Author Topic: Uttarakhand News - उत्तराखंड समाचार  (Read 124470 times)

नवीन जोशी

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Re: Uttarakhand News - उत्तराखंड समाचार
« Reply #40 on: February 13, 2012, 12:13:17 AM »
तीन घंटे में पहुंचेंगे टनकपुर से जौलजीवी
जाका, चम्पावत: बहुप्रतीक्षित टनकपुर-जौलजीवी मार्ग के प्रथम चरण में ककराली गेट से ठूलीगाड़ तक 12 किमी सड़क चौड़ीकरण के लिए वन भूमि स्वीकृति के बाद पेड़ चिह्नित करने की प्रक्रिया पूरी हो गयी है। अवशेष शारदा रेंज के आठ किमी मार्ग पर करीब चार सौ पेड़ों की गिनती कर ली है। अनुमति मिलते ही पेड़ों का कटान शुरू हो जाएगा। मार्ग का निर्माण होने पर टनकपुर से जौलजीवी का सफर तीन घंटे में पूरा हो सकेगा। कुछ वर्ष पूर्व केंद्र सरकार ने काली नदी के किनारे टनकपुर-जौलजीवी मार्ग के निर्माण के लिए 520 करोड़ रुपये अनुमोदित किए थे। मार्ग पर वन भूमि आने से लोनिवि की कवायद ठंडी पड़ गयी थी। विभागीय सूत्रों के अनुसार करीब 172 किमी मार्ग के सर्वे का जिम्मा राजस्थान की एक फर्म को सौंपा गया है। प्रथम चरण में वन मंत्रालय से ककराली गेट से ठूलीगाड़ तक 12 किमी मार्ग के चौड़ीकरण के लिए वन भूमि की स्वीकृति मिली है। इधर, लोनिवि के जेई जय सिंह खोलिया ने बताया कि बूम रेंज के अंतर्गत चार किमी मार्ग पर पड़ने वाली वन भूमि में पेड़ों की गिनती हो चुकी है। सात फरवरी को हल्द्वानी प्रभाग के अंतर्गत शारदा रेंज में पड़ने वाले 8 किमी मार्ग पर पेड़ों की गिनती प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें करीब चार सौ से अधिक पेड़ आ रहे हैं। इसकी रिपोर्ट से ईई को अवगत करा दिया गया है। इसमें वन विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त टीम ने गणना की। डीएफओ एसपी सिंह ने बताया कि अपर प्रमुख वन संरक्षक देहरादून को वन भूमि में पेड़ों के कटान के लिए लोनिवि द्वारा अनुमति मांगी गयी है। स्वीकृति मिलने के बाद छपान व कटान की कार्रवाई हो सकेगी। टुकड़ों में ही सही जैसे-जैसे वन भूमि मिलेगी सड़क निर्माण प्रक्रिया तेज हो सकेगी। इससे भविष्य में टनकपुर से जौलजीवी का सफर तीन घंटे में पूरा करने का सपना पूरा हो सकेगा। मार्ग के निर्माण से सीमावर्ती क्षेत्रों के दूरस्थ अंचलों में विकास की बयार पहुंच जाएगी।

विनोद सिंह गढ़िया

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तुमूल गलत बटन दबै राखा..

कस्टमर की ‘केयर’ अब कुमाऊंनी, गढ़वाली में

मोबाइल में टाल फ्री नंबर पर बात करते हुए अगर आप सुन लें, माफ करया..तुमूल गलत बटन दबै राखा, कृपया कर बेर सही बटन दबाया..तो चौंकिये नहीं। अब तक मोबाइल कंपनियां उपभोक्ताओं को तमाम टाल फ्री नंबरों पर हिंदी, अंग्रेजी में ही सेवाएं दे रही थीं। उसके बाद नंबर आया पंजाबी आदि बड़े समुदाय की भाषाओं का। बात बढ़ते-बढ़ते अब घोर स्थानीय होते हुए कुमाऊंनी, गढ़वाली तक भी पहुंच चुकी है।
आइडिया के टाल फ्री नंबर 53533 पर डायल करते हुए आपको सुनाई देगा..आइडिया कस्टमर केयर में आपका स्वागत है, हिंदी के लिए एक दबाएं और इसके बाद, गढ़वाली के दो तीन दबाएं, कुमाऊंनी भाषा के लिए तीन दबाएं..। कुमाऊंनी या गढ़वाली आप्शन चुनने के बाद फिर आपको अन्य आप्शन मिलेंगे और गलत बटन दबाने पर फिर वही कुमाऊंनी या गढ़वाली वाला टेप बजेगा। आप्शन बटन पर आपको सारी बातें कुमाऊंनी या गढ़वाली में ही बताई जाएंगी। मसलन, आपण रिचार्ज राशि जाणना लिजी एक दबाया.. आदि आदि। फिलहाल आइडिया के टाल फ्री नंबर पर ही कुमाऊंनी, गढ़वाली में बातचीत का टेप बज रहा है। मोबाइल सेवा के जानकारों का कहना है कि स्थानीय भाषा को प्रमोट करने का कंपनियों का मकसद वहां लोगों के बीच अधिक से अधिक लोकप्रियता पाना है। मोबाइल क्रांति के इस दौर में कुछ दिनों बाद कस्टर केयर पर बातचीत कुमाऊंनी में होने लगे तो कोई आश्चर्य नहीं।

श्रोत : अमर उजाला

नवीन जोशी

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Re: Uttarakhand News - उत्तराखंड समाचार
« Reply #42 on: February 14, 2012, 12:19:08 AM »
डीएम कर सकेंगे जमीन ट्रांसफर
परियोजनाओं के लिए सिविल सोयम भूमि का मामला वन भूमि व सिविल सोयम भूमि की वजह से अटकी पड़ी हैं 418 परियोजनाएं कार्य मे तेजी लाने के लिए सिविल सोयम भूमि को वन रक्षित स्तर के लिए किया मुक्त
देहरादून(एसएनबी)। वन भूमि व सिविल सोयम भूमि के दायरे में आने वाली करीब 418 परियोजनाओं के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इस संबंध में शासन ने सभी जिलाधिकारियों को सिविल सोयम भूमि के दायरे में आने वाली परियोजनाओं के लिए भूमि को संबंधित विभाग को सीधे ट्रांसफर करने के निर्देश दिए है, ताकि परियोजना में शीघ्र कार्य करवाया जा सके। विगत दिनों प्रदेश सरकार ने 20 हजार हैक्टेयर सिविल सोयम भूमि को वन रक्षित स्तर से मुक्त कर राजस्व विभाग के अधीन कर दिया था। इससे वन रक्षित स्तर वाली भूमि पर परियोजनाओं के निर्माण का रास्ता साफ हो गया। साथ ही वन भूमि हस्तांतरण के लिए भूमि उपलब्ध न होने के चलते वन भूमि क्षेत्र में आने वाली परियोजनाओं के निर्माण का रास्ता भी साफ हो गया है। इस संबंध विगत दिनों शासनादेश जारी होने के बाद जिले स्तर पर धीमी प्रगति को देखते हुए सोमवार को मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने वीडियों कांफ्रेंस के माध्यम से जिलाधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने कहा कि सभी जिलाधिकारी जिले स्तर पर सिविल सोयम भूमि का लैण्ड बैंक बनाकर परियोजनाओं के लिए वह अपने अपने जिले में भूमि का चयन कर उसे वन विभाग को हस्तांतरित करें। इसके बाद क्षतिपूर्ति बनीकरण से विकास कार्य नहीं रूकेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 418 मामले जो वन भूमि हस्तांतरण व सिविल सोयम भूमि होने की वजह से रूके हुये थे, उन कायरे में अब तेजी लायी जाए। मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने बताया कि पूरे प्रदेश में 20 हजार हैक्टेयर भूमि का लैण्ड बैंक बनना है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि वे अपने अपने जिले में भूमि का चयन कर उसे वन विभाग को हस्तांतरित करें। इसके बाद क्षतिपूर्ति बनीकरण से विकास कार्य नहीं रूकेंगे। इसी खाते में से क्षतिपूर्ति होती रहेगी। उन्होंने बेनाप भूमि की अधिसूचना निरस्त करने के बाद के स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि अब जिलाधिकारी अपने स्तर से भूमि का हस्तांतरण कर सकेंगे। अब फॉरेस्ट क्लिीयरेंस की वजह से विकास सम्बन्धी कायरे में अड़चन नहीं आयेगी। उन्होंने बताया कि इस अधिसूचना को निरस्त करने का मकसद यही था। सभी जिलाधिकारी इस मकसद को समझते हुए विकास कायरे में तेजी लाये। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के इस निर्णय से पिथौरागढ़ में 100, नैनीताल में 88, अल्मोड़ा में 28, चम्पावत में 11, टिहरी में 46, बागेर में 1, रूद्रप्रयाग में 20, चमोली में 141, उत्तरकाशी में 30, पौड़ी में 38, देहरादून में 31 विकास कायरे को गति मिल सकेगी। इसके साथ ही मुख्य सचिव ने फ्लैगशिप कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए सम्बन्धित अधिकारियों को फरवरी और मार्च महीने का लक्ष्य निर्धारित किया। उन्होंने जनपदवार और कार्यक्रमवार लक्ष्य तय किया। उन्होंने कहा कि वह एक मार्च को वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से फिर से प्रगति की समीक्षा करेंगे। केंद्र से फ्लैगशिप कार्यक्रमों के लिए इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में ज्यादा धनराशि प्राप्त हुई है। मुख्य सचिव ने बीआरजीएफ, मनरेगा, पीएमजीएसवाई आदि कार्यक्रमों के वित्तीय और भौतिक प्रगति की समीक्षा करते हुए लक्ष्य से पीछे चल रहे अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। साथ ही अच्छा कार्य करने वाले अधिकारियों की सराहना भी की। बैठक में मुख्य वन संरक्षक डा. आरबीएस रावत, मुख्य राजस्व आयुक्त पीसी शर्मा, प्रमुख सचिव गृह उत्पल कुमार सिंह, सचिव पंचायतीराज पीएस गुसाईं, आयुक्त गढ़वाल मण्डल अजय नबियाल, सचिव ग्राम्य विकास विनोद फोनिया, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा डॉ़ निधि पाण्डेय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

नवीन जोशी

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गढ़िया जी, बढ़िया खबर सुनाने के लिए आभार,  यह खबर अमर उजाला के किस अंक में कहाँ छपी थी ?
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कस्टमर की ‘केयर’ अब कुमाऊंनी, गढ़वाली में

मोबाइल में टाल फ्री नंबर पर बात करते हुए अगर आप सुन लें, माफ करया..तुमूल गलत बटन दबै राखा, कृपया कर बेर सही बटन दबाया..तो चौंकिये नहीं। अब तक मोबाइल कंपनियां उपभोक्ताओं को तमाम टाल फ्री नंबरों पर हिंदी, अंग्रेजी में ही सेवाएं दे रही थीं। उसके बाद नंबर आया पंजाबी आदि बड़े समुदाय की भाषाओं का। बात बढ़ते-बढ़ते अब घोर स्थानीय होते हुए कुमाऊंनी, गढ़वाली तक भी पहुंच चुकी है।
आइडिया के टाल फ्री नंबर 53533 पर डायल करते हुए आपको सुनाई देगा..आइडिया कस्टमर केयर में आपका स्वागत है, हिंदी के लिए एक दबाएं और इसके बाद, गढ़वाली के दो तीन दबाएं, कुमाऊंनी भाषा के लिए तीन दबाएं..। कुमाऊंनी या गढ़वाली आप्शन चुनने के बाद फिर आपको अन्य आप्शन मिलेंगे और गलत बटन दबाने पर फिर वही कुमाऊंनी या गढ़वाली वाला टेप बजेगा। आप्शन बटन पर आपको सारी बातें कुमाऊंनी या गढ़वाली में ही बताई जाएंगी। मसलन, आपण रिचार्ज राशि जाणना लिजी एक दबाया.. आदि आदि। फिलहाल आइडिया के टाल फ्री नंबर पर ही कुमाऊंनी, गढ़वाली में बातचीत का टेप बज रहा है। मोबाइल सेवा के जानकारों का कहना है कि स्थानीय भाषा को प्रमोट करने का कंपनियों का मकसद वहां लोगों के बीच अधिक से अधिक लोकप्रियता पाना है। मोबाइल क्रांति के इस दौर में कुछ दिनों बाद कस्टर केयर पर बातचीत कुमाऊंनी में होने लगे तो कोई आश्चर्य नहीं।

श्रोत : अमर उजाला


विनोद सिंह गढ़िया

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Re: Uttarakhand News - उत्तराखंड समाचार
« Reply #44 on: February 14, 2012, 01:55:45 AM »
जोशी जी पैलाग...
मोबाइल कंपनी आईडिया द्वारा अपने टोल फ्री नंबर पर हमारी बोली कुमाऊंनी और गढ़वाली में  बातचीत का टेप शुरू किया है, इसकी खबर मुझे अमर उजाला के 13 फरवरी 2012 के अंक से प्राप्त हुई। यह खबर पृष्ठ संख्या 9 में छपी थी।


गढ़िया जी, बढ़िया खबर सुनाने के लिए आभार,  यह खबर अमर उजाला के किस अंक में कहाँ छपी थी ?
तुमूल गलत बटन दबै राखा..

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नवीन जोशी

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Re: Uttarakhand News - उत्तराखंड समाचार
« Reply #45 on: February 15, 2012, 12:34:03 AM »
पंत विवि की प्रवेश प्रक्रिया शुरू
पंतनगर: पंत विश्र्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गयी है। विवि के प्रवेश अनुभाग के निर्धारित कार्यक्रम के तहत पीएचडी, परास्नातक व एमसीए पाठ्यक्रमों में प्रवेश 2 जून को तथा विभिन्न स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश 3 जून को प्रतियोगिता परीक्षा होगी। स्नातक पाठ्यक्रमों के तहत कृषि, फूड सांइस, पशुचिकित्सा विज्ञान फिशरीज व गृह विज्ञान की परीक्षाओं सहित अन्य पीएचडी व परास्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश से संबधित आवेदन पत्रों की बिक्री पंत विवि के प्रवेश अनुभाग के साथ ही अन्य प्रतिष्ठानों के माध्यम से शुरू हो चुकी है। आवेदन पत्र 3 अप्रैल तक उपलब्ध होंगे। इसके बाद 11 अप्रैल तक आवेदन पत्रों की प्राप्ति विलम्ब शुल्क के साथ होगी। प्रदेश के दूरदराज के अभ्यार्थियों को भी आवेदन पत्र सुलभ कराने की विभिन्न डाक घरों के माध्यम से व्यवस्था की गई है। इसके तहत आवेदन पत्र 26 मार्च तक अल्मोड़ा, रानीखेत, बागेश्र्वर, द्वाराहाट, स्याल्दे, गोपेश्र्वर, जोशी मठ, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग देहरादून, रुड़की, हरिद्वार, ऋषिकेश, नैनीताल, पंतनगर, रुद्रपुर, काशीपुर, रामनगर, हल्द्वानी, किच्छा, खटीमा, पौड़ी, लैंसडाउन, कोटद्वार, श्रीनगर, पिथौरागढ़, चंपावत, धारचूला लोहाघाट, डीडीहाट, चम्बा, नरेन्द्रनगर पोस्ट आफिस के साथ ही लखनऊ व नई दिल्ली स्थित जीपीओ में उपलब्ध होंगे।

सौजन्य: राष्ट्रीय सहारा

नवीन जोशी

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Re: Uttarakhand News - उत्तराखंड समाचार
« Reply #46 on: February 16, 2012, 11:41:15 PM »
नागालैंड को महकाएगा उत्तराखंडी कीवी
संजय वर्मा, भवाली उत्तराखण्ड के कीवी की खुशबू अब नार्थ ईस्ट नागालैण्ड में महकेगी। प्रदेश के नैनीताल जनपद के भवाली के समीप निगलाट में एनबीपीजीआर के वैज्ञानिकों के दो दशकों की कठिन मेहनत के चलते यह संभव हो पाया है। राष्ट्रीय पादप अनुसंधान केन्द्र निगलाट के द्वारा वर्ष 1990 से कीवी की पौध का प्रचार प्रसार किया जा रहा है। जहां से पूरे उत्तराखंड में वीपीकेएस अल्मोड़ा के सहयोग से कीवी की पौध पहंुचायी जा रही है। एनबीपीजीआर निगलाट के दिशा निर्देशन में ग्राम निगलाट के प्रगतिशील काश्तकार सगत सिंह मेहरा के मेहरा पौधालय में भी कीवी की गुणवत्ता युक्त पौध का उत्पादन किया जा रहा है। एनबीपीजीआर निगलाट के प्रधान वैज्ञानिक एसके वर्मा ने बताया कि उच्च गुणवत्ता वाले कीवी पौधों की खुशबू सुदूर नार्थ ईस्ट राज्यों तक फैली है। जिससे प्रेरित होकर आइसीएआर रिसर्च कांप्लेक्स बारापानी के निदेशक और संयुक्त निदेशक नागालैण्ड ने यहां से कीवी की पौध को मंगाया है। डा. वर्मा ने बताया कि केन्द्र की वैज्ञानिक टीम के डा. एके त्रिवेदी, डा. एसके नेगी, डा. पीएस मेहता, आरआर आर्या, रमित जोशी ने कठिन परिश्रम से तैयार कर नागालैण्ड के सदस्यों को 5000 ग्रैफटेड कीवी की पौध की पहली खेप दी गयी है। साथ ही केन्द्र व प्रदेश के राजकीय एवं अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं को भी रूट स्टाक व गैफटेड पौध उपलब्ध करा रहा है। जिससे प्रदेश अपनी ख्याति कीवी फल प्रबंधन में अग्रणी रख सके। जिसके लिए विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के निदेशक की सहमति से निदेशालय के माध्यम से प्रत्येक जनपद तक कीवी को फैलाने का कार्य तेजी के साथ किया जा रहा है। केन्द्र में दो दशकों से कीवी जननद्रव्य का संकलन, मूल्यांकन, तुलनात्मक अध्ययन व संकर प्रजाति का उत्पादन कार्य भी चल रहा है। जननद्रव्य संकलन में नर प्रजाति तोमुरी तथा मादा प्रजाति एबट, एलीसन, ब्रूनों, हैवार्ड, मोन्टी व रेड कीवी है। जिसका बाजार भाव वर्तमान में 100 रुपया किलो तक है। केन्द्र के वैज्ञानिकों का मानना है कि शीघ्र ही उत्तराखंड कीवी नार्थ ईस्ट के अलावा अन्य राज्यों के पर्वतीय क्षेत्रों में भी अपना परचम लहरायेगा।
सौजन्य: [url]दैनिक जागरणhttp://in.jagran.yahoo.com/epaper/index.php?location=14&edition=2012-02-17&pageno=5#id=111733472771192792_14_2012-02-17[url]

नवीन जोशी

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Re: Uttarakhand News - उत्तराखंड समाचार
« Reply #47 on: February 16, 2012, 11:44:26 PM »
‘पंचेश्वर’ पर जगी ‘उम्मीद’
भारत और नेपाल ने पंचेर विकास प्राधिकरण के कार्य में तेजी लाने का फैसला लिया दोनों देशों के जल संसाधन मंत्रालयों के संयुक्त आयोग की पहली बैठक में बनी सहमति

अरविंद शेखर/एसएनबी देहरादून। उत्तराखंड- नेपाल सीमा पर काली नदी पर बनने वाली पंचेर बहुउद्देश्यीय परियोजना को लेकर उम्मीद जग गई है। 40 से 50 हजार करोड़ रुपये का लागत की यह परियोजना लंबे समय से लटकी हुई है। 6480 मेगावाट की इस परियोजना को लेकर भारत और नेपाल ने अपने जल संसाधन मंत्रालयों का आयोग भी बनाया है। बुधवार को नई दिल्ली में संयुक्त आयोग की बैठक के बाद लगता है कि दोनों देश पंचेर बांध निर्माण की ओर तेजी से बढ़ेंगे। सूत्रों की मानें तो बैठक में दोनों देशों ने पंचेर विकास प्राधिकरण के कार्य में तेजी लाने का फैसला लिया है। ताकि पंचेर बहुउद्देश्यीय योजना जल्द पूरी हो सके। बैठक में दोनों देशों के बीच यह सहमति बनी है कि सप्तकोसी हाइ डैम बहुउद्देश्यीय परियोजना व सन कोसी स्टोरेज कम डाइवर्जन स्कीम की डीपीआर इस अगले साल फरवरी तक पूरा कर लिया जाए यही नहीं बैठक में संयुक्त परियोजना कार्यालयों को और मजबूती देने पर भी सहमति बनी। संयुक्त जल संसाधन आयोग ने कोसी और गंडक परियोजनाओं के निर्माण में आ रही विभिन्न परेशानियों को दूर करने पर पर भी विचार किया। नेपाल के हिस्से की भूमि के मुआवजे व फसलों के मुआवजे पर भी विचार किया गया। यही नहीं गंडक परियोजना में के लिए सामग्री और उपकरणों के कर रहित आवाजाही की सुविधा का भी परीक्षण करने पर विचार हुआ। बाढ़ रोकने व उसके प्रबंधन पर दोनों देशों के सहयोग को भी सराहा गया और पारदेशीय नदियों के पानी के प्रबंधन पर विचार हुआ। आयोग ने सिफारिश की है कि नेपाल कोसी के जिस 15 किमी किनारे की देखरेख करता है उसमें भारत भी मदद दे। बैठक में नेपाल द्वारा डाली जा रही 400 केवी की मुजफ्फरपुरढ लकेबार बिजली लाइन की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया गया और अगले छह माह में नेपाल को 75 मेगावाट बिजली देने के लिए बन रहे ट्रासमिशन लिंक की प्रगति पर भी संतोष व्यक्त किया गया। आयोग ने क्रास बार्डर इंटरकनेक्शन के लिए नेपाल से मिले विद्युत ऊर्जा व्यापार समझौते मसौदे के समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने की भी सिफारिश की। दूसरी क्रास बार्डर इटरकनेक्शन ट्रांसमिशन लाइन के संयुक्त विकास पर भी जोर दिया। बैठक में केंद्रीय जल संसाधन एवं संसदीय मामलों के मंत्री पवन कुमारबंसल, नेपाल के ऊर्जा मंत्री पोस्ता बहादुर बोगती, नेपाल के सिंचाई मंत्री महेंद्र प्रसाद यादव, जल संसाधन व अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री विंसेंट एच पाला, बिहार के जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, व बिहार, उप्र, उत्तराखंड व पश्चिमी बंगाल के अफसरों ने हिस्सा लिया।

सौजन्य: राष्ट्रीय सहारा http://rashtriyasahara.samaylive.com/epapermain.aspx?queryed=14

नवीन जोशी

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Re: Uttarakhand News - उत्तराखंड समाचार
« Reply #48 on: February 16, 2012, 11:47:32 PM »
राज्य में 40 हेलीपैड बनाएगी सेना
23,216 एकड़ भूमि देने पर बनी सहमति

देहरादून (एसएनबी)। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उत्तराखण्ड में सेना करीब 40 स्थानों पर हेलीपैड बनाने जा रही है। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य योजनाओं पर भी कार्य किया जाना है। इसके लिए सेना को करीब 23,216 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। प्रदेश सरकार ने सेना को भूमि उपलब्ध कराने के लिए सहमति दे दी है। भूमि चयन के लिए सेना व स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीम गठित की गई है। चीन और नेपाल की सीमा से लगे उत्तराखंड को सामरिक दृष्टि के महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास तौर पर जिस तरह से सीमा पर चीन की गतिविधियां बढ़ती जा रही है। उसको देखते हुए सेना ने भी तैयारियां करनी शुरू कर दी है। इसको देखते हुए सेना उत्तराखंड में विभिन्न परियोजनाएं पर कार्य कर रहा है। इसके लिए सेना को काफी भूमि की आवश्यकता है। इस सम्बन्ध में मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने वृहस्पतिवार को सचिवालय में सेना के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में सेना को भूमि उपलब्ध कराने पर सैद्धांतिक सहमति जता दी गई है। इस संबंध में अनापत्ति प्रमाण पत्र 10 दिन में दे दिया जायेगा। भूमि की उपलब्धता के आधार पर सेना को जमीन दी जाएगी। उन्होंने कमिनर गढ़वाल और कुमाऊं को निर्देश दिये कि भूमि का चयन कर लें। इसके लिए सेना के फील्ड आफिसर्स के साथ संयुक्त सव्रेक्षण भी कर लिया जाय। सेना को औली, अल्मोड़ा, बनबसा, चर्मागाड़, छियालेख, धरासू, देहरादून, धारचूला, घनसाली, घटौली, गुंजी, हल्द्वानी, हषिर्ल, हेमपुर, जोशीमठ, कौसानी, मलारी, माणा, मुनस्यारी, नरेन्द्रनगर, नेलांग, पंतनगर, पिथौरागढ़, रायवाला, रुड़की, रुद्रप्रयाग, सिरकटा, सोबला, तपोवन, तेदांग और 13 स्थानों पर हैलीपेड बनाने के लिए भूमि की आवश्यकता है। बैठक में मुख्य राजस्व आयुक्त पीसी शर्मा, प्रमुख सचिव न्याय डीपी गैरोला, सब एरिया कमाण्डर मेजर जनरल रणवीर यादव, सचिव राजस्व कुंवर राजकुमार, कमिश्नर गढ़वाल अजय नबियाल, प्रभारी जिलाधिकारी देहरादून सुशील कुमार आदि उपस्थित थे।

सौजन्य: राष्ट्रीय सहाराhttp://rashtriyasahara.samaylive.com/epapermain.aspx?queryed=14

नवीन जोशी

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Re: Uttarakhand News - उत्तराखंड समाचार
« Reply #49 on: February 18, 2012, 12:49:23 PM »
किसी की भी सरकार बने, मैदान से ही बनेगा पर्वतीय प्रदेश उत्तराखंड का मुख्यमंत्री...
विकास धूलिया, देहरादून मैदानी क्षेत्र से डिप्टी सीएम बनाए जाने का शिगूफा उछलने के बाद अब इस मुद्दे पर सूबे में व्यापक जनाधार रखने वाली दोनों राष्ट्रीय पार्टियां, भाजपा और कांग्रेस साफतौर पर दोफाड़ हो गई हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिस कांग्रेस की तरफ से यह मांग सुनियोजित तरीके से उठाई गई, इस चुनाव में उसके मुख्यमंत्री पद के दो प्रबल दावेदार केंद्रीय मंत्री हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य मैदानी क्षेत्र की नुमाइंदगी कर रहे हैं या करने की तैयारी में हैं। उधर, भाजपा के प्रोजेक्टेड सीएम भुवन चंद्र खंडूड़ी व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक भी इस दफा मैदानी सीटों से ही चुनाव मैदान में हैं।
कांगे्रस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री तिलकराज बेहड़ के डिप्टी सीएम मैदान या तराई से बनाए जाने की हिमायत करने संबंधी बयान से इस विवाद की शुरुआत हुई लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा किसी को सीएम प्रोजेक्ट न किए जाने के बावजूद जिन दो वरिष्ठ नेताओं को मुख्यमंत्री पद की दौड़ में अव्वल माना जा रहा है, वे खुद मैदान से ही हैं। ये हैं हरिद्वार के सांसद और केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री हरीश रावत और पार्टी प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य। हरीश रावत उस लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जो सबसे अधिक विधानसभा सीटों वाला मैदानी जिला है। रावत के अलावा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य को भी इस पद पर दो बार के तजुर्बे और पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी के जोरदार प्रदर्शन के कारण मुख्यमंत्री की कुर्सी की दौड़ में आगे माना जा रहा है। आर्य अब तक तो नैनीताल जिले की मुक्तेश्र्वर विधानसभा सीट की नुमाइंदगी करते रहे हैं और अब नए परिसीमन में इस सीट के खत्म हो जाने के बाद पड़ोसी जिले ऊधमसिंह नगर की बाजपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। गौरतलब है कि ऊधमसिंह नगर जिला हरिद्वार के बाद दूसरा ऐसा सबसे बड़ा मैदानी जिला है, जहां सबसे ज्यादा विधानसभा सीटें हैं। यही नहीं, सीएम पद की एक और दावेदार पूर्व मंत्री डॉ. इंदिरा हृदयेश खुद नैनीताल जिले की मैदानी भूगोल वाली सीट हल्द्वानी से विधायक रही हैं और इस दफा भी यहीं से चुनाव मैदान में हैं। दिलचस्प बात यह है कि लगभग यही स्थिति भाजपा में भी है। भाजपा ने मौजूदा मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी को ही सीएम प्रोजेक्ट कर चुनाव लड़ा। खंडूड़ी अब तक पौड़ी जिले की पहाड़ी भूगोल वाली धुमाकोट सीट के विधायक हैं लेकिन इस दफा वह इसी जिले की जिस कोटद्वार सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, वह पूरी तरह मैदानी सीट है। यही नहीं, भाजपा के दूसरे वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक भी इस बार पौड़ी जिले की पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों वाली थलीसैंण सीट की बजाए देहरादून जिले की पूरी तरह मैदानी सीट डोईवाला से विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा रहे हैं।

 

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