Author Topic: 18 Aug 10-18 School Children Killed in Kapkot, Bageshwar due to Cloudburst  (Read 24355 times)

सत्यदेव सिंह नेगी

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 771
  • Karma: +5/-0
  चम्पावत। भारी वर्षा के कारण जन जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। लोगों के कामकाज भी प्रभावित हुए हैं। वहीं टनकपुर-पिथौरागढ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई स्थानों पर मलवा व चट्टाने आ जाने से मार्ग बाधित हो गया है। जिससे पर्वतीय व मैदान क्षेत्र में आने जाने वाले यात्रियों की भारी फजीहत हुई।
मंगलवार की रात्रि से हो रही भारी वर्षा के कारण बेलखेत, चल्थी, टिपनटाप आदि स्थानों में मलवा व चट्टान खिसकने से मार्ग बाधित रहा। जिससे कई वाहन मार्ग में ही फंसे पडे हैं। मार्ग बाधित होने का खामियाजा यात्रियों को भी उठाना पड रहा है। पहाड व मैदानी क्षेत्र में आने जाने वाले यात्रियों को भी भारी दिक्कतों से दो चार होना पड़ा।
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6657204.html

सुधीर चतुर्वेदी

  • Sr. Member
  • ****
  • Posts: 426
  • Karma: +3/-0
कपकोट बागेश्वर की इस दुखद घटना पर  मेरा पहाड़ के सारे सदस्य गहरा दुःख प्रकट करते है और शोक वयक्त करते है |

सत्यदेव सिंह नेगी

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 771
  • Karma: +5/-0
बेकाबू हालात: बेचारगी के आलम में रहा शासन  देहरादून। शासन में बैठे अफसरों को आज जैसे बेचारगी के आलम से शायद ही कभी दो-चार होना पड़ा हो। आपदा की इस घड़ी में घटना स्थल से ताजा अपडेट के लिए अफसर परेशान रहे। तमाम तंत्र आज पूरी तरह से फेल साबित हुए।
बागेश्वर के कपकोट क्षेत्र स्थित एक विद्यालय में आई विपदा की शासन स्तर पर देरशाम तक कोई पुख्ता सूचना नहीं मिल सकी। सुबह पहला फीड 25 बच्चों के मलबे में दबने का आया। तत्काल ही वहां के जिलाधिकारी को मौके पर रवाना कर दिया गया। इसके बाद मौके की कोई सही स्थिति शासन के अफसरों के पास नहीं आ सकी।
आपदा प्रबंधन विभाग के अफसर कभी जिला मुख्यालय पर संपर्क करते दिखे तो कभी तहसील मुख्यालय से। हर जगह से यह सूचना दी गई कि जिलाधिकारी मौके पर रवाना हो गए हैं और 25 बच्चों के भू-स्खलन से आए मलबे में दबने की खबर है। इससे ज्यादा सूचना किसी भी स्तर से नहीं मिल सकी। बाद में एक अंतिम हथियार के रूप में पुलिस मुख्यालय के कंट्रोल रूप से संपर्क साधा गया। यहां से भी पुराना और रटा-रटाया उत्तार मिला तो अफसरों ने आस ही छोड़ दी।
इस बीच मुख्यमंत्री डा.रमेश पोखरियाल निशंक ने मौके पर जाने का कार्यक्रम बनाया। सीएम दफ्तर से भी लगातार अपडेट लेने की कोशिशें जारी रही पर किसी के पास कुछ भी कहने को नहीं मिला। इस बीच मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी के बीच मुख्यमंत्री मौके पर जाने का कार्यक्रम रद करना पड़ा। देर शाम किसी तरह शासन को सूचना मिली कि 18 बच्चों की मौत हो चुकी है। अहम बात यह रही है कि सुबह से चल रहे हालात को देखते हुए कोई भी अफसर इसकी आधिकारिक पुष्टि करने को तैयार नहीं हुआ। आपदा प्रबंधन विभाग के एक अफसर का कहना है कि ऐसे हालात पहले कभी भी सामने नहीं आए।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,904
  • Karma: +76/-0

यह घटना के बाद लोग काफी दहशत में है ! आपदा प्रभंधन की टीम बचाव के कार्य में जुटी है!

जैसे की हम पहले चर्चा कर चुके है उत्तराखंड का हिमालयी क्षेत्र प्राकर्तिक आपदाओ की दृष्टि से अति संवेदन शील है!  हमारे आपदा प्रवंधन के पास पूरे सामान होना चाहिए ताकि इस प्रकार के घटना में जान माल का नुक्सान हम हो !


विनोद सिंह गढ़िया

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 1,676
  • Karma: +21/-0
कुदरत के कहर से कांपा कपकोट
« Reply #24 on: August 19, 2010, 10:41:06 AM »
बागेश्वर। कुदरत के कहर से बुधवार को बागेश्वर की कपकोट तहसील कांप उठी। सुमगढ़, सलिंग व सलिंग उडियार गांव में एक साथ बादल फटने के बाद मौत ने जो तांडव किया, वह दिल दहलाने वाला रहा। सुमगढ़ की पहाड़ी में जबर्दस्त भूस्खलन हुआ और सरस्वती शिशु मंदिर तप्तकुंड में मौत बनकर आया मलबा 18 बच्चों को लील गया। एक अध्यापिका समेत सात बच्चे जख्मी हुए हैं, जबकि अन्य ने जैसे-तैसे भाग कर जान बचाई। सुमगढ़ को जोड़ने वाला पुल ध्वस्त होने से राहत व बचाव दल को दुर्गम रास्तों से होकर मौके पर पहुंचना पड़ा। हालांकि ग्रामीणों की मदद से मलबे में दबे एक बच्चे के शव को निकाल लिया गया है। अल्मोड़ा व अन्य जिलों से भी स्थानीय प्रशासन ने राहत दल मांगा है।

कपकोट तहसील के ग्राम सुमगढ़, सलिंग व सलिंग उडियार में बुधवार सुबह एक साथ बादल फट गया। प्रकृति के इस कहर की सर्वाधिक मार सुमगढ़ में पड़ी। कपकोट-सुमगढ़ मार्ग पर सरस्वती शिशु मंदिर तप्तकुंड के ठीक पीछे की पहाड़ी में अचानक भूस्खलन हुआ और पलक झपकते ही खिसक कर आया मलबा स्कूल की पिछली दीवार ध्वस्त कर 18 बच्चों को मौत की नींद सुलाता हुआ आगे बढ़ गया। इस बीच एक अध्यापिका व सात बच्चे भी मलबे की चपेट में आकर जख्मी हो गये जबकि शेष ने भागकर जान बचाई। बादल फटने के बाद तबाही और बच्चों की मौत की खबर से सुमगढ़ गांव में चीत्कार मच गई। ग्रामीणों ने तत्काल कपकोट प्रशासन को इत्तला दी। डीएम डीएस गब्र्याल व एसपी एम. मोहसिन व एसडीएम तीर्थपाल सिंह दलबल के साथ घटना स्थल की ओर दौड़ पड़े। राहत व बचाव टीम भी मौके की तरफ रवाना हुई लेकिन सुमगढ़ क्षेत्र को जोड़ने वाला पुल ध्वस्त होने से काफी विलंब हुआ। बचाव दल दुर्गम रास्तों से होकर घटनास्थल पर पहुंचा। देर शाम समाचार लिखे जाने तक बचाव दल व ग्रामीणों ने मलबे में दबे एक बच्चे का शव निकाल लिया था। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6657218_1.html


बागेश्वर जिले में बादल फटने से भूस्खलन से कपकोट ब्लाक के शुमगढ़ गांव के एक स्कूल की छत और दीवार ढह गई। इसके मलबे में दबकर स्कूल के 18 बच्चों की मौत हो गई, जबकि महिला आचार्य समेत सात बच्चे घायल हो गए। देर शाम तक 10 बच्चों के शव निकाले जा सके थे। प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिवार को एक-एक लाख और घायलों को 25-25 हजार रुपये मदद देने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने दर्दनाक हादसे पर गहरा दुख जताया है। पीएम ने मृतकों के परिजनों को एक-एक लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये की मदद का ऐलान किया है। इस बीच अल्मोड़ा से आईटीबीपी के 60 जवान और मेडिकल टीम को मौके पर रवाना कर दिया गया है। देर शाम तक मलबा हटाने का कार्य जारी था।

सुरक्षित निकालने और बचने का मौका नहीं मिला
बुधवार सुबह शुमगढ़ गांव में भारी बारिश से गांव के सरस्वती शिशु मंदिर के भवन से करीब 60 मीटर की दूरी पर स्थित पहाड़ी में भूस्खलन हो गया। पहाड़ी का मलबा स्कूल भवन की छत और पीछे की दीवार को तोड़ता हुआ स्कूल की प्रथम व तृतीय की कक्षाओं में घुस गया। इस दौरान स्कूल में पढ़ रहे 18 बच्चे मलबे में दब गए, जबकि महिला आचार्य और सात बच्चे इसकी चपेट में आकर घायल हो गए। घटना के वक्त प्रधानाचार्य बालम सिंह भंडारी अपने कक्ष में थे। जमीन के थर्राने की आवाज सुनकर वह बाहर आए। वह बच्चों से बाहर निकलने के लिए कह ही रहे थे कि मलबा बरामदे तक आ आया। इस दौरान बच्चों को सुरक्षित निकालने और बचने का मौका नहीं मिला। दर्दनाक हादसे पर मुख्यमंत्री और आपदा प्रबंधन राज्यमंत्री खजानदास देर रात काठगोदाम एक्सप्रेस से आपदा प्रभावित क्षेत्र के लिए रवाना हो रहे हैं। हादसे की सूचना मिलते ही पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी लेह का दौरा स्थगित कर दिल्ली से कपकोट के लिए रवाना हो गए।

अमर उजाला ब्यूरो


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,904
  • Karma: +76/-0
उत्तराखंड में स्कूल की इमारत ढही, 18 बच्चों की मौत   बागेश्वर, एजेंसी
   
 
 
         उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के कापकोट गांव में बुधवार को मूसलाधार वर्षा और भूस्खलन के कारण एक स्कूल की इमारत ढहने से कम से कम 18 बच्चों की मौत हो गई और कई घायल हो गए।
हादसे के समय सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ाई हो रही थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बागेश्वर से फोन पर बताया कि स्कूल की इमारत पुरानी थी और वह बादल फटने और भूस्खलन का असर नहीं झेल पाई। उन्होंने बताया, ‘राहत दल सहायता कार्यों में जुटे हुए हैं और और राहत व बचाव कार्य जारी हैं।’
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पांच बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के अनुसार हादसा सुबह करीब साढ़े नौ बजे हुआ। बादल फटने से हुई मूसलाधार बारिश में सरस्वती शिशु मंदिर की इमारत ढह जाने से बच्चों मलबे में फंस गए। उन्होंने बताया कि कुछ शव बरामद किए जा चुके हैं जबकि कुछ के अभी तक दबे होने की आशंका है।
निशंक ने बताया कि राहत और बचाव कार्य जारी है लेकिन भारी बारिश के कारण इसमें बाधा आ रही है।
इस बीच उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने बातचीत में कहा, ‘भारी नुकसान हुआ है लेकिन मासूम बच्चों की मौत से ज्यादा खराब और कुछ नहीं हो सकता। ये उनके परिवारों के लिए अपूर्णीय क्षति है।’
 
http://www.livehindustan.com/news/desh/deshlocalnews/39-0-133206.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,904
  • Karma: +76/-0

जब से मैंने यह घटना के बारे में सुना है मै बेहद ही दुखी हूँ !  कही भी इस प्रकार की घटना न घटे भगवान् से यही प्राथर्ना है !

सभी सदस्यों से अनुरोध है, दिवंगत बच्चो के आत्माओ की शांति के लिए भगवान् से प्रार्थना करे!


दीपक पनेरू

  • Sr. Member
  • ****
  • Posts: 281
  • Karma: +8/-0
जागरण कार्यालय, बागेश्वर: कुदरत के कहर से बुधवार को बागेश्वर की कपकोट   तहसील कांप उठी। सुमगढ़, सलिंग व सलिंग उडियार गांव में एक साथ बादल फटने   के बाद मौत ने जो तांडव किया, वह दिल दहलाने वाला था। सुमगढ़ की पहाड़ी पर   जबरदस्त भूस्खलन हुआ और तप्तकुंड के सरस्वती शिशु मंदिर में मौत बनकर आया   मलबा 18 बच्चों को लील गया। एक अध्यापिका समेत सात बच्चे जख्मी हुए हैं,   जबकि अन्य ने जैसे-तैसे भाग कर जान बचाई। देर रात तक 12 बच्चों के शव मलवे   से निकाले जा चुके थे। गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। सुमगढ़ को   जोड़ने वाला पुल ध्वस्त हो जाने से राहत व बचाव दल को दुर्गम रास्तों से   होकर मौके पर पहुंचना पड़ा। राहत कार्य में मदद के लिए भारत-तिब्बत सीमा   पुलिस (आईटीबीपी) के 80 जवान आपदा प्रभावित क्षेत्र के लिए रवाना कर दिए गए   हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के   परिजनों को एक-एक लाख तथा गंभीर घायलों को 50-50 हजार रुपये राष्ट्रीय राहत   कोष से देने की घोषणा की है।   कपकोट तहसील के ग्राम सुमगढ़, सलिंग व सलिंग उडियार में बुधवार सुबह करीब   नौ बजे एक साथ बादल फट गया। प्रकृति के इस कहर की सर्वाधिक मार सुमगढ़ में   पड़ी। कपकोट-सुमगढ़ मार्ग पर सरस्वती शिशु मंदिर, तप्तकुंड के ठीक पीछे की   पहाड़ी में अचानक भूस्खलन हुआ और पलक झपकते ही खिसक कर आया मलवा स्कूल की   पिछली दीवार ध्वस्त कर 18 बच्चों को मौत की नींद सुलाता हुआ आगे बढ़ गया।   एक अध्यापिका व सात बच्चे भी मलबे की चपेट में आकर जख्मी हो गये जबकि शेष   ने भागकर जान बचाई। बादल फटने के बाद तबाही और बच्चों की मौत की खबर से   सुमगढ़ गांव में चीत्कार मच गई। ग्रामीणों ने तत्काल कपकोट प्रशासन को   सूचना दी। जिलाधिकारी डीएस गब्र्याल व एसपी एम. मोहसिन व एसडीएम तीर्थपाल   सिंह के साथ ही तहसीलदार अनिल चन्याल व थानाध्यक्ष चंचल शर्मा भी दलबल के   साथ घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। राहत व बचाव टीम भी मौके की तरफ रवाना हुई   लेकिन सुमगढ़ क्षेत्र को जोड़ने वाला पुल ध्वस्त होने से काफी विलंब हुआ।   बचाव दल दुर्गम रास्तों से होकर घटनास्थल पर पहंुचा। देर रात तक मलबे में   दबे 12 बच्चों के शव निकाल लिये गये थे। गंभीर रूप से घायल दो बच्चों को   बागेश्वर लाया गया है। ग्रामीणों के साथ 108 सेवा राहत कार्य में जुटी हुई   है।

दीपक पनेरू

  • Sr. Member
  • ****
  • Posts: 281
  • Karma: +8/-0
  •     कुमाऊं में आफत बन बरसे बादल
    जागरण ब्यूरो, हल्द्वानी/ पिथौरागढ़/  बनबसा/ किच्छा/ गदरपुर: मूसलाधार बारिश से कुमाऊं में व्यापक तबाही हुई है। किच्छा में मछली पकड़ने गये चार किशोर उफनाई  गौला नदी में बह गए। एक युवक ने तीन को बचा लिया  पर एक की मौत हो गई। उधर, गदरपुर में दीवार गिरने से स्कूली छात्रा  की मौत हो गई। पिथौरागढ़ के मुनस्यारी को जोड़ने  वाले दोनों मार्ग बंद हो चुके हैं। धारचूला से आगे कुलागाड़ में मार्ग बंद होने से दारमा, ब्यास और चौदास  घाटियां भी अलग-थलग पड़ गई हैं। जौलजीवी के निकट टनकपुर-तवाघाट  राष्ट्रीय राजमार्ग पर विशाल चट्टानें टूट कर आने  से कैलास-मानसरोवर यात्री नौ घंटे फंसे रहे। रामगंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले चालीस वर्षो में इस बार नदी का जल स्तर सबसे अधिक है। बनबसा क्षेत्र के कई गांव  बाढ़ की चपेट में आ गये  हैं। नैनीताल जिले में सभी  स्कूल गुरुवार व शुक्रवार को बंद करने के आदेश दिए गए हैं।  दो दिन से लगातार हो रही  बारिश ने कहर बरपा दिया है।

विनोद सिंह गढ़िया

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 1,676
  • Karma: +21/-0
सुमगढ़ में बादल फटने से 20 छात्र जिंदा दफन

कपकोट से 32 किलोमीटर दूर सुमगढ़ में बादल फटने से सरस्वती शिशु मंदिर के 20 बच्चे जिंदा दफन हो गए है। ये सभी बच्चे शिशु सदन, प्रथम, द्वितीय और तृतीय के छात्र बताए जा रहे है। घटना में सात बच्चे बुरी तरह से जख्मी है, जबकि देर रात तक राहत और बचाव दल दो शवों को बाहर निकाल पाया है। इससे पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया है। मुख्यमंत्री ने इस हादसे में मारे गए छात्रों के परिजनों को एक-एक लाख और घायलों को 25-25 हजार रुपये देने की घोषणा की है। दूसरी ओर प्रधानमंत्री ने भी मृतकों के परिजनों को एक-एक लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये देने की घोषणा की है। यह घटना बुधवार सुबह नौ बजे के आसपास की बतायी जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना के समय शिशु मंदिर में तीसरा वादन पूरा कराकर शिक्षिका थापेश्वरी द्याराकोटी कक्ष से बाहर निकल रही थी। इसी समय अचानक दीवार तोड़कर भारी मलवा और बोल्डर कमरे में आ गए और बच्चे जिस दशा में थे, उसी में दफन हो गए। द्याराकोटी भी जख्मी हो गई है। घटना की जानकारी मिलते ही राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंच गया है। खुद डीएम डीएस गब्र्याल मौके पर शवों को खोजने में लगे हुए है। जिस समय यह घटना हुई उस समय स्कूल में 39 छात्र मौजूद थे। इनमें से 12 मलबा आने की आहट के साथ ही सुरक्षित बाहर आ गए, जबकि सात बच्चों को ग्रामीणों ने सुरक्षित निकाल लिया। इनमें करिश्मा देवली पुत्री चामू सिंह देवली पेठी, सागर जोशी पुत्र राजेंद्र जोशी सुमगढ़, ऊषा जोशी पुत्री हरीश जोशी सुमगढ़, प्रिया पुत्री लाल सिंह सलिंग, मुकेश दानू पुत्र चामू सिंह दानू बाछम, देवेंद्र सिंह धानिक पुत्र नरेंद्र सिंह धानिक सुढिंग, खड़क नाथ पुत्र पूरन नाथ कफलानी है।  में जिंदा वालों में सिंह गड़िया तोली, मुन्ना ताकुली पुत्र मोहन सिंह सूडिग, चन्द्रशेखर ताकुली पुत्र प्रेम चन्द्र सुमगढ़, नेहा दानू पुत्री जगत सिंह सुमगढ़, मनीष दानू पुत्र जगत सिंह दानू, तारा सिंह कुमल्टा पुत्र राम सिंह सूडिग, दीपा कुमल्टा पुत्री तारा सिंह सूडिग, भारती जोशी पुत्री हरीश जोशी सुमगढ़, पंकज दानू पुत्र जय सिंह बाछम, खीम सिंह देवली पुत्र गंगा सिंह सुमगढ़, श्रेया पाण्डा पुत्र कुंदन सिंह, खुशबु पुत्री नंद किशोर तप्तकुंड, करन पाठक पुत्र दिनेश पाठक बढ़ेत, प्रीति कुमल्टा पुत्री राजेन्द्र कुमल्टा सलिग, मोहित जोशी पुत्र लक्ष्मी दत्त सुमगढ़ है। इस घटना में नंद किशोर का पूरा घर सूना हो गया है। तीन बच्चे उर्मिला, योग्यता व गौरव जिंदा दफन हो गए है। जबकि सुमगढ़ निवासी जगत सिंह के नेहा और मनीष भी जिंदा दफन हो गए है। राहत एवं बचाव दल के मौके पर पहुंचने से पहले तारा सिंह कुमल्टा पुत्र राम सिंह कुमल्टा सूडिंग का शव निकाल लिया गया था जबकि एक शव की शिनाख्त नही हो पाई थी। घटना की जानकारी मिलते ही पीड़ित परिजन मौके पर पहुंच गए थे। एक तरह से चारों ओर हाहाकार का वातावरण दिखाई दे रहा था। कई परिजन सदमे की स्थिति में थे, तो कोई खुद ही फावड़ा, गैंती लेकर अपने बच्चों को मलवे के ढेर से निकालने की कोशिश कर रहे थे। एक तरह से घटना स्थल पर करुण क्रंदन का ही शोर सुनाई दे रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार यह स्कूल एक पहाड़ी की गहराई में है। पहाड़ी में बादल फटने के बाद अचानक भारी मलवा और बोल्डर स्कूल की दीवार को तोड़कर कमरे में आ गया। जिस समय यह घटना हुई, उस समय स्कूल में दो आचार्य भी मौजूद थे। आचार्य

किसी तरह 12 बच्चों को बाहर भगाने में कामयाब रहे। अन्यथा कुछ पलों में पूरे स्कूल के छात्र मलवे के ढेर में समा जाते। कुमाऊं आयुक्त कुणाल शर्मा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि बादल फटने से इस स्कूल के कई बच्चे मलबे के ढेर में दब गये है। उन्होंने बताया कि अल्मोड़ा तथा डीडीहाट(मिर्थी)से आईटीबीपी के जवान मौके पर भेज दिये गये है। उन्होंने बताया कि बागेश्वर जिले का पूरा आपदा तंत्र मौके पर मौजूद है। खुद जिलाधिकारी पूरे आपरेशन की कमान संभाल रहे है। उन्होंने घटना में जिंदा दफन बच्चों की संख्या की कोई पुष्टि नही की है। उन्होंने यह भी बताया कि घायलों को बेहतर इलाज के लिए बेहतर चिकित्सालयों में रेफर कर दिया है।

उत्तर भारत जल विद्युत परियोजना तबाह: बादल फटने और सरयू नदी के उफान में आने से उत्तर भारत हाइड्रो पावर लिमिटेड की जलविद्युत परियोजना मटियामेट हो गई है। इससे पांच करोड़ से अधिक के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। प्रशासनिक और हाइड्रो पावर लिमिटेड सूत्रों के अनुसार ठोडिला में पिछले कई समय से सरयू नदी के किनारे पर उत्तर भारत हाइड्रो पावर लिमिटेड द्वारा बनायी जा रही 120 मेगावाट की जल विद्युत परियोजना पूरी तरह से तबाह हो गई है। रीठाबगढ़ से लेकर दुल्म तक निर्माण कार्य ध्वस्त हो गये है। यही नही दो सौ श्रमिकों के लिए बनाये गये अस्थायी आवास भी बह गये है। सरयू में आये भीषण उफान से रीठाबगढ़, खाईबगढ़, उतरौड़ा, हरसिला, गालना में पांच सौ नाली से अधिक कृषि भूमि सरयू की भेंट चढ़ गई है। इस दौरान जीवन राम, लालू राम व रमेश राम नदी की चपेट में आते-आते बालबल बच गये है। राहत व बचाव दल ने इन तीनों लोगों को सकुशल निकाल लिया है



HYDRO POWER PROJECT DODILA (BHARARI) KAPKOTE

18082010014


 

Sitemap 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22