Author Topic: Enrich Your Knowledge On Uttarakhand - उत्तराखंड के बारे संक्षिप्त जानकारी  (Read 78768 times)

राजेश जोशी/rajesh.joshee

  • Sr. Member
  • ****
  • Posts: 406
  • Karma: +10/-0
Re: ENRICH YOUR KNOWLEDGE ON UTTARAKHAND – (GK )
« Reply #40 on: October 27, 2007, 01:48:37 PM »
मेहता जी
बहुत ही अच्छा टोपिक है पर मैं कुछ संशोधन करना चाहूँगा आपने चाय के बारे में जो जानकारी दी है वह  up    टू date नही है   ठाकुर दानसिंह देवसिंह मालदार अब नही रहे उनके नाम से नैनीताल का  डीएसबी कॉलेज बना है. दूसरा कुमाऊँ केशरी के नाम से डॉ. बदरी दत्त पण्डे को जाना जाता था जिन्होंने कुमाऊँ का इतिहास पुस्तक लिखी है.
रोचक जानकारी देने के लिए आपका बहुत धन्यवाद

राजेश जोशी/rajesh.joshee

  • Sr. Member
  • ****
  • Posts: 406
  • Karma: +10/-0
Re: ENRICH YOUR KNOWLEDGE ON UTTARAKHAND – (GK )
« Reply #41 on: October 27, 2007, 01:59:53 PM »
मेहता जी
कुमाऊँ की झीलों की जानकारी अधूरी है कृपया दुबारा पोस्ट करें भीमताल झील की लम्बाई सही नही है.  अन्य झीलों में नौकुचियाताल, सातताल, खुरपाताल, नल दमयंती ताल, मल्वाताल, सुखा ताल हैं. इसके अलावा पिथोरागढ़ और चम्पावत जनपद में भी झीतें हैं.
कृपया झीलों के बारे विस्तृत जानकारी देने की कृपा करें आपका एडवांस में बहुत धन्यवाद

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,904
  • Karma: +76/-0
Re: ENRICH YOUR KNOWLEDGE ON UTTARAKHAND – (GK )
« Reply #42 on: October 27, 2007, 02:20:07 PM »

Rajesh Ji,

thanx  update...

मेहता जी
बहुत ही अच्छा टोपिक है पर मैं कुछ संशोधन करना चाहूँगा आपने चाय के बारे में जो जानकारी दी है वह  up    टू date नही है   ठाकुर दानसिंह देवसिंह मालदार अब नही रहे उनके नाम से नैनीताल का  डीएसबी कॉलेज बना है. दूसरा कुमाऊँ केशरी के नाम से डॉ. बदरी दत्त पण्डे को जाना जाता था जिन्होंने कुमाऊँ का इतिहास पुस्तक लिखी है.
रोचक जानकारी देने के लिए आपका बहुत धन्यवाद

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 2,865
  • Karma: +27/-0
Re: ENRICH YOUR KNOWLEDGE ON UTTARAKHAND – (GK )
« Reply #43 on: October 27, 2007, 03:01:01 PM »
Thanks Rajesh ji for pointing out the errors in the details.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,904
  • Karma: +76/-0
Re: ENRICH YOUR KNOWLEDGE ON UTTARAKHAND – (GK )
« Reply #44 on: November 02, 2007, 09:59:10 AM »

Folk Songs And Dances

Jhumallo, Thadya, Chaunfla, Rasau, Pandwana, Tandi, Bhadgeet, Jaagar, Chaanchri, Chholia etc
 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,904
  • Karma: +76/-0
Re: ENRICH YOUR KNOWLEDGE ON UTTARAKHAND – (GK )
« Reply #45 on: November 14, 2007, 09:40:03 AM »

FAMOUS FAIR OF UTTARAKHAND & THE MONTH THEY ARE CELEBRATED


 
Bishwat Sankranti  Karanprayag, Nandprayag  April 
Bikhot  Agastyamuni  April 
Bhaikhal Mela  Bhaikhaltal   August 
Gauchar Mela  Gauchar  November 
Jwalpa Navratra meta  Jwalpa  - 
Krishna Mela  Joshimath  November 
Kaviltha  Kaviltha   June 
Kubjapuri mela  Tehri  - 
Gauchar Mela  Gauchar  November 
Nanda Devi  Nauti  March 
Nanda Devi  Bedni Bugyal   September 
Nanda Devi  Lata  Sept-Oct. 
Kamleshwar mela  Srinagar  - 
Jwajivi  Pithoragarh  - 
Poornagiri  Champawat  Mar - April 
Uttarayini  Bageshwar  January 
Tarkeshwar mela  Lancedawn  - 
 
Some famous festivals of Uttranchal are :

1. Makar Sankranti (January).
2. Basant Panchmi (Jan - Feb).

3. Shivaratri (Feb).

4. Nandasthmi (March).

5. Fool Dhai Chamma Dhai ( March)

6. Holi (March).

7. Baisakhi (April).

8. Rakshabandhan (August).

9. Mata Murti (September).

9. Janamasthami (August - September).

10. Lekhpal (September)

11. Dusshera ( Danshe) (October).

12. Deepawali (Baghwav) (November).


Information source : M Lal Dhondiyal <ml.dhoundiyal@gmail.com>   

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,904
  • Karma: +76/-0
Re: ENRICH YOUR KNOWLEDGE ON UTTARAKHAND – (GK )
« Reply #46 on: November 14, 2007, 09:47:56 AM »
पारंपरिक लोक कला भगनौल अब विलुप्ति की ओरNov 14, 02:26 am

चौखुटिया(अल्मोड़ा)। एक समय में उत्तराखंड की पारंपरिक लोक कला भगनौल, चांचरी व छपेली का अपना खास महत्व हुआ करता था, लेकिन आज बदलते जमाने के साथ ही ये लोक विधायें विलुप्ति की ओर है। अब इनका स्थान बैण्ड-बाजों व पाश्चात्य संस्कृति ने ले लिया है। फिर भी 'भगनौल' जैसी लोक कला की झलक यदा-कदा देखने को मिल जाती है।

बुजुर्ग कलाकार बताते है कि पूर्व में 'भगनौल' उत्तराखंड की मुख्य लोक संगीत में शुमार रहा है। वर्तमान पीढ़ी में इसे भुला सा दिया गया है। इससे अब कुछ ही बुजुर्ग कलाकार जुड़े रह गये है। 'भगनौल' की प्रस्तुति का अनोखा तरीका है। इसमें लय, ताल व नृत्य के साथ हुड़के की थाप पर गायक द्वारा गीत शुरू किया जाता है, फिर अन्य लोग गीत को सामुहिक रूप से दोहराने के साथ नृत्य करते है। इसके बाद बांसुरी की सुमधुर धुन व हुड़के की थाप के अनूठे संगम से नृत्य का विशेष वातावरण तैयार हो जाता है। फिर गीतों में ही एक दूसरे कलाकार से सवाल किये जाते है तथा गीतों में उनका उत्तर देना होता है।

भगनौल गीत स्थानीय परिवेश पर आधारित होते है। जिन्हे विविध रूपों व गायन के साथ प्रस्तुत किया जाता है। जो सम सामयिक, धार्मिक, भाव मूलक व प्रेम प्रसंगों आदि पर आधारित होते है। रंग कर्मी जसी राम आर्य का कहना है कि आज इन लोक कलाओं को संव‌र्द्घन किये जाने की जरूरत है। उनकी संस्था धाद इस दिशा में प्रयास कर रही है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,904
  • Karma: +76/-0
Re: ENRICH YOUR KNOWLEDGE ON UTTARAKHAND – (GK )
« Reply #47 on: November 14, 2007, 04:17:46 PM »


Culture point of view. This is not a good news.

tough challenge for new generation to keep it alive.

पारंपरिक लोक कला भगनौल अब विलुप्ति की ओरNov 14, 02:26 am

चौखुटिया(अल्मोड़ा)। एक समय में उत्तराखंड की पारंपरिक लोक कला भगनौल, चांचरी व छपेली का अपना खास महत्व हुआ करता था, लेकिन आज बदलते जमाने के साथ ही ये लोक विधायें विलुप्ति की ओर है। अब इनका स्थान बैण्ड-बाजों व पाश्चात्य संस्कृति ने ले लिया है। फिर भी 'भगनौल' जैसी लोक कला की झलक यदा-कदा देखने को मिल जाती है।

बुजुर्ग कलाकार बताते है कि पूर्व में 'भगनौल' उत्तराखंड की मुख्य लोक संगीत में शुमार रहा है। वर्तमान पीढ़ी में इसे भुला सा दिया गया है। इससे अब कुछ ही बुजुर्ग कलाकार जुड़े रह गये है। 'भगनौल' की प्रस्तुति का अनोखा तरीका है। इसमें लय, ताल व नृत्य के साथ हुड़के की थाप पर गायक द्वारा गीत शुरू किया जाता है, फिर अन्य लोग गीत को सामुहिक रूप से दोहराने के साथ नृत्य करते है। इसके बाद बांसुरी की सुमधुर धुन व हुड़के की थाप के अनूठे संगम से नृत्य का विशेष वातावरण तैयार हो जाता है। फिर गीतों में ही एक दूसरे कलाकार से सवाल किये जाते है तथा गीतों में उनका उत्तर देना होता है।

भगनौल गीत स्थानीय परिवेश पर आधारित होते है। जिन्हे विविध रूपों व गायन के साथ प्रस्तुत किया जाता है। जो सम सामयिक, धार्मिक, भाव मूलक व प्रेम प्रसंगों आदि पर आधारित होते है। रंग कर्मी जसी राम आर्य का कहना है कि आज इन लोक कलाओं को संव‌र्द्घन किये जाने की जरूरत है। उनकी संस्था धाद इस दिशा में प्रयास कर रही है।


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,904
  • Karma: +76/-0
"बेडू पाको बारो मासा"  के रचियता

क्या आप जानते है ????

उत्तराखंड के प्रसिद्ध गाना "बेडू पाको बारो मासा"  के रचियता प्रसिद्ध साहित्यकार - श्री बृजेन्द्र लाल साह थे ?
[/size][/size][/size][/size][/size]

Girish

  • Newbie
  • *
  • Posts: 28
  • Karma: +3/-0
About Uttaranchal state Bird " Himalayan Monal"

Found in Asia, including Afganistan, Bhutan, NE India,southern Tibet and Burma

Habitat : Open coniferous or mixed forests with bamboo

Average Size:
Length: 2 - 2 1/2 feet  Weight: 3 - 5 lbs.

Lifespan:
In the wild: Unknown
In captivity: Estimated at 10 - 12 years

Population Status:
Endangered

The Himalayan monal pheasant is found in high altitudes of up to 4000 feet.It shows greater seasonal movements than other pheasants in the area,moving to much lower altitudes of 2000 feet in the wintertime. Most of its day is spent foraging for food. They are excellent diggers, using their long,curved beak to dig up to ten inches under the ground. These pheasants are most often found in pairs or small groups maintaining defined home ranges,with males being more competitive and aggressive than females. Four to six pairs can be found in a half-mile radius.
This species of pheasant is extremely communicative, using both body displays and vocalizations. The wide range in their calls allows them to differentiate between contentment, aggression, alarm, and advertising for a mate. The males have intricate displays signaled by bobbing the crest on their heads and fanning their tail feathers.


Interesting Fact :  Himalayan Monal is also National bird of Nepal.


 

Sitemap 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22