Author Topic: Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें  (Read 173112 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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देव भूमि बद्री-केदार नाथ
उत्तराधाम

सड़की सड़की पुहंची उत्तराधाम मा
किले सड़की ना पुहंची मेर गाम
६४ बरसी व्हागे देश आजाद व्हायेकी
१० बरस व्हागे उत्तरखंड राज्य बनैकी
सड़की सड़की पुहंची उत्तराधाम.........

बिजली बिजली जलैगे उत्तराधाम
किले बत्ती ना बले मेरे घारा मा
टेहरी डैम बाणयूँ बिजली का नाम मा
एक इतिहस हास होंयुं आँखों समण मा
बिजली बिजली पुहंची उत्तराधाम.........

नल कूप लाग्यां हर गाम गाम
पंतैन्द्र का बाटा भुल्याँ मेर गाम
बंजा पुन्गाडा रीटा डंडा गीत लगांण
रोल्युं गढ़युन कखक भाटै तिस बोजाण
गंगा गंगा पुहंची उत्तराधाम.........

दून दून मा गैरसैंण की धुन
अस्थाई राजधनी स्थाई राजधानी की गुंज
१ राज्य मा १७ जिलों की फ़ोजा
देखा भूलह पहाड़ मा प्रगती की दोअड़
प्रगती प्रगती पुहंची उत्तराधाम.........

ब्रिटिष्ट राज्य मा बाणी योजना
अब जाके जगी सींयीं रेल योजना
कब पहाड़ मा रेल ठुम-ठुम्कैली
चुनवा ऐगे पहाडा अब व दम्कैली
ठुम ठुम कैकी रेल पुहंची उत्तराधाम.........

शिक्षाका प्रपंच मनड़यूँ बीच बाजार
एक गुरु एक स्कूल बच्चे पचास हजार
सरकार नी ठेकैदारू को की उधार
दर्रू लाइसें दे दारू दुकान खोल्दै बीच बाजार
दारू शिक्षा पुहंची उत्तराधाम.........

सड़की सड़की पुहंची उत्तराधाम मा
किले सड़की ना पुहंची मेर गाम
६४ बरसी व्हागे देश आजाद व्हायेकी
१० बरस व्हागे उत्तरखंड राज्य बनैकी
सड़की सड़की पुहंची उत्तराधाम.........

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

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उत्तराधाम

सड़की सड़की पुहंची उत्तराधाम मा
किले सड़की ना पुहंची मेर गाम
६४ बरसी व्हागे देश आजाद व्हायेकी
१० बरस व्हागे उत्तरखंड राज्य बनैकी
सड़की सड़की पुहंची उत्तराधाम.........

बिजली बिजली जलैगे उत्तराधाम
किले बत्ती ना बले मेरे घारा मा
टेहरी डैम बाणयूँ बिजली का नाम मा
एक इतिहस हास होंयुं आँखों समण मा
बिजली बिजली पुहंची उत्तराधाम.........

नल कूप लाग्यां हर गाम गाम
पंतैन्द्र का बाटा भुल्याँ मेर गाम
बंजा पुन्गाडा रीटा डंडा गीत लगांण
रोल्युं गढ़युन कखक भाटै तिस बोजाण
गंगा गंगा पुहंची उत्तराधाम.........

दून दून मा गैरसैंण की धुन
अस्थाई राजधनी स्थाई राजधानी की गुंज
१ राज्य मा १७ जिलों की फ़ोजा
देखा भूलह पहाड़ मा प्रगती की दोअड़
प्रगती प्रगती पुहंची उत्तराधाम.........

ब्रिटिष्ट राज्य मा बाणी योजना
अब जाके जगी सींयीं रेल योजना
कब पहाड़ मा रेल ठुम-ठुम्कैली
चुनवा ऐगे पहाडा अब व दम्कैली
ठुम ठुम कैकी रेल पुहंची उत्तराधाम.........

शिक्षाका प्रपंच मनड़यूँ बीच बाजार
एक गुरु एक स्कूल बच्चे पचास हजार
सरकार नी ठेकैदारू को की उधार
दर्रू लाइसें दे दारू दुकान खोल्दै बीच बाजार
दारू शिक्षा पुहंची उत्तराधाम.........

सड़की सड़की पुहंची उत्तराधाम मा
किले सड़की ना पुहंची मेर गाम
६४ बरसी व्हागे देश आजाद व्हायेकी
१० बरस व्हागे उत्तरखंड राज्य बनैकी
सड़की सड़की पुहंची उत्तराधाम.........

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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देव भूमि बद्री-केदार नाथ ये मेरा सिप्पोडा बाला
 
 ये मेरा सिप्पोडा बाला
 चल दगडी अपडा पुंगडा जोंला
 हाल खांदा मा धरी हे बाला
 अपडा पुंगडा जोती ऊंला
 ये मेरा सिप्पोडा बाला........
 
 दुई चोटी बंधा के मेर बाला
 धान का बीज पुंगडा बोंती ऊंला 
 बोये की बोल्युं मान रे बेटा
 अपरी बोई थै भेंटी ऊंला 
 ये मेरा सिप्पोडा बाला........
 
 माना ना हार मेर राजा बेटा
 माया पुन्गाडा दगडी लगी ऊंला 
 जग माया का पीछणे पीछणे   
 अपरा पहाड़ थै ना कभी छुडी जोंला 
 ये मेरा सिप्पोडा बाला........
 
 पहाडा मा खैरी विपदा भारी
 दोई जोड़ा  मा कटेगै उम्र सारी 
 हैरी हैरी का जीवाण म्यार पहाडा
 कटेगै ईणमा जीन्दगी को उन्दारू उकाला 
 ये मेरा सिप्पोडा बाला........
 
 तुछे रे मयारू जीकोडी को दिलासा
 तुज पर टिकी हम सबकी आशा
 गढ़ देश की तु बदल दै परीभास
 दैणु हो जाये तै पर बद्री-केदार
 ये मेरा सिप्पोडा बाला........
 
 ये मेरा सिप्पोडै बाला
 चल दगडी अपडा पुंगडा जोंला
 हाल खांदा मा धरी हे बाला
 अपडा पुंगडा जोती ऊंला
 ये मेरा सिप्पोडा बाला........
 
 बालकृष्ण डी ध्यानी
 देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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From :
देव भूमि बद्री-केदार नाथ
वो याद पहाड़ की
 
 फुँर फुँर रुमाली बथों मा फुँर
 घेरा घेरा मा बसी म्यार मुल्की की फुँर
 लास्का ढह्स्कों गढवाली गीतों की फुँर
 तू भी ऐजा दीदा मरले एक फुँर
 फुँर फुँर रुमाली बथों मा फुँर
 
 नाथ की नथुली मुड्मा साफा
 हाथ मा कमरी कमरी मा बंधा
 पैरों मा पैजाण गला गुलुबन्द
 कान का झुमका वह तेरा ठुमका फुँर
 फुँर फुँर रुमाली बथों मा फुँर
 
 मुड्मा मा टोपली दीदा
 कुर्ता पैजामा दगडी कमरी हिला
 दंत्ता की पट्टी ऐसे खिला फुँर
 हमारी लोक संस्क्रती की दर्शन करा फुँर 
 फुँर फुँर रुमाली बथों मा फुँर
 
 ढोलह थापों मा पैजाण बजै फुँर
 माशू बाजों संग रिगांण लगे फुँर
 दामू की थपकी मा ये ढह्स्क तेर
 याद आणी मी थै वो पहाडा मेरा 
 फुँर फुँर रुमाली बथों मा फुँर
 
 फुँर फुँर रुमाली बथों मा फुँर
 घेरा घेरा मा बसी म्यार मुल्की की फुँर
 लास्का ढह्स्कों गढवाली गीतों की फुँर
 तू भी ऐजा दीदा मरले एक फुँर
 फुँर फुँर रुमाली बथों मा फुँर
 
 बालकृष्ण डी ध्यानी
 देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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देव भूमि बद्री-केदार नाथ पहाडा मा रुमक
 
 डंणडू मा रुमुक छायु
 घाम अब तक णीआयु
 जाडु का ये महीना दीद
 बेल भी अब हरची गैणी
 बारह  कब बाजैण दीदा  बारह कब बजेणी
 
 सबैर को बगत च
 ये दोपहरी को घाम
 पहडोमा असुज का महीना
 कोयैडी मा लोंकीगै गढ़ को काम
 बारह  कब बाजैण दीदा  बारह कब बजेणी
 
 छपालाहट छपालाहट मा
 णी बणी दीदा आज भी काम
 बेल हैर हैर की णी आयी
 पह्डोमा आज भी घाम
 बारह  कब बाजैण दीदा  बारह कब बजेणी
 
 मठो मठो हीट की
 बौअडी णी काठो टीके टीके की
 आज कई अपरू काम 
 सबेर भटैक रात तक दीदा णी बण पाई मेरु काम
 बारह  कब बाजैण दीदा  बारह कब बजेणी
 
 डंणडू मा रुमुक छायु
 घाम अब तक णीआयु
 जाडु का ये महीना दीद
 बेल भी अब हरची गैणी
 बारह  कब बाजैण दीदा  बारह कब बजेणी
 
 
 बालकृष्ण डी ध्यानी
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देव भूमि बद्री-केदार नाथ बात मेरे दिल की दिल से
 
 आज् की बात दिल की दिल से
 कोइ तु आये इस दिल मै
 रह्ता जो इस दिल मै
 करता है  बात इस दिल से
 आज् की बात दिल की दिल से..........
 
 ठोकर लगी इस दिल पर
 बेवफा लगा तब दिलबर
 काँटों का सरताज सर पर
 यकीन ना आया उस पल पर
 आज् की बात दिल की दिल से..........
 
 नैनो से अंशूं की लकीर सी
 जब बहती नदिया इस दिल पर
 अथाह गम के सागर मन मै
 दिल की नवोका क्यों उतारती
 आज् की बात दिल की दिल से..........
 
 खोजों उस पल को पाओं उस पल को
 जो रूठा है मुझ से ना जाने वो कब से
 तडपता रहता है दिल उस दिल से
 जिसने परवाह ना की इस दिल की 
 आज् की बात दिल की दिल से..........
 
 आज् की बात दिल की दिल से
 कोइ तु आये इस दिल मै
 रह्ता जो इस दिल मै
 करता है  बात इस दिल से
 आज् की बात दिल की दिल से..........
 
 बालकृष्ण डी ध्यानी
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देव भूमि बद्री-केदार नाथ कोई णी ये
 
 ये बाटा ......२
 कोई णी ये .....२
 छुडी की साथ ये साथ
 ये बाटा ......२
 कोई णी ये .....२
 
 
 यकुली यकुली मी यकुली
 ये पहाडा कोई णी ये .....२
 झणमण....२ ये बरसाता
 तु सखी ये  कीले णा ये
 ये बाटा ......२
 कोई णी ये .....२
 
 दीण भर को मण मण
 अंशूं को दड़मण तु भी णा ये कीले णा ये
 राती को तड़पण
 बत्ती सी जल्णु ये मण किले जले ..२     
 ये बाटा ......२
 कोई णी ये .....२
 
 पुन्गाड़ सी बंजा ये जीवण
 रोलूं गदन्यूं दगडी फिरणु मण
 डाणड़ काणड़ उजाड़ मण बाण
 कोईणी ऐकी अब सजै अब सजै     
 ये बाटा ......२
 कोई णी ये .....२
 
 ये बाटा ......२
 कोई णी ये .....२
 छुडी की साथ ये साथ
 ये बाटा ......२
 कोई णी ये .....२
 
 बालकृष्ण डी ध्यानी
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देव भूमि बद्री-केदार नाथ एक कल्पना मेरी
 
 कवी कविता और कलम
 एक दुजे संग और मन
 पल पल बडती ये उमंग
 एक मेज और एक पेज
 कवी कविता और कलम.........
 
 क्या सोचे क्या खोजे
 इस मेज पर बैठे क्या बोझे
 पल पल करवट लेती है
 जिन्दगी शब्दों को लपेटती
 कवी कविता और कलम.........
 
 पास की खिड़की मेरी
 सवेरे साँझा दोपहरी घेरी
 कभी पर्वत कभी नदी
 कभी पेड़ और संग सहेली
 कवी कविता और कलम.........
 
 कभी खुशी कभी गम
 हरदम एक नयी पहेली
 दर्द के रिश्ते के संग
 खुशी की वो हमजोली
 कवी कविता और कलम.........
 
 कल्पना का ये संसार
 हर समय एक नया आकर
 करे विश्व स्वंयम निर्माण
 देता हों इस कविता को विराम
 कवी कविता और कलम.........
 
 कवी कविता और कलम
 एक दुजे संग और मन
 पल पल बडती ये उमंग
 एक मेज और एक पेज
 कवी कविता और कलम.........
 
 बालकृष्ण डी ध्यानी
 देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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देव भूमि बद्री-केदार नाथ मण मा
 
 मण कण धक् धाकटयात होणुचा
 प्रीत  मा कणी बात होणी चा
 दीण  रात विंकी छुंई होणी चा
 निंदी खाईणी सब सैणी खोणीचा 
 मण कण धक् धाकटयात होणुचा...........
 
 ढुंगा गारा दगडी बचाण छान
 अल छाला पल छाला भेंट होणी छान
 रोल्युं गद्न्युं मा माया बोगणी छन
 प्रीत दगडी प्रीत अब होणी छन
 मण कण धक् धाकटयात होणुचा...........
 
 ऊँचा निशा डंडा माया लगाण छन
 दूर प्युन्ली पहाडमा लजाणी छन
 बुरांश पोट्गी धरैकी कैतैकी हसणी छन
 काफल किन्गोडा कुदगाली लगाण छन
 मण कण धक् धाकटयात होणुचा...........
 
 आंखी आंखी दगडी बचाण छन
 के छुयीं ये दगडी लगाणा छन
 तीबरी डंडाली गों-गोंठ्यार
 बाटा पुन्गाड़ घारबार पन्त्दैर सब बचाण छन
 मण कण धक् धाकटयात होणुचा...........
 
 मण कण धक् धाकटयात होणुचा
 प्रीत मा कणी बात होणी चा
 दीण  रात विंकी छुंई होणी चा
 निंदी खाईणी सब सैणी खोणीचा 
 मण कण धक् धाकटयात होणुचा...........
 
 बालकृष्ण डी ध्यानी
 देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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देव भूमि बद्री-केदार नाथ उत्तराधाम
 
 सड़की सड़की पुहंची उत्तराधाम मा
 किले सड़की ना पुहंची मेर गाम
 ६४ बरसी व्हागे देश आजाद व्हायेकी
 १० बरस व्हागे उत्तरखंड राज्य बनैकी
 सड़की सड़की पुहंची उत्तराधाम.........
 
 बिजली बिजली जलैगे उत्तराधाम
 किले बत्ती ना बले मेरे घारा मा
 टेहरी डैम बाणयूँ बिजली का नाम मा
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 बिजली बिजली  पुहंची उत्तराधाम.........
 
 नल कूप लाग्यां हर गाम गाम
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 गंगा गंगा पुहंची उत्तराधाम.........
 
 दून दून मा गैरसैंण की धुन
 अस्थाई राजधनी स्थाई राजधानी की गुंज
 १ राज्य मा १७ जिलों की फ़ोजा
 देखा भूलह पहाड़ मा प्रगती की दोअड़
 प्रगती प्रगती पुहंची उत्तराधाम.........
 
 ब्रिटिष्ट राज्य मा बाणी योजना
 अब जाके जगी सींयीं रेल योजना
 कब पहाड़ मा रेल ठुम-ठुम्कैली
 चुनवा ऐगे पहाडा अब व दम्कैली
 ठुम ठुम कैकी रेल पुहंची उत्तराधाम.........
 
 शिक्षाका प्रपंच मनड़यूँ बीच बाजार
 एक गुरु एक स्कूल बच्चे पचास हजार
 सरकार नी ठेकैदारू को की उधार
 दर्रू लाइसें दे दारू दुकान खोल्दै बीच बाजार
 दारू शिक्षा पुहंची उत्तराधाम.........
 
 सड़की सड़की पुहंची उत्तराधाम मा
 किले सड़की ना पुहंची मेर गाम
 ६४ बरसी व्हागे देश आजाद व्हायेकी
 १० बरस व्हागे उत्तरखंड राज्य बनैकी
 सड़की सड़की पुहंची उत्तराधाम.........
 
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