Author Topic: Bal Krishana Dhyani's Poem on Uttarakhand-कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी  (Read 33469 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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आंदी राली मौल्यारें

आंदी राली मौल्यारें ,जांदी राली मौल्यारें
जीयु आँखीं दगडी , जग थे देका
जग सदनी देखेणु छे

मिनी त बस इनि मांगी छे दुआ
फुलू जानी हम सदा हैंसी रन्या
गाणा राला हम गीत सुख का
इनि ही जाली बीत , जियुंदगी
आंदी राली मौल्यारें

तुम दगडी च अब जीवन मा सारू
जख जंया नजरि वख ही च नजारा
ले की ऐगेनि वा नैई मौल्यार
रंगा भरु प्रीत और्री कुसी
आंदी राली मौल्यारें

हम थे जो मिली वो जीयु थे मालुम च
धरा कु सरग जो च यखी च
भूल से बी दुक ऐ ना वख
प्रीत जख मेर , देब्तों ठोँअ च
आंदी राली मौल्यारें

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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हिंदी गाणा बोल छंण ... आती रहेंगी बहारें, जाती रहेंगी बहारें
चित्रपट : कसमे वादे
गढ़वाली मा ये बोल जी कंन लाग्यां जी आप थै बतवा जरुर जी
हिन्दी गाने का ये का गढ़वाली बोळ संस्करण

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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ऐजा स्वामी ते थे माय दूँ

ऐजा स्वामी ते थे माय दूँ गोरी बैंयां ते पर अंग्वाल दूँ
किले की तू इतगा उदास, सुख्यां सुख्यां ओंठ ,आँखि मा तिस
किले की ,किले की ?

डमी गैंया छन सरीर कित्गा ,स्वामी इनि राति मा
थाकी गेना इनि हाथों थे , दे दे मेर हाथ मा
सुख मेर लियां , मि दुःख तुमरि ले लू
मि बी जगूं,तू बी जिंयां

हुंण दे रे , जो ये जुल्मी छन ,बाटा तेरु गौंऊँ का
पलकी मा बिण लें लूँ , कांटा तेरा खूठा का
लट बिखरलु ,चुनरी बिछे की
बैठी छों मि , तेरा बाना

आपरी त अखियों थे ,भनि च धार सी
खिल व्हाली एक हैंसी , स्वामी तेर माय की
मि त ना हारी , स्वामी जरा सोचा
किले की ,किले की ?

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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हिंदी गाणा बोल छंण ... आजा पिया तोहे प्यार दू, गोरी बैय्याँ तोपे वार दू
चित्रपट : बहारों के सपने -
गढ़वाली मा ये बोल जी कंन लाग्यां जी आप थै बतवा जरुर जी
हिन्दी गाने का ये का गढ़वाली बोळ संस्करण

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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ये बाटा ये डाला

ये बाटा ये डाला
ध्यै लगणा छिन ऐजा
देक देक तेथे ऊ
सड़की का मोड़ बुलणा छिन ऐजा

कंन बिगरैली
स्वाणी दिखेंदी वा
हैरा धातुली पैनी
बांद नटेली वा

ईं जीयु का तार
वि जीयु तार दगडी मिलणा छिन ऐजा
गीत माया का
ये जिकोड़ी मा वा लगणा छिन ऐजा

ना दैर कैर छुचा
झट दौड़ी की ऐजा
तेथे अपरा डंडा कांठा
बोई बाबा बुलणा छिन

ये बाटा ये डाला
ध्यै लगणा छिन ऐजा
देक देक तेथे ऊ
सड़की का मोड़ बुलणा छिन ऐजा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
 
झन बी व्हाली ,वा मेरी व्हाली

ये पाड़ा मा इनि ही बीती जाली
झन बी व्हाली ,वा मेरी व्हाली
मेरी जिंदगी वा मेरी या

रैगे सदनी ई लाटी काटी
बेडू काफल टिपि बण चाखि या

झन बी व्हाली ,वा मेरी व्हाली
मेरी जिंदगी वा मेरी या

घुगति हिलांस जनि ऊ दूर अकास उदी जांदी
फर र र ....बथों दगडी मेर जीयु गीत लगंदी या

झन बी व्हाली ,वा मेरी व्हाली
मेरी जिंदगी वा मेरी या

खाते जाली या बेये जाली
यूँ उजाड़ी मा कबि त मौल्यार आली या

झन बी व्हाली ,वा मेरी व्हाली
मेरी जिंदगी वा मेरी या

दूँ जूना की रुटळु मिलाली या
भूकी पोटी बल पाणी पीकी निर्जक सै जाली या

ये पाड़ा मा इनि ही बीती जाली
झन बी व्हाली ,वा मेरी व्हाली
मेरी जिंदगी वा मेरी या

एक उत्तराखंडी

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यक्ला मना

यक्ला मना की खैरी नि जानी
निर्भगी तिन विं जियु की हैरी नि देकि

ऐगे ऐ बगत चलगे वे बगत
लठयाला तिन वै बाटों मा खुठों की फेरी नि देकि

चुलू जागैई चुलू बुझैई
स्वामी जिन तुमन ऊँ फिनको की पीड़ा नि देकि

उजाड़ा डंडा कांठा बंजा पुंगडु
बेटा जी तेन अपरू हिकमत नि परखी

ऐगे फजल ऐगे दोफरी ऐगे रात
बाबा जी म्यार अपन मेरा हाक ना सुनि

यक्ला मना की खैरी नि जानी
निर्भगी तिन विं जियु की हैरी नि देकि

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फिर बरसी गे बरखा.

फिर बरसी गे बरखा
आच मेरा पाडे मा
ऐ पाडे मा मेरा
कूड़े का घारे मा
फिर बरसी गे बरखा.....

काला काला बादल छैगी
चाल चमकी जीकोडी दारा
आंधरु बाटों ऐकि
ऐ राता तू किले रुलेगे
फिर बरसी गे बरखा.....

बैठी छे आस मा
कुचली का साथ मा
आंखियों मा देकि कया
बरसा थाकि हरी छे
फिर बरसी गे बरखा.....

फिर बरसी गे बरखा
आच मेरा पाडे मा
ऐ पाडे मा मेरा
कूड़े का घारे मा
फिर बरसी गे बरखा.....

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अब मेरा पहाड़ मा

अब मेरा पहाड़ मा
नि देकेंदु नि देकेंदु बोई क्वी अपरू

देके बी जाली जाली त
देके जांद बल बल वै दगड बस हैर माया कु पुट्लू

नि देकेंदु हर्ची गेन ऊ सेवा सौंळी का गैंणा
रीत बणी नटेलि ब्योलि जनि आच ब्यो भोळ परदेश गैनी

लुक्यां लुक्यां कांस्य कु दूध कू गिलास
आव भगत ऊ सदनी पुरैनी अपरुँ का ऊ शिस्टाचार

पीठेई पिंगली नि रैगे चवलों दानो कख दौड़ी गे
मनखी अपरा अपरा मा मस्त तुण्ड पहाड़ कूड़ों कू हलौ खसतौ

भेद उपजे जिकोड़ी सबि शतरंज कि चालों मा रंत
नींद नि आणि बोई पैल जनि पैल जनि ऐ जांद छे सबी भै निरजक सै जांद छे

अब मेरा पहाड़ मा
नि देकेंदु नि देकेंदु बोई क्वी अपरू

देके बी जाली जाली त
देके जांद बल बल वै दगड बस हैर माया कु पुट्लू

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माटु रै

कुच त बोल तू
भेद उघड़ी मन का
कुच त बोल तू
माटु रै

ना सुदी बैथि रै
ना लूटयूँ रै तू
लिपी रै
माटु रै

सरीर साथ तू
अचु बुरु भाग तू
मेरु ज्यूंदगी कू
माटु रै

हैंसी खेळी
चत कखक गैनी
रुयै रुळै की
माटु रै

दगड्या तू दगडी
मौल्यार ऐ तैमा
कबि उजाड़ा ऐ
माटु रै

बरखा नचे कबि
घाम मा हाल वै
ह्युंद मा जमे
माटु रै

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पौड़ी मा

पौड़ी मा मनस्वाग ल्ग्युं चा
रै बेटा क्खी यकुली ना जैई

ईं जिकुड़ी मा फ़िक्र दढी चा
रै बेटा बोल्यूं मेर मानी

खानि-पीनी यख मेरी हर्ची चा
रै बेटा इनि जिंदगी मेरी

पाड़ा मा सारू सोर ल्ग्युं चा
रै बेटा कंन कटना वाला तुम कुटमदरी

उत्तराखंड सरकार निरजक सीेंईं चा
रै बेटा मेर यख निंद उदी चा

पौड़ी मा मनस्वाग ल्ग्युं चा
रै बेटा क्खी यकुली ना जैई

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क्ख्क धरियूंच बल

क्ख्क धरियूंच बल
संभलिक तिल ……२
खोजी खोजी थाकी गीयुं
मैटी मैटी पाकी गीयुं
क्ख्क धरियूंच बल
संभलिक तिल ……२

माया तेरी आंखियों कि
दिके ना दिकेई दे ,दिके ना दिकेई दे
हाथ खुठा कि पैजनी चूड़ी
किले बल तिल लुकेई दे ,किले बल तिल लुकेई दे

क्ख्क धरियूंच बल
संभलिक तिल ……२
खोजी खोजी थाकी गीयुं
मैटी मैटी पाकी गीयुं
क्ख्क धरियूंच बल
संभलिक तिल ……२

बथे दे ना तू लुके
सुरुक ये आंखियों थे ना झुके तू
पुड़न देईं बल यूँ आंखियों थे बी
सु नींदि ऐन दे ये जिकोड़ी करार

क्ख्क धरियूंच बल
संभलिक तिल ……२
खोजी खोजी थाकी गीयुं
मैटी मैटी पाकी गीयुं
क्ख्क धरियूंच बल
संभलिक तिल ……२

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