Author Topic: Politics In Uttarkhand - उत्तराखंड की राजनीति  (Read 23602 times)

पंकज सिंह महर

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देहरादून। भाजपा में नेतृत्व को लेकर मचे घमासान के बीच मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मध्यावधि चुनाव को ही एकमात्र विकल्प बताया है। बसपा ने भाजपा पर जनता की समस्याओं की अनदेखी कर कुर्सी की लड़ाई में व्यस्त रहने का आरोप लगाया है तो सपा ने राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है।

लोकसभा चुनाव के बाद से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर भाजपा में आए तूफान ने प्रदेश के विकास को हाशिये पर ला दिया है। भाजपा के मंत्रियों व विधायकों समेत सभी नेता इस गुत्थी को सुझलाने में इतने व्यस्त हैं कि प्रदेश व जनता के मसलों की उन्हें सुध ही नहीं है। विपक्ष ने बदले हालात में आक्रामक तेवर अख्तियार कर लिए हैं। नेता प्रतिपक्ष हरक सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश में अस्थिरता का वातावरण बनाने के लिए भाजपा दोषी है। सरकार को न तो जनता की चिंता है और न ही राज्य के हितों की। भाजपा नेता केवल सत्ता के लिए लड़ रहे हैं। नेतृत्व परिवर्तन से अस्थिरता खत्म होने वाली नहीं है। ऐसे में राज्य में राष्ट्रपति शासन के अलावा कोई विकल्प नहीं है। मध्यावधि चुनाव से ही यह अफरा-तफरी खत्म हो सकती है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि नेतृत्व परिवर्तन से प्रदेश का भला होने वाला नहीं है। यह जनता का दुर्भाग्य है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार है। हालत यह है कि अफसर मनमानी कर रहे हैं। मंत्री कुर्सी की लड़ाई में व्यस्त हैं और जनता पूरी तरह त्रस्त है। सरकार को यह देखने की फुर्सत भी नहीं कि प्रदेश में क्या हो रहा है। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. मेघराज सिंह ने कहा कि भाजपा में अविश्वास का वातावरण है। भाजपा नेताओं ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए राज्य को ताक पर रख दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद बड़थ्वाल ने कहा कि मौजूदा हालात में राज्यपाल को हस्तक्षेप करना चाहिए। नेतृत्व परिवर्तन से मसले हल होने वाले नहीं है। भविष्य में राज्य की दिक्कतें और बढ़ेंगी। सरकार इस समय अल्पमत में आ गई है। ऐसे में जरूरी है कि नए सिरे से जनादेश लिया जाए। उन्होंने कहा कि पिछले सवा दो वर्ष से भाजपा नेताओं ने प्रदेश की चिंता नहीं की, बल्कि अपनी व्यक्तिगत राजनीति के लिए राज्य के हितों को हाशिये पर रखा।

पंकज सिंह महर

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देहरादून। उत्तराखंड अभी तक चार मुख्यमंत्री देख चुका है। नवंबर 2000 में राज्य गठन के समय भाजपा की अंतरिम सरकार बनी और पहले मुख्यमंत्री के रूप में अविभाजित उत्तर प्रदेश की विधान परिषद के सभापति नित्यानंद स्वामी ने शपथ ली।

नित्यानंद स्वामी करीब 11 महीने तक मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद अक्टूबर 2001 में भाजपा हाईकमान ने मुख्यमंत्री के रूप में भगत सिंह कोश्यारी की ताजपोशी की। करीब तीन महीने बाद ही विधानसभा के चुनाव हुए, जिसमें भाजपा बुरी तरह पराजित हो गई। वर्ष 2002 में कांग्रेस की सरकार बनी तो पार्टी ने अनुभवी नारायण दत्त तिवारी को मुख्यमंत्री बनाया। 2007 के चुनाव में भाजपा ने फिर वापसी की और सीमांत बहुमत के दम पर सरकार बनाई। मार्च में पूर्व केंद्रीय मंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी पर विश्वास जताते हुए भाजपा हाईकमान ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया।

पंकज सिंह महर

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जागरण समाचार, देहरादून Jul 03, 02:15 am

देहरादून। पूर्व विधायक मुन्ना सिंह चौहान को अनुशासनहीनता के आरोप में बसपा से निष्कासित कर दिया गया है। उनके साथ एक अन्य नेता एससी शर्मा को भी बाहर का रास्ता दिखाया गया है। करीब तीन महीने पहले श्री चौहान ने भाजपा विधायक पद से इस्तीफा देकर बसपा का दामन थामकर लोकसभा का चुनाव लड़ा था।

बसपा प्रदेश अध्यक्ष डा. मेघराज सिंह के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष व यूपी की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती के निर्देश पर मुन्ना सिंह चौहान व एससी शर्मा को अनुशासनहीनता के कारण निष्कासित कर दिया गया है। पार्टी में शामिल होने के बाद से ही श्री चौहान बैठकों में शामिल नहीं हो रहे थे। कई बार आमंत्रित किया गया पर उनकी ओर से कोई सक्रिय पहल नहीं हुई।

दूसरी ओर श्री चौहान ने पार्टी से निष्कासित होने की जानकारी होने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि वे विकासनगर में कार्यकर्ताओं के साथ हैं और उन्हें नहीं पता कि बसपा ने इस तरह का कोई फैसला किया है। पार्टी स्तर से भी उन्हें सूचना नहीं मिली है। गौरतलब है कि श्री चौहान लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा को अलविदा कह गए थे। उन्होंने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर टिहरी लोकसभा से चुनाव लड़ा। चुनाव में उन्हें अपेक्षानुसार मत नहीं मिले। तभी से उनकी बसपा को लेकर खिन्नता दिखाई देने लगी थी। उनके साथ पार्टी से बाहर हुए एससी शर्मा भी कई मामलों को लेकर आला नेताओं से नाराज थे।

पंकज सिंह महर

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देहरादून, जागरण संवाददाता: भाजपा सरकार पर विकास योजनाओं की स्वीकृति के मामले में विपक्षी विधायकों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कांग्रेस के विधायकों ने मुख्यमंत्री आवास के समक्ष प्रदर्शन किया और सांकेतिक उपवास भी रखा। प्रदर्शन के दौरान सीएम आवास की ओर जाने की कोशिश करते कांग्रेसी विधायकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने चेताया कि सरकार ने जल्द ही सौतेला व्यवहार बंद न किया, तो वो आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक सोमवार सुबह नेता प्रतिपक्ष डा. हरक सिंह रावत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में कांग्रेसी विधायक चकराता रोड स्थित बिंदाल पुल के समीप एकत्र हो गये। भाजपा सरकार पर विपक्षी विधायकों व उनके निर्वाचन क्षेत्रों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए उन्होंने रैली निकाली। मुख्यमंत्री आवास की ओर जाते पार्टी विधायकों व कार्यकर्ताओं के हुजूम को पुलिस ने यमुना कालोनी के मुख्यद्वार पर बैरिकेडिंग लगाकर रोक लिया। यहां पार्टी विधायकों-कार्यकर्ताओं व पुलिस कर्मियों के बीच काफी देर तक धक्कामुक्की होती रही और नेता प्रतिपक्ष डा. रावत समेत कुछ विधायक बेरिकेडिंग पर चढ़ गये। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष श्री रावत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने अपने ढाई वर्ष के कार्यकाल में जन-अपेक्षाओं का गला घोंटा है। बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य जैसी विपक्षी विधायकों द्वारा संस्तुत योजनाओं को भाजपा सरकार ने स्वीकृति नहीं दी। कालाढूंगी कांड ने सूबे की लचर कानून व्यवस्था की कलई खोल दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि भाजपाई सत्ता में आने के बाद से कुर्सी की लड़ाई में व्यस्त हैं, जबकि जनता की उम्मीदों व समस्याओं से उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने

हेम पन्त

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Source : www.livehindustan.com

भाजपा हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष बची सिंह रावत की विदाई पर मुहर लगा दी। निशंक मंत्रिमंडल में शामिल वन मंत्री बिशन सिंह चुफाल नए प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने चुफाल को उत्तराखंड प्रदेश भाजपाध्यक्ष मनोनीत किया है। ‘हिन्दुस्तान’ ने 16 सितम्बर के अंक में बचदा की विदाई और चुफाल के नए प्रदेश अध्यक्ष बनने की संभावना जतायी थी।

पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि बचदा के इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। लोकसभा चुनाव के बाद बचदा ने प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था। हाईकमान ने बचदा को विकासनगर उपचुनाव तक पद पर बने रहने को कहा था। राजनाथ सिंह ने मंगलवार को बचदा का इस्तीफा स्वीकार करते हुए चुफाल के मनोनयन की घोषणा की। डीडीहाट से पार्टी विधायक चुफाल पार्टी के पांचवें अध्यक्ष होंगे।

चुफाल से पूर्व पृरणचंद्र शर्मा, मनोहरकांत ध्यानी, भगत सिंह कोश्यारी व बचदा प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी संभाल चुके हैं। चुफाल के मनोनयन पर मुख्यमंत्री डा. निशंक, पूर्व मुख्यमंत्री खंडूड़ी और कोश्यारी ने खुशी जताते हुए कहा कि संगठन और सरकार दोनों मिलकर विकास कार्यो की गति बढ़ाएंगे।

हेम पन्त

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Seven MLAs nominated as parliamentary secretaries
« Reply #75 on: October 03, 2009, 11:17:09 AM »
Source : PTI

Dehra Dun, Oct 2 (PTI) The Uttarakhand government nominated seven MLAs as parliamentary secretaries, an official release here said today.

In a late last night decision, the government nominated MLAs Asha Nautiyal, GL Shah, Arvind Pande, Premchand Agrawal, Gopal Rawat, Chandanram Das and Diwan Singh Bist as parliamentary secretaries, the release.

All these BJP MLAs would enjoy minister of state level rank along with facilities associated with the post, which also include vehicles fit with red beacons.

Ever since Ramesh Pokhariyal Nishank took over the reins of the state from former Chief Minister BC Khanduri on June 27 this year, ruling party MLAs, who did not find cabinet berth, were anxiously awaiting to be accorded with the ministerial level posts.

More MLAs and other politicians would also be granted the ministerial level posts in near future, the sources said.

पंकज सिंह महर

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Politics In Uttarkhand -Now, Fonia too turns down Nishank’s offer
« Reply #76 on: August 06, 2010, 11:04:26 AM »
Tribune News Service
  Dehradun, August 5
After the refusal of senior ruling Bharatiya Janata Party (BJP) leader Lt Gen TPS Rawat (retd) to accept a governmental position, another senior party leader Kedar Singh Fonia has also refused to accept the offer of his own government. Both these leaders were made chairmen of different government bodies. But, both of them declined the offer by the state government.   While Lt General Rawat was made chairman of the State Sainik Welfare Board, Fonia, who is legislator from Gangotri, was made chairman of the Char Dham Vikas Parishad.   Lt General Rawat in his letter to Chief Minister Ramesh Pokhriyal Nishank said yesterday that he had never asked for any such position and would not accept the one offered by his own government. He said he would prefer to work as an ordinary party worker.   Fonia has also refused to accept the position offered to him. He said he never asked for any such position in the government. He reportedly said leaders who are hankering after such posts should be given these posts.   Fonia, who was a cabinet minister in the Kalyan Singh ministry in Uttar Pradesh in 1991, was also a cabinet minister in the interim government of Uttarakhand led by Chief Minister Nityanand Swami. Known as an expert of tourism, he was Tourism Minister both in Uttar Pradesh and Uttarakhand.   But he lost the first Assembly elections held in February 2002. He again won his seat in 2007 assembly polls but was ignored by Chief Minister Maj Gen BC Khanduri (retd) in his ministry formation.   Fonia, along with Koshiyari, was in the forefront in raising a banner of revolt against Khanduri which led the downfall of Khanduri. But he was not accommodated in the Nishank ministry either. His supporters claim that being a cabinet minister twice, acceptance of a petty position was below his dignity.   The effort by Nishank to placate two senior BJP leaders having sizable following in their respective areas has not borne fruit. Fonia is a leader of the Bhotia tribal residing in Chamoli district, while Lt General Rawat commands respect of the large ex-servicemen community in the hills.

हेम पन्त

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U'khad Assembly fails to conduct even half of required sittings
« Reply #77 on: March 09, 2011, 02:14:14 AM »
Dehra Dun, Mar 6 (PTI) The Uttarakhand Assembly has failed to conduct even 30 sittings a year against the required 60 sittings as stated in the house's rule book, a report said.Since formation of the state in 2000, the Vidhan Sabha has never even crossed the halfway mark of the required number of yearly sittings, according to the recent report on Assembly's proceedings. The maximum was 23 sittings in 2003.The data revealed so far only 169 sittings have been conducted against the obligation of having at least 600 sittings in 10 years. These proceedings lasted for 751 hours and 3 minutes in combined.Over 116 hours were lost due to adjournments.Worst performing Chief Minister was N D Tiwari who remained present for only 29 days out of 83 sittings conducted during his reign (2002-2007).Uttarakhand parliamentary affairs minister Prakash Pant said blamed opposition for the poor record and said they think disrupting the house proceedings repeatedly will give publicity."Most of the state assemblies in the country are having very less number of sittings these days. There should be big political debate on the national level to settle the issue," Pant, who was the first speaker in the Uttarakhand Assembly, said.While, Opposition Congress accused the BJP government of not being sincere on the smooth conduct of the House's proceedings. "The government tries to shy away from all those issues which are of the interest of the common people," a party spokesman said.
Source - http://ibnlive.in.com/generalnewsfeed/news/ukhad-assembly-fails-to-conduct-even-half-of-required-sittings/599666.html

हेम पन्त

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India Today - Khanduri may quit BJP to join UKD
« Reply #78 on: July 06, 2011, 03:17:54 AM »
The BJP government in Uttarakhand seems to be in for trouble from within following speculations that former chief minister B.C. Khanduri is planning to quit the party. The leader has been sidelined in the party and it is learnt that he may join hands with Uttarakhand Kranti Dal (UKD) ahead of the assembly elections, due next year.

The development comes even as the Congress and the BJP stepped up efforts to woo voters.

While the Congress is focusing on the Ramesh Pokhriyal Nishank government's misrule, the BJP is trying to make the people aware of the development programmes it has undertaken in the state.

In the midst of all this, UKD president Trivender Singh Panwar met Khanduri at his residence in Dehradun on June 27. The UKD is planning to form a third front to fight the BJP and the Congress in the state polls.

The UKD is keen on joining hands with influential political leaders who are dissatisfied with their parties. Khanduri is believed to have apprised the BJP's national leaders on the party's poor condition in Uttarakhand. But instead of listening to him, he has been sidelined.

With a series of corruption charges against the Nishank-led government, many believe that the party could find it difficult to regain power in Uttarakhand.

Upset with the treatment meted out to him, Khanduri is believed to be keen on forming a political outfit of ex-servicemen.

However, the former chief minister termed the news of resigning from the BJP as baseless and speculative. "It is media created. They make such speculative news to provide entertainment to their readers," Khanduri said.

Despite his clarification, rumours surrounding the leader's resignation from the BJP refuses to die down. Panwar called the meeting with Khanduri just a courtesy call.

"We had gone there to meet Khanduri. It was a courtesy meeting in which we discussed the current political situation in Uttarakhand. We also discussed about the scams and corruption prevailing in the hill state."

Panwar refused to divulge whether or not his party would join hands with Khanduri but there's no doubt that the meeting was fixed by supporters of the former chief minister. It also indicates that Khanduri is ready with a plan should the BJP continue to sideline him.

Source - http://indiatoday.intoday.in/site/story/bc-khanduri-may-quit-bjp-soon/1/143680.html

हेम पन्त

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