Author Topic: Char Dham Yatra 2011 details-from 06 May 2011 - चार धाम यात्रा २०११  (Read 8777 times)

umeshpant

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आज खुलेंगे कपाट बद्री विशाल के !!!!

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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श्रद्धालुओं के लिए फ़िर खुला केदारनाथ मंदिर
 
 
देहरादून : प्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर छह महीने के अंतराल के बाद आज श्रद्धालुओं के लिए फ़िर से खुल गया . भगवान शिव के प्रथम दर्शन करने वालों में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी शामिल रहे.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच केदारनाथ तीर्थस्थल के मुख्य पुजारी भीमशंकर लिंग ने सुबह साढे पांच बजे मंदिर के ताले खोले.     

इस दौरान गर्भ गृह के बाहर सैकडों श्रद्धालु मौजूद थे जो बर्फ़ीली हवाओं की परवाह किए बिना ‘‘बम बम भोले’’ के नारे लगा रहे थे. निशंक ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ पूजा अर्चना की. उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मंत्री खजान दास और प्रधान सचिव पर्यटन राकेश शर्मा भी प्रथम दर्शन करने वालों में शामिल थे.     

इस बीच श्रद्धालुओं के लिए बद्रीनाथ तीर्थस्थल के दरवाजे सोमवार को खुलेंगे. चार धाम यात्रा बद्रीनाथ केदारनाथ गंगोत्री यमुनोत्री छह मई को गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने के साथ शुरू हो गई थी.
 
http://www.prabhatkhabar.com/news/85398.aspx

Anil Arya / अनिल आर्य

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Anil Arya / अनिल आर्य

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जय बदरी के गूंजते रहे जयकारे
कड़ाके की ठंड में मध्य रात्रि से दर्शनों के लिए कतारबद्ध रहे लोग
जोशीमठ। बदरीनाथ धाम के कपाट ‘जय बदरीविशाल’ के जयकारों के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। भगवान बदरीविशाल के कपाट खुले जय बदरीविशाल के जयकारों के साथ पूरी बदरीनाथ पुरी गूंज उठी। कपाटोद्घाटन के साक्षी बनने के लिए हजारों श्रद्धालु मध्य रात्रि से ही कतारबद्ध हो गए थे।
इस मौके पर देश-विदेश से पहुंचे हजारों भक्तों ने भगवान के दिव्य विग्रह और अखंड ज्योति के दर्शन किए। गढ़वाल स्काउट्स के बैंड की सुमधुर संगीत लहरियों ने पूरे माहौल को भक्ति से सराबोर कर दिया। सिंहद्वार के बाहर महिलाओं ने पारंपरिक वेषभूषा में चौफला, दांकुडी नृत्य किया।
तुंगनाथ में शिवभक्तों ने किया जलाभिषेक
ऊखीमठ। पंच केदारों में तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ मंदिर के कपाट सोमवार को सुबह 10.30 बजे आम शिवभक्तों के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। डोली ने सोमवार को प्रात: नौ बजे चोपता से तुंगनाथ धाम की ओर प्रस्थान किया। उत्सव डोली भुजगली और देवदर्शनी में अल्प विश्राम के बाद 11.30 बजे तुंगनाथ मंदिर पहुंची। डोली मंदिर की तीन परिक्रमा करते हुए पार्वती मंदिर के बाहर विराजमान हुई। SOURCE-EPAPER.AMARUJALA

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Devbhoomi,Uttarakhand

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माणा गांव में लौटी रौनक
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चारधाम यात्रा पर देश-विदेश से आये श्रद्धालुओं से देश के अंतिम गांव माणा में भी रौनक लौट आयी है। कपाट खुलने के साथ ही इस गांव के ग्रामीणों के लिए भी रोजगार के कई अवसर खुल गये हैं, जिस कारण निचले स्थानों से लोग माणा लौटकर एक बार फिर अपने व्यवसाय में जुट गये हैं। प्रतिदिन हजारों यात्रियों के माणा पहुंचने से स्थानीय लोगों का रोजगार भी फल फूल रहा है।

बदरीनाथ धाम से तीन किमी. की दूरी पर स्थित जनजाति ग्राम भारत तिब्बत सीमा पर द्वितीय पंक्ति के सीमा प्रहरी के रूप में जाने जाते हैं। छह महीने कपाट बंद रहने पर ये ग्रामीण निचले स्थानों पर खेतीबाड़ी व अन्य व्यवसायों से जुड़े रहते हैं। कपाट खुलने पर स्थानीय निवासी अपने गांव को लौट आते हैं और व्यवसाय करते हैं।

विश्व की सबसे बड़ी वन पंचायत के रूप में पहचानी जाने वाला यह क्षेत्र 90 हजार हैक्टेयर में फैला है। सरस्वती नदी का उद्गम स्थान एवं 5 सौ मीटर थोड़ी दूर जाकर अलकनंदा में विलुप्त होना अपने आप में अद्भुत है। तिब्बत चीन सीमा से लगे भोटिया जनजाति बाहुल्य सीमांत ग्राम माणा की सबसे खास बात यह है कि गांव के ईष्ट देव क्षेत्रपाल श्री घंटाकर्ण की पूजा अर्चना करने के उपरान्त ही यहां कोई भी कार्य प्रारंभ किया जाता है। कुछ वर्षो पूर्व यह क्षेत्र वृक्षविहीन हुआ करता था, लेकिन यहां के मेहनतकश लोगों के कठोर परिश्रम से आज यहां हरियाली देखने को मिल रही है। माणा पंचायत के अन्तर्गत दुर्लभ जड़ी बूटियों का भी अथा भंडार है। इन बूटियों में प्राणी जीवन के रक्षक की अचूक औषधि एवं गुण विद्यमान है। माणा में तीर्थाटन के रूप में यहां गणेश गुफा, व्यास गुफा, भीम पुल एवं सरस्वती गंगा का साक्षात उद्गम स्थान है। वहीं माणा के निकट भी मुचकुन्द गुफा, वसुधारा, स्वर्गारोहणी जैसे पवित्र तीर्थ स्थल है। यहां पर पर्यटन और साहसिक पर्यटन की अपार संभावनायें है। माणा से गंगोत्री पैदल ट्रैकिंग मार्ग अनेकों मनोहारी दृश्यों , कंदराओं, ग्लेशियरों , हिमखंडों , नदी नालों और बर्फीली पहाड़ियों से होकर गुजरता है। जो कि पर्यटन के क्षेत्र में अनेक यादगार अनुभूतियों को स्पर्श कराता है। प्रदेश सरकार की ओर से सीमांत ग्राम माणा को पर्यटक ग्राम भी घोषित किया गया है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7709467.html

Anil Arya / अनिल आर्य

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Tilak Ji is gem of our forum. Tilak also invited me to join him. But due to scarcity of time, I couldn't. May God Bless You Tilak. Great Job, Keep it up !!!!! .:)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Anil Arya / अनिल आर्य

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चारधाम यात्रा में बढ़ने लगा यात्रियों का दबाव
Jun 09, 10:10 pm
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देहरादून, जागरण संवाददाता: सिरोबगड़ व आसपास के इलाकों में सड़क धंसने से बसों की आवाजाही में हो रही देरी व चारधाम यात्रियों के बढ़ते दबाव को देखते हुए परिवहन विभाग ने अतिरिक्तबसों की व्यवस्था की है।
विभाग की ओर से गुरुवार को मार्ग पर परिवहन निगम की पांच बस लगाई गई। इसके अलावा सिटी बस सेवा की एक बस को यात्रा के लिए ग्रीन सिग्नल दे दिया गया है। संभागीय परिवहन अधिकारी सुनीता सिंह ने इसकी पुष्टि की है।
इस वर्ष अधिक हैं यात्री
इस बार पिछली बार की अपेक्षा अधिक यात्री चारधाम यात्रा पर आए हैं। पिछले वर्ष जहां आठ जून तक केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री व यमनोत्री में एक लाख 50 हजार यात्रियों ने यात्रा की थी, वहीं इस बार अब तक दो लाख 35 हजार यात्री यात्रा कर चुके हैं। निजी वाहनों के यात्रियों को जोड़ दे तो इनकी संख्या पांच लाख के पार पहुंच जाती है। पिछले वर्ष आठ जून तक जहां संयुक्तरोटेशन की कुल 3800 बसों को लगाया गया था, वहीं इस वर्ष अब तक संयुक्त रोटेशन की कुल 4243 बसें लग चुकी हैं। इनके अलावा मैक्सी व टैक्सी गाड़ियां भी चली हैं, इनकी संख्या 3216 व 4085 रही है। मूवमेंट की अगर बात करें तो इस वर्ष मैक्सी कैब, टैक्सी, स्टेज कैरेज व प्राइवेट बसों को मिलाकर कुल 13 हजार 954 ट्रिपें लग चुकी हैं।
लोकल यात्रियों के लिए अलग व्यवस्था
परिवहन निगम ने लोकल यात्रियों के लिए बसों की अलग व्यवस्था की है। इसके तहत करीब आधा दर्जन बसों को उन लोकल यात्रियों को लगाया जाएगा जो ऋषिकेश से गौरकुंड या बदरीनाथ या हेमकुंड आदि जगहों पर यात्रा के लिए जाना चाहते हैं।
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अब तक परमिट जारी हुए-
देहरादून- 1060
ऋषिकेश-6166
हरिद्वार-1500
कोटद्वार-268
गाड़ियों की मूवमेंट
टैक्सी- 3216
मैक्सी कैब-4085
बसें-स्टेज कैरिज-3440
जनरल बसें- 3415
 Source - Jagaran.Yahoo

umeshpant

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