Author Topic: SURPRISE & UNIQUE NEWS OF RELATED TO UTTARAKHAND- जरा हट के खबर उत्तराखंड की  (Read 21514 times)

Devbhoomi,Uttarakhand

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ऐसे पाठशाला बनी मधुशाला

चमोली. जहां ज्ञान गंगा बहनी थी, वहां सुरा की धारा बहती दिखायी दे तो..। चमोली जिले के नरोधार प्राथमिक विद्यालय में ऐसा ही नजारा दिखायी दिया। मंगलवार की रात ग्रामीणों की सूचना पर एसडीएम साहब विद्यालय पहुंचे तो पाठशाला में मधुशाला देख हैरान रह गए। उनके साथ गई पुलिस ने तीन महिलाओं समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
 
 दरअसल इन दिनों इलाके में महिलाएं शराब कारोबारियों पर आंखें तरेर रही हैं। आंदोलन कर रहीं महिलाएं न केवल शराब के ठेकों पर प्रदर्शन कर रही हैं, बल्कि तोड़फोड़ करने से गुरेज नहीं कर रहीं। तस्करों से लेकर कारोबारियों तक में महिलाओं का आतंक इस कदर बैठ गया है कि वे अपना सामान छिपाने के लिए दूरदराज के स्कूलों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
 
 मंगलवार की शाम नरोधार के ग्रामीणों ने एसडीएम चमोली रामजी शरण शर्मा को सूचना दी कि गांव के प्राथमिक विद्यालय में कुछ लोगों ने देसी शराब का जखीरा छिपा रखा है। इस पर एसडीएम ने आबकारी और पुलिस टीम के साथ स्कूल पर छापा मारा।

 टीम ने यहां से नौ बोरी बालमा व कई लीटर कच्ची शराब बरामद की। इसके बाद टीम ने नरोधार गांव में छापा मारकर लक्ष्मण सिंह के अलावा तीन महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया। इन लोगों के कब्जे से 35 लीटर कच्ची शराब मिली। आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।



http://bhadas4uttarakhand.com
 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Man survives fight with leopard in Uttarakhand
« Reply #71 on: October 28, 2011, 02:23:06 AM »
Man survives fight with leopard in Uttarakhand                  
Dehra Dun : It is very rare that anyone takes on a full grown leopard one-to-one and lives to tell the tale. Manoj Gusain, a ‘shiksha mitra’ in a primary school at Pokhra in Kotdwara tehsil of Uttarakhand, is now recuperating from the wounds he suffered in the hand-to-hand combat with the feline, but says he has no regrets taking on the carnivore despite knowing the odds were stacked against him.
Manoj, a resident of Gawani village in the same area, was going to the primary school, when he saw the leopard crouching in the bushes in the periphery of the agricultural fields along the path. Apprehending that the feline was lying in wait for the children that would soon be flocking the path to their way to the school, he decided to take on the leopard to save the oncoming children.
Initially he tried to shoo away the big cat, who desperate to make a kill took no heed to Manoj’s gestures and throwing of stones. In fact, infuriated at being deprived of its food, the feline started snarling and growling at Manoj, who thought it best, in the interest of the safety of the children to take the beat head on. In a rare show of chivalry, rather than the leopard attacking him, he pounced on the animal.
According to eye witnesses Manoj had pushed his left hand in the throat of the animal and had his right hand round hand round the feline’s neck trying to choke it in a vice like grip. The animal kept attacking the young man with its paws creating deep wounds from where blood gushed.
The scuffle continued for about 10 minutes, by which time the people who gathered got out of their shock and picked up sticks to attack the animal. Seeing the large number of people coming at it with sticks, the feline freed itself and made a quick exit to the nearby oak forest, where it retreated into the thick undergrowth.
The oak forest is said to be home to a number of leopards that prowl in the region and are known to lift animals, specially dogs, goats, sheep and calves. Attacks on human beings, even children are rare, but wild life experts were of the view that the leopard had probably gone old, or been injured by another leopard because of which it was lying in wait for an easy prey.


http://hillpost.in/2011/10/27/man-survives-fight-with-leopard-in-uttarakhand/33254/latest-news/bhatt

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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उत्तराखंड के सुरेंद्र ने खरीदा सबसे महंगा घोड़ा

अंतर्राष्ट्रीय लवी मेले की अश्व प्रदर्शनी का शुक्रवार को शुभारंभ हो गया है। कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के चेयरमैन शेरसिंह चौहान ने पाठबंगला मैदान में अश्व प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। 151 से ज्यादा घोड़ों का पंजीकरण किया जा चुका था। इसके अलावा नेशनल हाइवे-22 किनारे चूहाबाग व खनेरी आदि क्षेत्रों में भी विभिन्न प्रजाति के घोड़ों को बिक्री के लिए रखा गया था। अश्व प्रदर्शनी में लाहौल स्पीति की पिन व स्पीति घाटी से चामुर्थी नस्ल के घोड़ों की संख्या काफी अधिक है। पहले दिन करीब 81 से अधिक घोड़ों की बिक्री की गई। उत्तराखंड के प्रकाश नेगी ने मैदान में चामुर्थी नस्ल का सबसे महंगा घोड़ा 4८ हजार रुपए में खरीदा। यह घोड़ा लाहौल स्पीति की पिन वैली के पदम दोरजे से खरीदा गया है। लवी मेले के दौरान अब भेड़-बकरियों का कारोबार हर वर्ष सिमटता जा रहा है। सतलुज से सटे कुल्लू जिले के ब्रौ व जगातखाना क्षेत्र में कभी भेड़-बकरियों को रखने के लिए जगह नहीं रहती थी लेकिन मौजूदा दौर में भेड़-बकरियों का कारोबार धीमा पड़ गया है। वहीं भेड़-बकरियों का कारोबार कम हुआ।
 तय हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम
 अंतर्राष्ट्रीय लवी मेले की सांस्कृतिक संध्या के लिए रामपुर व आसपास स्कूलों व कालेज छात्रों का रंगारंग कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। एसडीएम एमएस चौहान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में स्कूल प्रबंधन कमेटी के सुझावों के अनुसार सांस्कृतिक कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया। प्रत्येक शिक्षण संस्थान को 10 मिनट का समय दिया गया है। एसडीएम एमएस चौहान ने कहा कि मेले में सभी स्कूलों को अपनी प्रस्तुतियां पेश करने का मौका दिया गया है।

http://www.bhaskar.com/article/HIM-OTH-1604476-2542365.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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110 साल की आमा ने दुनिया को कहा अलविदाSat, 17 Nov 2012 1
सोमेश्वर (अल्मोड़ा): गुलामी का दौर, फिर आजादी की गवाह घाटी क्षेत्र की सबसे बुजुर्ग महिला ने 110 बसंत देखने के बाद दुनिया को अलविदा कह दिया। ग्राम अर्जुनराठ निवासी पानुली देवी कुछ समय से बीमार थीं। शतायु पार कर एक दशक तक की अवधि में पानुली देवी ने जहां अपनी चौथी पीढ़ी को आंगन में खेलते देखा, वहीं चारों बेटों को खोने का गम भी सहा। उसके चार पोतों ने अपनी आमा को मुखाग्नि दी।
 समीपवर्ती ग्राम अर्जुनराठ निवासी पानुली देवी का 110 वर्ष की आयु में शुक्रवार की रात निधन हो गया। परिजनों के अनुसार वह बीमार थी। उसके पति जोध सिंह बोरा तथा चार बेटे पहले ही दुनिया छोड़ चुके थे। 1902 में जन्मी पानुली देवी घाटी क्षेत्र की सबसे बुजुर्ग ग्रामीणों में गिनी जाती थीं। चारों बेटों दीवान सिंह, राजेंद्र सिंह, नारायण सिंह व त्रिलोक सिंह को खोने का गम हालांकि उन्हें हमेशा रहा, मगर चार पोतों भुवन बोरा, संजय, दीपक व हरीश तथा चौथी पीढ़ी की संतानों को देख उसे जीने का हौसला भी मिला। अपने नौ परपोतों को आंगन व गोदी में खेलते, खिलाते पानुली देवी ने उम्र का शतक पूरा कर एक दशक तक निरोगी रहकर जिंदगी बिताई। ग्रामीणों के अनुसार गुलामी का दौर देख चुकी यह बुजुर्ग महिला ने देश की आजादी देखी। विकास के मद्धम पहियों के साथ ही बदलते जमाने में आने वाली पीढ़ी में बदलाव से भी रूबरू हुई। शुक्रवार को आमा की अंतिम यात्रा में क्षेत्र के तमाम सामाजिक, राजनीतिक संगठनों के साथ ही आसपास के गांवों के लोग भी शामिल हुए। उनके पोतों ने पानुली देवी को मुखाग्नि दी।



(Source dainik jagran)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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मिट्टी, पत्थर और सूती कपड़े से निर्मित किया फ्रिज

अल्मोड़ा। विवेकानंद इंटर कालेज के छात्र टीम लीडर भावेश पाठक और उनके साथी संकर्षण जोशी, राहुल कांडपाल, रवींद्र सिंह, प्रशांत पपनै ने मिट्टी, पत्थर और सूती कपड़े से ‘शून्य ऊर्जा की खपत करने वाला फ्रिज’ बनाया है। यह फ्रिज चार से पांच दिन तक फल तथा सब्जी सुरक्षित रखने में सक्षम है। इसके लिए बिजली की भी जरूरत नहीं है। इसमें न्यूनतम तापमान सात डिग्री सेल्सियस तक रहता है।
‘शून्य ऊर्जा की खपत करने वाला फ्रिज’ बनाने के लिए साधारण और चिकनी मिट्टी का मिश्रण तैयार किया जाता है। इस मिश्रण से मिट्टी की करीब एक-एक फिट ऊंची दो दीवारें खड़ी की जाती हैं। उसके ऊपर सूती कपड़ा रखकर मिट्टी तथा पत्थर से मिश्रण से छत डाली जाती है। फिर उसके ऊपर दुमंजिले में मिट्टी की चहारदीवारी खड़ी कर उसके भीतर सब्जी तथा फल रखे जाते हैं। तत्पश्चात सूती कपड़ा बिछाकर और पत्थर मिट्टी के मिश्रण की छत डाली जाती है और तैयार हो गया फ्रिज तैयार।
इस फ्रिज में तापमान कम करने के लिए छत में तीन से चार घंटे के अंतराल में करीब एक लीटर पानी का छिड़काव करने की आवश्यकता होती है। इससे पानी छनकर भीतर रखेे सब्जी तथा फलों में जाता है और तापमान स्थिर रहता है। जबकि धरातल में दो दीवारों के बीच में एक बर्तन रखा जाता है। जिससे की ऊपर से छनकर आने वाला पानी उस बर्तन में जाए। भावेश बताते हैं कि जो पानी छनकर बर्तन में पहुंचता है। वह साफ होता है और उपयोग में लाया जा सकता है। भावेश तथा उनके साथी इस फ्रिज का प्रदर्शन पूर्व में चितई तेवाड़ी गांव में भी कर चुके हैं।


(Amar ujala)

Hisalu

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