Author Topic: Articles & Poem by Sunita Sharma Lakhera -सुनीता शर्मा लखेरा जी के कविताये  (Read 28689 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Bahut sunder likha hai apane sharma ji.

Sunita Sharma Lakhera

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आप सबको सादर नमन ।

Sunita Sharma Lakhera

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आपदाक दुयी  साळ
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टुटियू बाट अर  गिलु माट मा
उत्तराखंड पर्यटन हरच ही जाळ
मौसमी धौंक अर  उकाउ खाड़ मा
विकास हैंक साल हुये ही जाल

Sunita Sharma Lakhera

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नाटिका - स्वंत्रता दिवस
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चरित्र - १. गुरूजी २. कमळी दद्दी
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गुरजी : हे कमळी दद्दी ,तू कख बोडी रे ?
दद्दी : गुरजी ,राम राम । खूब छ्यावो ?
गुरजी : मिन बोळी कख पैठिन छै तू सुबेर - सुबेर ?
दद्दी : आज नाती न बोळी ,' आज हमारे इस्कूल में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा ,मैं उसमें नेहरू बना हूँ ,मुझे देखने जरूर आना ।" वखि जाणा छौ ।
गुरजी : अच्छू च .... पण त्वेथे पता भी च स्वंत्रता दिवस कु बारा मा कुछ ?
दद्दी : द लाटा.... मी नि जांदु व्होलु … कन निरास हुई च … तीन किताब बांच अर हमन यु आँखि सुधि नी फ़ोड़ी वां sss दा बोलो … ।
गुरजी : हाँ सिन छै च पण दद्दी कैन तुयथै पूछ ल्याय तब ?
दद्दी : मीथै पूछण वाल थै क्या पता कि परार क साळ नाती न बताय छयाई कि आज अग्रेजों न हमते आज़ाद करी बल ।
गुरजी : अच्छा ! होर क्या पता च तुयथै ?
दद्दी : मिथे न पूछ कुछ भी हांsss ।
गुरजी : हैं sss क्या हुयेयी ?
दद्दी : सब नै जमन का उमाळ छन । अलां दिवस फलां दिवस । अब ज्यादा नी पूछ मिसे फिर बोल्ळी कमली दद्दी कु दिमाग बिरड़ ग्यायि हाँ ।
गुरजी : मन कु उमाळ न छिपा दद्दी अब बोल भी दे ,अच्छा चिंता नी कर यी बात मि कै मा नि बुल्लू पक्की बात च ।
दद्दी : म्यार ल्याखण तू वार -पार उबारो धार पूर गढ़वाल कखि भी बोल दे मीथै नी फ़र्क़ पड़दु सुनियाल

गुरजी : हम्म .....
दद्दी : सरी आज़ादी शयद भैर शेहरी मनख्यात कुण आयी होली । हमर पाड़ माँ कै बाथो कु आज़ादी अर कण आज़ादी । हरेक गौ मा जात - पात कु भेद , बलि कु रिवाज पुजारी - बकि का फैलाया अन्धविश्वास , कैक भितरी मा क्या हुई च एक घपरोल मा लगी मनखि , तास - पत्ति मा बढ़दी गरीबी और वे पण शराब कु श्राप भुगतान पण लगि छिन आज भी लोग । बच्चा नौकरी माँ देश विदेश बैठी छिन आर यूंका छुंयी बथ की वु लोग पाड़ कुण खुदे गये अर भैर बैठिकन हमर सरी करी कमाई पण खुदेड़ गीत लिखना गौणा छिन । कब्बि हमर खोज खबर नी करदन ,हमकुन कुई नै औजार नी लायी । टी. वी. मा दिखान्द छिन ,छुटू ट्रेक्टर भी आय गयें बल पण हमर बेटी - बुआरीयों की चिंता बस खबर सार मा ही दिखौंदन । कख च आज़ादी पाड़ मा पाड सारीका जीण वली हमर गरीब नौनियो कुण जौंक नसीब मा पाड़ की जिंदगी अर शर्पिया कु अत्यचार लिख्युं च । कन भग्याण राय वु लोग जौं सिंकुयलि अपर बच्चों थैं पाड़ से आज़ादी दी याल कम से कम वूं कुण त आए ग्येई आज़ादी । शहरी बेटा बुआरी पड़ी लिखिकण् अंग्रेज की औलाद बणी गेन होर सारा दिन बस अग्रेजी मा गिटर - पिटर करदन , तब बोल्दन हम आज़ाद हुय ग्यों । अरे सुणताल पडियुं च अग्रेज बड़ा चालाक छयायी ,अफिक ता चली गेन अर हम सभीयूं थैं मानसिक गुलाम बनै गेन । तब्बि ता हम लोग आज भी वूंक बताय रस्तौ मा चलणा छवाँ । अब होर भी कुछ बोलण बाकी रहयूं च क्या ?
गुरजी : अरी बाप रे !! दद्दी तू बड़ी होशियार छै ! मेरो दंडवत प्रणाम ।
दद्दी : तुम जन शहरी मास्टर सरीका लोग हमर पाड़ का भोला मनख्यात पण अपरी अंग्रेजी धौस क बल पण राज करना छन ।
गुरजी : अरे बाप रे !! तीन त मीथै भी छुआड़ दद्दी , अच्छा दद्दी सूण आज स्वतंत्रता दिवस च अर तू आज की इस्कूल की भारत माता चुनी गे । भोत -भोत बधाई दद्दी ।
दद्दी : हैं क्या बोलि तीन हे भगवती क्या जमाना आय ग्याई आहा !! सच बोल रे लाटा म्यार भाषण ठीक च । खूब खुस रे ।
गुरजी : खित खित खित हाँ - हाँ दद्दी भोत भोत बधाई , अब बाट लग तब तक मी प्रधान दगड औन्दु छौ ।
__________सुनीता शर्मा

Sunita Sharma Lakhera

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स्व ० श्री  इन्द्रमणि बडोनी जी
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श्री सुरेशानंद जी कु घोर मा ही उत्तराखंड सुपणु  कु जलम हुय  ,
वेकी नौ इन्द्रमणि छ्याय् जू पैथर उत्तराखंड गांधी बणी ग्याय ,
जखोली गौ का ये नौना न  पर्बतों की संस्कृति देश भर मा पहुँचाय ,
अलग राज्य कु वास्ता  स्वालंबन   नारा उन घोर -घोर पहुँचाय ,
अपड़ी दगड़िया राज्य आन्दोलनकारियों मा एकता नाद बजवाय ,
 पर्वतो कु समस्या अर जड़ी बूटियों का मोल समझण वाल भी छयाय ,
 खटलँग ग्लेशियर खुजाण वाल  भल्लू केदार नर्तक भी छ्याय् ,
राज्य आंदोलनकारी श्री इन्द्रमणि जी उत्तराखंड की पहचान छ्याय् ।

_________सुनीता शर्मा
उनकी पुण्यतिथि पण  श्रद्धा सुमन अर्पित ।

Sunita Sharma Lakhera

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बरसात
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 बरसात बरस रही वर्ष दर वर्ष ,
मात्र नियमों की पूर्ति करती सी ,
पर बरसात भूल चुकी अपनापन ,
कि उसके बूंदों के लिए तरसती धरा ,
अब कांप जाती है ,
 उसके  आगमन पर ...

और क्यों न डरे...

बरसात अब हरियाली नहीं लाती ,
वो तो प्रतिशोध के रूप में ,
आए दिन फट जाती है इस कदर कि..
धरती के ममत्व भरे आंचल से .
क्रूर नदी बन छीन लेती है ,
वो जिंदगी भी ,,, उम्मीदें भी ...
बरसात अब दोस्त भी नहीं ,,,
 फिर दुश्मन भी नहीं ,,,,
वो भी तो काट रही ,
अपने हिस्से का जीवन ,,,,
धरा पर , धरा के लिए |

Sunita Sharma Lakhera

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Sunita Sharma Lakhera

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कैक्टस
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सुनो ....
तुम कभी अपनी थी ...
ईर्ष्या कहो या कहो संकीणर्ता ...
मेरे स्नेह को तुमने ठुकराया...

आज ....

क्यों फिर इंतज़ार है ...
तुम्हे फिर से ...
मेरे फोन का ....
कहीं कोई नया स्वार्थ ....

 सुनो सखी ....

इंसां को एक बार या दो बार
परखा जाता है ,,,,
पर तुम्हे तो ...
  दूसरों की चुगली  से ...
आनंद आता रहा है ....

याद है ....

तुमने मुझे कैक्टस कहकर ठुकराया था |
तुम तो ऊंचे महलों वाली ....
क्या जानती जीवन क्या है ....
जीवन का गुरु है रेगिस्तान ....
जिसके स्नेह में खूब .....
पनपता है ... बढता है ...

कैक्टस .....

आज तुम भीड़ में भी अकेली ....
और मैं वीरानी में भी सबकी प्यारी सखी |
  • [/li]

Sunita Sharma Lakhera

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अदयांजलि
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बिन अदयांजलिक मनखियोंक कखि बि  उद्धार नि होंदु ...
वेकि बिना युंकू कुइ कामकाज बि नि होंदु ....
तन अर धन सै गरीब हूणा छिन म्यारा देसक लोग....
यनु नशा सै कैक बि बिकास कब्बि  नि होंदु पण...
 म्यरा गढदेशी मनखिन अपरु रीति से बेजां लगाव रख्युं ....
शर्पिया बनण मा युंकु शयद कुइ उद्धार लुक्युं...
राजनीतिन युंकु यीं कमि मा भौत घपरौल करि ....
पन्चो बस्क्याल्क म्यंडुक सदैनि टराणु रै जांदु ..
अंग्रेजि सियासत का सिकार फेर व्हेय जांदि भोला बोटर ब्यचारु...
-------© सुनीता शर्मा

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बल उत्तराखंड ....
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अपर राज्य वास्ता  आंदोलन नि हूंद , त इतगा लोग नि  मरदी  , 
कुखली मा बोई का नौना  रांद अर कज्यांण कु सुहाग बचदि ,
  सुपन्यु मा छ्याइ जौंक अपर राज्य  उत्तराखंड ...उन क्या जी पाइ , 
रूणु च खटीमा अर रूनी  च मंसूरी , इन सहादत सै  यून  क्या जी पाइ  ,
 अगास मा  बैठी गेन  जु अहंकारी ... उन शहीदोंक घोरोंक  नि  सुध ल्याइ    ,
राज्य त दे गेन आंदोलनकारी एकजुटता मा , अफिक नि कैन सुख पाइ ,
राज्यक विकास कागजों मा व्हाल .. यन यूं  ब्यचारों न कब्बि नि  सोचि होळी ,
अर यख अपडु विकास पैथर अपड़ी  लोखयूं  मा एकता नि रैली ,
यख कैक  धीत नि भरल अर अपर-अपर स्वार्थों मा बंटी जाल मनखी ,
येकि राजा राज करला अर परजा वोटों कि घपरोल मा अल्झ जालि ,
अर दीदा सुपन्यु का उत्तराखंड बल ठुलमठुला मा कखि त पौछ जालि |

----©सुनीता शर्मा

 उत्तराखंड के अमर शहीदों को श्रद्धांजली |

 

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