Author Topic: Bal Krishana Dhyani's Poem on Uttarakhand-कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी  (Read 32457 times)

devbhumi

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ऐ जा मेर पास

ऐ जा ऐ जा मेर पास
मेर पास बैठि  जा
सुणि  जा मेर बात
ऐ जा  ऐ जा  ऐ जा   ऐ जा  ..... ऐ जा ..अ
सुणि  जा मेर बात
ऐ जा ....  ऐ जा..अ

डाली व बोटी क्या वणोंदी
जीकोडी खोली तेर क्या सुणोंदी
सुणि  ले .... सुणि  ले
ऐ जा मेर पास
सुणि  जा मेर बात..अ
ऐ जा ....  ऐ जा ..अ

उल्यारों को स्वागत
रंगों  को बसन्त
पिंगला  नीला भाँति भाँति फूल
गाड, गधेरा पंछी पौन..अ
सुणि  ले ओँ  कि  सुणि  ले
जियू  की पुकार ..अ
ऐ जा ....  ऐ जा ..अ

सुणोंद जा
क्या कैनि ऐ  चारू दिसा
ना बण यन  परदेशी  ....
ऐना छन यख रंग  रोज नया नया
सुणि  ले सुणि  ले , ले ले
एक बार ,एक बार ,एक बार
तेरु छ  यख  घार बार ..अ
ऐ जा ....  ऐ जा ..अ

लठ्यालू  होलो निरभागी  होलो
प्रकृति दगड छुई  जो नि लगलू
गईन फूटि कलि कोंपलें
सजाई दीने रति रंग भूमि ऐकी
अपंडी रतन्याली
अंख्यों न देखेलि औरृ सुणि  ले
ऐ जा मेर पास
सुणि  जा मेर बात..अ
ऐ जा ....  ऐ जा ..अ

बालकृष्ण डी ध्यानी
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यन मेर माया

यन मेर माया यन मेर माया  ....अ
यन मेर माया यन मेर माया
अधा उमर त बीतिगै ....२
अधि बचि छन जी....२
हैंसि रुवैई इनि
वूँ बि बित जाला
वूँ बि बित जाला जी 
अधा उमर त बीतिगै
(अधि बचि छन जी)....२
यन मेर माया यन मेर माया  ....अ
यन मेर माया यन मेर माया

वूँ को रुसेणु जी
ईं रूड़ि घाम जनि
खुद रुवांद जी अब ह्यूँद जनि  ....२
बगत हेरनु कब आलू
कब आलू
मेरु मौल्यार जी ...  २ 
यन मेर माया यन मेर माया  ....अ
यन मेर माया यन मेर माया

जुगों बिटि कटेनि
क्दगा राति इखुलि  मिन
वूँकि याद मा  ....२
इखुलि  मिन
बितेनि दिन म्यारा
इन ही वूँ का आंदा जांदा 
खैल मां 
आंदा जांदा खैल मां 
अधा उमर त बीतिगै
(अधि बचि छन जी)....२
यन मेर माया यन मेर माया  ....अ
यन मेर माया यन मेर माया

बालकृष्ण डी ध्यानी
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इखलु मि

कै दिन साल बिटिनि
अपडों ते नि देखि
कन कब हिटलू ऐ ज्यू
हिट सरासारी जौलौं

कनि होली वा
मेरी  छज्जा तिबारी
कब मिळालो वों से
झणी क़्या बात होली

कब धारा  वों आंख्यों कु
खारो  मीठो पाणी  प्युंलों
वों से  अपड़ी तिस बुझेकि
कब गला भेंट दियोंलों

झणी कब बिटि नि देखि मिन
ऊ गलडियों मां फूल्यों लाल बुरांश
झणी कब बिटि नि सुणि मिन
ज्यू बंसदी वा हिलांश कि आवाज

प्याज अर कंडली की भुज्जी
झणिक बटेक वों हातों नि खायी
छंछ्या पल्यो बाड़ी, प्याज
यों दगडी आणि वों कि बी याद

अब मेरी प्यारी क्या कन होली
बाजूबंद, थड्या, चौंफला ऊ गीत
थाडो दगडी  नचदा नचदा वा
क्या मिथे बी याद कन होली

सारयूं मा काम काज, रोपणी
थके कि छैलू मा वा बैठी होली
प्याज पिरान्यां कोदा कु रोटु
गिची  डाली मि याद कन  होली

कब जैकी  मी अपड़ी आंखोंल
वा रौंतेलि स्वाणी मुखड़ी द्यखलो
उजाड़ विराणु सी यु परदेश माँ
अब यख इखलु नि रयेंदु

बालकृष्ण डी ध्यानी
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कुछ नी कनू

कुछ नी कनू
म्यारू ज्यू  आजकल
बैठ्युं छौं मि ड्यारा मां
निरबगि बणिक आजकल
कुछ नी कनू

सच माणा त
पैली मि यन नि निछ्याई
गौं  चारी तरफै घूमे घूमे
मिन बालपन बिताई
कुछ नी कनू

अब लोग बैठ्यांछन
मि बी बैठ्युं छौं
खुट्यों ते अपड़ा पसरेकी
औरृ खूब से से  कि
कुछ नी कनू

पैली मजबूरी छे
अब बड़ो व्हैग्युं मि
तब बोई पिछने पिछने
सुबेर भटिक  लगि जांदी छे
कुछ नी कनू

इन निकमो मि ह्वेग्युं जी
लज्जा सरम बेचीं कि खेग्युं
तास दारू बीड़ी  फुके कि
जीबन थे मिल फुके दे
कुछ नी कनू

लोगू  अब याद दिलांद
बालपन थे मिथे फिर मिलांदा
निछ्याई यनि वब
क्या व्हैग्या होलो मिथे अब
कुछ नी कनू

बालकृष्ण डी ध्यानी
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आज कु जी  आणू होलु ?

आज को जी   आणू होलु
ईं जिकुड़ि मां दैल फ़ैल कै जाणा कुन
आज कु जी  आणू होलु ?

सुरुक ऐईं कनुडि का बाटा
 तू माया  का गीत गाणा कुन
यन काळी लटल्यूं दगडी खेल की
ऐजा ऐमा लटें जाणा कुन
मेर माया बुलाणी छा
ऐजा ईमा अलझे जाणा कुन
आज कु जी  आणू होलु ?

झप्प कैकी ऐई तू
ऐ म्यारा दिल मा
झुणमुंणाट बरखा सी
समै जा ये जिकुड़ि खोलि मां
द्वि  स्वास अबेर  यखुली यखुली  छन 
ऐ जाणा छन  अफे ऐक  ह्वै जाणा कुन
आज कु जी  आणू होलु ?

माया ल अंग्वाली खोलि छ
आज अपड़ा गीच भतेक तू बोली दे
तेरे अंख्यों न खूब बोली अबै तक
तू ऐकी मिथे  अंग्वाली भेंटि  जै
देखि मिल बस त्वै आंदा जांदा
गेड़ी  छुट्ना पैला गेंठी  जै
आज कु जी  आणू होलु ?

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ऐगे बसंत

ऐगे ऐगे रे बसंत
म्यारा डंडों कांडों  मां
कुंगळा हैरा पता  हैरगेनि
पिंग्ला फूलों दगड वो हैंसगेनि
म्यारा डंडों कांडों  मां
ऐगे ऐगे रे बसंत

यों उजाड़ु  मां
मिते कु  धेय लगाणु
जिकुड़ी मेरि तू  बता दे
त्वे ते कु बुलाणु
कु  छ आणु व्हालू यख
खुटियूं कि  चाप छ सुनाणी

क्दगा  जंगलात मैदान पाड़ो ते
पार कैरि  कि
बिन्सरी कि पैलि उजाळी
कैथे  ऐकी यख होलि लजाणी
मेर धुरपाली चौक खंदवारों  मां
ऐगे ऐगे रे बसंत
म्यारा डंडों कांडों  मां

कैन  रचाई व्हाळि
कैन  नचाई व्हाळि
यन  गीतों की माला मेरा पाड़ों मां
ऐकी यख कैन लगाई व्हाळि
चार दिसा सजै कि
ये ढोल दामों यख यन कैल  बजाई व्हाळि
ऐगे ऐगे रे बसंत
म्यारा डंडों कांडों  मां

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हरचन लग्यां  छन

हरचन लग्यां  छन
यख सबि अफी अफ मां
संभाळ सकी नि जिम्मेदारी
दोष देण तू बता कैमा

अपड़ा अपडों ते देखिकि
वो स्वांग अजानु  का
कन  रचणा छन
नि  जाणा किलै कै बाण

किलै धैरी तिल बता
अप्डी मुथि ते यन बोती कि 
ले जाणा जैल बी जैकु होलो वो
तेरु नि  छै नि  होलो कबि

सचि तुम समझी ग्यां
मेरा मनकि बात
समझै कि बी नि समझी
समझ कैरि  बी क्या कनै

हरचन लग्यां  छन

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आख्यूं- मा अगास

आख्यूं- मा अगास
धरा  मां खुटा
फिर बि नि ऐ हत मां
 कुच बि  ना

जित जोलों
हैर जोलों
वै का बाद क्या पोलों
कुच बि  ना

हैंसि खुसि घड़ेक
चखुलों कु च्युचांण
कन्दुड़ु सुणद समझी ना
कुच बि  ना

कुछ न कुछ वैल
त्वैथैं बताई होलु
जिकोडी न हाल त्वै लगेई होलु
कुच बि  ना

हे बगत ना हिट यनि
जरा बैठी ले दुई घड़ेक 
नि बैठी वो हिटदा वैल बोलि
कुच बि  ना

सिकसेरी ना कैर
जरा धैरी  ले तू  धीर
नि धैरी क्या पाई तिल
कुच बि  ना

आख्यूं- मा अगास

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परसि भतेक

परसि भतेक  खुद तेरी
झुणमुंणाट बरखा सी
गडग़ड़ाट द्वि बुन्दा 
सुरुक ऐई माया तेर  थमै गेई
परसि भतेक  खुद तेरी.......

स्वीलि घाम जनि
मि ते डमै गेई
झप्प दिल मां ऐकी  तू
ज्यू मां समै गेई
परसि भतेक  खुद तेरी.......

छुई तेर तू मैसे वा
यन लगे गेई
सुरुक जिकुड़िळ बोती माया
तू वैमा पौद जमै गेई
परसि भतेक  खुद तेरी.......

क्या हुनु होलो अचकल मिते
किलै गडबडानदु  जांदू  छु मि
सुरुक ऐकि मि ते तू 
म्यारू ठौर बाते गेई
परसि भतेक  खुद तेरी.......

उठि झसाक फिर  आज
तू मेर गौलि आज मले जै ई
परसि भतेक  खुद तेरी
क्या क्या मिते बतै समजै  गेई
परसि भतेक  खुद तेरी.......

बालकृष्ण डी ध्यानी
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ऐ बारी बि

राती तेरा सुपन्या
दिन मा बस तेरु  ख्याल
क्दग बरसों  भटी हुणीं रे लाटा
बस जी बाळा तेरु  जग्वाल

पठे  देदि  पिरत तेर
माया छीटगा मां भेजीं कि रैबार
बाँज पौड़ी भुमि मां परी
समुदर भटी ऐ जांदु मौल्यार

नि घुटेन्दी रे अब गफा
कुरबुरि देलि  मां बैठि  जांदु मि
परदेस भटिक आनदा बाटा दगड
बैठी अब तेर छुई लगंदु मि

सुण्याल मिन नि छे तेरु टैम
क्या कन मिन नि जाणू मेरू टैम
अब दुई जमानु  को फेर हेर मां
ऐ बारी बि कखक ऊडलु रे गुलाल

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