Author Topic: Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें  (Read 230172 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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व भूमि बद्री-केदार नाथ
भजन मंडल उत्तराखंड
 
 चल दिदो चल भुलीयुं घर घर जोंला 
 घर घर मा भगवती को जयकार लोगों ला
 जय माता दी जय माता दी बोल ता जा
 
 बुआडी डोल्की बाजा भुली मंजीरा उठा
 जर जोशमा दिदिओं माता थै बुला 
 जय माता दी जय माता दी बोल ता जा
 
 आयी भजन टोली मेर गढ़ बेटी ब्वारीयुं की
 दिदो ओंक का प्रयास मा अब हाथ बाटा   
 जय माता दी जय माता दी बोल ता जा
 
 गढ़वाल ना अब मुंबई दिल्ली हुगे सुरवात
 माँ का नाम को जयकर अब हर जगे जगे साथ
 जय माता दी जय माता दी बोल ता जा
 
 मै मंदिर खुला छुड आयी भक्ती की धुन मै
 पहड़ो मा बैठी मेर भगवती माँ भजनों थै तू भी गै
 जय माता दी जय माता दी बोल ता जा
 
 गाम गाम शहर शहर भक्ती गंगा बाँहों ला
 गढ़ देश की माँ भगवती तेरी आरती करों ला
 जय माता दी जय माता दी बोल ता जा
 
 मै भी आयुं भुलूह तुम भी अब साथ साथ आव
 हर की पाड़ी मा हर की पाडी मा वख ल्गोंला जयकार माँ का हर  की पाडी मा
 जय माता दी जय माता दी बोल ता जा 
 
 पहाडी भजनं माला मा बोगता जा
 हर गंगे हर गंगे धुन अपने मन से गाता जा 
 जय माता दी जय माता दी बोल ता जा 
 
 चल दिदो चल भुलीयुं घर घर जोंला 
 घर घर मा भगवती को जयकार लोगों ला
 जय माता दी जय माता दी बोल ता जा
 
 बालकृष्ण डी ध्यानी
 देवभूमि बद्री-केदारनाथ
 मेरा ब्लोग्स
 http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
 मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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देव भूमि बद्री-केदार नाथ
कण कंडा पुअडी
 
 कण कंडा पुअडी कुटम्बदरी मा 
 मेर जींदगाणी मा
 कण कंडा पुअडी...........
 ये सरकार मा ये मंहगाई मा
 
 बाल बच्चा छिन तास-बीड़ी मा
 सब गीचा छन उपरा पाडी मा 
 कण कंडा पुअडी...........
 ये स्कूला मा ये शीक्षा मा
 
 घार मा बीठाया छन दाण
 जवांन तुंड दारू का ठेकों मा
 कण कंडा पुअडी...........
 ये डाणडों मा उजाड़ पुंगडों मा 
 
 नलकुप लगा गैण गाम गाम
 पाणी नीच बुंदा तीसा सरीयुं मा
 कण कंडा पुअडी...........
 ये कलशी मा ये रुलोयुं मा
 
 बिजली बाण टेहरी गाम हाटायी
 फिर भी लैट घार णी बल्याई
 कण कंडा पुअडी...........
 लोड शैडींग मा ये बिजली मा
 
 सड़की सड़की बाणी गैनी
 चो डाणड़ का पुओंरों तक 
 कण कंडा पुअडी...........
 जीप गाडी मा ये रीटा सड़कीयुं मा
 
 कण कंडा पुअडी कुटम्बदरी मा 
 मेर जींदगाणी मा
 कण कंडा पुअडी...........
 ये सरकार मा ये मंहगाई मा
 
 बालकृष्ण डी ध्यानी
 देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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Bhishma Kukreti

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Dhyani Jee 1
marvelous efforts for developing Garhwali poetry
Do you have any poem on Hyund/Autum/Winter in Garhwali?
Sincerely
Bhishm Kukreti

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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देव भूमि बद्री-केदार नाथ
ना पीयु
 
 ना पीयु शराब दिदो
 न पीयु शराब ये चीज ख़राब दिदो
 ना पीयु शराब ...२
 
 बिखरी गैणी कुटमदरी
 जैण पी शराब दिदो ...२
 ना पीयु शराब ....२
 
 होशणी रैण जब
 तिल ये पी चीज ख़राब दिदो...२
 ना पीयु शराब ...२
 
 सोच जर गड़देश की
 कैको कण ऐका नाम खराब  दिदो ...२
 ना पीयु शराब ...२
 
 बात बेटी ब्वारी की
 छुटा नुँना नुँनी को करो याद दिदो .....२
 ना पीयु शराब ...२
 
 
 रहलो उपकार तुम्हरो गढ़ भूमी मा
 तुम णी पीयां शराब दिदो ....२
 ना पीयु शराब ...२
 
 ना पीयु शराब दिदो
 न पीयु शराब ये चीज ख़राब दिदो
 ना पीयु शराब ...२
 
 बालकृष्ण डी ध्यानी
 देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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देव भूमि बद्री-केदार नाथ
हुयंद जम्युंचा ये गढ़ मा
 
 सवेर ये गढ़ देशा मा
 हुयंद पड़युं  ये पहाड़मा पहाडमा
 बुरंस खिला तेयुं डालियुं मा
 हुयंद  बिछों फुल पंखी मा
 सवेर ये गढ़ देशा मा ..........
 
 चंमकण लगी पत्ती पत्ती
 जाण  वहाली रत्ना की कणडी
 कंण शरर्म्यणी लज्जाणी वा
 राता की जण  छुंयीं लगादी वा     
 सवेर ये गढ़ देशा मा ..........
 
 हुयंद जम्युंचा ये गढ़ देशा मा
 रुल्युं गदनीयुं का भेषा मा
 गढ़ छुडी की दूर गयांन उंचा उड़यां
 पखा पखा आकाश का रेघा मा
 सवेर ये गढ़ देशा मा ..........
 
 हुन्दु णी जंमदु ये परदेशा मा
 यकुली यकुली मण का गेडा
 एक गेडा मण का गेडा मेरा
 गढ़ मा छुडों ऐक पैला गेडा जी
 सवेर ये गढ़ देशा मा ..........
 
 सवेर ये गढ़ देशा मा
 हुयंद पड़युं  ये पहाड़मा पहाडमा
 बुरंस खिला तेयुं डालियुं मा
 हुयंद  बिछों फुल पंखी मा
 सवेर ये गढ़ देशा मा ..........
 
 बालकृष्ण डी ध्यानी
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देव भूमि बद्री-केदार नाथ राजधनी गैर सैण
 
 दिण रैण इण गैणी
 पहाडा की दाशा णी बदली
 णी बदली  गैणी
 आपरा आपरा मा लगी रैणी
 दिण रैण इण गैणी
 
 पहाड़ की प्रगती
 इण कखक लुकी गैणी
 पहाड़ का बाटा देखा देखी मा
 उन्दारू का बाटा मा सर रुअडी गैणी
 दिण रैण इण गैणी
 
 क्रांती का बाटा सब बंद हुयेगैणी
 १० बरस हुयेगैणी उत्तरखंड बणेकी
 क्रांतीकरीयुं को सपुनिया की राजधानी
 गैरसैण पहाड़ मा कखक  लुकी गैणी
 दिण रैण इण गैणी
 
 विपद च या व्यथा च ये गढ़ की
 या मेर या मेरा लोगों की सब चुप बैठयांछण 
 हाथ मा हाथ धरी की प्रगती मार्ग मा बाधा बाणयाछन
 दूँण अस्थाई-स्थाई राजधानी  मा प्रगतीणीच मेर गढ़ की
 दिण रैण इण गैणी
 
 कब आलो ओ दीण कब आलो ओ सवेरा
 कब जगाला लोग कब मंगला आपरा हक
 एक नयी जन-क्रांती  की  जरुरत छा आजा
 को पैलु व्हालो जो ये ये क्रांती मशाला जगवालो
 दिण रैण इण गैणी
 
 दिण रैण इण गैणी
 पहाडा की दाशा णी बदली
 णी बदली  गैणी
 आपरा आपरा मा लगी रैणी
 दिण रैण इण गैणी
 
 बालकृष्ण डी ध्यानी
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देव भूमि बद्री-केदार नाथ
ना पी बीडी बारड़

 ना पी ना पी बीडी बारड़ ना पी

 बीडी च ख़राब कराइल सहेत ख़राब
 बुअडी मुंडारु बारड़ बीडी तेरी
 छुड़ दै बारड़ अब तक बगत नी गयाई
 बारड़ बीडी तेरी बीडी तेरी .........२

 गुडगुडी को गुड़हट वख भी तम्बोकोख की बात

 कण बीगाडी जीन्दगी को प्रभात ये बारड़
 फिनका फिनका जलणी तेरी जीकोडी तेरी
 ये बारड़ सुनले बुअडी की बात
 ना पी ना पी बीडी बारड़ ना पी
 बारड़ बीडी तेरी बीडी तेरी .........२

 तू पीअली बीडी छुटा नुआण सीखैसैर करलु

 ये बीमारी सब गढ़ थै लागली बारड़
 बोल्यु मान ये बारड़ मेरु छुड़ ये बीडी का साथ
 ना ऊड़ ना ऊड़ सुटा ना कर ना कर ईणी बात   
 ना पी ना पी बीडी बारड़ ना पी
 बारड़ बीडी तेरी बीडी तेरी .........२

 टोपलो धरी कपाला की सुनले बात ये बारड़

 जीवण को बच्च्यां बस अब दिन चार
 नाती नात्नी दगडी हंस खेली की बीता दिन चार
 छुड साथ तम्बाखू को ये जड़ सर्वनाशा को ये बारड़
 ना पी ना पी बीडी बारड़ ना पी
 बारड़ बीडी तेरी बीडी तेरी .........२

 बालकृष्ण डी ध्यानी

 देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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देव भूमि बद्री-केदार नाथ
वो  रात
 
 बदली ओर छुपा चाँद
 वो काली सी रात   
 वो अधुरी सी बात
 आगायी फिर याद 
 
 चाँदनी का था साथ
 फुलों की थी बात
 यादों के पलछिन मै 
 पत्तों की थी बस आड़
 वो अधुरी सी बात
 
 अंधेरी गली मै
 उलझी एक पहेली
 संग ना थी कोई सहेली
 रात थी वो अकेली
 वो अधुरी सी बात
 
 दुरियाँ नजदिकियां
 बढती घटती परछाईयां
 दिये तले था छाया अँधेरा
 क्या कुछ वंह पड़ा था मेरा
 वो अधुरी सी बात
 
 बदली ओर छुपा चाँद
 वो काली सी रात   
 वो अधुरी सी बात
 आगायी फिर याद 
 
 बालकृष्ण डी ध्यानी
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देव भूमि बद्री-केदार नाथ
भजन मंडल उत्तराखंड
 
 चल दिदो चल भुलीयुं घर घर जोंला 
 घर घर मा भगवती को जयकार लोगों ला
 जय माता दी जय माता दी बोल ता जा
 
 बुआडी डोल्की बाजा भुली मंजीरा उठा
 जर जोशमा दिदिओं माता थै बुला 
 जय माता दी जय माता दी बोल ता जा
 
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 जय माता दी जय माता दी बोल ता जा
 
 गढ़वाल ना अब मुंबई दिल्ली हुगे सुरवात
 माँ का नाम को जयकर अब हर जगे जगे साथ
 जय माता दी जय माता दी बोल ता जा
 
 मै मंदिर खुला छुड आयी भक्ती की धुन मै
 पहड़ो मा बैठी मेर भगवती माँ भजनों थै तू भी गै
 जय माता दी जय माता दी बोल ता जा
 
 गाम गाम शहर शहर भक्ती गंगा बाँहों ला
 गढ़ देश की माँ भगवती तेरी आरती करों ला
 जय माता दी जय माता दी बोल ता जा
 
 मै भी आयुं भुलूह तुम भी अब साथ साथ आव
 हर की पाड़ी मा हर की पाडी मा वख ल्गोंला जयकार माँ का हर  की पाडी मा
 जय माता दी जय माता दी बोल ता जा 
 
 पहाडी भजनं माला मा बोगता जा
 हर गंगे हर गंगे धुन अपने मन से गाता जा 
 जय माता दी जय माता दी बोल ता जा 
 
 चल दिदो चल भुलीयुं घर घर जोंला 
 घर घर मा भगवती को जयकार लोगों ला
 जय माता दी जय माता दी बोल ता जा
 
 बालकृष्ण डी ध्यानी
 देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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 देव भूमि बद्री-केदार नाथ
धरावाहीक परिवार
 
 सोमवार से लेकर रविवार
 हफ्ते हफ्ते मै बाटा अब प्यार
 टीवी धरावाहीक ओर परिवार
 रिश्तों की एक नयी पहचान
 सोमवार से लेकर रविवार
 
 वास्तविकता से अब इनकार
 कल्पना ने बंधा ऐसा जाला
 रो रोकर होआ देखो बुरा हाल   
 यातर्थ मै सुख गये अब वो नैना
 सोमवार से लेकर रविवार
 
 चर्चा खुब छयी रहती हर बार
 घर नुकड़ या हो बीच बाजार
 खुद के घर मै क्या हो रहा है
 नैया फंसी कैसे बीच माझधर
 सोमवार से लेकर रविवार
 
 धरावाहीक परिवार सा रिश्ता
 अब हर घर घर नजर आता है   
 अपनों के गम और दुःख से
 सीरीयल दुख हमे खुब रुलाता है
 सोमवार से लेकर रविवार
 
 शहरों की अब रही बात नहीं
 गावों गावों मै इस दुःख मातम छा जाता है
 मनोरजन के नाम पर लोगों
 बीच बीच मै विज्ञापन अब खुब कमाता है
 सोमवार से लेकर रविवार
 
 सोमवार से लेकर रविवार
 हफ्ते हफ्ते मै बाटा अब प्यार
 टीवी धरावाहीक ओर परिवार
 रिश्तों की एक नयी पहचान
 सोमवार से लेकर रविवार
 
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