Author Topic: Agriculture,in Uttarakhand,उत्तराखण्ड में कृषि,कृषि सम्बन्धी समाचार  (Read 27345 times)

Devbhoomi,Uttarakhand

  • MeraPahad Team
  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 13,047
  • Karma: +59/-1
पहाड़ में अब भी पुरातन परम्पराओं से ही करते है खेती

गरुड़ (बागेश्वर): आधुनिकता की चकाचौंध में भी पहाड़ों में पुरातन तौर पर ही खेती की जाती है। काश्तकार पुरातन तरीके से की गई खेती को ही स्वास्थ्य व प्रकृति के लिए बेहतर मानते है। पहाड़ में अब भी धान मढ़ाई के बाद घास को लम्बे समय तक सुरक्षित रखने के लिए लूटे लगाए जाते है। यहां पर रासायनिक खादों को खेती का दुश्मन माना जाता है।

आधुनिक युग में सुविधायुक्त कृषि यंत्रों की उपलब्धता के बाद भी कई काश्तकार अब भी पारंपरिक खेती में ही विश्वास रखते है उनका मानना है कि पारंपरिक तरीके से प्रकृति संतुलन के साथ ही उन्नत खेती भी की जा सकती है।

 काश्तकार अब भी उपजाऊ भूमि को बनाए रखने के लिए गाय के मूत्र को कीटनाशक व गाय-भैंस के गोबर को खाद के लिए सर्वश्रेष्ठ मानते है। वहीं मैदानी क्षेत्रों में जहां धान की मढ़ाई के बाद पुआल का ढेर लगाया जाता है वहीं पहाड़ों में घास को लम्बे समय तक सुरक्षित रखने के लिए लूटे लगाए जाते है जिससे साल भर पशुपालक अपने मवेशियों को पुआल खिलाते है। पुआल की अधिकता होने पर भी यह कई वर्ष तक सुरक्षित रहता है।

 लूटा लगाने के लिए चीड़, बांज या पौपलर के पतले पेड़ को काटकर छीला जाता है व उसे जमीन पर गाड़ा जाता है। इसके बाद महिला,पुरुष व बच्चे उसके चारों ओर घूमकर घास को लगाते है लूटे की बनावट शंकु आकार की होती है। लूटे की बनावट इस तरह की होती है कि तेज बरसात के बाद भी इसमें अंदर तक पानी नहीं जाता है।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_5876065.html

Devbhoomi,Uttarakhand

  • MeraPahad Team
  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 13,047
  • Karma: +59/-1
कृषि मेले को दिया जायेगा भव्य रूप

गैरसैंण (चमोली)। प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले कृषि एवं विकास मेले का उद्घाटन पशुपालन व कृषि मंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत करेगें।

क्षेत्र पंचायत सभागार में आयोजित बैठक में क्षेत्र पंचायत प्रमुख, उपजिलाधिकारी, खंडविकास अधिकारी सहित तमाम विभागीय अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में आयोजन को बृहद रूप से मनाये जाने का निर्णय लिया गया। मेले का समय बढ़ाते हुए इसे चार दिवसीय कर दिया गया है। 4 नवंबर से प्रारंभ होने वाले इस मेले के समापन के लिए पंचायती राज्यमंत्री राजेन्द्र भंडारी को आमंत्रित किया गया है।

मेला समिति अध्यक्ष जानकी रावत ने बताया कि मेले में उद्यान, कृषि, सर्वशिक्षा, स्वास्थ्य, स्टेट बैंक, पशुपालन सहित तमाम विभागीय व गैरसरकारी संस्थाओं के प्रदर्शन कक्ष लगाये जाएंगे। न्याय पंचायत स्तर पर कृषि उत्पादों की प्रदर्शनी मेले का मुख्य आकर्षण होगी।

 मेले में स्थानीय विद्यालयों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ महिला मंगल दलों द्वारा लोक संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियां देखने को मिलेगी। आयोजन की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देते हुए स्वागत, सांस्कृतिक, सुरक्षा, लेखा, पुरस्कार, क्रय समितियों का गठन कर पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गयी।

 बैठक में समिति अध्यक्ष जानकी रावत, उप प्रमुख प्रेम संगेला, प्रधान राधा देवी, हयात सिंह, प्रेम लाल, कस्बा देवी, सावित्री देवी, राम सिंह, क्षेत्र समिति सदस्य नंदाबल्लभ, सुरेन्द्र लाल, उत्तम सिंह, बलवीर सिंह सहित मुख्यालय स्थिति सभी विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

Devbhoomi,Uttarakhand

  • MeraPahad Team
  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 13,047
  • Karma: +59/-1
पुरस्कार वितरण के साथ कृषि मेला संपन्न

गैरसैंण (चमोली)। कृषि विकास मेले के समापन पर पंचायत राज मंत्री राजेन्द्र भंडारी ने मेलों के आयोजन को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

मेले के लिए 50 हजार रुपये की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि पंचायतें विकास की धुरी हैं। इनका सशक्तिकरण होने पर ही राज्य का विकास होगा। चार दिवसीय इस मेले की सफलता के लिए जनता का धन्यवाद करते हुए मेलाध्यक्ष जानकी रावत ने सरकारी, गैरसरकारी विभागों व संगठनों का सहयोग का आभार व्यक्त किया।

 इस मेले के समापन अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को स्मृति चिह्न व नगद धनराशि दी गई। बेहतरीन झांकी प्रदर्शन के लिए विद्यामंदिर, गुरुकुल विद्या निकेतन को नवाजा गया, जबकि प्राथमिक लोकनृत्य में बाल सदन, जूनियर में विद्यामंदिर, माध्यमिक में जीआईसी व सीनियर में राजकीय महाविद्यालय को पुरस्कृत किया गया।

 108 तथा जमडिया के मध्य खेले गये रोमांचक वालीबाल फाइनल में जमडिया विजेता रहा। कृष्णा, प्रियंका, ऋचा व अनुष्का को बैडमिंटन के लिए पुरस्कृत किया गया। इसके ओपन वर्ग में अभिषेक, मोईद्दीन खान व सूरज बत्र्वाल ने पुरस्कार प्राप्त किया। सतीश बलोदी व हरीश को शतरंज का श्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया गया, जबकि विभागीय स्टाल में ग्राम्या तथा गैरसरकारी स्टाल में महिला आश्रम को प्रथम पुरस्कार मिला।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_5921470.html

Devbhoomi,Uttarakhand

  • MeraPahad Team
  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 13,047
  • Karma: +59/-1
धान की उपज के भुगतान को 10 करोड़ उपलब्ध

SOURCE DAINIK JAGRAN

रुद्रपुर। किसानों को धान की उपज का तत्काल भुगतान करने के लिए जिले को 10 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध हो गयी है। धान केंद्रों पर 65 हजार वारदाना मुहैया करा दिया गया है। यह जानकारी सीडीओ रंजीत सिन्हा ने दी। उन्होंने बताया कि मूल्य समर्थन योजना के तहत जिले में 25 धान क्रय केंद्र खोले गये हैं, इनमें से 15 सहकारी समितियों तथा 10 केंद्र उत्तराखंड सहकारी संघ के हैं।

केंद्रों पर उपज का भुगतान किसानों को करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। उन्होंने बताया कि जिले के रुद्रपुर, जसपुर, काशीपुर, बाजपुर, गदरपुर, महतोष मोड़, दिनेशपुर, किच्छा, नारायणपुर, सितारगंज, शक्तिफार्म, बिरिया, मकरसड़ा, पोलीगंज, नानकमत्ता, बलखेड़ा, बिछुवा, सरपुड़ा, जमौर, दाह फार्म व नगला में केंद्र स्थापित किये गये हैं। श्री सिन्हा ने किसानों से इन खोले गये केंद्रों पर धान बेचने के बाद सरकारी मूल्य प्राप्त करने को कहा है।

Devbhoomi,Uttarakhand

  • MeraPahad Team
  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 13,047
  • Karma: +59/-1
सिकुड़ रही है कृषि भूमि और जंगल: जंगली

श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल)। राष्ट्रीय इंदिरा गांधी वृक्ष मित्र पुरस्कार से सम्मानित पर्यावरणविद् जगत सिंह चौधरी जंगली ने कहा कि जलवायु में परिवर्तन और वर्षा चक्र के अनियमित हो जाने से कृषि भूमि और जंगल भी तेजी से सिकुड़ते जा रहे हैं।

राजकीय मेडिकल कालेज के सभागार में हिमालय में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव और उसके विकल्प विषय पर आयोजित व्याख्यान माला में उन्होंने कहा कि इससे कृषि उत्पादन में भी 50 प्रतिशत की कमी देखी गयी है।

 एकल प्रजाति और चीड़ के पेड़ों से होने वाली हानि के बारे में विस्तार से बताते हुए जंगली ने कहा कि इससे मिश्रित और चौड़ी पत्ती के वनों का विकास भी अवरुद्ध हो रहा है। जलवायु परिवर्तन से भारी वर्षा और मृदा अपरदन जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। तापमान वृद्धि से हिमालय की बर्फ तेजी से पिघलकर नदियों का जल स्तर भी बढ़ा रही है।

 पर्वतीय विकास शोध केंद्र के नोडल अधिकारी डा. अरविंद दरमोड़ा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का हिमालय पर्यावरण पर सीधा प्रभाव पड़ा है, जिसे रोकने के लिए जगत सिंह चौधरी जंगली द्वारा तैयार किए गए मिश्रित वन के मॉडल को अपनाना होगा। श्रीनगर मेडिकल कालेज में मेडिसन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. सुधीर कुमार गुप्ता ने कहा कि जलवायु परिवर्तन भी आज सबसे बड़ा मुद्दा भी बन चुका है।

 हिमालय के पर्यावरण के संरक्षित रहने पर ही पूरे विश्व का पर्यावरण ठीक रहेगा। मेडिकल कालेज के प्रशिक्षणार्थी डाक्टरों को भी इस जागरुकता अभियान में शामिल किया जाना चाहिए।

Devbhoomi,Uttarakhand

  • MeraPahad Team
  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 13,047
  • Karma: +59/-1
अब सताने लगी गेहूं की फसल की चिंता


चम्बा (टिहरी गढ़वाल)। इस बार सूखे के कारण धान की फसल ठीक न होने से भारी नुकसान झेल चुके हेंवलघाटी के काश्तकारों की अब गेहूं की फसल भी बर्बाद होने की कगार पर है। गेहूं की बुआई तो लोग कर चुके हैं, लेकिन पहली सिंचाई के लिए भी पानी न होने से काश्तकार चिंतित हैं।

बारिश न होने से जहां पहले धान की फसल चौपट हो गई, वहीं अब गेहूं की सिंचाई के लिए भी पानी नहीं है। हेंवलनदी पहले की तरह नागणी में दो किमी तक सूख चुकी है।

काश्तकारों का कहना है कि गेहूं की बुआई के बाद सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है और पानी तो है नहीं, यदि अभी बारिश नहीं होती है तो आने वाले दिनों में मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। हेंवल नदी के किनारे ट्यूबबेल लगाकर खेतों में पानी पहुंचाने की मांग को लेकर यहां के किसानों ने आंदोलन भी किया था।

अगस्त माह में लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग में चक्काजाम कर अपनी मांगों को शीघ्र हल करने की मांग की थी। जिलाधिकारी ने एक प्रतिनिधि मंडल से वार्ता में ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि एक माह में ट्यूबवैल लगाकर पानी पहुंचाया जाएगा, लेकिन अभी तक इसमें कोई कार्यवाही नहीं हुई।

ग्रामीण विजय जड़धारी व प्रधान ज्योति कुमार का कहना है कि हेंवल नदी का पानी गहरा गया है। यहां ट्यूबवैल लगाकर पानी निकल सकता है। उनका कहना है कि सिंचाई के अभाव में गेहूं के अलावा प्याज, और आलू की फसल भी नहीं हो सकती है।


SOURCE DAINIK JAGRAN

Devbhoomi,Uttarakhand

  • MeraPahad Team
  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 13,047
  • Karma: +59/-1
फूलों की खेती अपनाएं किसान

जोशीमठ (चमोली)। कृषि एवं उद्यान मंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि आगामी कुंभ मेले को देखते हुए किसानों को फूलों की खेती पर जोर देना चाहिए। मेले की वजह से फूलों की खेती किसानों के लिए काफी लाभप्रद होगी।

जोशीमठ ब्लाक सभागार में आयोजित किसान गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि श्री रावत ने कहा कि मौसम में आ रहे बदलाव और बाजार की डिमांड को देखते हुए किसानों को पारम्परिक खेती से हटकर वैज्ञानिक तरीके से खेती करनी चाहिए, ताकि कम मेहनत में उन्हें अधिक मुनाफा हो।

 उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र में जड़ी बूटी और फूलों की खेती की अपार संभावनाएं हैं। हरिद्वार में प्रस्तावित कुंभ मेले की वजह से फूलों की खेती का महत्व और अधिक गया है। कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार शीघ्र ही कृषि नीति बनाने जा रही है।

पहले चरण में चकबंदी का शासनादेश जारी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि चकबंदी कराने वाले काश्तकारों की सम्बंधित भूमि बगैर शुल्क तहसील कार्यालय में एक-दूसरे के नाम ट्रांसफर और रजिस्टर्ड की जाएगी। गोष्ठी के दौरान स्थानीय किसानों ने कृषि मंत्री से पहाड़ के किसानों की फसलों की बीमा कराए जाने की मांग की।

काश्तकारों का कहना था कि पहाड़ के किसानों को प्रतिकूल मौसम और जंगली जानवरों की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है, ऐसी स्थित में कृषि उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। इस मामले में कृषि मंत्री ने किसानों को सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

Devbhoomi,Uttarakhand

  • MeraPahad Team
  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 13,047
  • Karma: +59/-1
पहाड़ी खेती: तैयार हुआ उत्तराखंडी हल

उत्तरकाशी। जिले के काश्तकारों के लिए हल जोतना अब आसान होगा। कृषि संयंत्र इकाई सिमली (चमोली) ने उत्तराखंडी हल के नाम से पारंपरिक हल से हल्का और टिकाऊ हल तैयार किया है। जिला कृषि विभाग ने इस हल के अलावा इकाई द्वारा तैयार नई तरह की दरांती, कुदाल व गार्डन रैक जैसे संयंत्रों का परीक्षण कर लिया है।

समय के साथ पहाड़ में खेती के तौर तरीकों में भी बदलाव जरूरी हैं। इसी दिशा में बीते 11 वर्षो से काम कर रही सिमली स्थित कृषि संयंत्र इकाई ने उत्तराखंडी हल व कुछ अन्य उपकरण तैयार किये हैं। इकाई द्वारा तैयार हल खास तौर पर खेत जोतने के काम को काफी आसान करेगा। परंपरागत हल से काफी हल्के इस हल का वजन महज सात किलो है। इसमें लकड़ी की जगह इस्पात का प्रयोग किया गया है।

इसकी फाल पर सात एमएम मोटी पत्ती बनाई गई है। इसमें ऐसी तकनीक का अपनाई गई है कि जुताई के समय फाल को जमीन में कम या ज्यादा गहराई पर रखा जा सकता है। वहीं मिट्टी के बड़े ढेलों को एक बार में ही पूरी तरह तोड़ देता है। हल की लाट काफी हल्की और जुए पर आसानी से फिट हो सकती है।

परंपरागत हल का फाल बनावट ठीक न होने पर कई बार बैलों के पैर से टकराने की समस्या भी आती है। उत्तराखंडी हल की खास बनावट के कारण ऐसा होने की कोई संभावना नहीं है। इसके अलावा महिलाओं के लिये नई तरह दरांतियां व कुदाल भी तैयार की गई हैं, जिनमें लकड़ी का उपयोग काफी कम किया गया है।

गार्डन रैक नामक बहुद्देशीय यंत्र से हल लगने के बाद मिट्टी को समतल करने के साथ ही धान कूटना, गोबर निकालना आदि काम किये जा सकते हैं। शुक्रवार को इकाई के प्रतिनिधियों ने कृषि विभाग में अपने इन यंत्रों का प्रदर्शन किया।

विभाग ने यंत्रों का परीक्षण कर उन्हें न्याय पंचायतों में बने कृषि उपकरण विपणन केंद्रों पर भिजवा दिया है। इकाई के संचालक गोपाल राम टम्टा ने बताया कि इन उपकरणों से जहां खेती व अन्य कार्य आसान होंगे, वहीं लकड़ी के कम उपयोग से वनोपज की भी काफी बचत होगी।

 जिला कृषि अधिकारी देवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि ये उपकरण विभाग की ओर से सब्सिडी पर किसानों को उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि उत्तराखंडी हल पहाड़ी खेती के लिये एकदम मुफीद है और जल्द ही यह गांवों में नजर आएगा।

Devbhoomi,Uttarakhand

  • MeraPahad Team
  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 13,047
  • Karma: +59/-1
पहाड़ी खेती, तैयार हुआ उत्तराखंडी हल

उत्तरकाशी। जिले के काश्तकारों के लिए हल जोतना अब आसान होगा। कृषि संयंत्र इकाई सिमली (चमोली) ने उत्तराखंडी हल के नाम से पारंपरिक हल से हल्का और टिकाऊ हल तैयार किया है। जिला कृषि विभाग ने इस हल के अलावा इकाई द्वारा तैयार नई तरह की दरांती, कुदाल व गार्डन रैक जैसे संयंत्रों का परीक्षण कर लिया है।

समय के साथ पहाड़ में खेती के तौर तरीकों में भी बदलाव जरूरी हैं। इसी दिशा में बीते 11 वर्षो से काम कर रही सिमली स्थित कृषि संयंत्र इकाई ने उत्तराखंडी हल व कुछ अन्य उपकरण तैयार किये हैं। इकाई द्वारा तैयार हल खास तौर पर खेत जोतने के काम को काफी आसान करेगा।

परंपरागत हल से काफी हल्के इस हल का वजन महज सात किलो है। इसमें लकड़ी की जगह इस्पात का प्रयोग किया गया है। इसकी फाल पर सात एमएम मोटी पत्ती बनाई गई है। इसमें ऐसी तकनीक का अपनाई गई है कि जुताई के समय फाल को जमीन में कम या ज्यादा गहराई पर रखा जा सकता है। वहीं मिट्टी के बड़े ढेलों को एक बार में ही पूरी तरह तोड़ देता है।

 हल की लाट काफी हल्की और जुए पर आसानी से फिट हो सकती है। परंपरागत हल का फाल बनावट ठीक न होने पर कई बार बैलों के पैर से टकराने की समस्या भी आती है। उत्तराखंडी हल की खास बनावट के कारण ऐसा होने की कोई संभावना नहीं है। इसके अलावा महिलाओं के लिये नई तरह दरांतियां व कुदाल भी तैयार की गई हैं, जिनमें लकड़ी का उपयोग काफी कम किया गया है।

 गार्डन रैक नामक बहुद्देशीय यंत्र से हल लगने के बाद मिट्टी को समतल करने के साथ ही धान कूटना, गोबर निकालना आदि काम किये जा सकते हैं। शुक्रवार को इकाई के प्रतिनिधियों ने कृषि विभाग में अपने इन यंत्रों का प्रदर्शन किया। विभाग ने यंत्रों का परीक्षण कर उन्हें न्याय पंचायतों में बने कृषि उपकरण विपणन केंद्रों पर भिजवा दिया है।

 इकाई के संचालक गोपाल राम टम्टा ने बताया कि इन उपकरणों से जहां खेती व अन्य कार्य आसान होंगे, वहीं लकड़ी के कम उपयोग से वनोपज की भी काफी बचत होगी। जिला कृषि अधिकारी देवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि ये उपकरण विभाग की ओर से सब्सिडी पर किसानों को उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि उत्तराखंडी हल पहाड़ी खेती के लिये एकदम मुफीद है और जल्द ही यह गांवों में नजर आएगा।

lpsemwal

  • Jr. Member
  • **
  • Posts: 56
  • Karma: +2/-0
Dosto,
A training program on seed production proposed at NAARM Hyderabad where Dr. Joshi from uttrakhand is currently Director.

Interested friends can apply.
NAARM , Rajendra nagar, Hyderabad

 

Sitemap 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22