Author Topic: History of Haridwar , Uttrakhnad ; हरिद्वार उत्तराखंड का इतिहास  (Read 30721 times)

Bhishma Kukreti

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पौरव  वंशी राजा विष्णु वर्मन व वृषभ वर्मन
Vishnu Varman and Vrishabh Varman Kings of Paurava Dynasty
हर्षवर्धन पश्चात बिजनौर , हरिद्वार , सहारनपुर का 'अंध युग' अर्थात तिमर युग  इतिहास- 9

Paurava dynasty in Dark/ Early Middle Age  of History of Haridwar, Bijnor , Saharanpur  -9

Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  286                   
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  286               


                  इतिहास विद्यार्थी :::  भीष्म कुकरेती 
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         विष्णु वर्मन व वृषभ वर्मन के बारे में कुछ अधिक जानकारी नहीं मिलतीं हैं। द्युतिवर्मन व वृषभ वर्मन की राज मुद्राओं में अंकित नामों से इनके बारे में जानकारी मिलती है।  संभवतया विष्णुव्रमण हर्ष काल में ब्रह्मपुर का स्थानीय शासक था हुएन सांग ने ब्रह्मपुर नरेश का उल्लेख नहीं किया हुआ है जिससे अनुमान लगता है कि ब्रह्मपुर विष्णु वर्मन का पैतृक राज्य न था।  डबराल अनुमान लगते हैं कि संभवतया वृषभ वर्मन ने हर्ष मृत्यु से रिक्त ता का लाभ उठाकर ब्रह्मपुर का शासन संभाला और पैतृक राज्य का जमा पहना दिया।  वृषभ वर्मन ने परम् भट्टारक महाधिराज जैसी स्वतंत्र उपाधि धारण नहीं की (1 ) 

सन्दर्भ :
 
1- Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page 414 , 415
 

Copyright@  Bhishma Kukreti , 2018

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Bhishma Kukreti

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पौरव  वंशी राजा श्री अग्निवर्मन

King Shri Agnivarman of Paurava Dynasty
हर्षवर्धन पश्चात बिजनौर , हरिद्वार , सहारनपुर का 'अंध युग' अर्थात तिमर युग  इतिहास- 10

Paurava dynasty in Dark/ Early Middle Age  of History of Haridwar, Bijnor , Saharanpur  -10

Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  287                   
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  287               


                  इतिहास विद्यार्थी :::  भीष्म कुकरेती 
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  द्युतिवर्मन व वृषताप शासन व राज्य मुद्रा में इस शासक का नाम शृयग्निवर्मन है और यह संधि लाखामंडल के ईश्वर वर्मा के शिलालेख  में नहीं मिलता।  (1 ) शासन में अग्निवर्मन को ब्राह्मण हितैषी कहा गया है।  विद्वानों का मत है बल चूँकि कुषाण काल से वर्णषकर अति हो गयी थी तो वर्णशंकर रोकने हेतु जाति प्रथा को प्रश्रय दिया गया और अग्नि वर्मन वर्ण शकर समाप्ति का समर्थक रहा होगा।  शासनों में इस  बारे  अधिक विवरण नहीं मिलता (1 ) इसे शत्रु मर्दन संज्ञा दी गयी है। 



सन्दर्भ :
 
1- Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page 414
 

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Middle Age King Agnivarman , History of Haridwar; Middle Age King Agnivarman , History of  Kankhal , Haridwar; Middle Age King Agnivarman , History of Jwalapur , Haridwar; Middle Age King Agnivarman , History  of  Rurki Haridwar; Middle Age King Agnivarman , History  of Haridwar; Middle Age King Agnivarman , History  of Laksar , Haridwar; Middle Age King Agnivarman , History  of  Saharanpur; Middle Age King Agnivarman , History of  Behat , Saharanpur; Middle Age King Agnivarman , History  of  Saharanpur; Middle Age King Agnivarman , History  of Nakur,  SaharanpurMiddle Age King Agnivarman , History of  Devband , Saharanpur; Middle Age King Agnivarman , History of  Bijnor ; Middle Age King Agnivarman , History  of  Bijnor ; Middle Age King Agnivarman , History  of  Nazibabad , BijnorMiddle Age King Agnivarman , History of  Bijnor; Middle Age King Agnivarman , History  of Nagina  Bijnor ; Middle Age King Agnivarman , History  of  Dhampur , Bijnor ; Middle Age King Agnivarman , History of  Chandpur Bijnor ; 
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पौरव वंशी राजाओं द्वारा नाग मंदिर हेतु भूमि दान

Paurava Kings donating land for Nag /Naga Temple Expenses
हर्षवर्धन पश्चात बिजनौर , हरिद्वार , सहारनपुर का 'अंध युग' अर्थात तिमर युग  इतिहास- 11

Paurava dynasty in Dark/ Early Middle Age  of History of Haridwar, Bijnor , Saharanpur  11

Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  288                 
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  288               


                  इतिहास विद्यार्थी :::  भीष्म कुकरेती 
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   महाराजधिराज द्युतिवर्मन
द्युतिवर्मन व नाग मंदिर
 अभिलेखों की राजमुद्रा पर द्युतिवर्मन का नाम द्विजवर्मन पढ़ा गया है उसके पुत्र विष्णु वर्मन द्वितीय के शासन में उसे द्युतिवर्मन पढ़ा गया है। उसे शत्रुओं का ड्यूटी हरने वाला बताया गया है। (1 )द्युतिवर्मन का विरुद राज्य मुद्रा में महाराजधिराज है।
    नाग मंदिर को भूमि दान
पौरव वंशी राजाओं का कुलदेवता वीरणेश्वर नाग देवता था वीरेणेश्वर नाग को अनंत का अवतार माना गया है।  जनता व राजाओं मध्य वीरणेश्वर नाग देव की तब बड़ी मान्यता थी।  द्युतिवर्मन के पूर्वजों ने व अन्य श्रद्धालुओं ने वाणेश्वर मंदिर व्यवस्था हेतु मंदिर अग्रहार भूमि प्रदान की थी।  जिन ताम्रपत्रों या कांस्य पत्रों में भूमिदान की गयी थी वे अग्नि में जल गए।  तब द्युतिवर्मन ने अपने मंत्रियों आदि की सलाह अनुसार द्युतिवर्मन ने वृषताप शासन प्रदान किये।  द्युति  वर्मन की राजमुद्रा में द्युतिवर्मन को प्रजा पर अनुग्रह करने वाला बतलाया गया है (1 )


  . 
सन्दर्भ :
 
1- Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page
 

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Donation for Nag Temple In Garhwal by Pauravas , History of Haridwar; Donation for Nag Temple In Garhwal by Pauravas , History of  Kankhal , Haridwar; Donation for Nag Temple In Garhwal by Pauravas , History of Jwalapur , Haridwar; Donation for Nag Temple In Garhwal by Pauravas , History  of  Rurki Haridwar; Donation for Nag Temple In Garhwal by Pauravas , History  of Haridwar; Donation for Nag Temple In Garhwal by Pauravas , History  of Laksar , Haridwar; Donation for Nag Temple In Garhwal by Pauravas , History  of  Saharanpur; Donation for Nag Temple In Garhwal by Pauravas , History of  Behat , Saharanpur; Donation for Nag Temple In Garhwal by Pauravas , History  of  Saharanpur; Donation for Nag Temple In Garhwal by Pauravas , History  of Nakur,  SaharanpurDonation for Nag Temple In Garhwal by Pauravas , History of  Devband , Saharanpur; Donation for Nag Temple In Garhwal by Pauravas , History of  Bijnor ; Donation for Nag Temple In Garhwal by Pauravas , History  of  Bijnor ; Donation for Nag Temple In Garhwal by Pauravas , History  of  Nazibabad , BijnorDonation for Nag Temple In Garhwal by Pauravas , History of  Bijnor; Donation for Nag Temple In Garhwal by Pauravas , History  of Nagina  Bijnor ; Donation for Nag Temple In Garhwal by Pauravas , History  of  Dhampur , Bijnor ; Donation for Nag Temple In Garhwal by Pauravas , History of  Chandpur Bijnor ;  Naga templesin garhwal, Naga temples in Haridwar , Naga temples in Uttarakhand
कनखल , हरिद्वार इतिहास में पौरव  वंशियों का नाग मंदिर हेतु दान महत्व  ; ज्वालापुर हरिद्वार इतिहास में पौरव  वंशियों का नाग मंदिर हेतु दान महत्व  ;रुड़की , हरिद्वार इतिहास में पौरव  वंशियों का नाग मंदिर हेतु दान महत्व  ;लक्सर हरिद्वार इतिहास में पौरव  वंशियों का नाग मंदिर हेतु दान महत्व  ;मंगलौर , हरिद्वार इतिहास में पौरव  वंशियों का नाग मंदिर हेतु दान महत्व  ; बहादुर जुट , हरिद्वार इतिहास में पौरव  वंशियों का नाग मंदिर हेतु दान महत्व  ;
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पौरव वंशी महाराज विष्णुवर्मन द्वितीय 

Paurava King Vishnuvarman 2nd

हर्षवर्धन पश्चात बिजनौर , हरिद्वार , सहारनपुर का 'अंध युग' अर्थात तिमर युग  इतिहास- 12

Paurava dynasty in Dark/ Early Middle Age  of History of Haridwar, Bijnor , Saharanpur  12

Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  289                   
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  289                 


                  इतिहास विद्यार्थी :::  भीष्म कुकरेती 
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  विष्णुवर्मन द्वितीय को ताम्रशासन में उसे विनय , एनएमआर , वीर धैर्य , स्थैर्य , गांभीर्य , औदार्य गोनो से ओतप्रोत बताया गया है।  (विष्णुव्रमण का ताम्रपत्र ) विष्णूवर्मन जनता दुःख दूर में अग्रसर रहता था / विष्णुवर्मन को पितृभक्त बताया गया है।
  विष्णुवर्मन ने अपने बीसवें वर्ष में  मंगसिर की पांचवीं तिथि को द्युतिवर्मन समान वामन स्वामी मदिर हेतु भूमि दान दी
  विष्णुव्रमण के उत्तराधिकारियों के बारे में कोई ऐतिहासिक जानकारी अनुपलब्ध है।
    डबराल  ने मत दिया कि हो सकता है विष्णुव्रमण अजय अंत में या ततपश्चात तिब्बत ने उत्तराखंड पर आक्रमण किया और पांचाल नरेश यशोवर्मन ने तिब्बत आक्रमण रोकने हेतु उत्तराखंड पर आक्रमण किया होगा व उसने पहाड़ों में सैनिक छांवनियाँ बिठा दीं।  संभवतया पौरव नरेश यशोवर्मन के अधीन हो यशोवर्मन के सूबेदार बन गए हों (1 )

सन्दर्भ :
 
1- Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page 416 , 17
 

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कनखल , हरिद्वार इतिहास में राजा विष्णुवर्मन का स्थान ; ज्वालापुर हरिद्वार इतिहास में राजा विष्णुवर्मन का स्थान ;रुड़की , हरिद्वार इतिहास में राजा विष्णुवर्मन का स्थान ;लक्सर हरिद्वार इतिहास में राजा विष्णुवर्मन का स्थान ;मंगलौर , हरिद्वार इतिहास में राजा विष्णुवर्मन का स्थान ; बहादुर जुट , हरिद्वार इतिहास में राजा विष्णुवर्मन का स्थान ;
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Bhishma Kukreti

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पर्वताकार पौरव राजाओं का शासन तंत्र
Administration in Parvatakar Paurava Kingdom in Haridwar, Bijnor, Saharanpur
हर्षवर्धन पश्चात बिजनौर , हरिद्वार , सहारनपुर का 'अंध युग' अर्थात तिमर युग  इतिहास- 13

Paurava dynasty in Dark/ Early Middle Age  of History of Haridwar, Bijnor , Saharanpur  13

Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  290                   
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  290                 


                  इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती 
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पर्वताकार पूर्व राजाओं के शासन मिलने से उनके शासन व्यवस्था पर प्रकाश पड़ता है।  ताम्र शासनों में राज्याधिकारियों की सूची मिलती है।
  राज्य का सबसे बड़ा अधिकारी नरेश था नरेशों की उपाधि परमभट्टारक महाराजधिराज बताया गया है।  सग्निवर्मन , द्युतिवर्मन व विष्णुव्रमण को यह उपादि उल्लेखित है याने ये स्वतंत्र शासक थे व बड़े भूभाग के शासक भी रहे होंगे  (2 )
 पौरव नरेश वर्णाश्रम व्यवस्था के संवाहक थे व वर्णशंकर व्यवस्था के विरुद्ध थे (2 ) नरेश ने नय ,  धैर्य , शौर्य , स्थिरता , गंभीरता व उदारता के गुण उल्लेख है।  पौरव नरेश आस्थावान थे व उनका कुल देवता नाग था। भूमिदान इसका द्योतक है।
  पौरव शासनों /आदेशों में उच्च अधिकारी को महाराज बतलाया गया है जो गुप्त काल में भी प्रचलित था (1 )

सन्दर्भ :
 
1- Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page 410
2 - द्युतिवर्मन , विष्णुव्रमण के शासन /आदेश
 

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पर्वताकार पौरव राजाओं का मंत्रीपरिषद

Cabinet Ministries in Paurava Kingdom in Haridwar, Bijnor, Saharanpur
हर्षवर्धन पश्चात बिजनौर , हरिद्वार , सहारनपुर का 'अंध युग' अर्थात तिमर युग  इतिहास- 14

Paurava dynasty in Dark/ Early Middle Age  of History of Haridwar, Bijnor , Saharanpur  14

Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  291                   
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  291                 


                  इतिहास विद्यार्थी :::  भीष्म कुकरेती 
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   पौरव पर्वताकार राज्य व्यवस्था हेतु प्रशासन वहन हेतु महाधिराज को परामर्श व सलाह हेतु अमात्य , बलाध्यक्ष , सन्धिविग्रहक , राजदौवारिक , कोटाभिकरणक , कुमारामात्य , सर्वविषय प्रधान , व देवद्रोण्यधिकृत जैसे शासन अधिकारी होते थे।  पौरव शासनादेशों से मालुम पड़ता है कि महत्वपूर्ण निर्णय व कार्य हेतु महाधिराज इन मंत्रियों व अधिकारियों की सलाह अवश्य लेते थे जैसे द्युतिवर्मन के शासन आदेश अनुसार अग्रहार भूमिदान देने से पहले यी अधिकारियों जैसे देवद्रोणधिकृत , महासत्रपति , परिवांग , ब्रह्मचारी -गौग्गुलिक परिषद , राजदौवारिक , कारंगिक , कोटाधयक्ष आदि से सलाह ली गयी थी।  शासन आदेश से पता चलता है कि महाराज धीरज से स्वीकृति लेने हेतु अमात्य से निवेदन आवश्यक था व साथ में आमात्य को भी ले जाना आवश्यक था।   
सन्दर्भ :
 
1- Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page
 

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Cabinet Structure of Paurava Kingdom, History of Haridwar; Cabinet Structure of Paurava Kingdom, History of  Kankhal , Haridwar; Cabinet Structure of Paurava Kingdom, History of Jwalapur , Haridwar; Cabinet Structure of Paurava Kingdom, History  of  Rurki Haridwar; Cabinet Structure of Paurava Kingdom, History  of Haridwar; Cabinet Structure of Paurava Kingdom, History  of Laksar , Haridwar; Cabinet Structure of Paurava Kingdom, History  of  Saharanpur; Cabinet Structure of Paurava Kingdom, History of  Behat , Saharanpur; Cabinet Structure of Paurava Kingdom, History  of  Saharanpur; Cabinet Structure of Paurava Kingdom, History  of Nakur,  SaharanpurCabinet Structure of Paurava Kingdom, History of  Devband , Saharanpur; Cabinet Structure of Paurava Kingdom, History of  Bijnor ; Cabinet Structure of Paurava Kingdom, History  of  Bijnor ; Cabinet Structure of Paurava Kingdom, History  of  Nazibabad , BijnorCabinet Structure of Paurava Kingdom, History of  Bijnor; Cabinet Structure of Paurava Kingdom, History  of Nagina  Bijnor ; Cabinet Structure of Paurava Kingdom, History  of  Dhampur , Bijnor ; Cabinet Structure of Paurava Kingdom, History of  Chandpur Bijnor ; 
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सेनापति अथवा बलध्याक्ष
Bladhyaksha or Army Chief in Paurava Kingdom
हर्षवर्धन पश्चात बिजनौर , हरिद्वार , सहारनपुर का 'अंध युग' अर्थात तिमर युग  इतिहास- 14

Paurava dynasty in Dark/ Early Middle Age  of History of Haridwar, Bijnor , Saharanpur  14

Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  291                   
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  291                 


                  इतिहास विद्यार्थी :::  भीष्म कुकरेती 
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   पौरव वंश के शासनों से निम्न जानकारियां मिलती है।
सेनाध्यक्ष - सेना का सर्वोच्च अधिकारी का पद बलाध्यक्ष होता था।  बलाध्यक्ष के आधीन तीन विभाग थे -गज सेना का अधिकारी गजपति , अश्व सेना का अधिकारी , गजरोहि का अधिकारी -अश्वपति व पैदल सेना का अधिकारी -जयनपति। 
पीलुपति गजशालाओं व अश्वशालों का प्रबंध करता था।
 संधिविग्रहिक पदाधिकारी का कार्य युद्ध व संधि विमर्श व कार्य प्रबंधन करन होता था (1 )

सन्दर्भ :
 
1- Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page 418
 

Copyright@  Bhishma Kukreti , 2019

Army Chief in Paurava Kingdom, History of Haridwar; Army Chief in Paurava Kingdom, History of  Kankhal , Haridwar; Army Chief in Paurava Kingdom, History of Jwalapur , Haridwar; Army Chief in Paurava Kingdom, History  of  Rurki Haridwar; Army Chief in Paurava Kingdom, History  of Haridwar; Army Chief in Paurava Kingdom, History  of Laksar , Haridwar; Army Chief in Paurava Kingdom, History  of  Saharanpur; Army Chief in Paurava Kingdom, History of  Behat , Saharanpur; Army Chief in Paurava Kingdom, History  of  Saharanpur; Army Chief in Paurava Kingdom, History  of Nakur,  SaharanpurArmy Chief in Paurava Kingdom, History of  Devband , Saharanpur; Army Chief in Paurava Kingdom, History of  Bijnor ; Army Chief in Paurava Kingdom, History  of  Bijnor ; Army Chief in Paurava Kingdom, History  of  Nazibabad , BijnorArmy Chief in Paurava Kingdom, History of  Bijnor; Army Chief in Paurava Kingdom, History  of Nagina  Bijnor ; Army Chief in Paurava Kingdom, History  of  Dhampur , Bijnor ; Army Chief in Paurava Kingdom, History of  Chandpur Bijnor ; 
कनखल , हरिद्वार इतिहास में पौरव राज्य में सेनापति ; ज्वालापुर हरिद्वार इतिहास में पौरव राज्य में सेनापति ;रुड़की , हरिद्वार इतिहास में पौरव राज्य में सेनापति ;लक्सर हरिद्वार इतिहास में पौरव राज्य में सेनापति ;मंगलौर , हरिद्वार इतिहास में पौरव राज्य में सेनापति ; बहादुर जुट , हरिद्वार इतिहास में पौरव राज्य में सेनापति ;सहरानपुर इतिहास में पौरव राज्य में  सेनापति ;देवबंद , सहरानपुर इतिहास में पौरव राज्य में सेनापति ;बेहट , रामपुर , सहरानपुर इतिहास में पौरव राज्य में सेनापति ;बाड़शाह गढ़ , सहरानपुर इतिहास में पौरव राज्य में सेनापति ; नकुर , सहरानपुर इतिहास में पौरव राज्य में सेनापति ;
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Bhishma Kukreti

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किला , कोट , अधिकारी

Officer Managing  Fort
हर्षवर्धन पश्चात बिजनौर , हरिद्वार , सहारनपुर का 'अंध युग' अर्थात तिमर युग  इतिहास- 15

Paurava dynasty in Dark/ Early Middle Age  of History of Haridwar, Bijnor , Saharanpur  15

Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  292                   
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  292                 


                  इतिहास विद्यार्थी :::  भीष्म कुकरेती 
-
 महाधिराज व परिवार कोट (दुर्ग) में निवास करते थे।  कोट की  अन्य प्रबंध कोट अधिकारी यानी कोटाधिकरण करता था।  प्रतिहार राज परिवार की रक्षा का उत्तरदायी होता था। 
राजदौवारिक - राज प्रसाद में अधिकारियों के आवागमन प्रबंध करता था। (१)
कारंगिक -अधिकारियों अनुमति पत्र को राजा के पास व राजाज्ञा अधिकारियों तक पंहुचाता था। (1 )
सूपकारपति - भोजन व्यवस्था देखता था (1 )
अनुजी वर्ग - निम्न श्रेणी के कर्मचारी इस वर्ग के अंतर्गत आते थे
(1 )

सन्दर्भ :
 
1- Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page 418
 

Copyright@  Bhishma Kukreti , 2019

Fort Incharge in Paurava Kingdom , History of Haridwar; Fort Incharge in Paurava Kingdom , History of  Kankhal , Haridwar; Fort Incharge in Paurava Kingdom , History of Jwalapur , Haridwar; Fort Incharge in Paurava Kingdom , History  of  Rurki Haridwar; Fort Incharge in Paurava Kingdom , History  of Haridwar; Fort Incharge in Paurava Kingdom , History  of Laksar , Haridwar; Fort Incharge in Paurava Kingdom , History  of  Saharanpur; Fort Incharge in Paurava Kingdom , History of  Behat , Saharanpur; Fort Incharge in Paurava Kingdom , History  of  Saharanpur; Fort Incharge in Paurava Kingdom , History  of Nakur,  SaharanpurFort Incharge in Paurava Kingdom , History of  Devband , Saharanpur; Fort Incharge in Paurava Kingdom , History of  Bijnor ; Fort Incharge in Paurava Kingdom , History  of  Bijnor ; Fort Incharge in Paurava Kingdom , History  of  Nazibabad , BijnorFort Incharge in Paurava Kingdom , History of  Bijnor; Fort Incharge in Paurava Kingdom , History  of Nagina  Bijnor ; Fort Incharge in Paurava Kingdom , History  of  Dhampur , Bijnor ; Fort Incharge in Paurava Kingdom , History of  Chandpur Bijnor ; 
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पौरव  काल में पुलिस व  कर संग्रह
 Police, tax Collection in Paurava Period
हर्षवर्धन पश्चात बिजनौर , हरिद्वार , सहारनपुर का 'अंध युग' अर्थात तिमर युग  इतिहास- 16

Paurava dynasty in Dark/ Early Middle Age  of History of Haridwar, Bijnor , Saharanpur  16

Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  293                   
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  293                 


                  इतिहास विद्यार्थी :::  भीष्म कुकरेती 
-
    -पौरव  काल में पुलिस व्यवस्था -
  पौरव शासनों में दंडोपरिक,  दांडवासिक व राजपुत्र शब्दों का उल्लेख है जो गुप्त कालीन पुलिस अधिकारी जैसे दंडपाक्षिक के रूपांतरित रूप लगते हैं  (1 ) . ये सभी अधिकारी आंतरिक सुरक्षा , न्याय व शान्ति  हेतु अधिकारी थे। राहुल ने उपरिक  को राजयपाल माना है (2 )
  - कर संग्रह
  पौरव शासनों में  करों का उल्लेख नहीं मिलता किन्तु भागिक व भोगिक अधिकारियों का उल्लेख मिलता है जो गुप्त काल के कृषि कर संग्रह अधिकारियों के समक्ष ही लगते हैं (1 ) . भोग कर छोटे छोटे कर होते थे जो रज्मंरी के कर थे। 

सन्दर्भ :
 
1- Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page 418
 
2 -राहुल , गढ़वाल पृष्ठ 8
Copyright@  Bhishma Kukreti , 2019 bjkukreti@gmail .com

Police and Tax Collection in Paurava Period , History of Haridwar; Police and Tax Collection in Paurava Period , History of  Kankhal , Haridwar; Police and Tax Collection in Paurava Period , History of Jwalapur , Haridwar; Police and Tax Collection in Paurava Period , History  of  Rurki Haridwar; Police and Tax Collection in Paurava Period , History  of Haridwar; Police and Tax Collection in Paurava Period , History  of Laksar , Haridwar; Police and Tax Collection in Paurava Period , History  of  Saharanpur; Police and Tax Collection in Paurava Period , History of  Behat , Saharanpur; Police and Tax Collection in Paurava Period , History  of  Saharanpur; Police and Tax Collection in Paurava Period , History  of Nakur,  SaharanpurPolice and Tax Collection in Paurava Period , History of  Devband , Saharanpur; Police and Tax Collection in Paurava Period , History of  Bijnor ; Police and Tax Collection in Paurava Period , History  of  Bijnor ; Police and Tax Collection in Paurava Period , History  of  Nazibabad , BijnorPolice and Tax Collection in Paurava Period , History of  Bijnor; Police and Tax Collection in Paurava Period , History  of Nagina  Bijnor ; Police and Tax Collection in Paurava Period , History  of  Dhampur , Bijnor ; Police and Tax Collection in Paurava Period , History of  Chandpur Bijnor ; 
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पौरव काल में भू व्यवस्था 
Land Settlement in Paurava Kingdom
हर्षवर्धन पश्चात बिजनौर , हरिद्वार , सहारनपुर का 'अंध युग' अर्थात तिमर युग  इतिहास- 17

Paurava dynasty in Dark/ Early Middle Age  of History of Haridwar, Bijnor , Saharanpur  17

Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  294                   
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  294                 


                  इतिहास विद्यार्थी :::  भीष्म कुकरेती 
-
 Paurav  शासनों आदेशों में डिविरपति व कायस्थ नाम मिले हैं।  ये दोनों पद गुप्त काल में व्याप्त थे  (2 ) व इन अधिकारियों का कार्य जनपद की आय व भूमि का लेखा जोखा रखना होता था।  गाँवों का लेखा जोखा कर्मगत था (1 )जैसे गाँव का।
लग्गा गाँव , भूमि स्वामी  नाम व उसका व्यवसाय।  इससे अनुमान लगता है कि कृषि के अतिरिक्त व्यवसाय भी कृषक करते रहे होंगे जैसे पंडिताई लोहारगिरि , राजकार्य /मकान निर्माण आदि 
   केदार - सिंचाई वाली भूमि केदार कहलायी जाती थी
सारी - चौरस व धान की खेती हो सकती थी
भेल - चढ़ाई वाली पहाड़ की खायी को भेल कहते थे।  भेल केऊपर के खेतों का नाम भेलमस्तक  याने भेळ मथि (विष्णूवर्मन का शासन पं 14 , 20 )
 भूमि नाप (1 ) -
भूमि नाप बीज बोने के बीज माप से होता था जो आज भी गढ़वाल कुमाऊं में कायम है।
द्रोण की भूमि -जिस पर 16 सेर अनाज बोया जाय याने दूण बीज बोये जायँ
खारी - जिन खेतों में बीस दूण बीज बोये जायं
      भू सामित्व
भूमि का स्वामी राजा ही होता था किन्तु बसे लोगों को स्वामी कहलाये जाते थे।  भूमि का मालिक वह होता था जिन्हे राजा अग्रहार , दान , पुरुष्कार में दे। ऐसे लोगों द्वारा भूमि बेचे जाने पर स्वामित्व खरीददार को मिल जाता था। विष्णु वर्मन के ताम्र शासन (पं २४ -२५ ) में बलाध्यक्ष लव चंद्र व कायस्थ ननक द्वारा भूमि विक्री का उल्लेख है

सन्दर्भ :
 
1- Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page 419
 2 - वासुदेव उपाध्याय , गुप्त साम्राज्य का इतिहास खंड २ , पृष्ठ १७ 

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Land Settlement  in Paurava Time,  , History of Haridwar; Land Settlement  in Paurava Time,  , History of  Kankhal , Haridwar; Land Settlement  in Paurava Time,  , History of Jwalapur , Haridwar; Land Settlement  in Paurava Time,  , History  of  Rurki Haridwar; Land Settlement  in Paurava Time,  , History  of Haridwar; Land Settlement  in Paurava Time,  , History  of Laksar , Haridwar; Land Settlement  in Paurava Time,  , History  of  Saharanpur; Land Settlement  in Paurava Time,  , History of  Behat , Saharanpur; Land Settlement  in Paurava Time,  , History  of  Saharanpur; Land Settlement  in Paurava Time,  , History  of Nakur,  Saharanpur Land Settlement  in Paurava Time,  , History of  Devband , Saharanpur; Land Settlement  in Paurava Time,  , History of  Bijnor ; Land Settlement  in Paurava Time,  , History  of  Bijnor ; Land Settlement  in Paurava Time,  , History  of  Nazibabad , Bijnor Land Settlement  in Paurava Time,  , History of  Bijnor; Land Settlement  in Paurava Time,  , History  of Nagina  Bijnor ; Land Settlement  in Paurava Time,  , History  of  Dhampur , Bijnor ; Land Settlement  in Paurava Time,  , History of  Chandpur Bijnor ; 
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