Author Topic: Politics In Uttarkhand - उत्तराखंड की राजनीति  (Read 23699 times)

राजेश जोशी/rajesh.joshee

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उत्तराखंड विधान सभा में हुयी इस शर्मनाक घटना ने पूरे प्रदेश वासियों को शर्मशार किया है| इस पर हमारे विधान सभा के नेता प्रतिपक्ष इससे बलिदान की संज्ञा दे रहे हैं|  यह तो इतने उच्च व्यक्तित्व तथा कांग्रेस पार्टी के लिए शर्म की बात है|  क्या इस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इसका संज्ञान लिया? 
एक बात गौर करने की यह भी है की विश्विद्यालय विधेयक के पास हो जाने से हमारे नेता प्रतिपक्ष की नौकरी जाने का खतरा है, क्योंकि वह गढ़वाल विश्वविद्यालय के रक्षा विद्यां विभाग में प्राध्यापक भी हैं|  इस बात की जांच भी होनी चाहिए की क्या वह जो सुविधाएं प्राप्त कर रहे हैं वह नियमानुसार हैं?
विश्विद्यालय विधेयक में अगर कोई कमियां हैं तो उसका विरोध करने में कोई बुराई नही है पर एक इतने बड़े सदन के सम्मानित सदस्यों द्वार इस तरह व्यवहार कटाई शोभनीय नही है| यह हम उत्तराखंड वासियों के लिए सचमुच सोचनीय है की हम कैसे लोगों को चुनकर विधान सभा में भेज रहे हैं|

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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Bahut hi sharmanak ghatna hai yeh aur iski jitni bhartsana ki jaae woh kam hai.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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This is really very shameful act on part of these MLAs. What development we can expect from them

उत्तराखंड विधान सभा में हुयी इस शर्मनाक घटना ने पूरे प्रदेश वासियों को शर्मशार किया है| इस पर हमारे विधान सभा के नेता प्रतिपक्ष इससे बलिदान की संज्ञा दे रहे हैं|  यह तो इतने उच्च व्यक्तित्व तथा कांग्रेस पार्टी के लिए शर्म की बात है|  क्या इस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इसका संज्ञान लिया? 
एक बात गौर करने की यह भी है की विश्विद्यालय विधेयक के पास हो जाने से हमारे नेता प्रतिपक्ष की नौकरी जाने का खतरा है, क्योंकि वह गढ़वाल विश्वविद्यालय के रक्षा विद्यां विभाग में प्राध्यापक भी हैं|  इस बात की जांच भी होनी चाहिए की क्या वह जो सुविधाएं प्राप्त कर रहे हैं वह नियमानुसार हैं?
विश्विद्यालय विधेयक में अगर कोई कमियां हैं तो उसका विरोध करने में कोई बुराई नही है पर एक इतने बड़े सदन के सम्मानित सदस्यों द्वार इस तरह व्यवहार कटाई शोभनीय नही है| यह हम उत्तराखंड वासियों के लिए सचमुच सोचनीय है की हम कैसे लोगों को चुनकर विधान सभा में भेज रहे हैं|

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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U'khand: 11 Opposition members suspended
« Reply #43 on: May 20, 2008, 01:19:14 PM »
U'khand: 11 Opposition members suspended

Posted at Tuesday, 20 May 2008 11:05 IST 
Dehra Dun, May 20: Eleven members of the opposition in the Uttarakhand state assembly were today suspended on the charges of breaking furniture inside the House on May 12.

Speaker Harbans Kapoor ruled that nine members of the Congress and two from BSP will remain suspended till the end of the current session.

The move comes after the ruling BJP members brought a privilege motion on Friday against the opposition MLAs, who allegedly broke furniture inside the Vidhan Sabha on May 12 protesting against the university bill which sought to curtail powers of the Governor in appointment of VC and teaching staff.

Moving the motion, Munna Singh Chauhan (BJP) and other party members asked the Speaker to take stern action against the MLAs involved in the incident.

Leader of the Opposition Harak Singh Rawat, who was also suspended, said the opposition of the bill would continue and asserted he would not allow the government to curtail the autonomy of the university.

Meanwhile, the university bill has been again referred to a select committee of the House for further discussion.
 
 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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ओलावृष्टि से कपकोट में वृद्ध की मौत,फसल को भारी नुकसानMay 20, 11:57 pm

बागेश्वर। सोमवार की सायं तहसील कपकोट के मल्ला दानपुर क्षेत्र में हुई मूसलाधार बारिश व ओलावृष्टि से एक वृद्ध की मौत हो गयी। साथ ही क्षेत्र में फसल को भारी नुकसान ने किसानों की कमर तोड़ दी है। प्रभावित किसानों ने मुआवजा देने की मांग की है।

सोमवार की सायं कपकोट के ऊंचाई वाले गांवों में ओलावृष्टि के साथ मूसलाधार बरसात हुई। इसी बीच जंगल से घर को आ रहे किलपारा निवासी खीम राम (65)पुत्र कुशल राम रास्ते में रुक गये। ओलावृष्टि के कारण उनके सिर में गंभीर चोटे आयी और वह बेहोश होकर गिर गये। दूसरे दिन ग्रामीणों ने उनका शव देखा तो राजस्व पुलिस को सूचित किया। मृतक खीम राम मुजफ्फरनगर में किसी विद्यालय में चतुर्थ श्रेणी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद परिजनों को सौंप दिया है। ओलावृष्टि से मल्ला दानपुर के कर्मी, बदियाकोट, सूपी, झूनी, मिकिला, खलझूनी, किलपारा, सोराग, बाछम आदि गांवों में गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। जिला पंचायत सदस्य शांति दानू ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा करते हुए नुकसान का जायजा लिया तथा जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए प्रभावित किसानों को मुआवजा प्रदान किये जाने की मांग की।

पंकज सिंह महर

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देहरादून। पत्रकार वार्ता के दौरान नेता प्रतिपक्ष डा. हरक सिंह रावत विधानसभा से निलंबन का दिल में बसा दर्द छुपा नहीं सके। बाद में पूर्व मंत्री इंदिरा ह्दयेश ने मामले को संभाला।

श्री रावत वार्ता के दौरान भावुक हो उठे। विवि विधेयक का बात करते-करते वे सदन से किए गए निलंबन की बात पर आ गए। अपने प्रवाह में बोलते हुए डा. रावत ने कहा कि बात अंदर की है। इसे कहना तो नहीं चाहिए पर उनके साथ गलत किया गया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष और नेता सदन (मुख्यमंत्री) की मौजूदगी में यह तय हो गया था कि विपक्षी विधायकों का मामला विशेषाधिकार समिति को सौंप दिया जाएगा। इस वार्ता के दौरान बनी सहमति पर विपक्ष ने तो अमल किया पर सरकार ने नहीं। वार्ता की अगली सुबह उन्हें संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि भाजपाई विधायक सहमति पर अमल को तैयार नहीं है। डा. रावत ने कहा कि अगर नेता सदन की बात मानने को कोई तैयार नहीं था तो बैठक ही क्यों की गई। उनका कहना था कि फिर यह तय किया गया था कि निलंबन अगर होगा तो कालावधि के लिए। बाद में विधानसभा सचिवालय से देर रात सूचना दी गई कि ग्यारह विधायकों का निलंबन सत्रावसान तक के लिए है। उन्होंने कहा कि इन हालात में तो सत्ता और विपक्ष के बीच विश्वास कम होगा। डा. रावत अपनी बात और आगे बढ़ाते उससे पहले ही पूर्व मंत्री ने माइक अपनी ओर खींचने के साथ ही कहा कि ये बातें बाहर कहने की नहीं होती हैं।

पंकज सिंह महर

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देहरादून। विश्वविद्यालय विधेयक को लेकर उपजा विवाद अब और तूल पकड़ता नजर आ रहा है। इस मामले में बनी प्रवर समिति से भाजपा के एक सदस्य ने इस्तीफा दे दिया है। अब विस अध्यक्ष ने कांग्रेस से सदस्य नामित करने के नाम मांगे हैं। साथ ही सुझाव भी दिया है कि अगर गैर निलंबित सदस्यों के नाम दिए जाएं तो उचित होगा।

विस में भारी हंगामे के बाद यह विवि विधेयक एक बार फिर से प्रवर समिति के हवाले करने के साथ ही इसमें कांग्रेस का एक और सदस्य नामित करने पर सत्ता और विपक्ष के बीच सहमति बनी थी। इसी पर अमल करते हुए भाजपा विधायक खजान दास ने प्रवर समिति से अपना इस्तीफा विस अध्यक्ष को सौंप दिया है। इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष हरबंश कपूर ने बताया कि खजान दास का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि अब नेता प्रतिपक्ष को पत्र लिखकर प्रवर समिति के लिए सदस्य का नाम सुझाने को कहा गया है। इधर, पता चला है कि अध्यक्ष ने अपने पत्र में नेता प्रतिपक्ष को एक सुझाव भी दिया है। अध्यक्ष का कहना है कि सदन ने ग्यारह सदस्यों को सत्रावसान तक के लिए निलंबित कर रखा है। उचित होगा कि नेता प्रतिपक्ष ऐसे सदस्यों के नाम सुझाएं जो कि निलंबित नहीं हैं। इस समिति में पहले से शामिल विधायक मनोज तिवारी भी निलंबित होने वालों की सूची में हैं। जाहिर है कि ऐसे में प्रवर समिति का कोरम पूरा होने में पेंच फंस सकता है। विधानसभा अध्यक्ष हरबंश कपूर का कहना था कि उन्होंने तो प्रवर समिति की कार्यवाही को सुचारु करने के लिए ही यह सुझाव दिया है। इस बारे में फैसला तो नेता प्रतिपक्ष को ही करना है। नेता प्रतिपक्ष डा. हरक सिंह रावत का कहना था कि वे अपनी ओर से एक विधायक का नाम अध्यक्ष को दे चुके हैं। उन्हें अभी तक ऐसा कोई पत्र नहीं मिला है, जिसमें दो विधायकों के नाम सुझाने को कहा गया हो। पत्र मिलने पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष से वार्ता की जाएगी।

पंकज सिंह महर

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गोपेश्वर (चमोली)। नेता प्रतिपक्ष डा.हरक सिंह रावत ने कहा है कि भाजपा सरकार का आम लोगों की तकलीफों से कोई लेना देना नहीं है। खंडूड़ी सरकार भ्रष्टाचारियों की ऐशगाह बनी हुई है। भाजपा से परेशान जनता अब कांग्रेस का साथ देगी। अत: कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर आगामी पंचायत व लोस चुनाव में जुट जाना चाहिए। रावत ने परमाणु करार पर विपक्षी दलों की राजनीति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

नंदप्रयाग में आयोजित जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक में मुख्य अतिथि नेता प्रतिपक्ष ने कृषि ऋण माफी योजना व मिशन-2009 के तहत लोस चुनावों की तैयारियों पर गहन चिंतन किया। अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डा.जीतराम ने कहा कि अनुसूचित जाति के लोगों को कांग्रेस की मुख्यधारा से जुड़ने पर ही उचित सम्मान मिल पाएगा। पूर्व विधायक अनुसूया प्रसाद मैखुरी ने राज्य सरकार को हर मोर्चे पर विफल बताया। आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की योजनाओं पर भाजपा सरकार वाहवाही लूट रही है। पूर्व राज्य मंत्री सत्येन्द्र बत्र्वाल ने व्यक्तिगत मतभेदों को भुलाकर पार्टी हित में कार्य करने की बात कही। प्रदेश कांग्रेस महामंत्री हरि सिंह रावत, जिलाध्यक्ष प्रीतम सिंह रावत,महामंत्री मनीष नेगी, मुकेश नेगी, सुरेंद्र रावत, कमल रतूड़ी, वीरेंद्र असवाल, सुरेश डिमरी, माधवी सती, रैजा चौधरी, महावीर रावत, ओमप्रकाश नेगी, भीम सिंह नेगी, अनिल कठैत, शैलेंद्र बिष्ट आदि भी उपस्थित थे।

पंकज सिंह महर

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 जागरण संवाददाता, हल्द्वानी: पूर्वमंत्री डा.इंदिरा हृदयेश ने मंगलवार को शिक्षा विभाग की सुगम-दुर्गम आधारित स्थानांतरण नीति की जमकर बखिया उधेड़ी। उन्होंने साफ कहा कि नई स्थानांतरण नीति शिक्षा और शिक्षक दोनों के लिए खतरनाक है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार द्वारा शिक्षकों का सत्रांत लाभ छीन लेने के फैसले को चौकाने वाला बताया और कहा कि इस पर कोर्ट की शरण ली गई तो प्रदेश सरकार भी जबाव नहीं दे पायेगी। डा.हृदयेश आवास पर पत्रकारों से बात कर रही थीं। उन्होंने कहा कि अब तक सुरक्षित व संरक्षित महसूस कर रहे उत्तराखंड के शिक्षक भाजपा सरकार के फैसलों से काफी आहत हैं। शिक्षा विभाग में नए-नए प्रयोगों ने यहां की शिक्षा और शिक्षक दोनों की व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग की स्थानांतरण नीति पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि सुगम-दुर्गम की परिभाषा ही समझ से परे है। इससे साफ है कि सरकार में बैठे नुमाइंदों को यहां की भौगोलिक जानकारी नहीं है या फिर इसके पीछे कोई षणयंत्र है। इस नीति ने शिक्षकों को भयभीत कर दिया है, इससे परेशान शिक्षक शिक्षा पर ध्यान देने की बजाय निदेशालय और सचिवालय में चक्कर काट रहे हें। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में नियम है कि सत्र के मध्य में किसी शिक्षक को सेवानिवृत नहीं किया जाये। उसकी सेवा वृद्धि सत्रांत की जायेगी। ताकि सत्र के मध्य में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो सके। मगर सर्वाधिक हैरत की बात यह है कि उत्तराखंड सरकार ने यहां के शिक्षकों का सत्रांत का लाभ भी छीन लिया। इसके अलावा अब नया फरमान जारी करने की तैयारी की जा रही है जिसमें ग्रीन, यलो, ब्लू और रेड कैटेगरी में शिक्षकों को बांटने की तैयारी हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को नए प्रयोगों से बचते हुए शिक्षकों के रिक्त पड़े पदों को भरने और शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान देने की नसीहत दी। साथ ही सरकार को चेतावनी दी कि वातानुकुलित कमरों में बैठकर शिक्षकों को धमकाने और मनमाफिक इस्तेमाल करने का रवैया छोड़ दें। शिक्षक असहाय नहीं है, वह समाज का दृष्टा है।
 

पंकज सिंह महर

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देहरादून, जागरण ब्यूरो: दो दिन तक चलने वाले विधानसभा के सत्र में आज चंद मिनट की कार्यवाही चली। पहले वंदे मातरम् हुआ और फिर विपक्ष का भारी हंगामा। इस पर अध्यक्ष ने सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। फिर राष्ट्रगान हुआ और विधायकों ने अपने अन्य कायरें की ओर रुख कर लिया। आज सुबह ठीक ग्यारह बजे विस अध्यक्ष हरबंस कपूर सदन में आए। सबसे पहले वंदे मातरम् का गान हुआ। इसके समाप्त होते ही कांग्रेस और बसपा के विधायक वेल में आ गए। इनका कहना था कि उनके द्वारा नियम-310 के तहत दलित उत्पीड़न, गैंगरेप, मसूरी कांड के साथ ही हरिद्वार में आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमों के बारे में गई सूचनाओं पर सदन का कार्य रोक कर सुनवाई की जाए। नेता प्रतिपक्ष डा. हरक सिंह रावत भी इसी हंगामे के बीच अपनी बात कहते रहे। अध्यक्ष ने सदस्यों से अपनी सीट पर जाने का कई बार आग्रह किया पर विधायक सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। इस दौरान नेता सदन व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी भी सदन में बैठे रहे। अध्यक्ष ने सदन को पहले पौने बारह बजे तक स्थगित किया। फिर बीस मिनट और फिर आधा घंटे के लिए स्थगन बढ़ाया। इसके बाद कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी विधायक फिर से वेल में आ गए और नियम-310 के तहत ही सुनवाई की मांग करने लगे। शोर-शराबा शांत न होता देख अध्यक्ष ने कार्यवाही शुरू करा दी। विधानसभा सचिव महेश चंद ने सूचित किया कि राज्यपाल की अनुमति के बाद उत्तराखंड पंचायतीराज (संशोधन) विधेयक, 2008 अब उत्तराखंड का अधिनियम बन गया है। संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने विवि विधेयक पर प्रवर समिति की संस्तुतियां पटल पर रखी। सारा काम शोरशराबे के बीच ही चलता रहा। अध्यक्ष श्री कपूर ने कहा कि वे नियम-58 के तहत सूचनाओं पर चर्चा कराने के लिए तैयार हैं पर विपक्षी विधायक अपनी मांग पर अड़े रहे। इस पर संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि अगर विधानसभा चाहे तो सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर सकती है। अध्यक्ष ने राय जानने के बाद सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। इसके बाद सभी ने राष्ट्रगान किया और विधायक अपने अन्य कायरें को निपटाने के लिए चले गए। विपक्ष की ओर से वेल में आने वाले विधायकों में तिलकराज बेहड़, कुंवर प्रणव सिंह, जोतसिंह गुनसोला, अमृता रावत, रणजीत सिंह रावत, महेंद्र सिंह माहरा, किशोर उपाध्याय,दिनेश अग्रवाल, मो. शहजाद, नारायण पाल, प्रेमानंद महाजन, सुरेंद्र राकेश, हाजी तस्लीम, हरिदास आदि शामिल थे।
 

 

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