर्वेद , यूनानी , सिद्ध, आमची (तिब्बती )   तंत्र कार्यरत हैं।  किन्तु एक अन्य औषधि तंत्र है जिसे मोटे मोटे  तौर पर फोक मेडिसिन्स , फोक रेमिडीज या लोक औषधि तंत्र नाम दिया गया है।

एक अध्ययन अनुसार ,  बगैर कोडिफायड औषधि तंत्र याने फोक मेडिन्स बहुत महत्वपूर्ण क्षेत्र है।  फोक मेडिसिन्स से बहुसंख्यक जनता को औषधि सेवा दी जाती है।  अनुमान है कि भारत में ग्रामीण व जन जाती क्षेत्रों में लोक औषधि तंत्र में 8000  वनस्पति प्रजातियां प्रयोग में लायी जाती हैं व 25000 के लगभग औषधि या फोर्मुलेशन प्रयोग की जाती हैं।  इन फ़ॉर्मूलेसन्स का विवरण या कोडीफिकेशन बाकी है।

     अनुमान में अतिश्योक्ति नहीं है। जब कि कोडिफाइड आयुर्वेद , यूनानी ,   सिद्ध , आमची औषधि तंत्र में 4000 के लगभग औषधि पादप का पयोग होता है। 

   याने कि 3500 से अधिक औषधि पादपों को कोडिफाई शेष है।  व 15000 से अधिक फ़ॉर्मूलेसन्स से अधिक की आधिकारिक जानकारी शेष है।

 फोक मेडिसिन्स या लोक औषधि तंत्र को आयुर्वेद की  मुख्य धारा में लाना आवश्यक है।

   फोक मेडिसिन्स या लोक औषधि तंत्र को मुख्य धारा में उपयोग लाने हेतु निम्न समस्याओं का निदान आवश्यक है -

१-  अधिकायक रूप में अन्वेषण - वैज्ञानिक रूप से प्रत्येक फोक मेडिकल प्लांट, लोक औषधि पादप  का औषधीय खोज हो और सभी खोजों को एक समग्र रूप से डॉक्युमेंटेशन हो। खोजने जोउर्नल्स तक ही न रहें अपितु व्यवसायिक रूप से भी प्रयोग में लाये जायँ। 

२- क्वालिटी या गुणवत्ता समस्याएं - खोज के पश्चात गुणवत्ता का माप धनद निश्चित किया जाय

३- कृषि करण व वन नीति में परिवर्तन - बहुत इ पादपों की  कृषि आवश्यक है और बहुत से पादपों को वन में उगाना व संरक्षण आवश्यक हैं

४- प्रशासनिक या नियमों का  न होना

५- इंफ्रास्ट्रक्चर न होना

६- सही क्लिनिकल ट्रायल व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकरण या पेटियंट  करना

७- आधुनिकीकरण व इंटिग्रेसन /समग्रीकरण -



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पौड़ी गढ़वाल मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु लोक औषधि विकास ; उधम सिंह नगर कुमाऊं  मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु लोक औषधि विकास ;  चमोली गढ़वाल मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु लोक औषधि विकास  ; नैनीताल कुमाऊं  मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु लोक औषधि विकास ;  रुद्रप्रयाग गढ़वाल मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु लोक औषधि विकास ; अल्मोड़ा कुमाऊं  मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु लोक औषधि विकास  ; टिहरी   गढ़वाल मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु लोक औषधि विकास ; चम्पावत कुमाऊं  मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु लोक औषधि विकास ;  उत्तरकाशी गढ़वाल मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु लोक औषधि विकास ; पिथौरागढ़ कुमाऊं  मेडिकल  सेवा निर्यात विकास;  देहरादून गढ़वाल मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु लोक औषधि विकास ; रानीखेत कुमाऊं  मेडिकल  सेवा निर्यात विकास; हरिद्वार  गढ़वाल मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु लोक औषधि विकास ; डीडीहाट  कुमाऊं  मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु लोक औषधि विकास ;   नैनीताल  कुमाऊं मेडिकल  सेवा निर्यात विकास हेतु लोक औषधि विकास :

 

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