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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720:
शनिवार, १ अक्तूबर २०११   शिक्षा को प्रपंच    शिक्षा को प्रपंच देख प्रपंच शिक्षा को कण छुरा छूरी ने माचायु हात मा हात धरी बस्गा सरया बाजार मा घुमयु गढ़वाली गीतों नै मण सबका हरर्षयु देख जवांण ये बांदा दागडयूँ संग नाचायु देख प्रपंच शिक्षा कोजावणी को उमालउमाली उमाली की आंदा सरया नाता छुचा कण भूली ली जाणद     सरया बाजार मा घुमयु कण खैरी की बाबा णी हम थै पढाई लिखाईकण हल वहवाई बोई ये बोई ली ही जाण भुलह देख प्रपंच शिक्षा कोहमरी संस्क्रती दीदा ताड ताड़ हो जांदा जब शिक्षा छुडी  छुरा छूरीअपर अपर मनख्यूं बस जांदादेख प्रपंच शिक्षा कोएक टीश च चुबणीये जीकोड़ी का भीतर क्या होलो म्यार गढ़ देश को पीड़ा उभरी आंदा  पीड़ा उभरी आंदा  देख प्रपंच शिक्षा कोदेख प्रपंच शिक्षा को कण छुरा छूरी ने माचायु हात मा हात धरी बस्गा सरया बाजार मा घुमयु बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.comमै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720:
 ये राता    ये राता कीले होली होणी उदास ये राता को भीणीच अब मेर साथ सुरक कैकी तो आजा ये राता तू च छे अब मेरा साथ कीले होली होणी....................नींदी सों सों कोस दूर स्वामी जी का साथानिरजक आके येजा मेर पासा मेर पास तू ये राताकर म्यार दगाडी थोड़ी बाता कीले होली होणी....................बीता पंखी का मणमा ये बाता जगादु हुक हुक की ये राता तू भी छे आज क्या स्वामी का साथा तै मा क्या छुपाण ये राता बीत स्वामी संग हमरी जो राता कीले होली होणी....................जब हुंदी छुयीं माया की माण की गेयेढ खुल जाणद सुआण का मैना याद ओं की आंदारात राणी सी फुली जाणद कै मा लगणद ये पीड़ा ये राता कीले होली होणी....................कीले होली होणी उदास ये राता को भीणीच अब मेर साथ सुरक कैकी तो आजा ये राता तू च छे अब मेरा साथ कीले होली होणी....................बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.comमै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720:
बैजी गैनी नेता णी बैजैणी    बैजी गैनी नेता णी बैजैणी बैजी गैनी रुअली रुअली नेता णी बैजैणी कखक बठै खाणी दाणी पुट्गी कण भरेणी विकास का योजना देख गदानी बोगा गैनी गढ़वाल को क्या होलो अब क्या होला दीदा बैजी गैनी रुअली रुअली .........................देख पुँर डंडा डंडा सड़की रुअडी गैनीजंगलात को भी खाता सब चोर गैनी हरा भरा मेर ये डंडा अब हुयां उजड़ा डंडा का ये बघा राजा भी अब हैरणबैजी गैनी डंडा डंडा ................................पंतैद्रर की सूद णी लीण अब ये मेर बाटागाम गाम नल कुप लग गयां पाणी की धारापाणी च निस कण आलो ये बोये उकालातिश तिश मा बंजा होगैनी ये मेर पुंगडाबैजी गैनी ये पंतैद्रर ....................................भर पेट खाण छिण देख ये बंदर ये गोणी सुऊंरूंण भलू ण उजड़ी बोया ये सारी खेती कभी बरखा सताणी कब ये बदल फटाण देवी आपदा अपरू को आपदा णी हम हैरण बैजी गैनी पुन्गाडी.....................................गुओं गुओंल्यां रीता हौयाँ सब उड्या आकासमनख्यूं तै धास लाग्यां कब आलो ओ घाराबल खाईणी पाणी णी रही ये मेर गढ़वाला जवान भैर गाम दान-बऊड़यां रहेगें गयां घारा बैजी गैनी गुओं गुओंल्यां.............................बैजी गैनी रुअली रुअली नेता णी बैजैणी कखक बठै खाणी दाणी पुट्गी कण भरेणी विकास का योजना देख गदानी बोगा गैनी गढ़वाल को क्या होलो अब क्या होला दीदा बैजी गैनी रुअली रुअली .........................बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.comमै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
 कवी बालकृष्ण डी ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720:
बृहस्पतिवार, २९ सितम्बर २०११
बुंदै
बुंदै
हल्की हल्की बूंदे
जो तन को छुये
तु ये मन कहे
आ भी जा आ भी जा
की मोसम पुकारे
समझो इशारे
हल्की हल्की बूंदे

अभी जा .....................२
कर लो प्यार ओ जाने जाँ
फिर ना मीलेग येसा मोसम
कहता है ये दिल दीवान
हल्की हल्की बूंदे.................२

मुझे पता है की तू आयेगी
इस घटा सी छहयेगी
कड़ाके इस बीजरवा की तरह
आके इन बाँहों मै सम जायेगी
अभी जा ................................२

इतना ना तडपाओ सनम
बैचैन कंही ना हो जाये हम
मुरझये गुल की तरह
कही फिर ना खिल पाये हम
हल्की बूंदे .........................२

हल्की हल्की बूंदे
जो तन को छुये
तु ये मन कहे
आ भी जा आ भी जा
की मोसम पुकारे
समझो इशारे
हल्की हल्की बूंदे

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720:
 लेबल: काव्य उत्तरखंड     आज परायु हुयाग्याई    आज परायु हुयाग्याई बल क्या वहाई सैतों पल्युओं नुआणुआआज परायु हुयाग्याई विधात कण विपदा च या कण खैरी च या बड़ी गहरी च्या कलेजी म्यारी चिर ग्याईकपाली का रेखा तील भी ये आँसुओं दिखा दयाईभागा मेरा आंखोयाँ मा लुक ग्याई गीची मेरी गीची कैक बाण चुप राई चुप चाप ये पाणी पी गयाईबल क्या वहाई सैतों पल्युओं नुआणुआआज परायु हुयाग्याई ये वेदना हे देबता मेरा कै का भगा मा ना आई कै कुण ये दिन ना देखे ई हातों का झुल्हा ओ कन्दों मा झूमपा पीठ मा घोडी याद आणीबी अब भी थोड़ी थोड़ी एईजा दुआड़ी दुआड़ी बल क्या वहाई सैतों पल्युओं नुआणुआआज परायु हुयाग्याई ओ स्कोला दिणओ तेरी खोडीकटा दिण कभी णा तेर बीणातैर बाण पुंगडी बीक ग्याई फिर खैरी म्यार बाटा आयी जख भी रै बेटा सुखी रै बेटा तेरु जीवण यन दिण ना आयी जन दिण तील हम थै दीखाई आशीष भी म्यार रुदयाई जणी आज क्या व्हाई........(२)बल क्या वहाई सैतों पल्युओं नुआणुआआज परायु हुयाग्याई बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.comमै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
 कवी बालकृष्ण डी ध्यानी

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